05 दिसंबर 2008

मंदी से कपास के आयात पर दुनिया भर में आफत

कोलकाता : आर्थिक संकट का कपास के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर जमकर असर पड़ेगा। चालू कपास वर्ष (सीजन) में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के कुल आयात में 12 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है। इस सीजन में कुल आयात घटकर 73 लाख टन तक पहुंच सकता है। इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी (एसीएसी) ने इस साल पूरी दुनिया में टेक्सटाइल मिलों में उत्पादन कटौती के आधार पर यह अनुमान लगाया है। कपास का सीजन अक्टूबर से सितंबर तक होता है। आईसीएसी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी और केमिकल फाइबर से मिल रही कड़ी टक्कर की वजह से टेक्सटाइल मिलों में पहली बार कपास की खपत नकारात्मक रह सकती है। उसके मुताबिक, इस सीजन में टेक्सटाइल मिलों में कपास की खपत छह फीसदी गिरकर लगभग 2.49 करोड़ टन रहेगी। 2009 में विकसित अर्थव्यवस्थाओं में विकास दर कम रहने, स्पिनिंग मिलों को कर्ज मिलने में परेशानी और वित्तीय संकट को लेकर अनिश्चितता से भी दुनिया भर में कपास की मांग कम होगी। आईसीएसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में ये बातें कही हैं। आईसीएसी का मुख्यालय वॉशिंगटन में है। यह संस्था कपास के उत्पादन, खपत, निर्यात और आयात में दिलचस्पी रखने वाले देशों की सरकारों की एसोसिएशन है। भारत भी इसका सदस्य है। चीन के बाद भारत दूसरा बड़ा कपास उत्पादक देश है। इस साल चीन कम कपास आयात करेगा, जिससे कपास का अंतरराष्ट्रीय व्यापार घटेगा। अनुमान है कि चीन का कपास आयात 24 फीसदी गिरकर 19 लाख टन रह जाएगा। बाकी दुनिया में भी कपास आयात सात फीसदी गिरकर 54 लाख टन रहने के आसार हैं। आईसीएसी के मुताबिक, चालू सीजन में पूरी दुनिया में कपास का उत्पादन भी घट सकता है। उसने बताया है कि खेती का क्षेत्र कम होने से 2008-09 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास का उत्पादन छह फीसदी कम यानी 2.46 करोड़ टन रह सकता है। हालांकि, भारत में कपास का उत्पादन तीन फीसदी बढ़कर 55 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं, अमेरिका में कपास उत्पादन 30 फीसदी गिरने की वजह से दुनिया के कुल कपास उत्पादन में कमी आएगी। इस साल अमेरिका में 29 लाख टन कपास होने का अनुमान है। पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में भी कपास की पैदावार बढ़ने की बात कही गई है। (ET Hindi)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें