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26 दिसंबर 2008
खुले बाजार में भाव कम रहने से राज्यों ने नहीं उठाई राशन की चीनी
बाजार में भाव कम रहने पर कई राज्यों में राशन की चीनी उठाने में दिलचस्पी घट गई। शुगर सीजन वर्ष 2007-08 में असम व जम्मू कश्मीर जैसे कई राज्यों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अपने आवंटन के मुकाबले काफी कम चीनी उठाई।वर्ष 2007-08 के दौरान जिन 11 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सूचनाएं उपलब्ध हैं, उन्होंने राशन के लिए तय आवंटन से कम चीनी उठाई। इनमें दिल्ली, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार शामिल हैं। सरकारी अधिकारी के अनुसार चीनी का राज्यों में उठान खुले बाजार में नॉन लेवी चीनी के मूल्य पर निर्भर करती है। अगर चीनी उत्पादन अच्छा हो और खुले बाजार में नॉन लेवी चीनी के मूल्य राशन की चीनी के बराबर या कम हों तो राज्यों द्वारा चीनी का उठान कम हो जाता है क्योंकि राज्यों में उपभोक्ता राशन से चीनी खरीदना पसंद नहीं करते हैं। वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान भारत में चीनी का बंपर उत्पादन हुआ था जिससे चीनी का भारी स्टॉक जमा हो गया और बाजार में भाव गिरते चले गए।राशन पर चीनी का मूल्य 2002 से 13.50 रुपये प्रति किलो चल रहा है। अघिकारी बताते है कि दिल्ली में वर्ष 2007-08 के दौरान 29440 टन राशन की चीनी उठाई गई जबकि उसका आवंटन 36490 टन था। दिल्ली को छोड़कर बाकी सभी राज्य अपने कोटे की चीनी भारतीय खाद्य निगम से उठाते हैं। दस अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने 427570 टन के मुकाबले 173560 टन चीनी का ही उठान किया। सभी राज्यों ने अपने आवंटन से कम चीनी उठाई। ज्यादातर राज्यों ने 2005-06 और 2006-07 में भी आवंटन के मुकाबले कम चीनी उठाई थी। अन्य राज्यों के बार में बताया कि उन्होंने चीनी उठान के बार में कोई सूचना नहीं भेजी है। ऐसे में कहना मुश्किल है कि उन्होंने चीनी का कोटा पूरा क्यों नहीं उठाया। (BS Hindi)
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