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15 दिसंबर 2008
गने की कमी से महाराष्ट्र में घटेगा चीनी उत्पादन
पुणे : पिछले साल के मुकाबले इस बार महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन आधा ही रहने की आशंका है। गन्ने की कमी के कारण कई मिलों को कामकाज बंद करना पड़ा है जिससे पेराई सत्र के भी छोटा रहने की आशंका है। सभी मिलों का पेराई सत्र मध्य मार्च में ही समाप्त हो सकता है जबकि राज्य में आमतौर पर गन्ना पेराई सत्र अप्रैल के मध्य तक चलता है। राज्य के चीनी आयुक्त राजगोपाल देवड़ा ने बताया, 'हमने अनुमान लगाया था कि इस साल 530 लाख टन गन्ने की पेराई होगी और उससे 62 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा। हालांकि पिछले सप्ताह समीक्षा बैठक में पता चला कि राज्य में काम कर रही 140 फैक्टरियां इस सत्र में करीब 425 लाख टन गन्ने की ही पेराई कर पाएंगी और उससे 50 लाख टन से कम चीनी का उत्पादन हो सकेगा। पिछले साल के मुकाबले इसमें 45 फीसदी की गिरावट है। पिछले सीजन में 771 लाख टन गन्ने की पेराई से 91 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।' हालांकि अगले साल के लिए संभावना अच्छी दिख रही है क्योंकि गन्ने की खेती का क्षेत्रफल बढ़ने का अनुमान है। इस साल की कटाई दूसरी या तीसरी फसल थी। अगले साल नई फसल होगी। इसके अलावा इस बार किसानों को गन्ने के लिए औसत रूप से 1200 रुपए प्रति टन की अच्छी कीमत मिली है। इस कारण भी उत्पादन क्षेत्र में और बढ़ोतरी हो सकती है। चीनी आयुक्त ने अनुमान लगाया था कि इस सत्र में 157 मिलें काम करेंगी लेकिन 140 मिलों ने ही काम शुरू किया और उनमें से भी चार बंद हो गईं। इनमें काड़द की रैयत एसएसके, सांगली की मनगंगा एसएसके, औरंगाबाद की एक निजी फैक्टरी, लातूर में बालाघाट एसएसके (इसे श्री रेणुका शुगर्स ने लीज पर लिया था) शामिल हैं। श्री रेणुका शुगर्स बेलगाम की निजी चीनी मिल है जिसने महाराष्ट्र में दो और कोऑपरेटिव को लीज पर लिया है। 11 दूसरी मिलों ने भी काम न करने का फैसला किया है। इनमें टेरना और अंबेजोगाई एसएसके शामिल हैं। गन्ने की कमी के कारण काम न शुरू करने वाली अधिकतर मिलें मराठवाड़ा क्षेत्र की हैं। इसके अलावा इस साल उत्पादकता में गिरावट आने की आशंका भी जताई जा रही है। पिछले साल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 60 टन थी जिसके इस सत्र में 50 टन रहने की आशंका है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। देवड़ा का कहना है, 'पिछले साल गन्ने की अच्छी कीमत न मिलने के कारण इस साल किसानों ने गन्ने की सही देखभाल नहीं की। इसके अलावा जुलाई-अगस्त के बीच बरसात में भी काफी अंतर आ गया था।' महाराष्ट्र का रिकॉर्ड 12 फीसदी का रिकवरी स्तर है। इसके इस साल गिरकर 11 फीसदी आने की आशंका है। सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र के उत्पादन में समीक्षा के बाद राष्ट्रीय उत्पादन भी 2.2 करोड़ टन से घटने की पूरी आशंका है। हालांकि पिछले साल की शेष 80 लाख टन चीनी के कारण घरेलू बाजार में तंगी की आशंका नहीं है। देवड़ा का कहना है, 'हमारा राष्ट्रीय चीनी उपभोग लगभग 1.95 करोड़ टन है। उत्पादन में गिरावट आने की आशंका के बावजूद पिछले साल के 80 लाख टन के शेष भंडार के कारण अगले साल चीनी की कमी होने की आशंका नहीं है।' महाराष्ट्र में गन्ने का बकाया भुगतान जून-जुलाई में 600 करोड़ रुपए था लेकिन अब यह मात्र 28 करोड़ रह गया है। (ET Hindi)
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