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29 दिसंबर 2008
बेस मेटल नहीं मिली सौगात, कीमतों में गिरावट
कोलकाता : वैश्विक वित्तीय बाजार में संकट के साथ बेस मेटल की कीमतों में शुरू हुई गिरावट क्रिसमस की छुट्टियों में और तेज हुई। क्रिसमस से एक दिन पहले सभी नॉन फेरस मेटल में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने से दिसंबर के आखिरी सप्ताह में कीमतों में और गिरावट आई। एलएमई पर पिछले सप्ताह के अंत में कॉपर का भाव 2,815 डॉलर प्रति टन रहा। सप्ताह के बीच की कीमतों के मुकाबले इसमें 125 डॉलर की गिरावट आई। इसी तरह पिछले चार दिनों में निकल की कीमतें 325 डॉलर गिरकर 9,775 डॉलर प्रति टन पर आ गईं। जिंक की कीमतें 25 डॉलर गिरकर 1,145 डॉलर प्रति टन और लेड की कीमतें 30 डॉलर गिरकर 865 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गईं जबकि टिन की कीमतों में 500 डॉलर की गिरावट आई और वे 9,750 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गईं। एंजेल कमोडिटीज के एक विशेषज्ञ का कहना है कि बेस मेटल उत्पादकों के कर्ज को लेकर खराब रिपोर्ट आती रही, इससे मेटल मार्केट के सेंटीमेंट पर बुरा असर पड़ा। हालांकि उन्होंने साल के अंत में शॉर्ट कवरिंग की संभावना भी जताई। उनके मुताबिक, आने वाले समय में वायदा बाजार में बेस मेटल की खरीदारी बढ़ सकती है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में संकट शुरू होने के एक महीने बाद नवंबर में डिस्टॉकिंग और कंपनियों द्वारा खराब अर्थव्यवस्था के मुताबिक तालमेल बिठाने के कारण बेस मेटल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों के गिरने की दर इतनी तेज नहीं रहेगी। इस तरह की खबरें आ रही हैं कि रणनीतिक भंडार बढ़ाने के लिए चीन एल्युमीनियम खरीद सकता है। इससे एल्युमीनियम की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, कमोडिटी बाजार में निवेश करने वाले फंडों के पोर्टफोलियो में बदलाव से कॉपर, जिंक और निकल को फायदा मिल सकता है। अमूमन फंड जनवरी के शुरुआती सप्ताह में पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं। वैश्विक संकट शुरू होने से पहले दुनिया में बेस मेटल के सबसे बड़े उपभोक्ता देश चीन द्वारा धातुओं की खरीदारी करने से कीमतों में जोरदार इजाफा हुआ था। कॉपर की कीमतें जुलाई के पहले सप्ताह में अपने उच्चतम स्तर 8,930 डॉलर प्रति टन के स्तर तक पहुंच गई थीं। 2008 में निकल की शुरुआत अच्छी रही थी, लेकिन स्टील की मांग में कमी आने के कारण उस पर दबाव आ गया। दिसंबर के चौथे सप्ताह में 9,725 डॉलर प्रति टन के साथ निकल की कीमतें अपने चार साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं। स्टॉक बढ़ने के कारण जिंक की भी कीमतों पर भी दबाव आ गया। वित्तीय बाजार की खराब हालत से लेड की कीमतों को भी झटका लगा। बैट्री की मांग में कमी आने के कारण धातु की मांग में कमी आई। इस साल बेस मेटल की कीमतों में 75 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। (ET Hindi)
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