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01 जनवरी 2009
सोने की चमक इस साल भी रहेगी बरकरार
मुंबई: बेशकीमती धातुओं में सोना हमेशा से निवेश का बेहतर जरिया रहा है। बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए भी दूसरे निवेश माध्यमों में पैसा लगाने की अपेक्षा इसमें निवेश ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। जानकारों का मानना है कि वर्ष 2009 में दूसरी कमोडिटीज की तुलना में सोने का प्रदर्शन अच्छा होगा। इसके अलावा कच्चे तेल और धातुओं में अगले साल के मध्य तक तेजी आने की उम्मीद है। चीनी, सोयाबीन, रबर जैसी कृषि कमोडिटीज में भी निवेश मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है। जानकारों का कहना है कि सोने ने बेस मेटल और कच्चे तेल की तुलना में कहीं ज्यादा बेहतर रिटर्न दिया। यहां तक कि इसका प्रदर्शन इक्विटी, कर्ज, रियल्टी और बैंक फिक्स डिपॉजिट से भी अच्छा रहा। इस साल मार्च में डॉलर के कमजोर रहने, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भारी-भरकम निवेश के कारण सोना की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1,032 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गई थी। हालांकि, अक्टूबर में यह 681 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गया था। इसके बाद सोने में तेजी लौटी और अब यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में 885 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। एंजेल कमोडिटीज के नवीन माथुर ने बताया, 'नए साल में निवेशकों की दिलचस्पी सोने में बनी रहेगी। आने वाले कुछ वक्त में इसके 650 डॉलर प्रति औंस से नीचे जाने के आसार नहीं हैं। वहीं मजबूती आने पर यह 1,030 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक जा सकता है।' आनंद राठी कमोडिटीज के रिसर्च हेड सोने में निवेश को लेकर भी काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2009 के मध्य तक सोना 1200 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया, 'दुनिया भर की सरकारों ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे आने वाले समय में मुदाएं कमजोर होंगी। ऐसे में सोना निवेश का सबसे बेहतर विकल्प साबित होगा।' जानकारों का कहना है कि वर्ष 2008 में अधिकतर कमोडिटीज में काफी समय तक तेजी रही। इस दौरान क्रूड ऑयल, कॉपर, सोयाबीन, क्रूड पॉम की कीमतों अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। हालांकि, कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर ज्यादा समय के लिए बरकरार नहीं रख पाईं। अमेरिका में सब-प्राइम मॉर्टगेज और वैश्विक आर्थिक संकट के बाद इन कमोडिटीज में किए जाने वाले निवेश में तेज गिरावट आई और इनकी कीमतें जमीन पर आ गईं। जुलाई के बाद डॉलर में कुछ मजबूती आई। हालांकि, इस बीच दुनिया भर में मंदी की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल और बेस मेटल की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया। खाद्य तेल कॉम्प्लेक्स (ऑयल सीड एंड ऑयल) के सीमित होल्डिंग स्टॉक और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण इसकी कीमतों में जनवरी-जून 2008 के दौरान तेजी रही। जानकारों का कहना है कि ऐसे समय में जब दुनिया भर की सरकारें सहायता राशि पैकेज की घोषणा कर रही हैं और ब्याज दरों में कटौती का दौर चालू है। निश्चित रूप से इससे बेस मेटल और क्रूड ऑयल जैसी कमोडिटीज को रफ्तार मिलेगी। रेलिगेयर कमोडिटीज के जयंत मांगलिक ने बताया कि वर्ष 2009 में सोने के अलावा बेस मेटल और कच्चे तेल की मांग में भी तेजी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से निवेशक सोना, क्रूड ऑयल और बेस मेटल में पैसा लगाना पसंद करेंगे।' जानकारों का कहना है कि वित्त वर्ष 2009 में चीनी एक ऐसी कमोडिटी हो सकती है, जो ज्यादा मांग और कम आपूर्ति के कारण निवेशकों के लिए आकर्षक रहे। इसके अलावा रबर और जीरा जैसी दूसरी कमोडिटीज में भी मांग सुधरने से तेजी आने की उम्मीद है। बोनांजा कमोडिटीज के विभुरतन धारा ने बताया, 'दुनिया भर में भारतीय जीरे की अच्छी-खासी मांग है, जिससे इस कमोडिटी की मांग में तेजी आएगी। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद सिंथेटिक रबर के दाम में सुधार आएगा। इसके अलावा विकल्प के रूप में प्राकृतिक रबर की मांग में भी तेजी आ सकती है।' (BS Hindi)
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