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04 दिसंबर 2008
उपज बढ़ने के बाद भी चावल निर्यात की राह नहीं होगी आसान
नई दिल्ली: देश में 2008-09 में चावल उत्पादन में बढ़ोतरी के अनुमान के बाद भी इस बात की संभावना कम है कि सरकार निकट भविष्य में चावल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों और करों में कोई ढील देगी। सरकार ने समीक्षा में कहा है कि चावल उत्पादन बढ़कर 8.5 करोड़ टन होने की संभावना है। बहरहाल राजनीतिक हलकों में गेहूं और चावल के उपभोक्ता मूल्य को लेकर चिंता बरकरार रहने के कारण निर्यात से प्रतिबंध हटने की कोई संभावना नहीं है। कीमतों में नरमी की हालत यहां तक पहुंच चुकी है कि मिलों के लिए घरेलू बाजार के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार से गेहूं खरीदना ज्यादा सस्ता हो गया है। सरकार के लिए चिंताजनक बात है कि चीनी उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है। पहले सरकार ने 2008-09 में 2.3 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसकी समीक्षा कर उत्पादन 2.05 करोड़ टन कर दिया गया है। चिंता सिर्फ यहीं समाप्त नहीं हो रही है। 2008-09 में पिछले वर्ष से लाई जाने वाली चीनी की मात्र 75 लाख टन है जबकि 2007-08 में पिछले सीजन से लाई जाने वाली चीनी की मात्रा 1.10 करोड़ टन थी। इससे चीनी की उपभोक्ता कीमतों पर तुरंत प्रभाव पड़ने की आशंका है क्योंकि चीनी की सालाना खपत 2.20 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया है। 2009-10 के लिए भी चीनी उत्पादन में कमी आने की आशंका है। इससे भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को बल मिल सकता है। कृषि मंत्री शरद पवार इशारा कर चुके हैं कि पिछले खरीफ सीजन के मुकाबले इस खरीफ सीजन में कुल उत्पादन में कमी आ सकती है। इससे रबी सीजन में उत्पादन बढ़ने का फायदा कम हो जाएगा। उत्पादन के अनुमान की समीक्षा से भी साफ है कि उत्पादन में बढ़ोतरी मुख्यत: चावल, बाजरा और ज्वार के कारण हो रही है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय इसलिए किया गया था ताकि देश में चावल की बढ़ रही कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। हालांकि चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे देशों को फायदा मिला है। अधिकारी के मुताबिक, 'हम गेहूं और चावल के निर्यात पर लगी रोक को अभी हटाना नहीं चाहते हैं।' चावल कारोबारियों को गैर बासमती चावल के निर्यात में छूट देने से इस किस्म के चावल की देश में कमी होने की आशंका जताई जा रही है। कारोबारी मांग कर रहे हैं कि सरकार पीडीएस और गैर पीडीएस किस्मों की पहचान करें और तुरंत गैर पीडीएस किस्म के निर्यात पर लगी रोक हटाए। बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) इस वक्त 1,200 डॉलर प्रति टन है और इस पर 800 रुपए का निर्यात शुल्क लगाया गया है। भारत और पाकिस्तान में चावल की कीमतों में अंतर की वजह से पाकिस्तान को निर्यात में काफी फायदा हुआ है। पाकिस्तान सरकार ने इस साल 40 लाख टन बासमती चावल निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। (ET Hindi)
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