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09 दिसंबर 2008
निर्यातकों को भारी पड़ी बासमती की ज्यादा कीमत
नई दिल्ली : पिछले 15 दिनों में बासमती चावल के मुख्य उत्पादक देश भारत की उपेक्षा कर यूरोपीय कारोबारियों ने पाकिस्तान से 80,000 मीट्रिक टन बासमती खरीदा है। यह मात्रा इस सीजन में भारतीय बासमती चावल के निर्यात से 30,000 टन ज्यादा रही। यह बात ज्यादा आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि इस सीजन में विदेश में बेचे जाने वाले भारतीय बासमती की कीमत पाकिस्तानी चावल की तुलना में 200 से 500 डॉलर प्रति टन ज्यादा है। इससे सरकार को सतर्क हो जाना चाहिए जो इन दिनों बासमती से जुड़ी नीतियों में सुधार की उपेक्षा कर तमाम तरह के राहत पैकेज तैयार करने में व्यस्त दिख रही है। विश्व के चावल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 3 फीसदी है। कारोबारी मांग करते रहे हैं कि अप्रैल 2008 से बासमती पर लगाया गया 200 डॉलर प्रति टन का निर्यात शुल्क हटाया जाए। दुनिया में चावल के कारोबार से जुड़ी जानीमानी वेबसाइट ओरिजा के अनुसार टैक्स के कारण भारतीय बासमती की कीमत 1,400 से 1,500 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है। पाकिस्तानी बासमती के मुकाबले यह कीमत 400-500 डॉलर प्रति मीट्रिक टन ज्यादा है।अक्टूबर में पाकिस्तानी सरकार ने भारतीय बासमती निर्यातकों का सिरदर्द बढ़ाने का एक और काम किया था। पाकिस्तान ने अक्टूबर में न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटा दिया था, इससे पाकिस्तान बासमती निर्यातकों को काफी लाभ पहुंचा। इस समय भारत में एमईपी 1,200 डॉलर प्रति टन है जबकि उसी किस्म का पाकिस्तानी बासमती 700-900 डॉलर प्रति टन की कीमत पर है। ओरिजा के अनुसार इससे भारतीय बासमती के ईरान और सउदी अरब जैसे परंपरागत खरीदारों ने खरीद मूल्य घटा कर 1,050 डॉलर प्रति टन कर दिया। (ET Hindi)
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