कुल पेज दृश्य

05 मई 2026

विश्व बाजार में दाम तेज होने से घरेलू बाजार में कॉटन महंगी हुई

नई दिल्ली। विश्व बाजार में दाम तेज होने से घरेलू बाजार में शुक्रवार को कॉटन महंगी हुई। स्पिनिंग मिलों की खरीद बढ़ने के कारण शाम के सत्र में उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में इसकी कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


आईसीई कॉटन वायदा में गुरुवार को बड़ी तेजी दर्ज की गई तथा कीमत मंथ के हाई पर बंद हुईं। फरवरी 2024 के बाद यह सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन रहा, जिसका प्रमुख कारण डॉलर में कमजोरी के साथ ही एनर्जी प्राइस बढ़ने से भाव को सहारा मिला।

इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर जुलाई कॉन्ट्रैक्ट तेज होकर 82.20 सेंट प्रति पाउंड पर बंद हुआ, जो कि 3.00 सेंट तेज हुआ। यह तेजी मई 2024 के बाद का सबसे ऊँचा भाव है तथा पूरे महीने में इसके दाम करीब 18 फीसदी बढ़े।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 400 रुपये तेज होकर 61,800 से 62,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,250 से 6,400 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,060 से 6,120 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,100 से 6,450 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 59,000 से 60,000 रुपये कैंडी बोले गए।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एमसीएक्स पर अप्रैल 26 के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 840 रुपये तेज होकर 29,390 रुपये प्रति कैंडी हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रख रहा।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों की खरीद से उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में इसके दाम तेज हुए है। व्यापारियों विश्व बाजार में कॉटन महंगी होने से इसके आयात पड़ते महंगे हुए है, हालांकि आयात सौदे पहले ही नहीं के बराबर हो रहे हैं। घरेलू बाजार में हाल ही में सूती धागे में स्थानीय मांग कम हुई है, जिससे इसके दाम भी नरम हुए है। अत: स्पिनिंग मिलों के मार्जिन में कमी आई है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है हालांकि निगम के पास अभी भी 50 लाख गांठ से ज्यादा का कॉटन का स्टॉक है। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

कोई टिप्पणी नहीं: