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30 दिसंबर 2008
चीनी का उत्पादन होगा कम, महंगाई और ढाएगी सितम
नई दिल्ली : देश में मांग के मुकाबले चीनी का उत्पादन कम हो सकता है। ऐसा पिछले चार साल में पहली बार होगा। पिछले सप्ताह सरकार ने 2008-09 सीजन में 3.50 लाख टन तक चीनी आयात करने का संकेत दिया है। इस बीच ईटी को पता चला है कि चीनी उत्पादन और उसके स्टॉक के आंकड़ों को लेकर सरकार और इंडस्ट्री में भ्रम बन हुआ है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि 1.8 करोड़ और 2.10 करोड़ टन के बीच चीनी के उत्पादन का अनुमान है। वहीं, चीनी की घरेलू खपत 2.2 और 2.3 करोड़ टन के बीच है। दूसरी तरफ, सरकार के सख्त कदमों के बावजूद चीनी की खुदरा कीमतों पर लगाम नहीं लगी है। पिछले कुछ सप्ताह से चीनी का खुदरा भाव 20-21 रुपए किलो चल रहा है। खाद्य मंत्रालय की पिछली बैठकों में 1.9 करोड़ टन चीनी उत्पादन का आंकड़ा दिया जा रहा था। हालांकि, मंत्रालय आधिकारिक तौर पर इस आंकड़े को बताने से कतरा रहा था। इस महीने जाकर ही उसने इस पर तस्वीर साफ की है। सूत्रों ने यह भी बताया कि सितंबर और नवंबर में पिछले सीजन की बची चीनी का आंकड़ा 80 लाख टन से कुछ ज्यादा था, जबकि सरकार अभी भी इसे 1.1 करोड़ टन मान रही है। इस बीच, इंडस्ट्री सूत्रों ने ईटी को बताया है कि इस साल सितंबर के आखिर में 2008-09 सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 1.94 करोड़ टन रहने का अनुमान था। इंडस्ट्री को दिसंबर में इस आंकड़े की दोबारा समीक्षा करनी थी। यह समीक्षा लगभग 300 मिलों से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर होनी थी। इस समय चालू मिलों की कुल संख्या 500 है। मिलों से मिली जानकारी के आधार पर चीनी उत्पादन 1.8 करोड़ टन या उससे भी कम रहने के मोटे अनुमान के बाद दिसंबर के आखिर में होने वाली प्रस्तावित समीक्षा का समय आगे बढ़ा दिया गया है। यह अनुमान महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे तीन प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में उत्पादन कम रहने के आधार पर लगाया गया है। हाल ही में, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) की 74वीं सालाना आम बैठक हुई है। इसमें वह चीनी उत्पादन के राज्यवार आंकड़े नहीं दे पाई है। हालांकि, उस बैठक में एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रंजीत पुरी ने दावा किया था कि 2008-09 में पिछले सीजन की काफी चीनी मिलेगी। अगर चीनी उत्पादन बहुत ज्यादा गिरता है तो उस सूरत में चीनी की सप्लाई चार महीने के बराबर रहेगी। कारोबारियों को उम्मीद है कि 2008-09 के सीजन में खुदरा बाजार में चीनी काफी महंगी होगी। उनका अनुमान है कि अगले साल की पहली तिमाही में उसकी कीमत 10 रुपए किलो तक बढ़ सकती है। चीनी को इतनी महंगी होने से बचाने के लिए सरकार को दखल देना होगा। (ET Hindi)
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