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16 अक्टूबर 2008
जिंस वायदा में हेज फंडों व पी-नोट को मंजूरी नहीं मिलेगी
कमोडिटी वायदा कारोबार में विदेशी हेज फंडों और पार्टीसीपेटरी नोट को अनुमति नही दी जाएगी। वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के चेयरमैन बी. सी. खटुआ ने बुधवार को एक्सचेजों के साथ बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। खटुआ ने कहा कि हम कमोडिटी बाजार में विदेशी निवेश के पक्षधर है, किंतु हेज फंडों और पार्टीसीपेटरी नोट की अल्पकालिक निवेश की प्रकृति को देखते हुए उन्हें निवेश की अनुमति नही देंगे। इनके निवेश से कमोडिटी के दामों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना रहती है। इसके विपरीत चेयरमैन ने कहा कि वे कमोडिटी ब्रोकरेज में विदेशी निवेश के पक्ष में हैं। विश्व में जारी वित्तीय संकट का देश के कमोडिटी बाजार पर प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा कि इससे देश में कमोडिटी के दामों में भारी गिरावट आई है। किंतु इसका कमोडिटी वायदा बाजार के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। पिछले छह महीने में देश के 22 कमोडिटी एक्सचेंजों का कारोबार 47 फीसदी बढ़ा है। इसमें मुख्य रूप सोना, कच्चा तेल और धातुओं के वायदा कारोबार में बढ़ोतरी हुई है।जबकि इसी अवधि में एग्रो कमोडिटी के कारोबार में काफी गिरावट आई है। इस साल छह कमोडिटी पर वायदा कारोबार पर रोक लगने से इनके कारोबार में कमी को मुख्य वजह मानी जा रही है। इस साल मई में सरकार ने बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए सोया तेल, रबर, आलू और चना के वायदा कारोबार पर रोक लगा दी थी। चेयरमैन ने उम्मीद जताई की 30 नवंबर के बाद इन कमोडिटी के वायदा कारोबार से रोक हटा ली जाएगी। खटुआ ने कहा कि एक्सचेंजों ने कमोडिटी की क्वालिटी के निर्धारण और वेयरहाउसिंग सुविधाओं को बढ़ाने के लिए देश में बड़ी वेयरहाउसिंग एजेंसी बनाने का सुझाव दिया है। जिस पर एफएमसी गंभीरता से विचार करेगा। साथ ही डिलीवरी डिफाल्टरों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए कड़े नियम बनाने की बात भी एक्सचेंजों ने कही। (Business Bhaskar)
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