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10 सितंबर 2008
खाद्य तेलों में तीखी गिरावट की संभावना
खाद्य तेलों के दामों में जारी गिरावट का सिलसिला फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। वैश्विक परिस्थतियों को देखते हुए माना जा रहा है कि खाद्य तेलों के दाम अगले दो महीनों तक गिरते रह सकते हैं। घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के दाम अपने उच्चतम स्तरों से ब्स्त्र-भ्म् फीसदी तक गिर गये है।इस साल मार्च में सभी खाद्य तेलों के दाम अपने उच्चतम स्तर पर थे। उसके बाद से अब तक लगातार दामों में गिरावट का सिलसिला जारी है। सबसे ज्यादा गिरावट पाम तेल में हुई है। घरेलू बाजार में इसके दाम 1भ्00 डॉलर प्रति टन (भारतीय बंदरगाह पर एफओबी) से कम होकर मंगलवार को 7फ्5 डॉलर प्रति टन पर आ गये है। सोया तेल के दाम 1त्त00 डॉलर प्रति टन से घटकर 1क्त्तम् डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए हैं। खाद्य तेलों के दामों में हो रही गिरावट के बार में दीपक इंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक गोविंद भाई पटेल का मानना है कि विश्व बाजार में हो रही गिरावट का असर भारतीय बाजारों पर हो रहा है।मलेशिया में पाम तेल का स्टॉक 19.5 लाख टन तक पहुंच गया है जो अब तक का सबसे अधिक स्टॉक है। उन्होंने बताया कि पाम तेल में गिरावट को देखते हुए इसकी मांग में काफी कमी आई है। जिससे इसका स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है। साथ ही इस साल विश्व में तिलहनों का उत्पादन बढ़कर 41.6 करोड़ टन हो गया है जो 2006-07 में 38.7 करोड़ टन था। घरेलू बाजार में भी तिलहन का खरीफ सीजन में उत्पादन 180 लाख टन के करीब होने वाला है जो पिछले साल के उत्पादन 190 लाख टन के करीब ही है। पैराडाइम कमोडिटी के सीईओ बीरेन वकील का मानना है कि कच्चा तेल 147 डालर के रिकार्ड से गिरकर 101 डालर प्रति बैरल के आसपास आ गया। कच्चे तेल में हो रही गिरावट की वजह से विश्व भर में खाद्य तेलों की मांग में कमी आई है। जिसके चलते विश्व भर में खाद्य तेल के दामों में बिकवाली का रुख बना हुआ है। बीरेन वकील के अनुसार ब्राजील और भारत में सोयाबीन की अच्छी पैदावार को देखते हुए खाद्य तेलों के दामों में आगे भी गिरावट जारी रहने की संभावना है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बी. वी. मेहता ने बताया कि खाद्य तेलों में जारी इस गिरावट का सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन के किसानों को होने वाला है। सितंबर के अंत में उनकी फसल बाजार में आ जाएगी। दामों में हो रही गिरावट के चलते उन्हें अपनी फसल निचले दामों पर बेचनी पड़ेगी। उनका मानना है कि सरकार को इस समय खाद्य तेलों पर लागू स्टॉक लिमिट हटा लेनी चाहिए जिससे कारोबारी ज्यादा खाद्य तेल खरीद सकें। इससे बाजार में खाद्य तेलों की मांग में बढ़ोतरी होगी। साथ ही यदि सितंबर के अंत तक गिरावट जारी रहती है तो खाद्य तेलों पर आयात शुल्क लगाना चाहिए। अभी कच्चे खाद्य तेलों पर आयात शुल्क शून्य है। जबकि रिफाइंड खाद्य तेलों पर 7.5 फीसदी आयात शुल्क लगता है। (Business Bhaskar)
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