05 मई 2026

सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में भारी बढ़ोतरी से उत्तर भारत एवं गुजरात में कॉटन महंगी

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने से सोमवार को शाम के सत्र में उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में कॉटन की कीमतों में भारी तेजी दर्ज की गई।


सूत्रों के अनुसार कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 2,900 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने फसल सीजन 2025-26 की 89,600 गांठ कॉटन स्पिनिंग मिलों को बेची।

सीसीआई चालू फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई लगभग 61,02,100 कपास गांठ की बिक्री अभी तक कर चुकी हैं। निगम द्वारा अभी तक कुल बिक्री में सबसे ज्यादा 21.48 लाख गांठ महाराष्ट्र में तथा 10 लाख गांठ गुजरात में बेची है। सीसीआई ने तेलंगाना में भी 10.93 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश में 4.80 लाख गांठ के अलावा कर्नाटक 4.17 लाख गांठ तथा राजस्थान में 3.04 लाख गांठ और ओडिशा में 2.39 लाख गांठ के अलावा हरियाणा 1.64 और आंध्रप्रदेश 1.22 के अलावा पंजाब में 41,800 गांठ काटन की बिक्री की है।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव सोमवार को 1,750 रुपये तेज होकर 63,800 से 64,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,400 से 6,600 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,260 से 6,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,300 से 6,600 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 60,500 से 61,500 रुपये कैंडी बोले गए।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में इसके दाम तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार सूती धागे में स्थानीय मांग अच्छी है, साथ ही चीन की आयात मांग भी बराबर बनी हुई है। घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास नहीं के बराबर है, जबकि सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अच्छा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है ऐसे में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

उद्योग ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की थी। साथ ही चालू सीजन में कॉटन का आयात भी बढ़ेगा, हालांकि प्राइवेट जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जिस कारण इनकी बिकवाली कम आ रही है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें