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28 नवंबर 2008
आंध्र में लालमिर्च के उत्पादन में कमी आने की आशंका
आंध्रप्रदेश में लालमिर्च के उत्पादन में करीब 15-20 फीसदी की गिरावट आ सकती है। पिछले साल यहां करीब 150 लाख बोरी लाल मिर्च का उत्पादन हुआ था। लेकिन चालू सीजन में इसका रकबा घटने से उत्पादन का स्तर करीब 115 लाख बोरी रह सकता है।गुंटूर मंडी के लालमिर्च व्यापारी मांगीलाल मुंदड़ा के मुताबिक उत्पादक क्षेत्रों में बूंदा-बांदी हो रही है जोकि आने वाली फसल के लिए अच्छी है। लेकिन बारिश तेज होती है तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है। गुंटूर में इस समय लालमिर्च का 15 लाख बोरी का स्टॉक बचा हुआ है। जो पिछले साल से थोड़ा कम है। इसमें भी बढ़िया लाल माल महज 35-40 फीसदी ही है। ज्यादातर माल फटकी क्वालिटी का बचा हुआ है।इस दौरान गुंटूर में तेजा क्वालिटी की लालमिर्च के भाव 6500-7500 रुपये, 334 क्वालिटी के भाव 5200-6100 रुपये, सनम के भाव 5700-6300 रुपये, ब्याड़गी क्वालिटी के भाव 7000-7500 रुपये, 273 क्वालिटी के भाव 5800-6400 रुपये व फटकी क्वालिटी के भाव 1400-2500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने हुए हैं। नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में फरवरी के प्रथम पखवाड़े में शुरू हो जाएगी।मुंबई के निर्यातक अशोक दत्तानी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर तक लालमिर्च का निर्यात 1,21,500 टन का हो चुका है जोकि बीते वर्ष की समान अवधि के 1,21,420 टन से ज्यादा है। शुरूआत में मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड व इंडोनेशिया के साथ खाड़ी देशों की अच्छी मांग बनी हुई थी। लेकिन पाकिस्तान और चीन में नई फसल आने के कारण भारत से निर्यात में पिछले एक महीने से काफी कमी आई है। उनका कहना है कि बढ़िया माल के अभाव में निर्यात मांग कम होने के बावजूद भाव स्थिर हैं। इंदौर के खजोरमल प्रजापति के मुताबिक राज्य में विधानसभा चुनाव के कारण मंडियों में लालमिर्च की आवक कमी हुई है। चुनाव तक आवक प्रभावित रहने की उम्मीद है। राज्य की मंडियों में लालमिर्च के भाव 5000- 6000 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार बोले जा रहे हैं। बीते वर्ष राज्य में 35 लाख बोरी लालमिर्च का उत्पादन हुआ था लेकिन लालमिर्च के बजाए किसानों द्वारा सोयाबीन की बुवाई ज्यादा करने से चालू वर्ष में यहां भी उत्पादन में कमी आने की आशंका है। (Business Bhaskar.....R S Rana)
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