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02 अक्टूबर 2008
घट सकती है चीनी के वायदा करारों की अवधि
पुणे : फॉरवर्ड मार्केट कमिशन (एफएमसी) चीनी के वायदा करारों की अवधि तय करने पर दोबारा विचार कर रहा है। एफएमसी के चेयरमैन बी. सी. खटुआ ने बताया कि वायदा बाजार में चीनी के करार (कॉन्ट्रैक्ट) की अवधि 1 साल से घटाकर 6 महीने की जा सकती है। शायद यह कदम चीनी के कॉन्ट्रैक्ट पर चल रही इस व्यवस्था के खिलाफ सियासी विरोध के मद्देनजर उठाया जा रहा है। खटुआ ने बताया कि जनवरी-फरवरी, 2009 तक के कॉन्ट्रैक्ट में अच्छा कारोबार हो सकता है। रोजाना अच्छा वॉल्यूम मिलेगा। उसके बाद मार्च-सितंबर, 2009 के बीच चीनी के कॉन्ट्रैक्ट में ज्यादा कारोबार होने की कोई उम्मीद नहीं है। इसलिए कमीशन को 12 महीने की अवधि पर दोबारा सोचना पड़ सकता है और उसे घटाकर 6 महीने किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि वायदा कारोबार की वजह से चीनी की कीमतों में सट्टेबाजी हो रही है। दूसरी तरफ अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य और पूर्व विधान परिषद सदस्य कन्हैया लाल गिडवानी ने पुणे में बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि चीनी के भावों में चल रही अस्थिरता की जड़ में कुछ वायदा कारोबारी है। उन्होंने केंद्रीय खाद्य और कृषि मंत्रालय के उपभोक्ता मामलों के विभाग के कुछ सर्कुलर को भी चीनी के दाम ऊपर और नीचे होते रहने की वजह माना। उन्होंने कहा कि कुछ वायदा कारोबारी और सरकारी सर्कुलर चीनी को महंगा कर रहे हैं। एफएमसी उनके इस आरोप से सहमत नहीं है। मंगलवार को चीनी का हाजिर भाव 1,716 रुपए क्विंटल था, जबकि वायदा भाव 1,770 रुपए क्विंटल था। खटुआ ने कहा कि कारोबारियों लंबी अवधि के वायदा करारों पर कारोबार करना आना चाहिए। अगर इन पर करारों पर केवल 6 महीने का ही कारोबार होना है, तो एक साल की अवधि क्यों दी जाए? उन्होंने कहा कि चीनी का वायदा कारोबार आंशिक रूप से नियंत्रित बाजार है। इसी अर्ध-नियंत्रित बाजार में चीनी का वायदा कारोबार हो रहा है। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद ठहराया कि एफएमसी चीनी के वायदा कारोबार पर नजर नहीं रख रहा है। उन्होंने कहा कि कमीशन बहुत सतर्क है और हालात पर पूरी नजर रखे हुए है। वह खास तौर पर पिछले 2 महीनों से काफी सतर्क है। गिडवानी का कहना है कि उपभोक्ता मामलों के विभाग ने मई में एक सर्कुलर जारी कर चीनी मिलों को 30 सितंबर से पहले 27.5 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बाजार में लाने का निर्देश दिया था। यह स्टॉक सितंबर से पहले 4 महीने में बाजार में आना था, लेकिन 1 महीने में कितनी चीनी बाजार में आएगी, यह तय नहीं किया गया था। गिडवानी का कहना है कि इसी वजह से बाजार में चीनी उपलब्ध नहीं है। (ET Hindi)
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