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18 सितंबर 2008
डिलिवरी डिफॉल्टरों पर एफएमसी करेगा सख्ती
नई दिल्ली : कमोडिटी बाजार रेगुलेटर फॉरवर्ड मार्केट कमिशन (एफएमसी) ने डिलिवरी डिफॉल्ट के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए पेनल्टी बढ़ाकर 3 फीसदी करने का फैसला किया है। एफएमसी ने एक्सचेंजों को कमोडिटी की डिलीवरी करने के लिए अधिकृत किया है। एफएमसी के अध्यक्ष बी. सी. खटुआ ने बताया, 'खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए हमने पेनल्टी बढ़ाकर 3 फीसदी कर दी है। यह पहले ढाई फीसदी थी।' उन्होंने बताया कि पहले प्रभावित पक्ष डिफॉल्टर (खरीदार और विक्रेता) से अनुबंधित राशि का आधा फीसदी प्राप्त करने का हकदार था। पेनल्टी बढ़ाए जाने के बाद अब प्रभावित पक्ष को करीब 1 फीसदी रकम मिलेगी। उन्होंने बताया कि शेष 2 फीसदी हिस्सा एक्सचेंज के निवेशक संरक्षण फंड में जाएगा। खटुआ ने कहा कि नए नियम अक्टूबर से लागू होंगे। एफएमसी ने एक्सचेंजों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अगर सामान उनके वेयरहाउस में है तो कमोडिटी की डिलीवरी की जिम्मेदारी उन पर है। एफएमसी चेयरमैन ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी खरीदार को कीमतों की अस्थिरता से सुरक्षा मिलना चाहिए। खटुआ ने कहा, 'कॉन्ट्रैक्ट की अवधि खत्म हो जाने के बाद खरीदार को 5 दिन मिलने चाहिए ताकि वह कीमतों के फर्क को देख सकें। कॉन्ट्रैक्ट की मियाद खत्म होने पर एक्सचेंज कमोडिटी की डिलिवरी करने से पहले 5 दिन की औसत कीमत को सेटलमेंट कीमत से मिलाए।' ऐसे में अगर औसत कीमत और सेटलमेंट कीमत में अंतर है तो खरीदार को उतनी रकम लौटा दी जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर ट्रेडिंग के लिए सभी संभावित पक्षों पर विचार करना चाहिए। (ET Hindi)
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