<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677</id><updated>2012-02-09T03:35:50.929-08:00</updated><title type='text'>Agri Commodity News English-Hindi</title><subtitle type='html'>Daily update All Commodity news like : Wheat, Rice, Maize, Guar, Sugar, Gur, Pulses, Spices, Mentha Oil &amp;amp; Oil Complex (Musterd seed &amp;amp; Oil, soyabeen seed &amp;amp; Oil, Groundnet seed &amp;amp; Oil, Pam Oil etc.)</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' 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uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>6598</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2076500391587022866</id><published>2012-02-09T03:33:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:35:50.942-08:00</updated><title type='text'>पीडीएस में सुधार की खातिर</title><content type='html'>एक तरफ सरकार जहां अनाज के बदले लोगों को नकद राशि देने की योजना को अमली  जामा पहनाने पर विचार कर रही है वहीं दूसरी तरफ पीडीएस यानी जन वितरण  प्रणाली में सुधार कर उसे अधिक सशक्त बनाने का अभियान भी जोर पकड़ रहा है।  क्या देश की करीब 60 साल पुरानी पीडीएस को खत्म कर राशन के बदले नकद पैसा  दिया जाना आम आदमी के हक में है? इस सवाल पर बेहद गंभीरता से विश्लेषण करने  की जरूरत है। क्या अनाज के बदले नकद की योजना पीडीएस से अधिक कारगर साबित  हो सकती है? वह भी उन हालातों में जब विधवा पेंशन जैसी नकद राशि देने वाली  कई योजनाओं का पैसा लक्षित समूह तक नहीं पहुंच रहा हो। इसलिए अनाज के बदले  नकद देने की इस नीति को लागू करने से पहले यह जानना अधिक जरूरी है कि  पीडीएस की विफलता का मुख्य कारण क्या हैं? फिर तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ के  राज्यों में यही पीडीएस अन्य राज्यों की अपेक्षा सफल कैसे रहा?    &lt;br /&gt;पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के दूरदराज के अंदरूनी इलाकों का दौरा करने से  पता चला कि वजह कुछ भी हो पर यहां आम आदमी को सस्ता राशन मिल रहा है।  हांलाकि शहर के लोगों में खासकर जो वर्ग पीडीएस प्रणाली का हिस्सा नहीं इस  बात को लेकर क्षोभ भी है कि अगर हर गरीब आदमी को एक या दो रुपए में 35 किलो  अनाज मिल जाएगा तो वह काम पर क्यों जाएगा? लेकिन मुख्यमंत्री रमन सिंह इसे  शहरी मध्यवर्गीय सोच का परिचायक मानते हुए कहते हैं अगर आज बस्तर के  अभुजमाड़ और टोंडवाल जैसे जंगली इलाकों के गरीब लोगों को भी पीडीएस का चावल  मिल रहा है तो यह उनकी सोची समझी नीति का नतीजा है। ‘‘गोदाम में अनाज को  सड़ने दें लेकिन किफायत पर न दंे यह कहां की समझदारी है।’’&lt;br /&gt;आखिर वह  सोचा-समझा कौन सा फार्मूला है जिसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने  की योजनाएं चल रही है? इसे जानने के लिए मैंने एक बार छतीसगढ़ के पीडीएस को  विस्तार से जानने की कोशिश की तो पता चला कि इसे प्रभावी बनाने के लिए कईं  स्तर पर प्रयास किए गए। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय स्तर पर भोजन के अधिकार के  अधिनियम को लागू करने में भी इसकी मदद ली जा रही है।&lt;br /&gt;साल 2004 में  छत्तीसगढ़ की सरकार ने राशन की दुकानों पर अनाज न मिलने की बढ़ती शिकायतों के  मद्देनजर नया पीडीएस नियंत्रण आदेश जारी किया था। इसके तहत् तीन स्तरों पर  नए सुधारात्मक आदेश लागू किए गए।&lt;br /&gt;अति गरीबों और आदिवासियों को घर के  नजदीक आटा, चावल, और तेल मुहैया कराने के लिए सरकार ने उचित मूल्यों की  दुकानों के लाइंसेस निजी व्यापारियों की बजाए स्थानीय समुदाय जैसे वन  कोपोरेटिव, ग्राम पंचायत, ग्राम परिषदों और स्वयं सहायता समूहों को सौंप  दिए। इसके लिए 2872 निजी व्यापारियों के लाइसेंस रद्द किए गए। इसका फायदा  यह हुआ कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से दुकानें पूरा दिन खुली रहने लगी और  गांव वाले अपनी सुविधानुसार राशन लेने लगे। पूरे राज्य में ऐसी 2297 राशन  की दुकानें हैं जो स्वयं सहायता समूहों द्वारा चलाई जा रही हैं। स्थानीय  लोगों की भागीदारी ने जवाबदेही को भी बढ़ाने का काम किया। अब निजी व्यापारी  की तरह दुकान चलाने वाले समूह जल्द दुकान बंद करने और राशन खत्म होने का  बहाना नहीं कर सकते थे। संरचनात्मक स्तर पर अगला सुधार राशन की दुकानों की  गिनती बढ़ाना था। दुकानों की गिनती 8492 से बढ़ाकर 10465 कर दी गई। इसके तहत्  हर ग्राम पंचायत में एक दुकान खोली गई। इससे राशन लेने की लंबी कतारों में  कमी आई और कम समय में ही राशन मिलने लगा।   &lt;br /&gt;इसका स्पष्ट उदाहरण आंदा  है। बस्तर के अंदरूनी इलाके चित्रकोट के आदिवासी आंदा की खुशी उसकी  झुर्रियों से साफ झलक रही थी। आदिवासी आंदा के लिए इससे संतोष की अधिक क्या  बात हो सकती है कि महीने की छह तारीख को ही उसे महीने भर का चावल, तेल और  शक्कर मिल गया। आंदा ने दिखाया कि उसने 35 किलो चावल खरीदा है और वह भी  केवल एक रुपए किलो के हिसाब से। आंदा को यह राशन अपने गांव के यमुना स्वयं  सहायता समूह द्वारा चलाई जा रही उचित मूल्य की दुकान से मिला। आंदा के पास  लाल रंग का कार्ड है जो अति गरीब लोगों को एक रुपए प्रति किलो अनाज मुहैया  कराने के लिए दिए गए हैं।&lt;br /&gt;इसके बाद सबसे बड़ा सुधार राशन को गोदामों से  दुकानों तक पहुंचाने के लिए ट्रांसपोटेशन प्रणाली में बदलाव कर किया गया।  अभी तक निजी व्यापारी अपने कोटे का राशन उठाकर दुकान तक पहुंचने से पहले ही  ओपन मार्किट में उसे ऊंचे दामों पर बेच देते थे। लेकिन नए सिस्टम के तहत्  सिविल सप्लाई कारपोरेशन ने सभी उचित मूल्यों की दुकानों पर बिना किसी  अतिरिक्त लागत के राशन की सप्लाई करने की शुरुआत की। इसके लिए हर महीने की  छह तारीख तक पीले रंग के विशेष ट्रकों में पूरी सप्लाई पहुंचाई जाती है।  सारी सप्लाई सीधा दुकान तक पहुचने से ब्लैक मार्किटिंग की संभावना में कमी   हुई।&lt;br /&gt;अधिकतर राशन की दुकानें घाटे में चलने के कारण व्यापारी अक्सर  राशन का चावल या आटा मिल मालिकों को अधिक दामों में बेचकर अपना मुनाफा  बढ़ाने की फिराक में रहता था। ऐसे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए पीडीएस की  कमीशन 8 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 30 रुपए प्रति क्ंिवटल की गई। इस  प्रोत्साहन ने आम आदमी का आटा-चावल बाजार में बेचे जाने की प्रवृति पर कुछ  हद तक रोक लगाने का काम किया। इसके लिए 40 करोड़ रुपए प्रति वर्ष की  अतिरिक्त लागत राज्य सरकार को सहनी पड़ी। पीडीएस चलाने के लिए ब्याज रहित 75  हजार रुपए तक के ऋण देने की योजना ने भी लोगों को पीडीएस की बागडोर अपने  हाथों में लेने के लिए प्रोत्साहित किया। पीडीएस के अलावा दूसरी चीजें  बेचने की अनुमति ने भी स्थानीय लोगों को पीडीएस की जिम्मेदारी लेने के लिए  प्रेरित किया। इससे पीडीएस की दुकान चलाने वालों का मुनाफा 700 रुपए प्रति  माह से बढ़कर 2500 रुपए हो गया।&lt;br /&gt;किसी भी राज्य में पीडीएस की असफलता का  सबसे बड़ा कारण फर्जी कार्ड हैं। हाल ही में कर्नाटक और महाराष्ट्र में  लाखों की संख्या में फर्जी कार्ड पकड़े जाने का मामला सामने आया। छत्तीसगढ़  में भी ऐसे कार्डों से छुटकारा पाना एक बड़ी चुनौती थी। अधिक लोगों तक राशन  पहुुंचाने के लिए सरकार ने पुराने कार्डों को खत्म कर नए प्रकार के कार्ड  जारी किए। इस प्रक्रिया में तीन लाख के करीब फर्जी कार्डों को रद्द किया  गया। बीपीएल के अलावा बूढ़े, विकलांग, अति गरीब लोगों को भी पीडीएस में  शामिल करने के लिए पांच प्रकार के नए कार्ड जारी किए गए जिसमें अनुसूचित  जाति और जनजाति के परिवारों को भी शामिल किया गया और  अति गरीबों को एक  रुपए प्रति किलो चावल देने के कार्ड दिए गए। इससे करीब 80 प्रतिशत लोगों को  कवर किया गया। कुल मिलाकर राज्य सरकार इस नई प्रणाली को जारी रखने के लिए  फिलहाल प्रति वर्ष 1440 करोड़ रुपए की सब्सिडी प्रदान कर रही है।&lt;br /&gt;रमन  सिंह सरकार का दावा है कि इन सुधारांे ने हर घर में अनाज पहुंचा कर राज्य  की मातृत्व मृत्यु दर को 407 प्रति लाख से कम कर 337 प्रति लाख और नवजात  शिशु मृत्यु दर को 76 प्रति हजार से कम कर 56 प्रति हजार तक पहुंचा दिया  है। भले ही इन सुधारों के जरिए राज्य सरकार अधिक से अधिक लोगों तक अनाज  पहुंचाने में काफी हद तक सफल रही हो लेकिन आलोचकों का मानना है कि 35 किलो  अनाज का काफी हिस्सा महंगे दामों में मार्किट में बिक रहा है। जैसे कि  राज्य के कांग्रेस नेता अजित जोगी का मानना है कि एपीएल परिवारों के  हिस्सों का अनाज सीमावर्ती राज्यों में बेचा जा रहा है।&lt;br /&gt;दूसरी बड़ी  आलोचना का कारण यह है कि छत्तीसगढ़ का पीडीएस एक महंगा मॉडल माना जा रहा है  जिन्हें अन्य राज्यों में लागू करना संभव नहीं। इसके लिए अधिक संसाधनों और  बजट की जरूरत है। छत्तीसगढ़ के पास बजट भी अधिक है और अनाज भी जो कि अन्य  राज्यों के लिए संभव नहीं। इसके अलावा इस मॉडल में भी दुकानों तक सप्लाई  पहुंचाकर सरकार ने काफी हद तक गरीबों के हिस्से का अनाज ओपन मार्किट तक  पहुंचने पर रोक लगा दी है लेकिन दुकानों से परिवारों तक अनाज पहुंच रहा है  कि नहीं इसकी मॉनिटरिंग में अभी सुधार की जरूरत है। (First News live)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2076500391587022866?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2076500391587022866/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2076500391587022866' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2076500391587022866'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2076500391587022866'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_2485.html' title='पीडीएस में सुधार की खातिर'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4029918234572192535</id><published>2012-02-09T03:31:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:33:19.177-08:00</updated><title type='text'>सब्सिडी के बोझ से उड़ी वित्त मंत्री की नींद</title><content type='html'>&lt;p class="first-para"&gt;खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी के बोझ ने  वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है। वित्त मंत्री ने  बुधवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित राज्यों के कृषि व खाद्य मंत्रियों के  सम्मेलन में खुद यह बात कही। दो दिन का यह सम्मेलन लक्षित सार्वजनिक वितरण  प्रणाली और भंडारण के मुद्दे पर बुलाया गया है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री के तौर पर जब मैं विभिन्न मदों  में दी जाने वाली भारी सब्सिडी के बारे में सोचता हूं तो मेरी नींद उड़  जाती है। इसमें कोई शक नहीं।’’ बता दें कि&lt;/p&gt; &lt;p&gt;चालू वित्त वर्ष के दौरान खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी के बजट  अनुमान से कम से कम एक लाख करोड़ रुपए बढ़ जाने का अंदेशा है। बजट में 1.43  लाख करोड़ रुपए सब्सिडी का अनुमान है, जबकि वास्तव में इसके 2.45 लाख  करोड़ रुपए के आसपास रहने का आकलन है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;माना जा रहा है कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून के अमल में आने के  बाद जहां एक तरफ खाद्यान्नों की आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत होगी, वहीं दूसरी  तरफ सरकार का सब्सिडी बोझ भी बढ़ेगा। राशन व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की  बात करते-करते वित्त मंत्री का ध्यान अचानक सब्सिडी बोझ की तरफ चला गया।  उर्वरक सब्सिडी के लिए इस साल 50,000 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है। यह  अभी तक 67,700 करोड़ रुपए हो चुकी है और मार्च 2012 तक एक लाख करोड़ रुपए  हो जाने का अनुमान है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;वित्त मंत्री 16 मार्च को 2012-13 का आम बजट पेश करेंगे। वित्त मंत्री  ऐसे माहौल में यह बजट लाएंगे, जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता छाई है। देश  की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ी है और राजस्व प्राप्ति व खर्च के  बीच अंतर बढ़ रहा है। इस साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.6 फीसदी रहने का  बजट अनुमान है, लेकिन माना जा रहा है कि यह बढ़कर कम से कम 5.6 फीसदी पर  पहुंच जाएगा। (Aarth Kam)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4029918234572192535?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4029918234572192535/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4029918234572192535' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4029918234572192535'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4029918234572192535'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_9544.html' title='सब्सिडी के बोझ से उड़ी वित्त मंत्री की नींद'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4700875193236617685</id><published>2012-02-09T03:29:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:30:39.355-08:00</updated><title type='text'>खाद्य सुरक्षा बिल को लागू करना काफी मुश्किल: पवार</title><content type='html'>&lt;p class="txt" id="font_text"&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली।&lt;/b&gt; देश के करोड़ों गरीबों को  भोजन देने की सोनिया गांधी की महत्वाकांक्षी योजना, कृषि मंत्री शरद पवार  को रास नहीं आ रही है। शरद पवार ने कहा है कि मौजूदा पीडीएस सिस्टम के तहत  खाद्य सुरक्षा योजना लागू करने में कई दिक्कतें हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो  गया है कि क्या पवार राजनीतिक कारणों से इस लोकलुभावन योजना में अड़ंगा डाल  रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p class="txt" id="font_text"&gt;दरअसल  देश के करीब 65 फीसदी गरीबों को भोजन की गारंटी का अधिकार को मनरेगा के  बाद कांग्रेस इस प्रस्तावित कानून को अपना ब्रह्मास्त्र मान रही है। सोनिया  गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के दिमाग से उपजी ये  योजना अब बिल की शक्ल में संसदीय समिति के पास है। लेकिन कृषि मंत्री शरद  पवार को ये पहल रास नहीं आ रही है। शरद पवार का कहना है कि मौजूदा पीडीएस  की सीमाएं हैं, जैसे कि मंडियों की क्षमता, राज्य की एजेंसियों की वित्तीय  स्थिति, कर्मचारी, भंडारण आदि। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार किए बिना  इसे पूरे देश के में लागू करने में दिक्कतें आएंगी।&lt;/p&gt;&lt;p class="txt" id="font_text"&gt;वहीं भ्रष्टाचार के तमाम मामलों में घिरी  कांग्रेस को यकीन है कि ये कानून लागू हुआ तो 2014 के लोकसभा चुनाव में  उसकी नैया आसानी से पार हो जाएगी। जाहिर है, कांग्रेस को पवार का ये रुख  रास नहीं आ रहा है। शरद पवार की ये दलील भी है कि इस योजना के लागू होने से  मंत्रालय पर सब्सिडी का बोझ 65000 करोड़ रुपए से बढ़कर 1 लाख करोड़ तक हो  जाएगा। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी भी कह रहे हैं कि बढ़ती सब्सिडी से उनकी  नींद उड़ जाती है। लेकिन उनका ये भी कहना है कि खाद्य सुरक्षा के कानूनी  अधिकार के लिए जनता अब और इंतजार नहीं कर सकती।   &lt;/p&gt;&lt;p class="txt" id="font_text"&gt;राजनीतिक  गलियारों में शरद पवार के विरोध को उनके पिछले बयानों से जोड़कर भी देखा  जा रहा है। पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि घोटालों से यूपीए सरकार की छवि  खराब हुई है। जनता के बीच ये धारणा बनी है कि यूपीए सरकार ज्यादा दिनों तक  चल नहीं पाएगी। तो क्या पवार के रुख में भविष्य की राजनीति छिपी है। इस  कानून के दायरे में 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी आएगी जिन्हें  सस्ते दाम पर गेहूं, चावल और दूसरे अनाज दिए जाएंगे। ऐसे में कांग्रेस को  बड़ी राजनीतिक बढ़त मिल सकती है, जो शायद पवार को पसंद नहीं आ रहा। (IBN Khabar)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4700875193236617685?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4700875193236617685/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4700875193236617685' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4700875193236617685'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4700875193236617685'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_8580.html' title='खाद्य सुरक्षा बिल को लागू करना काफी मुश्किल: पवार'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-8758551209912188654</id><published>2012-02-09T03:27:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:29:02.712-08:00</updated><title type='text'>सोनिया के खाद्य सुरक्षा बिल ने प्रणब की नींद उड़ाई</title><content type='html'>&lt;span name="advenueINTEXT" id="advenueINTEXT"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;नई दिल्ली।। &lt;/span&gt; &lt;span style="font-family: Arial; font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;  वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की नींद उड़ गई है। वजह है सरकार का बढ़ता  सब्सिडी बिल। शायद ही सरकार की ओर से पहले खुलकर इस सचाई को स्वीकार किया  गया है। प्रणब के कबूलनामे के बाद यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के  ड्रीम प्रॉजेक्ट खाद्य सुरक्षा बिल की राह और कठिन हो गई है। कई सूबे खुलकर  और गैर-कांग्रेसी केंद्रीय मंत्री इशारों-इशारों में पहले ही खाद्य  सुरक्षा बिल का विरोध कर चुके हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम  और स्टोरेज पर आयोजित एक समारोह में प्रणब ने कहा, 'वित्त मंत्री होने के  नाते जब मैं सोचता हूं कि कितनी ज्यादा सब्सिडी देनी है तो मेरी नींद उड़  जाती है।' उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू करने की भारी जिम्मेदारी  सरकार ने उठाई है, लेकिन आसमान छूते सब्सिडी के आंकड़ें चिता बढ़ा रहे  हैं। यह सब्सिडी बिल को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देगा। मैं इस चिंता में सो  नहीं पा रहा हूं।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बयान का मेसेज साफ है। मुखर्जी की इमेज ऐसा  नेता की है, जो बहुत सोच-समझकर ही कुछ बोलते हैं। उनके इस बयान का मतलब यह  निकाला जा रहा है कि बजट में सब्सिडी पर चोट हो सकती है। क्रिसिल में चीफ  इकनॉमिस्ट सुनील सिन्हा ने कहा, 'वित्त मंत्री साफगोई बरत रहे हैं। वह इसकी  जमीन तैयार कर रहे हैं कि बजट से नाटकीय रियायतों की उम्मीद नहीं की जानी  चाहिए।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पता चलता है कि 2012-13 बजट में जोर फिस्कल  कंसॉलिडेशन पर होगा। 16 मार्च को पेश होने जा रहे बजट से टैक्स रियायतों की  उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। सरकारी खर्च बेकाबू होने से उनके मंत्रालय को  काफी आलोचनाएं सुननी पड़ी हैं। इससे वित्त मंत्रालय का परफॉर्मेंस भी  दागदार हुआ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले हफ्ते उन्होंने कोलकाता में कहा था कि  इंडस्ट्री को ज्यादा टैक्स देने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसका मतलब यह  निकाला गया कि सरकार ने 2008-09 के स्लोडाउन के वक्त जो राहत दी थी, उसे  बजट में वापस लिया जा सकता है। ऐसे में इंडस्ट्री को अगले फाइनैंशल ईयर में  ज्यादा एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स देना पड़ सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खजाने  को लेकर सरकार बड़ी मुश्किल में है। 2011-12 में सब्सिडी लक्ष्य से काफी  ज्यादा रह सकता है और टैक्स रेवेन्यू में कमी आई है। सरकार दूसरे जरियों से  भी खजाने में पैसा नहीं डाल पाई है। दिसंबर 2011 में संसद के शीतकालीन  सत्र में प्रणब ने कहा था कि सब्सिडी बिल बजट अनुमान से एक लाख करोड़ रुपये  ज्यादा रह सकता है। 2011-12 के बजट में सब्सिडी के करीब 1.4 लाख करोड़  रहने का अंदाजा लगाया गया था। सरकार विनिवेश और टैक्स से ज्यादा पैसा नहीं  जुटा पाई है। वह टेलिकॉम स्पेक्ट्रम की नीलामी भी नहीं कर सकी है। सिर्फ  इनडायरेक्ट टैक्स का लक्ष्य हासिल होता दिखाई दे रहा है।(Navbharat)&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-8758551209912188654?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/8758551209912188654/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=8758551209912188654' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/8758551209912188654'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/8758551209912188654'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_3010.html' title='सोनिया के खाद्य सुरक्षा बिल ने प्रणब की नींद उड़ाई'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4301374898425483277</id><published>2012-02-09T03:25:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:27:05.533-08:00</updated><title type='text'>सोनिया के खाद्य सुरक्षा बिल ने प्रणब की नींद उड़ाई</title><content type='html'>&lt;p&gt;नई दिल्ली। खाद्य सुरक्षा विधेयक पर राज्यों के एतराज के बाद बाद अब  संप्रग सरकार के मंत्रियों ने विरोधी स्वर अलापना शुरू कर दिया है। इससे  सोनिया के ड्रीम प्रोजेक्ट की राह और कठिन हो गई है। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली [पीडीएस]  की खामियों का हवाला देते हुए दो टूक कहा कि इसे लागू करना संभव नहीं है। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; खाद्य मंत्री केवी थॉमस की राय भी कुछ ऐसी ही है। काग्रेस के संकटमोचक  और वित्ता मंत्री प्रणब मुखर्जी का भी कहना है कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू  करने की भारी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई है, लेकिन आसमान छूते सब्सिडी के  आकड़ें चिता बढ़ा रहे हैं। यह सब्सिडी बिल को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देगा।  मैं इस चिंता में सो नहीं पा रहा हूं। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; शरद पवार ने राज्यों-संघ शासित प्रदेशों के खाद्य एवं कृषि मंत्रियों  के सम्मेलन में कहा, पीडीएस में आमूलचूल बदलाव बिना प्रस्तावित खाद्य  सुरक्षा बिल लागू करना मुश्किल होगा। अगर बिल को मौजूदा प्रणाली के जरिए ही  लागू करने की कोशिश की गई तो यह लक्ष्य प्राप्ति में विफल साबित होगा। मैं  इस पर इसलिए जोर दे रहा हूं, क्योंकि यह मेरा कर्तव्य है। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; खाद्य मंत्री के वी थामस ने भी पवार की बात को सही बताते हुए कहा, हमें  इस कानून को लागू करने के लिए और उत्पादन करने और पीडीएस को मजबूत करने की  जरूरत है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्ता मंत्री प्रणब मुखर्जी ने  पीडीएस में सुधार की वकालत करते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों को मिलकर इस  समस्या को दूर करने की जरूरत है। बढ़ते सब्सिडी बिल पर गंभीर चिंता जताते  हुए उन्होंने कहा, चालू वित्ता वर्ष में इसके 2.34 लाख करोड़ रुपये के पार  जाने का अनुमान है। मुखर्जी ने यह कहने से भी गुरेज नहीं किया, मैं इस  चिंता में सो तक नहीं पा रहा हूं। प्रस्तावित विधेयक के तहत 63.5 फीसदी  आबादी को सस्ती दर पर अनाज मुहैया कराया जाएगा। विधेयक को दिसंबर, 2011 में  संसद में पेश किया गया। संसद की स्थायी समिति इस पर विचार कर रही है। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; खाद्य सुरक्षा बिल को लागू करने के लिए सालाना करीब 6 करोड़ 50 लाख टन  खाद्यान्न खरीदना होगा। अभी औसतन 5 करोड़ 55 लाख टन खाद्यान्न खरीदा जाता  है। (jagarn)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4301374898425483277?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4301374898425483277/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4301374898425483277' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4301374898425483277'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4301374898425483277'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_9171.html' title='सोनिया के खाद्य सुरक्षा बिल ने प्रणब की नींद उड़ाई'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2074516625464630177</id><published>2012-02-09T03:22:00.002-08:00</published><updated>2012-02-09T03:25:47.737-08:00</updated><title type='text'>खाद्य सुरक्षा कानून के लिये सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बदलाव जरुरी: पवार</title><content type='html'>&lt;div class="article_text"&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार  का जनता को खाद्य सुरक्षा गारंटी देने का महत्वकांक्षी कार्यक्रम एक बार  फिर सवालों के घेरे में आ गया है.&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;          &lt;p&gt;कृषि मंत्री शरद पवार ने यह कहकर सवाल खड़ा किया कि मौजूदा राशन  प्रणाली के ढांचे में बड़ा सुधार किये बिना प्रस्तावित कानून पर पूरी तरह  से अमल करना मुश्किल होगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बढ़ते सब्सिडी बोझ को लेकर अपनी चिंता जताई.  उन्होंने तो यहां तक कहा कि जब उनका ध्यान बढ़े सब्सिडी बिल की तरफ जाता  है तो उनकी रातों की नींद उड़ जाती है. इस साल सरकार का सब्सिडी बोझ अनुमान  से कहीं अधिक बढ़कर 2.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाने की आशंका बनी है.  खाद्य सुरक्षा विधेयक पर अपनी बात रखते हुये उन्होंने कहा कि लागू होने पर  यह दुनिया का सबसे बड़ा सब्सिडीयुक्त खाद्य वितरण कार्यक्रम होगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पवार और मुखर्जी दिल्ली में बुधवार 8 फरवरी को शुरु हुये दो दिवसीय लक्षित  सार्वजनिक वितरण प्रणाली और भंडारण पर राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के  खाद्य एवं कृषि मंत्रियों के  सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पवार ने कहा, ‘‘मैं अपना कर्तव्य निभाने में असफल रहूंगा यदि में इस बात पर  जोर नहीं देता कि खाद्य सुरक्षा कानून को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के  मौजूदा ढांचे के ज़रिये ही लागू करने का प्रयास किया गया तो हम कभी भी इसके  पूर्ण लक्ष्य पाने को हासिल करने सफल नहीं हो पायेंगे.’’&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;राशन व्यवस्था में बदलाव&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून के जरिये देश की 63.5 प्रतिशत आबादी को  राशन की दुकानों के जरिये सस्ता राशन दिये जाने का कानूनी अधिकार दिया  जायेगा. पवार का मानना है कि इतने बड़े खाद्य वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने  के लिये राशन व्यवस्था व्यापक बदलाव किये जाने की आवश्यकता है. पवार  संप्रग सरकार के महत्वपूर्ण घटक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के  प्रमुख हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने की  दिशा में पहल करके सरकार ने एक बहुत बड़ी जवाबदेही अपने हाथ में ली है.  लेकिन इस दौरान उन्होंने बढ़ती जनसंख्या, पानी की घटती उपलब्धता और बढ़ती  सब्सिडी को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की. उन्होंने कहा, ‘‘देश की आबादी 1.2  अरब से ऊपर निकल चुकी है. हर साल ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या के बराबर लोग  इसमें जुड़ जाते हैं, पानी की उपलब्धता भी सीमित हो रही है, इससे सिंचाई  सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में यह बड़ी चुनौती हमारे सामने है.’’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री के वी थॉमस से पवार की चिंताओं के बारे  में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ उन्होंने कहा है वह गलत नहीं है.  हमें कानून लागू करने के लिये मजबूत वितरण प्रणाली की आवश्यकता है.’’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खाद्य सुरक्षा विधेयक संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर लाया गया  है. विधेयक संसद में पेश कर दिया गया है और खाद्य मामलों पर संसद की स्थायी  समिति विधेयक पर विचार कर रही है. (Samay Live)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2074516625464630177?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2074516625464630177/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2074516625464630177' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2074516625464630177'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2074516625464630177'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_6517.html' title='खाद्य सुरक्षा कानून के लिये सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बदलाव जरुरी: पवार'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1645880046250329256</id><published>2012-02-09T03:22:00.001-08:00</published><updated>2012-02-09T03:22:38.966-08:00</updated><title type='text'>तमिलनाडु को नहीं चाहिए खाद्य सुरक्षा कानून</title><content type='html'>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के  बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा  विधेयक के मसौदे को खारिज करते हुए कहा है कि यह मसौदा भ्रम और अशुद्धि से  भरा है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जया ने तमिलनाडु को खाद्य सुरक्षा  कानून के दायरे से बाहर रखने की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने केंद्र  द्वारा राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करने पर रोक लगाने की  भी अपील की है। जया ने कहा कि इस तरह की जनकल्याणकारी योजनाओं को बनाने और  उन्हें लागू करने का काम राज्य सरकारों को सौंप दिया जाना चाहिए। उधर,  योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने खाद्य सब्सिडी के कारण  पड़ने वाले 21 हजार करोड़ के अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए तेल सब्सिडी  खत्म करने का सुझाव दिया है। जया से पहले विधेयक का विरोध करते हुए नीतीश  ने कहा था कि योजना का खर्च केंद्र सरकार खुद उठाए। जबकि पटनायक ने कहा था  कि बिना किसी शर्त के हर गरीब को सस्ता अनाज योजना के तहत लाया जाना चाहिए।  मंगलवार को जयललिता ने प्रस्ताव पर केंद्र की ओर से राज्य के मांगे गए  विचार पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर जवाब दिया। जया ने विधेयक  में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के जरिये खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य  को हासिल करने वाले प्रावधान पर कहा कि टीपीडीएस को जबर्दस्ती लागू कराने  से 1800 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। जबकि केंद्र की ओर  से इस संबंध में कोई भी वैधानिक प्रतिबद्धता नहीं है। सोमवार को बिहार के  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि खाद्य सुरक्षा विधेयक के वित्तीय बोझ  को केंद्र सरकार को उठाना चाहिए। राज्य सरकारें इसे वहन करने की स्थिति  में नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के लाभार्थियों की पहचान एक  स्वतंत्र आयोग के जरिये की जाए। वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने  कहा था कि प्रत्येक गरीब को बिना किसी शर्त के सस्ता अनाज योजना के तहत  लाया जाना चाहिए। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1645880046250329256?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1645880046250329256/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1645880046250329256' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1645880046250329256'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1645880046250329256'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_241.html' title='तमिलनाडु को नहीं चाहिए खाद्य सुरक्षा कानून'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-597885833494895315</id><published>2012-02-09T03:18:00.001-08:00</published><updated>2012-02-09T03:18:51.324-08:00</updated><title type='text'>बढ़ सकती हैं पॉलिमर की कीमतें</title><content type='html'>करीब एक साल तक लगातार कीमतों में कटौती की मार झेलने वाले पॉलिमर  विनिर्माता पॉलिप्रोपलीन की कीमतें 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा सकते हैं।  इसकी वजह सालाना रखरखाव के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा अपनी तीन  इकाइयों को बंद करने का ऐलान और वैश्विक बाजार में कीमतों में आई मजबूती  है। पॉलिथिलीन की कीमतें हालांकि इसी स्तर पर बनी रहने की संभावना है। इससे  पहले हल्दिया पेट्रोकेमिकल ने सालाना रखरखाव के लिए अपनी इकाइयां बंद की  थीं। उद्योग के सूत्रों ने आगाह किया कि घरेलू बाजार में मांग में बढ़ोतरी  इसकी वजह नहीं है बल्कि पॉलिमर के प्रमुख उत्पादकों द्वारा क्षमता में की  गई कटौती है।&lt;br /&gt;इसके अलावा चीन, ताइवान और जापान में मांग बढऩे के चलते आयात महंगा हो गया  है। इन देशों के बाजार 15 दिसंबर के बाद से निष्क्रिय हो गए थे और अब चीनी  नव वर्ष के बाद खुल गए हैं। पॉलिमर खास तौर से पॉलिप्रोपलीन की वैश्विक  कीमतें 100-120 डॉलर प्रति टन बढ़ गई हैं और अब यह 1400-1420 डॉलर प्रति टन  पर बिक रहा है जबकि एक महीने पहले इसका भाव 1300-1320 डॉलर प्रति टन था।&lt;br /&gt;दूसरी ओर पॉलिविनाइल यानी पीवीसी विनिर्माता देश में इसका इस्तेमाल करने  वालों के पास ज्यादा भंडार होने के चलते दुविधा में हैं, लेकिन कीमतें  बढ़ाने के लिए मौके का इंतजार कर रहे हैं। दक्षिण पूर्वी व पूर्वी देशों से  मांग में तेजी के चलते वैश्विक कीमतें बढ़ी हैं और यह पिछले कुछ दिनों में  970-990 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1000-1020 डॉलर प्रति टन हो गई हैं।&lt;br /&gt;कंपनी के सूत्रों ने कहा - कीमतों में बढ़ोतरी के लिए विनिर्माता वैश्विक  कीमतों व डॉलर की चाल का इंतजार करेंगे और एक हफ्ते में ऐसा हो सकता है।  अगर वैश्विक कीमतों में बढ़त जारी रहती है और रुपये के मुकाबले डॉलर स्थिर  रहता है या मजबूत होता है तो कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि आधिकारिक  सूत्रों ने कहा कि आयात के मोर्चे पर घरेलू बाजार में पीवीसी की कीमतें  अपेक्षाकृत ज्यादा हैं क्योंकि मुनाफा बनाए रखने के लिए विनिर्माता कीमतों  में कटौती नहीं करेंगी। इसकी वजह कच्चे माल की लागत ऊंची रहना भी है।  सूत्रों ने कहा कि आयातित व घरेलू कीमतों के बीच का अंतर आज भी करीब 2  रुपये प्रति किलोग्राम है। पीवीसी की आधारभूत किस्म की कीमतें जनवरी में दो  बार कम की गई थीं और कुल कटौती विभिन्न उत्पादों में करीब 3.50 रुपये  प्रति किलोग्राम की थी। मौजूदा समय में देश में पीवीसी की आधारभूत किस्म की  कीमतें 55 रुपये प्रति किलोग्राम हैं और इसमें कर शामिल नहीं है।&lt;br /&gt;पॉलिप्रोपलीन और पॉलिथिलीन के मामले में घरेलू बाजार में मांग कमजोर है और  ग्राहकों को खींचने के लिए विनिर्माता कीमत सुरक्षा योजना की पेशकश कर रहे  हैं। पॉलिप्रोपलीन में सरकार ने सऊदी अरब से आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी  समाप्त कर दी है, जो विश्व के प्रमुख विनिर्माताओं में से एक है। सूत्रों  ने कहा कि इस वजह से भी घरेलू बाजार में नरमी है क्योंकि सऊदी से आयात करना  सस्ता है।&lt;br /&gt;पीई अभी भी 80-85 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में है जबकि पीपी 84-86  रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में। कीमत सुरक्षा योजना के तहत एक बार जब  उपभोक्ता उत्पाद खरीदता है तो उसे होने वाली नुकसान की भरपाई की जाती है,  अगर कंपनी एक हफ्ते या महीने के भीतर कीमतों में कटौती का ऐलान करती है।  पॉलिमर के प्रमुख विनिर्माता हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स, इंडियन ऑयल  कॉरपोरेशन, गेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज हैं। पॉलिप्रोपलीन का इस्तेमाल  रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामानों में किया जाता है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-597885833494895315?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/597885833494895315/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=597885833494895315' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/597885833494895315'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/597885833494895315'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_8999.html' title='बढ़ सकती हैं पॉलिमर की कीमतें'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-8235530716221360874</id><published>2012-02-09T03:17:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:18:12.371-08:00</updated><title type='text'>खाद्य कानून पर उभरे मतभेद</title><content type='html'>वित्त वर्ष 2012-13 का बजट आने से पहले प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा बिल को  लेकर कृषि मंत्रालय और खाद्य मंत्रालय द्वारा अपने मतभेद जाहिर करने के बाद  बुधवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बढ़ती सब्सिडी को लेकर चिंता  व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एक वित्त मंत्री के तौर पर सरकार द्वारा  वर्तमान में झेले जा रहे सब्सिडी के बोझ और भविष्य में आने वाले भार को  देखते हुए उनकी नींद उड़ जाती है। उन्होंने कहा, 'वित्त मंत्री होने के  नाते जब मैं दी जाने वाली सब्सिडी के बारे में सोचता हूं तो इसमें कोई शक  नहीं है कि मेरी रातों की नींद उड़ जाती है।'&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि मनरेगा और शिक्षा के अधिकार जैसे कानूनी हक के जरिये लोगों  की सशक्तिकरण की आकांक्षाओं पर खरा उतरना पड़ेगा। मुखर्जी ने कहा, 'अब  आजादी के 65 सालों बाद लोग इंतजार नहीं करना चाहते हैं। लोग अब सशक्त होना  चाहते हैं। न सिर्फ कागजी तौर पर बल्कि कानूनी हक के जरिये भी। खाद्य  सुरक्षा कानून के पीछे भी यही कारण है।' सब्सिडी के बढ़ते बोझ को लेकर  वित्त मंत्री का यह बयान और भी महत्त्वपूर्ण इसलिए हो जाता है क्योंकि वर्ष  2012-13 के आम बजट पेश करने के कुछ हफ्तों पहले ही दिया है। सरकार को वर्ष  2011-12 के दौरान सब्सिडी के बोझ के कारण बजट अनुमान से 1 लाख करोड़ रुपये  अधिक खर्च करने होंगे। वित्त मंत्री ने बयान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा  विधेयक को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में पेश आ रही मंत्रालय की समस्याओं  की ओर भी इशारा किया है। कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि इस विधेयक से  खाद्य सब्सिडी में 1,20,000 करोड़ रुपये का इजाफा हो जाएगा। न्यूनतम समर्थन  मूल्य बढ़ जाने से खाद्य सब्सिडी में बढ़ोतरी की उम्मीद है। जबकि खाद्य  मंत्रालय का मानना है कि सब्सिडी में सिर्फ 28,000 करोड़ रुपये का इजाफा  होगा। कृषि मंत्री शरद पवार का कहना है कि खराब सार्वजनिक वितरण प्रणाली   के कारण खाद्य सुरक्षा विधेयक कभी अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेगा।  पवार ने किसानों को सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा खाद्य फसलों के उत्पादन  के लिए दी जाने वाली गारंटी के न मिल पाने का मामला भी उठाया। जिसके कारण  हतोत्साहित होकर किसान गैर अनाज फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। सब्सिडी  खर्चे के बढ़ जाने के डर से खाद्य सुरक्षा विधेयक को संशय जताए जाने पर  खाद्य मंत्री केवी थॉमस कहते हैं कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना  पूरी होने के बाद नये लाभार्थियों के जुड़ जाने के बाद किसी भी हाल में  सब्सिडी का खर्च तकरीबन 85,000 करोड़ रुपये बढऩा तय है, चाहे खाद्य कानून  बने या नहीं। थॉमस कहते हैं, 'नई जनगणना पूरी होने के बाद खाद्य सब्सिडी का  खर्च करीब 85,000 करोड़ रुपये बढऩा तय है। चाहे कानून बने या नहीं।' (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-8235530716221360874?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/8235530716221360874/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=8235530716221360874' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/8235530716221360874'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/8235530716221360874'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_09.html' title='खाद्य कानून पर उभरे मतभेद'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-7928557201829452801</id><published>2012-02-06T07:08:00.001-08:00</published><updated>2012-02-06T07:08:46.684-08:00</updated><title type='text'>कल से जलवायु परिवर्तन, सतत कृषि और सार्वजनिक नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत</title><content type='html'>जलवायु परिवर्तन, सतत कृषि और सार्वजनिक नेतृत्व पर दो दिवसीय  अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कल से यहां शुरु होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान और  शिक्षा परिषद् तथा राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और सार्वजनिक  नेतृत्व परिषद के गठजोड़ में इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, सतत कृषि और सार्वजनिक  नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए विश्व भर से वैज्ञानिकों,  शिक्षकों, अनुसंधानकर्ताओं, अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और नीति निर्धारकों  को एक मंच पर एकत्रित करना और भविष्य के जलवायु परिदृश्य, भारतीय कृषि और  खाद्य सुरक्षा को संबोधित करने के लिए बहुमूल्य संस्तुतियों के माध्यम से  सर्वसम्मति विकसित करना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के  अनुसार जलवायु परिवर्तन वैश्विक पर्यावरण, कृषि उत्पादकता और मानव जीवन की  गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष बात यह है कि जलवायु  परिवर्तन के परिदृश्य में विकासशील देशों के किसानों के लिए खेती करना  मुश्किल होगा। विकासशील देश, खासकर भारत जलवायु बदलाव और जलवायु परिवर्तन  के प्रति अधिक संवेदनशील है क्योंकि यहां काफी हद तक कृषि वर्षा पर आधारित  होती है। कृषि फसलों के रोपण क्षेत्र और वार्षिक उत्पादन में बदलाव सीधे  तौर पर एक दूसरे से जुडे हैं, विशेषकर वर्षा और वर्षा के क्रम  पर।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के विषय में ज्ञान और इसके संबंध में  जानकारी अपर्याप्त तथा अधूरी है। 1992 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन  प्रारुप संधिपत्र को अपनाने का साथ जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के  अंतरराष्ट्रीय प्रयास प्रारंभ हुए। जलवायु परिवर्तन के प्रति प्राकृतिक और  मानव तंत्र की संवेदनशीलता के महत्व और इन बदलावों के प्रति अनुकूलन को  तेजी से समझा जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  विभिन्न राष्ट्रीय संगठनों के साथ आईसीआरआईएसएटी (ICRISAT), एफएओ (FAO),  आईएफएडी (IFAD) और आईसीएआरडीए(ICARDA) जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन तथा  मोरक्को, केन्या, सीरिया, कनाडा, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और  सिंगापुर  के विशेषज्ञों के इस सम्मेलन में हिस्सा लेने की संभावना है। (PIB)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-7928557201829452801?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/7928557201829452801/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=7928557201829452801' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7928557201829452801'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7928557201829452801'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_5342.html' title='कल से जलवायु परिवर्तन, सतत कृषि और सार्वजनिक नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1874325586840941816</id><published>2012-02-06T07:06:00.001-08:00</published><updated>2012-02-06T07:06:51.050-08:00</updated><title type='text'>राज्‍यों के खाद्य मंत्रियों की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार पर विचार के लिए बैठक</title><content type='html'>उपभोक्‍ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने सार्वजनिक वितरण  प्रणाली में सुधार पर विचार करने के लिए राज्‍यों के खाद्य और कृषि  मंत्रियों की बैठक बुलाई है। यह बैठक प्रस्‍तावित राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा  अधिनियम को ध्‍यान में रखते हुए बुलाई गई है और इसके एजेंडे में लक्षित  सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्यान्‍नों की वसूली और भंडारण क्षमता में  विस्‍तार शामिल है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     दो दिवसीय सम्‍मेलन नई दिल्‍ली में इस महीने की 8 और 9 तारीख को होगा।  बैठक का उद्घाटन वित्‍त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी करेंगे और कृषि मंत्री  श्री शरद पवार और उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री  प्रोफेसर के.वी. थॉमस सम्‍मेलन को सम्‍बोधित करेंगे। विभिन्‍न केन्‍द्रीय  मंत्रालयों, योजना आयोग और यूआईडीएआई के वरिष्‍ठ अधिकारी भी सम्‍मेलन में  भाग लेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     बैठक में वसूली केन्‍द्रों से उपभोक्‍ता राज्यों तक खाद्यान्‍न को  तेजी से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध लदान प्रणाली पर भी विचार किया जाएगा।  वसूली को प्रोत्‍साहित करने के लिए सीधे किसानों को अदायगी करने के तरीके  को भी अपनाया जा रहा है। राज्‍य सरकारों से अनुरोध किया जाएगा कि इन  प्रयासों को और सुदृढ़ बनाने के उपायों का पता लगाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली का कम्‍प्‍यूटरीकरण भी शुरू किया  है, कुछ पायलट परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं और कुछ राज्‍यों  में बायोमीट्रिक कार्ड जारी करने, विभिन्‍न वर्गों के लाभ उठाने वालों की  पहचान और जाली राशन कार्डों को समाप्‍त करने की दिशा में उल्‍लेखनीय प्रगति  हुई है। सम्‍मेलन इन प्रयासों को और सुदृढ़ करने और उसे यूआईडीएआई के साथ  जोड़ने पर भी विचार किया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     बैठक में महिला और बाल विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, कृषि  विभाग, गृह मंत्रालय, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, स्‍कूली शिक्षा  एवं साक्षरता विभाग, आर्थिक मामले विभाग, राष्‍ट्रीय सलाहकार परिषद और  योजना आयोग के वरिष्‍ठ अधिकारी भी अपने विचार रखेंगे।(PIB)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1874325586840941816?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1874325586840941816/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1874325586840941816' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1874325586840941816'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1874325586840941816'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_6147.html' title='राज्‍यों के खाद्य मंत्रियों की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार पर विचार के लिए बैठक'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6904343187166762137</id><published>2012-02-06T06:18:00.000-08:00</published><updated>2012-02-06T06:19:13.734-08:00</updated><title type='text'>पारंपरिक तरीके से होगा अफीम उत्पादन</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;सरकार ने अफीम उत्पादन के पारंपरिक तरीके को फिलहाल जारी  रखने का फैसला किया है। इस पर सरकार का एकाधिकार है और वह अभी अफीम  उत्पादन से जुड़े कारोबार का मशीनीकरण के जरिए निजीकरण नहीं करेगी। सरकार  अफीम तैयार करने की प्रक्रिया के निजीकरण की खातिर भारतीय व विदेशी  कंपनियों को अनुमति देने का प्रस्ताव तैयार कर रही है ताकि इसकी बढ़ती मांग  पूरी की जा सके। निर्यात बाजार और घरेलू दवा उद्योग में इसकी अच्छी मांग  है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;अधिकारियों ने कहा कि इस साल जनवरी में सरकार ने दवा  और अन्य नशीली दवाओं आदि के लिए राष्ट्रीय नीति का ऐलान किया था ताकि इस  तरह की दवाओं को नियंत्रित किया जा सके। एक हफ्ते के भीतर इस बारे में  दृष्टि पत्र व कार्ययोजना जारी किए जाएंगे ताकि अफीम से औषधि के लिए निकाले  जाने वाले तत्वों के संग्रह में निजीकरण को प्रोत्साहित किया जा सके।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;अफीम के प्रसंस्करण से अंतिम उत्पाद मॉर्फीन और  कोडीन बनता है और इसलिए कच्चे माल के तौर पर अफीम का औद्योगिक महत्व है।  इसके उपोत्पाद का इस्तेमाल दवा कंपनियां विभिन्न दवाओं के निर्माण में करती  हैं। ये रसायन सामूहिक रूप से अल्कलॉयड कहलाते हैं। तुर्की और अफगानिस्तान  के अलावा भारत अफीम का तीसरा प्रमुख उत्पादक है और देश से अल्कलॉयड का  निर्यात होता है। दुनिया में जितने अल्कलॉयड की जरूरत होती है, उसका आधे से  ज्यादा निर्यात भारत करता है। भारतीय अफीम के तत्वों का अमेरिका प्रमुख  आयातक है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;निजीकरण के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों के मुताबिक  लाइसेंस के लिए बोली लगाने वाली कंपनी थोक में दवा का विनिर्माण करने वाली  होनी चाहिए। उसकी साख भी बेहतर हो और पिछले तीन साल से उस कंपनी का  कारोबार 1 अरब रुपये सालाना से ज्यादा हो और यह कमाई सिर्फ दवा कारोबार से  हुई हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;संयुक्त उद्यम के लिए लाइसेंस की बोलीदाता कंपनी का  ऐसे उद्यम में कम से कम 51 फीसदी हिस्सा होना चाहिए। विदेशी कंपनी को  संचालन के लिए भारतीय सब्सिडियरी कंपनी बनानी होगी। सबसे ऊंची बोली लगाने  वाली कंपनी को लाइसेंस दिया जाएगा, लेकिन अगर उसने वादा पूरा नहीं किया तो  बोली के लिए जमा बॉन्ड की रकम या लाइसेंस शुल्क (जिसकी बैंक गारंटी दी गई  हो) की रकम जब्त कर ली जाएगी। सरकार द्वारा तय समय सीमा में अलग बोली लगाने  वाली कंपनी आपूर्ति के वादे को पूरा नहीं करेगी तो लाइसेंस रद्द कर दिया  जाएगा और लाइसेंस शुल्क जब्त हो जाएगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;इस समय पूरी प्रक्रिया पर सरकार का एकाधिकार है,  मसलन उत्पादन, कीमत और अफीम के पौधे का निपटारा आदि। सूत्रों ने स्पष्ट  किया कि अफीम से अल्कलॉयड तैयार करने का काम पारंपरिक तरीके से होता रहेगा  और कार्ययोजना के जरिए एक समयसीमा तय की जाएगी, जिसमें पूरी प्रक्रिया  मशीनीकृत हो जाएगी। इस मामले में मूल मकसद वैश्विक प्रक्रिया अपनाना है  ताकि नशीली दवाओं का अवैध कारोबार रोका जा सके।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;अधिकारियों ने यह भी कहा कि मशीनीकरण के सामाजिक व  राजनीतिक नतीजे भी होंगे क्योंकि इससे किसान सूखे अफीम के दोबारा इस्तेमाल  से वंचित हो जाएंगे। यहां तक कि किसान बीज भी नहीं रख पाएंगे। वे इसके सूखे  पौधे का इस्तेमाल चारे के तौर पर भी नहीं कर पाएंगे जैसा कि अभी होता है।  ऐसे में मशीनीकरण की प्रक्रिया अपनाने से पहले सरकार को राजस्थान, मध्य  प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अफीम किसानों के लिए व्यापक पुनर्वास पैकेज  तैयार करना होगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;अधिकारियों ने कहा कि अफीम उत्पादन से लेकर इसके  संग्रह व अल्कलॉयड निर्माण तक की प्रक्रिया पर सरकार का एकाधिकार बना  रहेगा। इसके संग्रह के बाद हालांकि शोधन की आंशिक प्रक्रिया निजी कंपनियों  को सौंप दी जाएगी और यह लाइसेंस की व्यवस्था पर आधारित होगा। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6904343187166762137?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6904343187166762137/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6904343187166762137' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6904343187166762137'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6904343187166762137'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_9438.html' title='पारंपरिक तरीके से होगा अफीम उत्पादन'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-7032750188251777692</id><published>2012-02-06T06:17:00.000-08:00</published><updated>2012-02-06T06:18:22.584-08:00</updated><title type='text'>घटते उत्पादन अनुमान से चने में आएगी उछाल</title><content type='html'>&lt;span style="font-size:85%;"&gt;सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद रबी सीजन में दलहन का  उत्पादन बढऩे की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। खाद्यान्न वर्ष 2011-2012 में  दलहन उत्पादन में करीब 5 फीसदी की कमी की आशंका है जबकि रबी सीजन की प्रमुख  दलहन फसल चने का उत्पादन 7 फीसदी घट सकता है। इससे अब चने की कीमतों में  यहां से सुधार शुरू हो सकता है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;कृषि मंत्रालय के वर्ष 2011-12 के दूसरे अग्रिम अनुमान  में दलहन का उत्पादन 5.2 फीसदी कम होकर 172.8 लाख टन रहने की उम्मीद जताई  गई है। पिछले वर्ष देश में दलहन का उत्पादन 182.4 लाख टन हुआ था। सरकारी  बयान में खरीफ सीजन में बारिश के असमान वितरण और रबी की बारिश में कमी को  इसकी वजह माना जा रहा है। इस साल जाड़े की बारिश करीब 50 फीसदी कम हुई है।  बुआई कम होने और कई इलाकों में भारी कोहरे से फसल पर असर पड़ा। खरीफ सीजन  में फसल कमजोर रहने की आशंका से सरकार ने रबी के लिए विशेष दलहन प्रोत्साहन  योजना चालू की थी, जिसके तहत देश के 12 प्रमुख दलहन उत्पादक इलाकों के लिए  80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। सरकार दावा कर रही थी कि इस राशि का  उपयोग सिंचाई की व्यवस्था करने और नई तकनीक में होगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;सरकारी अनुमान के अनुसार इस सीजन में चने का उत्पादन  6.8 फीसदी कम होकर 76.6 लाख टन होने की उम्मीद है। पिछले साल देश में 82.2  लाख टन चने की उपज हुई थी। ताजा आंकड़ों केअनुसार इस साल अभी तक चने का  कुल रकबा 89.57 लाख हेक्टेयर ही पहुंचा है, जो पिछले साल 93.41 लाख  हेक्टेयर से 4.11 फीसदी कम है। चने के प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश,  महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में बुआई हो चुकी है।  राजस्थान सरकार के पहले अग्रिम अनुमान में कहा गया है कि रबी सीजन में चने  का उत्पादन 7.8 फीसदी गिरकर 14.75 लाख टन रह सकता है जबकि पिछले साल राज्य  में उत्पादन 16 लाख टन रहा था। महाराष्ट्र में चने का उत्पादन 42 फीसदी कम  होकर 7.5 लाख टन और कर्नाटक में पिछले साल के 6 लाख टन की जगह 4.98 लाख टन  उत्पादन हो सकता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;उत्पादन कम होने और बाजार में मांग बढऩे की आशंका की  वजह से चने की कीमतों में गरमाहट शुरू हो गई है। पिछले सप्ताह चने की  कीमतें करीब 5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ थोक हाजिर बाजार में 3338 रुपये  प्रति क्विंटल पहुंच गईं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;वायदा बाजार में भी कीमतें 5 फीसदी की तेजी केसाथ  3300 रुपये प्रति क्विंटल (एनसीडीईएक्स फरवरी अनुंबध) पर पहुंच चुकी हैं।  ऐंजल कमोडिटी की नलिनी राय कहती हैं, फिलहाल चने की कीमतें लगभग निचले स्तर  पर हैं, इसलिए यहां से कीमतों का नीचे जाना मुश्किल है। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-7032750188251777692?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/7032750188251777692/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=7032750188251777692' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7032750188251777692'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7032750188251777692'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_5189.html' title='घटते उत्पादन अनुमान से चने में आएगी उछाल'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4388839413780632435</id><published>2012-02-06T06:16:00.001-08:00</published><updated>2012-02-06T06:16:57.106-08:00</updated><title type='text'>राइस ब्रान खली पर बढ़ेगा निर्यात कर</title><content type='html'>&lt;span style="font-size:85%;"&gt;कृषि मंत्रालय ने घरेलू बाजार में पशु चारे और बेकरी से  जुड़ी सामग्रियों की आपूर्ति को आसान बनाने के लिहाज से डिऑयल्ड राइस ब्रान  पर अतिरिक्त निर्यात कर लगाने का प्रस्ताव किया है। आधिकारिक सूत्रों का  कहना है, 'ऐसे निर्यात के लिए अभी तक 10 फीसदी निर्यात कर लगता है लेकिन  घरेलू बाजार में पशु चारे की कीमतों में बढ़ोतरी से दूध और पोल्ट्री के दाम  बढ़े हैं। दलील यह है कि घरेलू बाजारों में पशु चारे की ऊंची कीमतों और  भारी मांग के बावजूद तेल निकले हुए यानी डिआयल्ड राइस ब्रान का भारत को  निर्यात नहीं करना चाहिए। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;यह फैसला पशुपालन विभाग की सिफारिशों पर लिया गया है।  राइस मिलिंग के अलावा पशुओं का चारा खली से भी निकाला जाता है। इस क्षेत्र  में भारत कच्चे तेल का आयात करता है और खाद्य तेल का रिफाइन करता है। इसके  बाद बची खली का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में किया जाता है। इसलिए जब इसे  घरेलू बाजार में बेचा जाता है तो यह देसी पशु चारे की आपूर्ति की तुलना में  अधिक महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि इसलिए निर्यात को  हतोत्साहित करने की जरूरत है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;कच्चे ब्रान के निष्कर्षण के बाद तेल निकला हुआ या  बिना वसा का राइस ब्रान मिलता है। पशु चारे और पोल्ट्री के इस्तेमाल के  अलावा इसके और भी बहुत सारे उपयोग हैं। इस डिऑयल्ड ब्रान का इस्तेमाल  ब्रेड, केक, बिस्कुट जैसे बेकरी उत्पाद बनाने में होता है। खाद के रूप में  भी इसका उपयोग किया जा सकता है। दवा के तौर पर इसका इस्तेमाल संभव है।  इसमें विटामिन बी कांप्लेक्स, एमिनो एसिड, फॉस्फोरिक एसिड के यौगिक पाए  जाते हैं। राइस ब्रान सेे आसानी से प्रोटीन निकाला जाता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;इस बीच, भारत सरकार की नैशनल डेयरी योजना (एनडीपी)  ने कंपनी कानून के तहत दुग्ध उत्पादक कंपनियों की स्थापना का प्रस्ताव किया  है। कई राज्यों द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की पहल के तहत कायम एनडीपी की  शुरूआत अप्रैल में नई पंचवर्षीय योजना में की जाएगी। पहले चरण में इसके  लिए 2040 करोड़ रुपये का प्रावधान है। उत्पादक कंपनियों की स्थापना मुख्य  रूप से डेयरी के लिहाज से 14 सबसे बड़े राज्यों में की जानी है, खासकर उन  क्षेत्रों में जहां सहकारी समितियां नहीं हैं या फिर जहां उत्पादकता कम है।  ये राज्य हैं आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश,  महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम  बंगाल।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;प्रस्तावित कानून के मुताबिक सहकारी समिति का कोई  मौजूदा सदस्य या फिर सहकारी समिति खुद भी उत्पादक कंपनी बन सकती है। इस  मॉडल में साझा वित्तीय तरीके के आधार पर कंपनी/समिति के भीतर, सदस्यों से  और एनडीपी से धन आएगा। उत्पादक कंपनियां बनाने का मकसद कुल द़ुग्ध उत्पादन  में करीब 50 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली इन सहकारी समितियों को निजी  क्षेत्र से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। अधिकारियों  ने बताया कि उत्पादक कंपनियों का पंजीकरण कंपनी कानून के पार्ट 11 के  अंतर्गत किया जाएगा। (BS HIndi)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4388839413780632435?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4388839413780632435/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4388839413780632435' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4388839413780632435'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4388839413780632435'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_7490.html' title='राइस ब्रान खली पर बढ़ेगा निर्यात कर'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-3480585319154298651</id><published>2012-02-06T06:15:00.000-08:00</published><updated>2012-02-06T06:16:15.229-08:00</updated><title type='text'>औपचारिक वित्तीय इंस्ट्रुमेंट को प्रोत्साहन मिले : एसौचेम</title><content type='html'>&lt;p&gt;सोने को होल्डिंग असेट की श्रेणी में शामिल करने और चलन में ना लाने के  सरकार के विचार से उत्साहित प्रमुख  औद्योगिक संस्था एसौचेम ने सरकार से  आग्रह किया है कि निवेश को और अधिक उत्पादक बनाने के लिए औपचारिक वित्तीय  योजना को प्रोत्साहन दिया जाए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि  सोना एक होल्डिंग असेट है, जो निवेश योग्य संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ाता  है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;सोने के वर्तमान आयात को भुगतान संतुलन पर भारी बोझ बताते हुए एसौचेम के  महासचिव डी एस रावत ने कहा सोने के प्रति भारत की भूख से चालू खाते का घाटा  बढ़ रहा है, इसलिए इस पीली धातु का आयात लंबी अवधि तक नहीं किया जा सकता।  पिछले वित्त वर्ष में आयातित सोने का कुल मूल्य 12 राज्यों के सकल राज्य  घरेलू उत्पाद और उर्वरक व खाद्य सब्सिडी के बजटीय व्यय के अनुमान से अधिक  था। (Bs Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-3480585319154298651?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/3480585319154298651/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=3480585319154298651' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3480585319154298651'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3480585319154298651'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_06.html' title='औपचारिक वित्तीय इंस्ट्रुमेंट को प्रोत्साहन मिले : एसौचेम'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-206517626147959307</id><published>2012-02-04T01:13:00.000-08:00</published><updated>2012-02-04T01:15:02.865-08:00</updated><title type='text'>कृषि क्षेत्र के लिए 50 हजार करोड़ रुपये ज्यादा कर्ज</title><content type='html'>आर.एस. राणा नई दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;p&gt;प्रस्तावित खाद्य  सुरक्षा बिल सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की  आवश्यकता होगी। इसलिए वर्ष 2012-13 के आम बजट में किसानों के साथ-साथ कृषि  क्षेत्र पर ज्यादा जोर रहेगा। इसी अहमियत को देखते हुए कृषि क्षेत्र को  ज्यादा कर्ज दिए जाने की योजना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;देश&lt;/b&gt; की अर्थव्यवस्था में  खेती-बाड़ी की अहमियत को देखते हुए सरकार आम बजट में किसानों को दिए जाने  वाले कृषि ऋण में 50 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है। कृषि क्षेत्र  के लिए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में 4.75 लाख करोड़ का प्रावधान किया  गया था जबकि वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में यह राशि बढ़ाकर 5.25 लाख करोड़  रुपये करने की योजना है।&lt;/p&gt;&lt;span&gt;कृषि&lt;/span&gt; मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2012-13 के  बजट में कृषि ऋण देने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर कुल 5.25  लाख करोड़ रुपये कर्ज देने की योजना है।&lt;span&gt;पिछले&lt;/span&gt; बजट में इसके लिए 4.75 लाख करोड़ के कर्ज कृषि क्षेत्र को देने का  प्रावधान किया गया था। हालांकि ब्याज की दरों में किसी बदलाव की संभावना  नहीं है। इस समय किसानों को 7 फीसदी की दर पर फसली कर्ज दिया जाता है। तय  समय पर कर्ज अदा करने वाले किसानों को सरकार की ओर से तीन फीसदी ब्याज की  रियायत दी जाती है, जो वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में भी जारी रह सकती है।&lt;span&gt;अधिकारी&lt;/span&gt; ने बताया कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा बिल सरकार की पहली  प्राथमिकता है तथा इसके लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। इसलिए  वर्ष 2012-13 के आम बजट में किसानों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर ज्यादा जोर  रहेगा। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में कृषि ऋण देने के  लिए सरकार ने 4.75 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया हुआ है&lt;span&gt;जिसमें&lt;/span&gt; से पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर के दौरान 2.23 लाख करोड़  रुपये के ऋण आवंटित किए गए। उन्होंने बताया कि पहले छह महीनों के मुकाबले  अगले छह महीनों में ज्यादा कर्ज दिए जाते हैं। ऐसे में चालू वित्त वर्ष में  कुल लक्ष्य के मुकाबले ज्यादा ऋण वितरित किए जाने की संभावना है।&lt;span&gt;सरकार&lt;/span&gt; ने वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में कृषि ऋण देने के लिए 3.75 लाख  करोड़ रुपये के कर्ज देने का प्रावधान किया गया था जबकि इस दौरान देश में  कुल वितरित कर्ज की राशि बढ़कर 4.46 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। इस दौरान  देशभर के 5.50 करोड़ किसानों ने इसका लाभ लिया था। इसी तरह से वित्त वर्ष  2009-10 के बजट में कृषि ऋण के लिए सरकार ने 3.25 लाख करोड़ रुपये के कर्ज  देने का लक्ष्य रखा था&lt;span&gt;लेकिन&lt;/span&gt; कुल ऋण 3.84 लाख करोड़ रहे। इस दौरान देशभर के 4.82 करोड़ किसानों  को कर्ज मिले। वित्त वर्ष 2008-09 के बजट में भी कुल 2.80 लाख करोड़ रुपये  लक्ष्य के मुकाबले किसानों को 3.01 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-206517626147959307?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/206517626147959307/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=206517626147959307' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/206517626147959307'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/206517626147959307'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/50.html' title='कृषि क्षेत्र के लिए 50 हजार करोड़ रुपये ज्यादा कर्ज'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-597508350378554128</id><published>2012-02-04T01:12:00.000-08:00</published><updated>2012-02-04T01:13:29.971-08:00</updated><title type='text'>बीएन-बीटी कॉटन की जांच के लिए कमेटी</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;भारतीय &lt;/b&gt;कृषि  अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) ने स्वदेशी बीटी कॉटन विकसित किए जाने के  दावों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। स्वदेशी बीटी  कॉटन को बीकानेरी नरमी (बीएन-बीटी) नाम दिया गया है। बीएन-बीटी में  मोनसेंटो के बीटी कॉटन का मिश्रण होने के आरोपों के चलते इसकी बिक्री पर  प्रतिबंध है।&lt;/p&gt;&lt;span&gt;आईसीएआर&lt;/span&gt; के डिप्टी डायरेक्टर जनरल स्वपन कुमार दत्ता ने बताया कि पिछले  पखवाड़े गठित की गई जांच टीम का प्रमुख जवाहर लाल नेहरू यूनीवर्सिटी के  वाइस चांसलर एस. के. सोपोरी को बनाया गया है। धारवाड़ की यूनीवर्सिटी ऑफ  एग्रीकल्चरल साइंसेज, नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन बायोटैक्नोलॉजी (एनआरसीपीबी)  और नागपुर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर कॉटन रिसर्च (सीआईसीआर) के  वैज्ञानिकों ने स्वदेशी बीटी कॉटन विकसित करने का दावा किया है। आईसीएआर ने  जांच दल से कहा है कि वह जांच करे कि इन वैज्ञानिकों ने स्वदेशी बीटी  किस्म विकसित की है या फिर विकसित बीज बीएन-बीटी में 'मॉन-531' जीन वाले  बीज का मिश्रण है।&lt;span&gt;वैज्ञानिकों&lt;/span&gt; पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार बीएन-बीटी मौलिक रूप से  विकसित बीज नहीं है बल्कि इसमें 1990 के दशक में अमेरिकी कंपनी मोनसेंटो  द्वारा विकसित बीटी कॉटन (मॉन-531) का ही एक वर्जन है। दत्ता के अनुसार  बीएन-बीटी की बिक्री पर 2009 से ही रोक लगी हुई है।&lt;br /&gt;&lt;p&gt;यह रोक अभी भी बरकरार है।&lt;/p&gt;&lt;span&gt;उन्होंने&lt;/span&gt; कहा कि जांच का आदेश देने की वजह सच्चाई का पता लगाना है।  धारवाड़ के संस्थान से भी इस मामले की जांच करने को कहा गया है। इस संबंध  में सीआईसीआर के डायरेक्टर के. आर. क्रांति ने बताया कि संस्थान जांच कमेटी  को पूरा सहयोग करेगी। (Business Bhaskar)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-597508350378554128?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/597508350378554128/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=597508350378554128' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/597508350378554128'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/597508350378554128'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_1329.html' title='बीएन-बीटी कॉटन की जांच के लिए कमेटी'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1303151990596183738</id><published>2012-02-04T01:11:00.002-08:00</published><updated>2012-02-04T01:12:15.448-08:00</updated><title type='text'>गेहूं का होगा रिकॉर्ड उत्पादन</title><content type='html'>&lt;p&gt;अधिक उत्पादन और बेहतर मौसम के कारण देश में लगातार चौथे साल फसल वर्ष  2011-12 में गेहूं का रिकॉर्ड 8.83 करोड़ टन उत्पादन होने की उम्मीद है।  गेहूं का उत्पादन पिछले साल 8.68 करोड़ टन रहा था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;कृषि मंत्रालय द्वारा 2011-12 के लिए शुक्रवार को जारी दूसरे  पूर्वानुमान के मुताबिक कुल अनाज का उत्पादन 24.5 करोड़ टन के लक्ष्य को  पार कर 25.04 करोड़ टन के आंकड़े को छू लेगा। अनाज उत्पादन वित्त वर्ष  2010-11 में 24.47 करोड़ टन था। यह रिकॉर्ड अनाज उत्पादन का लगातार दूसरा  साल है जिससे खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने की सरकारी योजना को  प्रोत्साहन मिला है। अनाज के कुल उत्पादन में से चावल का उत्पादन इस साल  बढ़कर 10.27 करोड़ टन हो जाने का अनुमान है जबकि पिछले साल यह 9.59 करोड़  टन था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि दाल का उत्पादन इस साल थोड़ा कम 1.72 करोड़ टन रहने का  अनुमान है, जबकि पिछले साल 1.82 करोड़ टन दाल का उत्पादन हुआ था। इसी तरह  तिलहन उत्पादन घटकर 3.05 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल 3.27  करोड़ टन था। नकदी फसलों में कपास उत्पादन के बारे में अनुमान है कि चालू  वित्त वर्ष में यह 3.40 गांठें (हर गांठ 170 किलोग्राम) होगा जबकि पिछले  साल 3.3 करोड़ गांठों का उत्पादन हुआ था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;जूट का उत्पादन 2011-12 के दौरान 1.11 करोड़ गांठें (180 किलो प्रति  गांठ) होने की उम्मीद है जबकि पिछले साल 1.06 करोड़ गांठों का उत्पादन हुआ  था। गन्ने का उत्पादन 2011-12 में बढ़कर 34.78 करोड़ टन होने की उम्मीद है  जबकि पिछले साल यह 34.23 करोड़ टन था। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1303151990596183738?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1303151990596183738/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1303151990596183738' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1303151990596183738'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1303151990596183738'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_3684.html' title='गेहूं का होगा रिकॉर्ड उत्पादन'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4401225576596469073</id><published>2012-02-04T01:11:00.001-08:00</published><updated>2012-02-04T01:11:47.285-08:00</updated><title type='text'>सीटीटी : शेयर व जिंस एक्सचेंजों में तनातनी!</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;जिंस वायदा बाजार में कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स  (सीटीटी) लागू किया जाए या नहीं, इस मसले पर स्टॉक एक्सचेंजों और कमोडिटी  एक्सचेंजों के बीच शीत युद्घ का माहौल बन गया है। राष्ट्रीय स्तर के स्टॉक  एक्सचेंजों का समूह (एनएसईजी) इस मामले में गुटबंदी कर रहा है और जिंस  बाजार पर सीटीटी लगाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहा है। दूसरी ओर कमोडिटी  एक्सचेंज भी सीटीटी से निजात पाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। उनकी दलील है  कि जिंस हेजिंग का उत्पाद है, इसीलिए उस पर सीटीटी लगाने की कोई तुक ही  नहीं है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;एनएसईजी के सदस्यों का दावा है कि इक्विटी वायदा का  कारोबार घट गया है और वह जिंस बाजारों की ओर लुढ़क गया है। हालांकि इक्विटी  और जिंस के कारोबारी आंकड़ों की तफ्तीश करने पर पता चलता है कि इक्विटी  वायदा का कारोबार जिंस वायदा की ओर नहीं बल्कि इक्विटी ऑप्शन के सौदों में  जा रहा है क्योंकि वहां सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) ही नहीं है।  दरअसल 2007 में जब इक्विटी वायदा पर एसटीटी लगाया गया तो इक्विटी ऑप्शन  में सौदे अचानक बढ़ गए। कमोडिटी एक्सचेंज के अधिकारियों का तर्क है कि  इक्विटी कैश सेगमेंट पर एसटीटी या पूंजीगत लाभ कर लगाया जा सकता है क्योंकि  वे निवेश के उत्पाद हैं। इसके उलट जिंस डेरिवेटिव्स हेजिंग का उत्पाद है,  जो जिंसों की कीमतों में भारी उतारचढ़ाव के जोखिम से बचाता है। इसीलिए इसे  निवेश के साथ तराजू में नहीं तोला जा सकता।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;हालांकि सीटीटी के मसले पर एक्सचेंज के सदस्य खुलकर  कुछ नहीं बोलते, लेकिन नाम नहीं छापने की शर्त पर एक प्रमुख कमोडिटी  एक्सचेंज के एक वरिष्ठ&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-family:Arial;font-size:85%;"&gt;&lt;span style="font-family:Arial;font-size:85%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;अधिकारी  ने कहा कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट ब्याज दर वायदा और मुद्रा वायदा की  तरह है और मूल्य में उतार चढ़ाव की सूरत में बीमा की तरह काम करता है। इस  पर कोई भी कर लगाने से हेजिंग महंगी हो जाएगी और कारोबारी अंतरराष्ट्रीय  बाजार या डिब्बा ट्रेडिंग का रुख कर लेंगे। उन्होंने कहा, 'ब्याज दर वायदा  और मुद्रा वायदा के बाजार कमोडिटी वायदा से 100 गुना बड़े हैं। इसलिए  कमोडिटी के छोटे बाजार पर कर थोपने का कोई औचित्य नहीं है।&lt;/span&gt;&lt;span style="font-family:Arial;font-size:85%;"&gt;&lt;span style="font-family:Arial;font-size:85%;"&gt;'&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;साल 2009 के बजट में कमोडिटी पर ट्रांजैक्शन  टैक्स का प्रस्ताव आने के बाद तमाम विश्लेषकों और विशेषज्ञों ने केंद्रीय  वित्त मंत्री को सुझाव दिया था कि ट्रांजैक्शन टैक्स को खत्म कर दिया जाए।  उनकी इस बात को वित्त मंत्री ने मान भी लिया था। इसीलिए प्रत्यक्ष कर  संहिता (डीटीसी) लागू होने के साथ ही एसटीटी खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि  कमोडिटी एक्सचेंज, भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की), भारतीय  उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) ने वित्त  मंत्रालय से जिंसों पर सीटीटी नहीं लगाने का अनुरोध दिया है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;उद्योग संगठन और राष्ट्रीय स्तर के जिंस एक्सचेंज इस  मामले में एक जैसी बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि स्टॉक एक्सचेंजों का  यह तर्क बिल्कुल बेबुनियाद है कि इक्विटी वॉल्यूम दूसरे कारोबार में चला  गया है और लोगों का रुझान आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के बाजार में  घटा है। उनके मुताबिक स्टॉक एक्सचेंज सरकार को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं  कि लोगों का ध्यान आईपीओ से कमोडिटी बाजारों की ओर हो गया है, जबकि सच्चाई  यह है कि आईपीओ मार्केट में गहराई ही नहीं है। इक्विटी ऑप्शन में आज 90  फीसदी सौदे हो रहे हैं और इंडेक्स ऑप्शन में 80 फीसदी सौदे हो रहे हैं।  उनका आरोप है कि यह गुट बाजार के विकास के बारे में नहीं सोच रहा बल्कि  अपने हित को ही तरजीह दे रहा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;कमोडिटी एक्सचेंज के एक प्रमुख ने नाम न छापने की  शर्त पर कहा कि राष्ट्रीय स्तर के स्टॉक एक्सचेंजों के समूह ने गैर  प्रतिस्पर्धक अभियान चलाया है। उन्हें बाजार के विकास से कोई मतलब नहीं दिख  रहा है। उसके बजाय वे नीति निर्धारकों, और और कमोडिटी ईकोसिस्टम से जुड़े  लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं, जो कहीं से भी उचित नहीं है। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4401225576596469073?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4401225576596469073/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4401225576596469073' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4401225576596469073'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4401225576596469073'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post_04.html' title='सीटीटी : शेयर व जिंस एक्सचेंजों में तनातनी!'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4819751629256593346</id><published>2012-02-04T01:10:00.000-08:00</published><updated>2012-02-04T01:11:06.737-08:00</updated><title type='text'>रिकॉर्ड खाद्यान्न का अनुमान</title><content type='html'>&lt;span style="font-size:85%;"&gt;महंगाई पर काबू पाने की सरकारी कोशिश को झटका लग सकता है  क्योंकि दलहन और तिलहन का उत्पादन इस साल क्रमश: 5.2 व 6 फीसदी घटने का  अनुमान है। जरूरतें पूरी करने के लिए हर साल दलहन व खाद्य तेल का बड़ी  मात्रा में आयात किया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;हालांकि खाद्यान्न के मामले में इस तरह की चिंता नहीं है  क्योंकि साल 2011-12 के फसल विपणन वर्ष में उत्पादन अब तक के सर्वोच्च  स्तर 25.042 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान है। साल 2011-12 के दूसरे  अग्रिम अनुमान में कहा गया है कि गेहूं और चावल के उत्पादन में रिकॉर्ड  बढ़ोतरी के चलते खाद्यान्न का उत्पादन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान  है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;शुक्रवार को जारी अनुमान में कहा गया है कि इस साल  गेहूं का उत्पादन 883.1 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है, जो पिछले साल के  मुकाबले करीब 1.6 फीसदी ज्यादा है। इस अवधि में 1030 लाख टन चावल का  उत्पादन हो सकता है, जो पिछले साल के मुकाबले 7 फीसदी ज्यादा है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;14 जनवरी को समाप्त हफ्ते में लगातार चौथे हफ्ते  अवस्फीति की स्थिति रही। इस दौरान कीमतें 1.03 फीसदी तक कम हुईं जबकि एक  हफ्ते पहले यह 0.42 फीसदी घटी थी। इसकी मुख्य वजह फलों व सब्जियों की  कीमतों में आई गिरावट रही।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;इस बीच, आंकड़ों से पता चलता है कि कपास का उत्पादन  रिकॉर्ड 340.9 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) पर पहुंचने का अनुमान  है, जो पिछले साल के मुकाबले 3.3 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह इस साल गन्ने का  उत्पादन करीब 1.6 फीसदी बढ़कर 3478.7 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;सबसे बड़ी चिंता दलहन और तिलहन को लेकर है।  अधिकारियों ने कहा कि खरीफ सीजन में बारिश के असमान वितरण के चलते इन दोनों  फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा देश के उत्तरी इलाके में  जाड़े के दौरान होने वाली बारिश भी घटी है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक,  अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश में करीब 50 फीसदी कम बारिश हुई। एक वरिष्ठ  अधिकारी ने कहा - जाड़े में बारिश के अभाव से रबी में दलहन की फसलों पर असर  पड़ा है, साथ ही सरसों भी प्रभावित हुआ है, जिसकी बुआई मुख्य रूप से इसी  सीजन में होती है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;उन्होंने कहा कि एक बार फिर आपूर्ति बढ़ाने के लिए  देश को आयात पर निर्भर रहना होगा। साल 2010-11 में भारत में दलहन आयात घटकर  करीब 15 लाख टन रह गया था, जो औसतन 25 से 30 लाख टन होता था। इसकी वह देश  में उत्पादन बढऩा है, जो 180 लाख टन के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।  दालों का आयात कनाडा, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अफ्रीकी देशों से होता  है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;तिलहन में भी ऐसी ही स्थिति पैदा होने की संभावना  है, जहां उत्पादन में गिरावट मुख्य रूप से सरसों का उत्पादन घटने के चलते  आएगी, जिसके चलते आयात पर जोर पड़ सकता है। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने  कहा - देश में खाद्य तेल की उपलब्धता में सरसों का महत्वपूर्ण स्थान है  क्योंकि इससे सबसे ज्यादा तेल निकलता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;दलहन व तिलहन के कुल उत्पादन में गिरावट के अनुमान  के बाद सरकार की उन कोशिशों पर सवाल खड़ा हो गया है, जिसके तहत सरकार ने  रबी सीजन के दौरान देश के 12 प्रमुख दलहन उत्पादक इलाकों के लिए 80 करोड़  रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया था। इसका आवंटन खरीफ सीजन में दलहन के  उत्पादन में 10 फीसदी की गिरावट और बारिश के असमान वितरण के बाद किया गया  था। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4819751629256593346?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4819751629256593346/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4819751629256593346' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4819751629256593346'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4819751629256593346'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/02/blog-post.html' title='रिकॉर्ड खाद्यान्न का अनुमान'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2131364508917050912</id><published>2012-01-31T02:51:00.000-08:00</published><updated>2012-01-31T02:52:06.695-08:00</updated><title type='text'>विदेश में भारतीय मक्का सबसे सस्ता, तेजी संभव</title><content type='html'>आर.एस. राणा नई दिल्ल&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;विश्व&lt;/b&gt;  बाजार में भारतीय मक्का सबसे सस्ती होने के कारण निर्यातकों की खरीद बढ़ गई  है। इसके अलावा स्टार्च मिलों की ओर से भी मक्का की अच्छी मांग निकल रही  है। चालू महीने में मक्का की कीमतों में 200 रुपये की तेजी आकर दिल्ली में  भाव 1,375-1,380 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;span&gt;चालू&lt;/span&gt; फसल सीजन में अक्टूबर से अभी तक करीब 12 लाख टन मक्का के निर्यात  सौदे हो चुके हैं। मक्का में चीन और सीरिया की आयात मांग में बढ़ोतरी हुई  है। जबकि उत्पादक मंडियों में खरीफ मक्का की आवक घट गई है जबकि रबी की  मक्का की फसल आने में करीब तीन महीने का समय शेष है। इसलिए मौजूदा कीमतों  में तेजी की ही संभावना है।&lt;span&gt;अमेरिकी&lt;/span&gt; कृषि विभाग (यूएसडीए) के भारत में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने  बताया कि अक्टूबर से अभी तक करीब 12 लाख टन मक्का के निर्यात सौदे हो चुके  है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मक्का सबसे सस्ती है। वियतनाम भारतीय  मक्का की खरीद 311 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) की दर से कर रहा है जबकि चीन  304 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) पर कर रहा है। चीन की आयात मांग में 10 लाख टन  की बढ़ोतरी होकर कुल मांग 40 लाख टन की हो गई है।&lt;span&gt;उन्होंने&lt;/span&gt; बताया कि अर्जेंटीना और ब्राजील में मक्का की नई फसल की आवक  शुरू हो गई है तथा इन देशों में उत्पादन भी पिछले साल से ज्यादा है लेकिन  अमेरिका में पैदावार में कमी आने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़े  हुए हैं। अर्जेंटीना में मक्का की पैदावार 2.6 करोड़ टन और ब्राजील में  6.1 करोड़ टन होने का अनुमान है। पिछले साल इन देशों में क्रमश: 2.25 और  5.75 करोड़ टन की पैदावार हुई थी।&lt;span&gt;अमेरिका&lt;/span&gt; में मक्का का उत्पादन पिछले साल के 31.6 करोड़ टन से घटकर 31.4  करोड़ टन का हुआ है। चीन के अलावा इस समय सीरिया सबसे बड़ा आयातक देश है।&lt;br /&gt;&lt;p&gt;बीएम  इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर एम. एल. अग्रवाल ने बताया कि खरीफ मक्का  की आवक पहले की तुलना में कम हो गई है जबकि रबी फसल की आवक अप्रैल महीने  में बनेगी।&lt;/p&gt;&lt;span&gt;निर्यातकों&lt;/span&gt; के साथ ही स्टॉर्च मिलों की मांग बनी हुई है। मध्य प्रदेश,  उत्तर प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु की मंडियों में मक्का की कीमतें  1,180-1,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं। काकीनाडा बंदरगाह पर पहुंच  मक्का के सौदे 1,350-1,360 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं। कृषि  मंत्रालय के अनुसार रबी में मक्का की बुवाई 11.71 लाख हैक्टेयर में हुई है  जबकि पिछले साल की समान अवधि में 10.72 लाख हैक्टेयर में हुई थी। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2131364508917050912?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2131364508917050912/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2131364508917050912' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2131364508917050912'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2131364508917050912'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_763.html' title='विदेश में भारतीय मक्का सबसे सस्ता, तेजी संभव'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-7943143654663938572</id><published>2012-01-31T02:50:00.001-08:00</published><updated>2012-01-31T02:50:33.357-08:00</updated><title type='text'>इस साल दशहरी की भारी पैदावार की उम्मीद</title><content type='html'>कड़ाके की ठंड और जनवरी के पहले सप्ताह में हुई बारिश के चलते उत्तर प्रदेश  की फल पट्टी मलिहाबाद में इस बार दशहरी की बंपर फसल की उम्मीद है। तापमान  बढऩे के साथ ही आम के पेड़ों पर अच्छी बौर नजर आने लगी है जो बढिय़ा सीजन का  संकेत दे रही है। हालांकि साल दर साल पेड़ कटने, नई रिहायशी कॉलोनियां  बनने और फल पट्टी में चल रहे ईंट भट्ठों के धुएं से आम के पेड़ घट रहे हैं।  दशकों पहले फल पट्टी क्षेत्र का दर्जा पा चुके मलिहाबाद में आज तक एक भी  खाद्य प्रसंस्करण इकाई नही लगी है। हर साल सीजन में यहां पैदा होने वाले  दशहरी आम का लगभग आधा या तो सड़ जाता है या खराब होने की आशंका में औने  पौने दाम पर बिकता है।&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश नर्सरी संघ के अध्यक्ष शिवसरन सिंह का कहना है कि विदेशों में  भी अपनी खुशबू और मिठास के चलते पहचान बनाने वाले दशहरी आम के लिए  मलिहाबाद में आज तक किसी ने प्रसंस्करण इकाई नही लगाई है। न ही दशहरी के  भंडारण या बाहर भेजने के लिए कोल्ड चेन का कोई इंतजाम किया गया है। सिंह  बताते हैं कि आम उत्पादकों को सीजन के समय सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध  कराने का वादा जरूर किया जाता है, पर तैयार फसल का भंडारण कैसे हो इस बारे  में कोई माकूल इंतजाम नहीं किए जाते हैं। पिछले साल की कमजोर फसल के बाद इस  साल मलिहाबाद के बागवानों के चहरे बंपर फसल की उम्मीद से खिले हुए हैं। आम  उत्पादकों को आशा है कि इस साल दशहरी का बंपर उत्पादन होगा। पांच दशक से  ज्यादा से आम की खेती में जुटे पदमश्री कलीमुल्लाह बताते हैं - 'बौर ने  भरोसा दिलाया है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल उत्पादन कम से 70 से 80  फीसदी ज्यादा होगी। जनवरी के पहले सप्ताह में हुई बारिश के चलते आम के  पेड़ों से कीट, जाला जैसे हानिकारक कीड़े खत्म हो गए हैं। इस बार बौर छोटी  है, जो इस बात का संकेत है कि फसल बेहतर होगी।'&lt;br /&gt;दशहरी के जानकार माल इलाके के अखिलेश सिंह बताते हैं - आम निर्यात के मामले  में मलिहाबाद की हालात बहुत अच्छी नहीं है। अभी तक मुंबई के कारोबारियों  के भरोसे ही आम का निर्यात होता है, जो पिछले सीजन में 1000 टन से ज्यादा  नहीं रहा था।&lt;br /&gt;शिवसरन सिंह के मुताबिक बरसों पहले यहां स्थानीय आम उत्पादक राजा भूंपेंद्र  सिंह ने एक प्रसंस्करण इकाई लगाई थी, पर पिछले 20 साल से यह इकाई बंद पड़ी  है। हाल ही में लखनऊ की निजी कंपनी ऑर्गेनिक इंडिया ने जरूर इस इलाके में  एक मैंगो फ्लेक बनाने की इकाई लगाने का वादा किया है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-7943143654663938572?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/7943143654663938572/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=7943143654663938572' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7943143654663938572'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7943143654663938572'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_1516.html' title='इस साल दशहरी की भारी पैदावार की उम्मीद'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6506033115239183765</id><published>2012-01-31T02:42:00.001-08:00</published><updated>2012-01-31T02:42:25.800-08:00</updated><title type='text'>सेबी की तरह 65 साल में हो एफएमसी के चेयरमैन की सेवानिवृत्ति</title><content type='html'>वायदा बाजार आयोग ने उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर  बनी स्थायी समिति की उस सिफारिश का विरोध किया है जिसमें समिति ने नियामक  के चेयरमैन व सदस्यों के अवकाश प्राप्त करने की उम्र 60 साल रखने को कहा  है। समिति ने हाल में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट रेग्युलेशन अधिनियम (एफसीआरए)  में संशोधन के लिए सिफारिशें सौंपी है।&lt;br /&gt;समिति ने कहा है कि दूसरे सरकारी विभाग के अधिकारियों की तरह एफएमसी  चेयरमैन की अवकाश प्राप्त करने की उम्र 60 साल होनी चाहिए। सेबी के सदस्य  और चेयरमैन की अवकाश प्राप्त करने की उम्र हालांकि 65 साल है। एफएमसी चाहता  है कि सेबी की तरह ही एफएमसी के चेयरमैन व सदस्यों की अवकाश प्राप्त करने  की उम्र 65 हो।&lt;br /&gt;शुक्रवार को उपभोक्ता मामलों के विभाग को भेजे आधिकारिक नोट में वायदा  बाजार आयोग ने कहा है कि इस संस्था को सेबी समेत अन्य नियामक निकाय से अलग  रखा जा रहा है। बैंकिंग नियामक आरबीआई के गवर्नर के लिए सरकार ने अवकाश  प्राप्त करने की कोई उम्र तय नहीं की है, जबकि डिप्टी गवर्नर 62 साल तक पद  पर बने रहते हैं। एफएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एफएमसी का गठन  फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट (रेग्युलेशन) अधिनियम के तहत हुआ है। ऐसे में इसके साथ  दूसरे नियामक की तरह ही व्यवहार होना चाहिए और अवकाश की उम्र 65 साल की  जानी चाहिए।&lt;br /&gt;नागपुर के कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार की अगुआई वाली स्थायी समिति ने  हाल में अपनी सिफारिशें सौंपी हैं। मुत्तेमवार ने कहा, एफएमसी चेयरमैन और  सदस्यों की अवकाश प्राप्त करने की उम्र 60 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।  मोटे तौर पर एफएमसी ने अन्य सिफारिशों पर सहमति जताई है। इन सिफारिशों में  विदेशी प्रतिभागियों को जिंस वायदा प्लैटफॉर्म पर कारोबार की अनुमति नहीं  देना शामिल है। समिति को डर है कि विदेशी कारोबारियों के मोटे निवेश से  किसी एक जिंस की कीमतें उनके मनमुताबिक बढ़ सकती हैं। समिति ने हाजिर और  वायदा कारोबार एफएमसी के दायरे मेंं लाने की भी सिफारिश की है।&lt;br /&gt;जिंस वायदा बाजार में और मजबूती लाने की दरकार पर बल देते हुए एफएमसी ने  कहा है कि बीमा कंपनियों, म्युचुअल फंडों और बैंकों समेत संस्थागत निवेशकों  को वायदा प्लैटफॉर्म पर कारोबार की फौरन अनुमति दी जानी चाहिए। समिति की  एक अन्य सिफारिश में कहा गया है कि एफएमसी के पास अलग जांच एजेंसी होनी  चाहिए&lt;br /&gt;ताकि वह एक्सचेंज के प्लैटफॉर्म पर हुई अनियमितता की जांच कर सके। समिति ने यहां भी ऑप्शन ट्रेडिंग की अनुमति देने की सिफारिश की है।&lt;br /&gt;अधिकारियों ने कहा कि एफसीआरए संशोधन विधेयक से एफएमसी और मजबूत बनेगा और  यह दूसरे नियामक के समान आ जाएगा। यह विधेयक बजट सत्र में पेश किया जा सकता  है। उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय एफएमसी की सिफारिशों को ध्यान में रखते  हुए अंतिम निर्णय करने के लिए इन्हें सदस्यों के पास भेजेगा। मामला कानून  मंत्रालय के पास भी विचार के लिए जाएगा। कानून मंत्रालय प्रस्तावित विधेयक  में सिफारिशों को शामिल करने की बाबत अपनी राय देगा। अंत में मामला कैबिनेट  कमेटी के सामने पहुंचेगा।&lt;br /&gt;इन प्रक्रियाओं में कम से कम दो महीने का वक्त लगेगा। अधिकारी ने कहा कि इस  विधेयक को बजट सत्र के दौरान संसद में पेश किया जा सकता है। (BS  Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6506033115239183765?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6506033115239183765/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6506033115239183765' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6506033115239183765'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6506033115239183765'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/65.html' title='सेबी की तरह 65 साल में हो एफएमसी के चेयरमैन की सेवानिवृत्ति'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6806032756395748132</id><published>2012-01-31T02:40:00.000-08:00</published><updated>2012-01-31T02:41:45.897-08:00</updated><title type='text'>मसाला निर्यात में 5 फीसदी की गिरावट</title><content type='html'>मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान मात्रा के लिहाज से मसालों और  इसके उत्पादों के निर्यात में 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान  3,51,900 टन मसाले का निर्यात हुआ जबकि पिछले साल की समान अवधि में  3,72,010 टन मसाले का निर्यात हुआ था। हालांकि रुपये में कीमत के लिहाज से  इसमें 43 फीसदी जबकि डॉलर के लिहाज से 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस  दौरान भारत ने 6209.08 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की जबकि पिछले  साल की समान अवधि में 4336 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा कमाई थी।&lt;br /&gt;अप्रैल-नवंबर 2011 के दौरान काली मिर्च, छोटी इलायची, बड़ी इलाइची, अदरक,  हल्दी, जीरा, जायफल और जावित्री समेत दूसरे मसालों के निर्यात में मात्रा व  कीमत दोनों लिहाज से बढ़ोतरी दर्ज की गई। मिर्च, मसालों के तेल आदि के  मामले में सिर्फ कीमत के लिहाज से बढ़ोतरी हुई। धनिया, लहसुन समेत दूसरे  मसालों के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले मात्रा व कीमत  दोनों लिहाज से गिरावट दर्ज की गई।&lt;br /&gt;सबसे अच्छा प्रदर्शन छोटी इलायची का रहा, जिसमें मात्रा के लिहाज से 444  फीसदी की और कीमत के लिहाज से 290 फीसदी की उछाल आई। इस अवधि में 3100 टन  इलायची का निर्यात हुआ और इससे 253.74 करोड़ रुपये हासिल हुए जबकि पिछले  साल की समान अवधि में 570 टन इलायची का निर्यात हुआ था और इससे 65.12 करोड़  रुपये मिले थे। देश में इलायची के सालाना उत्पादन का करीब 30 फीसदी हिस्सा  पहले ही निर्यात किया जा चुका है। निर्यात मुख्य रूप से पश्चिम एशिया,  अमेरिका और यूरोप को हुआ। जायफल व जावित्री के मामले में मात्रा व कीमत  दोनों लिहाज से भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष में  अप्रैल-नवंबर की अवधि के 1295 टन और 55 करोड़ रुपये की रकम के मुकाबले इस  वित्त वर्ष की समान अवधि में 2250 टन का निर्यात हुआ और इससे 157.81 करोड़  रुपये हासिल हुए।&lt;br /&gt;इस अवधि में 17,000 टन काली मिर्च का निर्यात हुआ और इससे 518.80 करोड़  रुपये हासिल हुए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले मात्रा के लिहाज से  43 फीसदी जबकि कीमत के लिहाज से 139 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान 475 टन  बड़ी इलायची का निर्यात हुआ और इससे 37.02 करोड़ रुपये हासिल हुए, जो पिछले  साल की समान अवधि के मुकाबले मात्रा के लिहाज से 25 फीसदी व कीमत के लिहाज  से 100 फीसदी ज्यादा हैं। इस अवधि में मिर्च का निर्यात मात्रा के लिहाज  से 24 फीसदी घटा जबकि धनिये का निर्यात 41 फीसदी। अदरक के निर्यात में  मात्रा के लिहाज से 94 फीसदी की गिरावट आई।&lt;br /&gt;अप्रैल-नवंबर के दौरान 26,500 टन जीरे का निर्यात हुआ और इससे 379.24 करोड़  रुपये प्राप्त हुए जबकि पिछले साल की समान अवधि में 20,750 टन जीरे का  निर्यात हुआ था और इससे 248.79 करोड़ रुपये हासिल हुए थे। इस अवधि में कुल  11,500 टन करी पाउडर व पेस्ट का निर्यात हुआ और इससे 164.53 करोड़ रुपये  प्राप्त हुए। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6806032756395748132?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6806032756395748132/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6806032756395748132' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6806032756395748132'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6806032756395748132'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/5.html' title='मसाला निर्यात में 5 फीसदी की गिरावट'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6807195660226445061</id><published>2012-01-31T02:39:00.001-08:00</published><updated>2012-01-31T02:39:50.888-08:00</updated><title type='text'>मोन्सेंटो ने ब्रीडिंग स्टेशन खोला</title><content type='html'>&lt;p&gt;मोन्सेंटो इंडिया ने संकर मक्का और सब्जियों के बीजों की नई किस्मों के  विकास और परीक्षण के लिए कर्नाटक में ब्रीडिंग स्टेशन स्थापित किया है।  कंपनी ने एक बयान में कहा है कि यह ब्रीडिंग स्टेशन मुख्य रूप से दक्षिणी  भारत में पैदा होने वाली फसलों जैसे मक्के, टमाटर, बंदगोभी, फूलगोभी, खीरे  और तरबूज के उच्च उपज वाले संकर बीज विकसित करने पर केंद्रित होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसमें कहा गया है कि प्रयोगशालाओं से खेतों तक एकीकरण करने वाली यह  सुविधा संकर बीजों में अनुसंधान का उत्कृष्ट केंद्र होगा और इसका मॉडल,  चेस्टफील्ड विलेज, सेंट लुईस, अमेरिका में स्थित मोन्सेंटो की मुख्य  अनुसंधान इकाई पर आधारित है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह ब्रीडिंग स्टेशन, भारत में मोन्सेंटो का ऐसा दूसरा केंद्र है,  जिसमें एक ही जगह पर अनुसंधान विकास के सभी आयाम, प्रयोगशालाएं, परीक्षणों  के लिए खेत, ग्रीनहाउस इत्यादि हैं। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6807195660226445061?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6807195660226445061/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6807195660226445061' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6807195660226445061'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6807195660226445061'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_31.html' title='मोन्सेंटो ने ब्रीडिंग स्टेशन खोला'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4781742045900631502</id><published>2012-01-31T02:35:00.000-08:00</published><updated>2012-01-31T02:37:18.754-08:00</updated><title type='text'>ICAR probing govt scientists’ claims on Bt cotton version</title><content type='html'>Apart from ethical questions on scientific propriety, the investigation  raises questions as to whether government agriculture scientists are  capable of developing original GM seeds and if due processes are being  followed in the way seed development is undertaken&lt;br /&gt;&lt;p&gt;New Delhi: The Indian Council of Agricultural Research (ICAR) is  investigating allegations that government scientists from several  institutions falsely claimed to have developed an indigenous variety of  Bt cotton called Bikaneri Narma (BN-Bt).&lt;/p&gt;&lt;p&gt;This cotton seed,  allegations go, is an unoriginal version of Bt cotton developed by  Monsanto Co. in the early 1990s and the genetic backbone of several  types of cotton seeds being used by Indian farmers. In 2010, ICAR  stopped the commercial sale of BN-Bt. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;“BN-Bt seed samples were  reported to contain Monsanto’s gene/event (MON 531). Consequently, ICAR  had seed multiplication and commercialization suspended,” according to  an ICAR note that describes the investigative committee’s plan of  action. An “event” is, in this case, biotechspeak for genetically  modified (GM) plants that are insect-resistant.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;While Indian law recognizes patents on events, MON531 isn’t patented in India, according to a Monsanto spokesperson. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;The  main agenda of the investigative committee that will be led by S.K.  Sopory, vice-chancellor of Jawaharlal Nehru University, is to ascertain  in three months whether scientists from the University of Agricultural  Sciences (UAS), Dharwad, National Research Centre on Plant Biotechnology  (NRCPB), and the Central Institute for Cotton Research (CICR), Nagpur,  did indeed develop an indigenous Bt variety or whether BN-Bt got mixed,  or “contaminated”, with seeds that contained MON 531. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;If it was  the latter, the committee will also investigate how these seeds escaped  expert scrutiny and made it to the farmers’ fields.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Apart from ethical questions on scientific propriety, the investigation  raises questions as to whether government agriculture scientists are  capable of developing original GM seeds and if due processes are being  followed in the way seed development is undertaken in India’s  agricultural research institutes.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Bt cotton—predominantly based on MON  531—occupies over 90% of India’s arable cotton area and is credited  with transforming India from an importer to a net exporter of cotton.  The environment ministry subsequently stymied attempts to introduce Bt  into food crops, notably brinjal.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Jairam Ramesh, the then  environment minister, argued that before these were introduced, there  needed to be a consensus within states on the safety of GM food crops,  more scientific study of the possible fallout, and strong public  sector-backed production of GM seeds.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;If the investigating  committee finds that Indian scientists hadn’t developed these seeds, or  if it turns out that the government machinery couldn’t ensure the purity  of the seeds that it distributes to farmers, it will further undermine  the case for the country’s billion-dollar agribiotech industry.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;In 2007, I.S. Katageri, H.M. Vamadeviah, S.S. Udikeri, B.M. Khadi and P.  Ananda Kumar reported a new event, BNLA106, in the journal &lt;i&gt;Current Science&lt;/i&gt;.  This was three years after NRCPB, led by Ananda Kumar, constructed the  genetic package, and Katageri and Khadi at UAS used that to produce  BN-Bt, the GM version of a popular Indian cotton variety that was  fortified against insects.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;They did this as part of a 2001 government  initiative to introduce Bt into cotton varieties as an alternative to  the more expensive, commercial hybrids marketed by seed companies.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;NRCPB,  which comes under the purview of ICAR, was tasked with creating an  event that could be incorporated into Indian cotton varieties by UAS and  then marketed by CICR.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Such cotton varieties are much cheaper and  produce reusable, fertile seeds, but they don’t yield as much cotton as  hybrids. In contrast, hybrids (the Bt cotton seeds currently sold by  Monsanto’s partners in India) are high-yielding and expensive. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;Companies  make money because farmers must buy fresh seed from them every sowing  season to maintain their yield and it is this aspect of seed procurement  that has seen contentious litigation in several states such as Andhra  Pradesh and Maharashtra, where governments have moved to cap the prices  at which companies can sell such seeds.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Creating an event typically involves using genes derived from a soil bacterium called &lt;i&gt;Bacillus thuringiensis&lt;/i&gt; (Bt) that are then integrated into the cotton seeds’ genome.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;While  scientists and seed companies may know how to get these genes into the  plant genome, they can’t predict the exact location where they will  lodge. Through trial and error, genes are gunned into several plant  saplings until the biotechnologists hit upon a suitable niche of the  genome where the bacterial genes can stimulate the plant into producing  the insecticide.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;The controversy first came to light on 29 December, when &lt;i&gt;The Indian Express&lt;/i&gt; cited data sourced from Right to Information activists to say that Monsanto’s “genes were present in BN-Bt”.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Independent  scientists say that discovering events is the primary concern for seed  developers. “There are a limited arsenal of genes available. It’s  creating viable events that is the bread and butter of seed developers,”  said K.K. Narayanan, managing director of Metahelix Life Sciences Ltd, a  private seed company that too develops events.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Swapan Kumar  Datta, deputy director general at ICAR, who stopped the  commercialization, said that “issues would be looked into very  seriously”. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;The Monsanto spokesperson said the company “would not like to comment on Bikaneri Narma as it is an internal matter of ICAR”. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;Khadi,  Ananda Kumar and CICR director K. Kranthi declined to comment saying it  would be improper to discuss the matter before the committee’s verdict.  Sopory’s office didn’t return calls from &lt;i&gt;Mint&lt;/i&gt; seeking comment.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;“We  haven’t formally met yet, as a committee. We will do so soon and then  decide how to proceed on this,” said R.V. Sonti, deputy director at  Centre for Cellular and Molecular Biology, Hyderabad, one of the  investigation committee members. (Live Mint)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4781742045900631502?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4781742045900631502/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4781742045900631502' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4781742045900631502'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4781742045900631502'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/icar-probing-govt-scientists-claims-on.html' title='ICAR probing govt scientists’ claims on Bt cotton version'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-5426378498456270222</id><published>2012-01-30T06:20:00.001-08:00</published><updated>2012-01-30T06:20:56.043-08:00</updated><title type='text'>कृषि क्षेत्र पर खर्च बढ़ाए बिना खाद्य सुरक्षा मुश्किल</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;कृषि &lt;/b&gt;मंत्री  शरद पवार ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने के लिए कृषि  क्षेत्र का उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र  को पर्याप्त धन मुहैया कराए बगैर खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करना मुश्किल  है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए कम बजट आवंटन पर चिंता जताई है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पवार ने एक इंटरव्यू में कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए बजट में सिर्फ  20,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जबकि सब्सिडी के लिए 65,000 करोड़  रुपये दिए गए। इस साल सब्सिडी का खर्च बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच  सकता है। जब तक हम कृषि क्षेत्र पर खर्च नहीं बढ़ाएंगे, तब तक हम खाद्य  सुरक्षा कानून लागू नहीं कर पाएंगे। खाद्य सुरक्षा विधेयक में देश की 63.5'  आबादी को सस्ता अनाज देने का प्रावधान किया गया है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दूसरी ओर खाद्य मंत्री के. वी. थॉमस ने कहा है कि राष्ट्रीय खाद्य  सुरक्षा विधेयक के प्रस्तावों को लागू करने के लिए ग्रामीण और शहरी गरीबी  उन्मूलन मंत्रालयों को सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना का काम जल्द-से-जल्द  पूरा किया जाए। थॉमस ने कहा है कि इस सर्वेक्षण का उपयोग बहुत सारे योजनाओं  के तहत मिलने वाले लाभ के लाभार्थियों की पहचान में किया जाएगा।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उन्होंने खाद्य मामलों पर बनी संसद स्थायी समिति का संदर्भ देते हुए कहा  कि खाद्य सुरक्षा विधेयक के तहत देश की 63.5 फीसदी आबादी को सस्ता अनाज  मुहैया कराना है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रियों को  अलग-अलग पत्र में लिखा है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने  में परिवारों की पहचान करना एक जटिल कड़ी है। स्थायी समिति के सामने यह  मसला कभी भी आ सकता है। यही वजह है कि मैं यह सुनिश्चित करने का निवेदन  करता हूं कि जनगणना का काम जल्दी-से-जल्दी निबटाया जाए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;खाद्य मंत्री ने सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना 2011 की ताजी स्थिति  से अवगत कराने को कहा है।उन्होंने मंत्रालयों को सर्वेक्षण का काम जल्दी  से पूरा कराने के बारे सुनिश्चित कराने को कहा ताकि प्रस्तावित कानू को  लागू करने में सहूलियत हों।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;इस बीच ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण इलाकों में परिवारों की पहचान  के लिए सर्वेक्षण के बारे में तालमेल बिठाना शुरू कर दिया। शहरी गरीबी  उन्मूलन मंत्रालय ने भी शहरी इलाकों में परिवारों की पहचान के काम में तेजी  लाने का मन बना लिया है। संसद की शीतकालीन सत्र के दौरान योजना राज्य  मंत्री अश्विनी कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि उम्मीद है कि  एसईसीसी का काम जनवरी 2012 तक पूरा कर लिया जाएगा।&lt;br /&gt;एसईसीसी का काम बीते साल के जून में शुरू कर दिया गया था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;हालांकि बहुत सारे राज्यों में इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हो  सकी है। कुछ राज्यों में एसईसीसी का काम अभी तक शुरू भी नहीं किया जा सका  है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस काम के जून तक पूरा हो जाने की उम्मीद  जताई है। (Business Bhaskar)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-5426378498456270222?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/5426378498456270222/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=5426378498456270222' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5426378498456270222'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5426378498456270222'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_2535.html' title='कृषि क्षेत्र पर खर्च बढ़ाए बिना खाद्य सुरक्षा मुश्किल'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-5245774845419643992</id><published>2012-01-30T06:19:00.001-08:00</published><updated>2012-01-30T06:19:30.077-08:00</updated><title type='text'>कपास के वायदा सौदों पर 10% अतिरिक्त मार्जिन</title><content type='html'>&lt;span style="text-align: justify;" class="introTxt"&gt;&lt;b&gt;कपास &lt;/b&gt;की  कीमतें चालू महीने में उत्पादक मंडियों में भले ही बढ़ी हों, लेकिन इस  दौरान कमोडिटी एक्सचेंजों में इसके दाम लगातार घटे हैं। ऐसे में  स्टॉकिस्टों की सक्रियता कम करने के लिए वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने कपास  के सभी वायदा अनुबंधों की खरीद और बिक्री पर&lt;br /&gt;10 फीसदी का अतिरिक्त  मार्जिन लगा दिया है। एफएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनसीडीईएक्स  के साथ ही एमसीएक्स पर कपास के चल रहे सभी महीनों के वायदा अनुबंधों पर 10  फीसदी का अतिरिक्त मार्जिन लगाया है। यह मार्जिन खरीद और बिक्री करने वाले  दोनों तरह के निवेशकों पर लागू होगा तथा 27 जनवरी से ही यह प्रभावी हो गया  है। उन्होंने बताया कि वायदा बाजार में कपास की कीमतों में भारी  उतार-चढ़ाव नहीं हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है। मार्जिन में बढ़ोतरी  करने से वायदा एक्सचेंजों पर कपास की कीमतें सीमित दायरे में रहने की  संभावना है जिससे निवेशकों को सौदे करने में आसानी होगी। ब्रोकिंग फर्म  ऐंजल कमोडिटीज के एग्री विश्लेेषक बदरुद्दीन ने बताया कि महीनेभर में हाजिर  बाजार में कपास की कीमतों में तेजी आई है लेकिन वायदा बाजार में पिछले दस  दिनों में इसके दाम घटे हैं। अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कपास का भाव 31  दिसंबर को 35,100 से 37,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) था जबकि  शनिवार को इसका भाव बढ़कर 37,200 से 37,500 रुपये प्रति कैंडी हो गया।  इसके उलट एनसीडीईएक्स पर अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध में पिछले दस दिनों  में 12.1 फीसदी की गिरावट आई है। 19 जनवरी को अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध  में कपास का भाव 995 रुपये प्रति 20 किलो था जबकि शनिवार को भाव घटकर 874  रुपये प्रति 20 किलो रह गया। उन्होंने बताया कि कपास के वायदा कारोबार में  सट्टेबाजी नहीं हो पाए, इसलिए एफएमसी ने अतिरिक्त मार्जिन लगाया है।&lt;br /&gt;मालूम  हो कि ग्वार और ग्वार गम की कीमतों में आई भारी तेजी को रोकने के लिए  एफएमसी ने ग्वार और ग्वार गम के वायदा अनुबंधों पर अतिरिक्त मार्जिन लगाया  था। लेकिन ग्वार गम में निर्यातकों की भारी मांग बनी हुई है। ऐसे में  अतिरिक्त मार्जिन लगाने के बावजूद भी कीमतों में तेजी का ही रुख बना हुआ  है। (Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-5245774845419643992?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/5245774845419643992/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=5245774845419643992' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5245774845419643992'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5245774845419643992'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/10_30.html' title='कपास के वायदा सौदों पर 10% अतिरिक्त मार्जिन'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-7499077635382874687</id><published>2012-01-30T06:11:00.002-08:00</published><updated>2012-01-30T06:18:05.096-08:00</updated><title type='text'>मांग के मुकाबले दूध उत्पादन में बढ़त धीमी : उद्योग</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली&lt;/b&gt;  दुग्ध उत्पादों के मामले में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दूध का घरेलू  उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) के अनुसार अगले  दस साल में दूध की घरेलू मांग बढ़कर 20 से 21 करोड़ टन हो जाएगी। जबकि चालू  साल में दूध का घरेलू उत्पादन 11.50 करोड़ टन होने का अनुमान है।&lt;/p&gt;&lt;span&gt;आईडीए&lt;/span&gt; (उत्तर भारत) दिल्ली में दो से पांच फरवरी के दौरान डेयरी  इंडस्ट्री कांफ्रेंस का आयोजन कर रहा है। आईडीए के अध्यक्ष डॉ. एन. आर.  भसीन ने बताया कि कांफ्रेंस में देशभर से करीब 1,800 प्रतिनिधि भाग लेंगे,  जिसमें करीब 100 प्रतिनिधि विदेश से होंगे। डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के  लिए कोल्ड चेन को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।&lt;span&gt;इसके&lt;/span&gt; अलावा सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क में कमी किए जाने की आवश्यकता  है। उन्होंने बताया कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दूध के घरेलू  उत्पादन में बढ़ोतरी जरूरी है। मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण  वर्ष 2011 में 30 हजार टन एसएमपी और 15 हजार टन बटर ऑयल का आयात किया गया  था।&lt;span&gt;दूध&lt;/span&gt; उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए सरकार को उद्योग को प्रोत्साहन देना  होगा। घरेलू बाजार में दूध के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली में फूल  क्रीम दूध के दाम बढ़कर 37 से 38 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। (Business  Bhaskar....R S Rana)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-7499077635382874687?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/7499077635382874687/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=7499077635382874687' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7499077635382874687'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7499077635382874687'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_1805.html' title='मांग के मुकाबले दूध उत्पादन में बढ़त धीमी : उद्योग'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-3818965540217762736</id><published>2012-01-30T06:11:00.001-08:00</published><updated>2012-01-30T06:11:30.168-08:00</updated><title type='text'>खाद्य विधेयक पर वित्त मंत्रालय चिंतित</title><content type='html'>भारत के आम नागरिकों को खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने वाली संयुक्त प्रगतिशील  गठबंधन प्रमुख सोनिया गांधी की महत्त्वाकांक्षी योजना ने सरकार के लिए  मुश्किलें खड़ी कर दी है। राज्यों और कुछ केंद्रीय मंत्रियों द्वारा चिंता  व्यक्त किए जाने के बाद अब वित्त मंत्रालय भी खाद्य सुरक्षा विधेयक को लेकर  आशंकित है।&lt;br /&gt;संसद की स्थायी समिति विधेयक की जांच कर रही है, लेकिन इस विधेयक से वित्त  मंत्रालय के कई अधिकारियों की भृकुटि तन गई है। उन्हें लगता है कि इस योजना  के संचालन से न सिर्फ सरकार पर सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा बल्कि  राज्य की एजेसियों को ज्यादा अनाज की खरीद भी करनी पड़ेगी। लिहाजा, बाजार  में काफी कम अनाज बच पाएगा। अधिकारियों ने कहा, सबसे बड़ी चिंता मौजूदा  स्तर से अनाज की खरीद बढ़ाने की है, जिससे महंगाई का दबाव और खुदरा कीमतें  बढ़ सकती हैं।&lt;br /&gt;यह भी देखना होगा कि इसकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कैसे हो। इस योजना  के लिए रकम की उपलब्धता से ज्यादा चिंता अनाज की खरीद को लेकर है। वित्त  मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, खुले बाजार में अनाज की घटती आपूर्ति से  कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा अगर किसी साल फसल खराब होती है तो भारत  को ऊंची कीमतों पर वैश्विक बाजार से अनाज खरीदना होगा।&lt;br /&gt;खाद्य सब्सिडी बिल के जरिए सरकार पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये सालाना का भार  पडऩे का अनुमान है और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के चलते हर साल  इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। यह रकम मौजूदा वर्ष में अनुमानित कुल कर संग्रह  का 10 फीसदी और भारत के जीडीपी का करीब 1 फीसदी है।&lt;br /&gt;इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा नियुक्त आर्थिक सलाहकार परिषद  के अध्यक्ष सी रंगराजन की अगुआई वाली विशेषज्ञ समिति ने अनाज की खरीद पर  चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि विधेयक में देश की बड़ी आबादी को शामिल  करने पर सवाल उठाया था।&lt;br /&gt;खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद देश में सालाना अनाज की खरीद बढ़कर 6  से 6.5 करोड़ टन हो जाएगी, जो मौजूदा खरीद स्तर के मुकाबले करीब 1 करोड़  टन से ज्यादा है। योजना की अनुमानित लागत 3.5 लाख करोड़ रु. हो सकती है।  हालांकि खाद्य मंत्रालय को लगता है कि सब्सिडी के बोझ में महज 28,000 करोड़  रुपये का इजाफा होगा और उत्पादन के प्रतिशत के लिहाज से अनाज की खरीद करीब  30 फीसदी रहेगी।&lt;br /&gt;खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, साल 2007-08 से सरकार की तरफ  से सालाना अनाज खरीद कुल उत्पादन का औसतन 30 फीसदी रही है। उत्पादन में  सामान्य बढ़त की संभावना के बाद भी कुल उत्पादन का 30 फीसदी अनाज खरीदने  में परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इससे निजी कारोबार पर असर नहीं  पड़ेगा।&lt;br /&gt;पहले भी इस विधेयक पर कृषि मंत्रालय के मतभेद रहे हैं। कृषि मंत्री शरद  पवार ने योजना पर प्रस्तावित भारी सब्सिडी का विरोध किया था। बिहार,  तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कई और राज्यों ने भी  प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किए जाने की दशा में वित्तीय भार  साझा करने पर अपनी राय साफ कर दी है। कुछ राज्यों ने जोर देते हुए कहा है  कि यह विधेयक लागू करने के लिए केंद्र सरकार को बजट में पर्याप्त प्रावधान  करना चाहिए।&lt;br /&gt;विधेयक का लक्ष्य देश के नागरिकों को उचित कीमत पर पोषक तत्व उपलब्ध कराना  है और इसे पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था। यह देश की  63.5 फीसदी आबादी को सस्ती दरों खाद्यान्न पाने का कानूनी अधिकार देता है।  इसके दायरे में गांवों के 75 फीसदी लोग और शहरों के 50 फीसदी लोग शामिल  होंगे और इनमें कम से कम 28 फीसदी को तरजीह दी जानी है।&lt;br /&gt;प्राथमिक श्रेणी के लोग हर महीने 7 किलोग्राम अनाज (चावल, गेहूं और मोटे  अनाज समेत) पाने के हकदार होंगे। इन्हें 3 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से  चावल, 2 रुपये प्रति किलोग्राम पर गेहूं और 1 रुपये प्रति किलोग्राम की दर  से मोटे अनाज उपलब्ध कराए जाएंगे। सामान्य श्रेणी के लोगों को कम से कम 3  किलो अनाज उस दर पर मिलेगा जो एमएसपी से 50 फीसदी से ज्यादा न हो। मौजूदा  समय में लक्षित जन वितरण प्रणाली के तहत सरकार गरीबी रेखा के नीचे रहने  वाले 6.52 करोड़ लोगों को हर महीने 35 किलोग्राम चावल व गेहूं क्रमश: 4.15 व  5.65 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दरों पर देती है। गरीबी रेखा  से ऊपर रहने वाले 11.5 करोड़ लोगों को चावल और गेहूं 6.10 व 8.30 रुपये  प्रति किलोग्राम पर मुहैया कराया जाता है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-3818965540217762736?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/3818965540217762736/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=3818965540217762736' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3818965540217762736'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3818965540217762736'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_1569.html' title='खाद्य विधेयक पर वित्त मंत्रालय चिंतित'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1278537455488113196</id><published>2012-01-30T06:10:00.003-08:00</published><updated>2012-01-30T06:10:57.899-08:00</updated><title type='text'>सटोरियों को बाजार से दूर रखेगा एफएमसी</title><content type='html'>वायदा बाजार आयोग ने जिंस बाजार के सटोरिया सौदों पर नियंत्रण के लिए अपने  नियामक प्रावधानों की समीक्षा शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि जल्द  ही जिंसों पर मार्जिन में इजाफा किया जा सकता है।&lt;br /&gt;सूत्रों ने बताया, 'अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले घरेलू ग्राहकों को काफी  कम मार्जिन देना पड़ता है। आम तौर पर कारोबार के दौरान यह 6 से 10 फीसदी के  बीच रहता है और कुछ मामलों में 5 फीसदी की विशेष मार्जिन की व्यवस्था होती  है। सिर्फ अस्थिरता के दौर में मार्जिन बढ़कर 20 से 40 फीसदी और कभी-कभी  तो नकदी मार्जिन 60 फीसदी तक हो जाती है। सामान्य तौर पर यह 10 फीसदी से कम  नहीं हो सकता है और अस्थिरता के दौर में ही बढ़ाया जा सकता है। इसलिए  मार्जिन  बढ़ाकर इसे स्तर में लाना जरूरी है।'&lt;br /&gt;आयोग किसी एक पक्ष पर मार्जिन थोपने के बजाय दोनों पक्षों पर लगाने के बारे  में भी विचार कर रहा है। फिलहाल कीमतों पर आधारित मार्जिन कीमतें बढऩे&lt;br /&gt;की दशा में खरीदने वाले और कीमतें कम होने पर बेचने वाले पर लगाया जाता है।&lt;br /&gt;दरअसल, ग्वार गम में पहली बार बेचने वाले पर 10 फीसदी के मार्जिन के  साथ-साथ लॉन्ग पोजीशन वाले पर भी 60 फीसदी का विशेष मार्जिन भी लगाया गया।  इसी तरह आयोग आगे जिंसों के लिए ओपन पोजीशन लिमिट बढ़ा सकता है। क्योंकि  पिछले साल सीमा बढ़ाकर 10 से 15 फीसदी के बीच किये जाने के बावजूद यह काफी  कम है। सूत्रों का कहना है कि आयोग कारोबार की ओपन पोजीशन पर नजर रखे हुए  है। बाजार में उचित कारोबार के लिए ज्यादा व्यापक ओपन पोजीशन लिमिट होना  जरूरी है।&lt;br /&gt;फिलहाल एक सदस्य के लिए ओपन इंटरेस्ट लिमिट का स्तर आयोग द्वारा तय की गई  संख्या या बाजार का कुल ओपन पोजीशन का 15 फीसदी होता है। इन दोनों में से  जो भी अधिक हो, उसे ही एक सदस्य के लिए ओपन इंटरेस्ट लिमिट तय किया जाता  है। मार्जिन वह धन है जिसका भुगतान ग्राहक एक्सचेंज में निर्धारित ओपन  पोजीशन के एक निश्चित फीसदी हिस्से के रूप में करता है। यह प्रतिभूति, नकदी  या अन्य किसी भी रूप में हो सकता है। इसका मकसद कारोबारी की गंभीरता के  अलावा समय सीमा खत्म होने के बाद भुगतान की क्षमता की जांच करना होता है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1278537455488113196?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1278537455488113196/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1278537455488113196' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1278537455488113196'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1278537455488113196'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_727.html' title='सटोरियों को बाजार से दूर रखेगा एफएमसी'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1783627428950517044</id><published>2012-01-30T06:10:00.001-08:00</published><updated>2012-01-30T06:10:28.221-08:00</updated><title type='text'>चीनी करेंगे खाद्य तेल इकाइयों का दौरा</title><content type='html'>रैपसीड की खली में मैलासाइट जैसे हरे दूषित तत्व मिलने के मामले में चीन की  एक टीम अगले महीने भारतीय तेल प्रसंस्करण इकाइयों का दौरा करने आ सकती है।  छह सदस्यों की यह टीम इस मामसे में भारतीय अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट  नहीं हुई है। लिहाजा, चीनी अधिकारियों की टीम गुणवत्ता की जांच के लिए भारत  आ सकती है।&lt;br /&gt;पिछले छह महीने के दौरान चीनी अधिकारियों ने खली में हरे रंग का दूषित तत्व  देखा है और भारतीय निर्यातकों से कहा है कि वे चीन के नियमों का पालन  करें। लेकिन भारत से खली की खेप में लगातार ऐसे तत्व मिले हैं।&lt;br /&gt;सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी वी  मेहता ने बताया, चीनी अधिकारियों की शिकायत के बाद हमने पाया कि जूट की  बोरियों पर निशान लगाने के लिए हरे रंग का इस्तेमाल किया गया था और शायद  इसी से खली दूषित हुई होगी। तब हमने उद्योग से जुड़े लोगों से जूट की  बोरियों का इस्तेमाल न करने और हरी स्याही वाले पार्सल स्वीकार करने से मना  किया था।&lt;br /&gt;इस साल जनवरी में चीन द्वारा रैपसीड खली और सोया खली की खेप रोक देने से  देश को करीब 600 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की क्षति हुई है। जापान,  कजाकस्तान, पाकिस्तान, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश खली के निर्यात  में भारतीय हिस्सेदारी छीनने में जुट गए हैं। चीन के अधिकारियों के दौरे का  मकसद दूषित तत्वों केस्रोत की जांच करना है। इस कृत्रिम रंग का इस्तेमाल  सिल्क, ऊन, जूट, चमड़े आदि को रंगने में होता है और सीधे उपभोग किए जाने  वाली जिंसों में इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। चीन को भारत से आयातित  खली की कई खेपों में ऐसे तत्व मिले हैं। पहले चीनी अधिकारी सिर्फ हजार्ड  एनालिसिस ऐंड कंट्रोल पाइंट्स (एचएसीसीपी) प्रमाणित इकाइयों का दौरा करते  थे, बाद में उन्होंने बड़े संयंत्रों का भी दौरा करना शुरू किया ताकि  भारतीय इकाइयों के मानकों की जांच की जा सके। एचएसीसीपी दुनिया में  प्रमाणपत्र देने वाला सबसे बड़ा संस्थान है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1783627428950517044?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1783627428950517044/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1783627428950517044' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1783627428950517044'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1783627428950517044'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_1252.html' title='चीनी करेंगे खाद्य तेल इकाइयों का दौरा'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4745353638946319243</id><published>2012-01-30T06:09:00.001-08:00</published><updated>2012-01-30T06:09:42.969-08:00</updated><title type='text'>केन्‍द्रीय उपभोक्‍ता संरक्षण परिषद द्वारा उपभोक्‍ता संरक्षण उपायों की समीक्षा</title><content type='html'>उपभोक्‍ता संरक्षण क्षेत्र की शीर्ष संस्‍था केन्‍द्रीय उपभोक्‍ता संरक्षण  परिषद (सीसीपीसी) देश में उपभोक्‍ता संरक्षण के लिए किये गये उपायों और  गतिविधियों की समीक्षा के लिए कल एक बैठक का आयोजन करेगा। इस बैठक की  अध्‍यक्षता उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण मंत्री प्रोफेसर के.वी.  थॉमस करेंगे, जिसमें उपभोक्‍ता मामलों के प्रभारी राज्‍य मंत्री (देश के  पाँच क्षेत्रों से दो-दो राज्‍य मंत्री), संसद सदस्‍य, संघ शासित प्रदेशों  के प्रशासक, केन्‍द्र सरकार के प्रतिनिधि, उपभोक्‍ता संगठन एवं उपभोक्‍ता  कार्यकर्ता भी भाग ले रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     एक दिन की इस बैठक में सीसीपीसी द्वारा निम्‍नलिखित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी - जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली वस्‍तु एवं सेवाओं के विपणन के विरूद्ध उपभोक्‍ताओं के अधिकार की रक्षा करना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गुणवत्‍ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, मानक एवं वस्‍तुओं तथा सेवाओं की  कीमतों के बारे में जानकारी का अधिकार, ताकि अवैध व्‍यापार से सम्‍बन्धित  मामलों  में उपभोक्‍ताओं को सुरक्षित रखा जा सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहां कहीं संभव हो, प्रतियोगी मूल्‍य पर विभिन्‍न वस्‍तुओं और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कराने का अधिकार। (PIB)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4745353638946319243?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4745353638946319243/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4745353638946319243' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4745353638946319243'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4745353638946319243'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_30.html' title='केन्‍द्रीय उपभोक्‍ता संरक्षण परिषद द्वारा उपभोक्‍ता संरक्षण उपायों की समीक्षा'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2194066101737658419</id><published>2012-01-30T06:07:00.000-08:00</published><updated>2012-01-30T06:09:11.480-08:00</updated><title type='text'>पूर्वी भारत में हरित क्रांति के लिए 332.87 करोड़ रूपये जारी किए गए</title><content type='html'>20 जनवरी, 2012 को चालू वित्तीय वर्ष (2011-12) में पूर्वी भारत में हरित  क्रांति को बढ़ावा देने के लिए सात राज्यों को 332.87 करोड़ रूपये की राशि  जारी की गई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  इस वर्ष के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत इस  उप-योजना के लिए 400 करोड़ रूपये निश्चित किए गए हैं। कार्यक्रम में चयनित  राज्यों में चावल पर आधारित फसल पद्धति में सुधार करने का लक्ष्य रखा गया  है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; पश्चिमोत्तर राज्यों की तुलना में पूर्वी भारत में दुगनी-तिगनी अधिक  वर्षा, दोहन न किए गए अच्छी गुणवत्ता वाले भू-जल स्रोत तथा चावल, केला एवं  गन्ने की सतत् पैदावार के लिए सामाजिक पूंजी के विपुल संसाधन इसके पक्ष में  जाते हैं। इस क्षेत्र में बेहतर उत्पादन के लिए अपेक्षित प्राकृतिक  संसाधनों की उपयुक्त उपलब्धता होते हुए भी कृषि उत्पादन तुलनात्मक रूप से  कम है। योजना में यह लक्ष्य रखा गया है कि क्षेत्र की फसल पैदावार को  बढ़ाने के लिए सिफारिश की गई कृषि प्रौद्योगिकी एवं पद्धतियों के पैकेज के  माध्यम से गहन पैदावार की जाए।(PIB)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2194066101737658419?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2194066101737658419/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2194066101737658419' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2194066101737658419'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2194066101737658419'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/33287.html' title='पूर्वी भारत में हरित क्रांति के लिए 332.87 करोड़ रूपये जारी किए गए'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4341725725736134995</id><published>2012-01-27T23:00:00.001-08:00</published><updated>2012-01-27T23:00:49.707-08:00</updated><title type='text'>चीनी के विनियंत्रण की कोशिश</title><content type='html'>चीनी उद्योग को विनियंत्रित करने से जुड़े मसलों की समीक्षा के लिए  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष  सी रंगराजन की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन किया। यह फैसला ऐसे समय  लिया गया है जब देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक और दूसरे सबसे बड़े चीनी  उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने को हैं तथा सबसे बड़े  चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय के चुनाव होने जा रहे  हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के बयान के मुताबिक, 'यह समिति चीनी  उद्योग को विनियंत्रित करने से जुड़े सभी मसलों पर विचार करेगी। समिति को  जल्द से जल्द अपना कार्य पूरा कर प्रधानमंत्री को रिपोर्ट सौपने को कहा गया  है।' हालांकि समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिए कोई समय सीमा नहीं तय की गई  है।&lt;br /&gt;इस समिति के अन्य सदस्यों में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार  कौशिक बसु, कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) के अध्यक्ष अशोक गुलाटी,  पूर्व खाद्य एवं कृषि सचिव टी नंद कुमार, केंद्रीय कृषि सचिव और केंद्रीय  खाद्य सचिव शामिल हैं। इस फैसले का स्वागत करते हुए उद्योग जगत ने कहा है  कि समिति की अनुशंसा महज कागजों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए जैसा कि पूर्व  में टुटेजा समिति और थोराट समिति के साथ हुआ। वर्ष 2010 के मध्य में पूर्व  केंद्रीय खाद्य मंत्री शरद पवार की ओर से कुछ कोशिशें की गई थीं, जब वह इस  मामले को लेकर प्रधानमंत्री से मिले थे।&lt;br /&gt;बजाज हिंदुस्तान के बाद देश के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक और 10 चीनी  मिलों के मालिक बलरामपुर चीनी के प्रबंध निदेशक विवेक सरावगी का कहना है,  'बहुत सारी समितियों और विशेषज्ञों ने पहले चीनी उद्योग के विनियंत्रण के  लिए एकमत से सुझाव दिए थे। हालांकि इन सुझावों को सामने ही नहीं आने दिया  गया। इस बार समिति की सिफारिशें तेजी से लागू की जानी चाहिए।' इंडियन शुगर  मिल एसोसिएशन के महानिदेशक अविनाश वर्मा को लगता है कि इस नई समिति में  अनुभवी लोग हैं और वे चीनी उद्योग के बारे में अच्छे से जानते हैं। वह कहते  हैं, 'हम उम्मीद करते हैं कि समिति जल्द ही अपने सकारात्मक सुझाव हमारे  सामने रखेगी जिसमें उद्योग के साथ-साथ किसानों के हित का भी ध्यान रखा  जाएगा।'&lt;br /&gt;चीनी उत्पादन में करीब 45 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली सहकारी चीनी मिलों  ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। नैशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव  शुगर फैक्टरीज के प्रबंध निदेशक विनय कुमार कहते हैं, 'फिलहाल हम जरूरत से  ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं इसलिए विनियंत्रण के लिए यह सही समय है। हम  उम्मीद करते हैं कि इस बार सुझावों को जरूर लागू किया जाएगा।' चीनी उद्योग  देश के सबसे नियंत्रित उद्योगों में से एक है। सरकार पिछले सालों के दौरान  स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों के नियंत्रण को सरल कर दिया। चीनी उद्योग पर  नियंत्रण कोटे के मासिक आवंटन और लेवी चीनी की व्यवस्था के जरिए किया जाता  है। चीनी मिलें सिर्फ कोटे की व्यवस्था के तहत ही खुले बाजार में चीनी बेच  सकती हैं। केंद्र सरकार का चीनी निदेशालय हर महीने कोटे का निर्धारण करता  है और मिलों के हिसाब से बिक्री कोटा तय करता है। एक महीने के भीतर  निर्धारित कोटा न बेच पाने पर पेनल्टी का भी प्रावधान है। लेवी चीनी के तहत  मिलों को कुल उत्पादन का 10 फीसदी बाजार से कम कीमतों पर सरकार को बेचना  होता है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4341725725736134995?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4341725725736134995/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4341725725736134995' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4341725725736134995'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4341725725736134995'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_7999.html' title='चीनी के विनियंत्रण की कोशिश'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4552501468199036424</id><published>2012-01-27T22:59:00.000-08:00</published><updated>2012-01-27T23:00:13.681-08:00</updated><title type='text'>लेनदेन के तुरंत बाद मिलेगा एसएमएस</title><content type='html'>जिंस वायदा एक्सचेंजों पर सहज, सुरक्षित और पारदर्शी कारोबार और हेजिंग  करने वालों की सीधी प्रतिभागिता की खातिर वायदा बाजार आयोग ने कई  महत्वपूर्ण कदम उठाने की योजना बनाई है। इसके लिए नियामक ने कहा है कि  सदस्य द्वारा अपने क्लाइंट के लिए किए गए हर लेन-देन की बाबत एक्सचेंज  एसएमएस और ईमेल अलर्ट भेजे। इसका मतलब यह हुआ कि एक्सचेंज के प्लैटफॉर्म पर  कारोबार संपन्न होने के साथ ही क्लाइंट को एसएमएस और ईमेल मिल जाएगा। ये  अलर्ट एक्सचेंज के सॉफ्टवेयर से स्वत: ही भेजे जाएंगे और 1 मई 2012 से यह  अनिवार्य होगा। यह काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्टॉक एक्सचेंज भी सभी  लेनदेन की बाबत ऐसे अलर्ट नहीं भेजता है।&lt;br /&gt;एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक ने कहा - हमने एक्सचेंजों से ऐसे सॉफ्टवेयर  विकसित करने को कहा है, जिनके जरिए सौदा संपन्न होते ही तत्काल और स्वत:  एसएमएस और ईमेल क्लाइंट के पास पहुंच जाएं। जिंस एक्सचेंजों ने भी इस कदम  का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जल्द ही तैयार हो जाएगी और  इसे 1 मई से लागू कर दिया जाएगा।&lt;br /&gt;मौजूदा समय में कुछ ब्रोकरों (जिंस व स्टॉक दोनों) ने ही एक्सचेंज के  प्लैटफॉर्म पर सौदा होने के बाद किसी कर्मचारी के जरिए ईमेल अलर्ट भेजने की  व्यवस्था की हुई है। लेकिन यह अलर्ट अनिवार्य नहीं है। दोनों ही अलर्ट  अपने आप में काफी कुछ बता देंगे, जिसमें सौदे से संबंधित सभी जानकारियां  होंगी, मसलन मात्रा, कीमत, कुल लागत और सौदा किए जाने की तारीख व समय आदि।  देश के कई बैंकों में इस तरह की व्यवस्था पहले से ही है, जहां लेनदेन के  तुरंत बाद ईमेल अलर्ट व एसएमएस भेजे जाते हैं। इसके अलावा नियामक  एक्सचेंजों व जिंस वायदा एक्सचेंजों से जुड़े कमीशन व ब्रोकिंग फर्म के  अंकेक्षकों के लिए आचार संहिता लागू करने की योजना बना रहा है। नई आचार  संहिता के मुताबिक अगर किसी अंकेक्षक ने एक्सचेंज या किसी सदस्य के बही  खातों की जांच कर ली है तो उसे इसकी श्रृंखला से जुड़ी अन्य इकाइयों के  खाते बही की जांच से तीन साल तक अलग रखा जाएगा। अभिषेक ने कहा कि इस आचार  संहिता का मकसद ब्रोकर व एक्सचेंज के हितों के टकराव को टालना है।&lt;br /&gt;जिंस एक्सचेंजों के विवादों को सीमित करने के लिए एफएमसी शेयर बाजार की तरह  तिमाही निपटान व्यवस्था पर काम कर रहा है। इसके तहत एक सदस्य को अपने  क्लाइंट के खाते को हर तिमाही निपटाना होगा और अगर उसकी रकम निकलती है तो  उसे भुगतान करना होगा या फिर अगर क्लाइंट देनदार है तो उससे वसूली करनी  होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि क्लाइंट को तिमाही की समाप्ति पर सभी पोजीशन  काटनी होंगी। एफएमसी के चेयरमैन ने कहा - इससे काम सहज हो जाएगा और शिकायत  का निपटान भी जल्द हो जाएगा क्योंकि ऐसी शिकायतें तीन महीने से ज्यादा  पुरानी नहीं होंगी। इसके अलावा एफएमसी बाजार के विकास के लिए एक्सचेंज के  निवेशक सुरक्षा कोष में जमा ब्याज की राशि के उपयोग की संभावना भी तलाश रहा  है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4552501468199036424?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4552501468199036424/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4552501468199036424' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4552501468199036424'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4552501468199036424'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_3099.html' title='लेनदेन के तुरंत बाद मिलेगा एसएमएस'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4470796776129172978</id><published>2012-01-27T22:58:00.000-08:00</published><updated>2012-01-27T22:59:38.471-08:00</updated><title type='text'>आकर्षक हुई सोने की तस्करी : जीजेएफ</title><content type='html'>&lt;table border="0" cellspacing="0" width="100%"&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style="font-family: Arial; font-size: 11px; font-weight: bold;"&gt;कीमती  धातुओं व रत्नों पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी से 3,25,000 करोड़ के  देसी आभूषण उद्योग को भारी झटका लगा है। ऑल इंडिया जेम्स ऐंड ज्वैलरी ट्रेड  फेडरेशन के चेयरमैन बछराज बामलवा ने दिलीप कुमार झा को दिए साक्षात्कार  में कहा कि खास तौर से शादी-विवाह के सीजन में उद्योग घटती मांग का सामना  कर रहा है, लिहाजा उद्योग पर और भार बढऩे से यह बुरी तरह चरमरा जाएगा। पेश  है बातचीत के मुख्य अंश /  January  27, 2012&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td height="4"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style="background-image: url(&amp;quot;/images/common/gn_005.gif&amp;quot;); background-repeat: repeat-x;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td height="9"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;&lt;td style="background-image: url(&amp;quot;/images/common/gn_005.gif&amp;quot;); background-repeat: repeat-x;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;आयात शुल्क में बढ़ोतरी से घरेलू सोने व हीरे के आभूषण उद्योग पर किस तरह का असर पड़ेगा?&lt;br /&gt;आयात शुल्क में बढ़ोतरी भारतीय आभूषण उद्योग को निरुत्साहित कर देगा। रुपये  में मजबूती के चलते हालांकि तत्काल इसका प्रभाव महसूस नहीं हुआ है, लेकिन  लंबी अवधि में उद्योग पर इसका प्रभाव नजर आएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कच्चे सोने व रिफाइंड सोने के आयात शुल्क में 1 फीसदी के अंतर से क्या भारत में कच्चे सोने का आयात बढ़ेगा?&lt;br /&gt;नहीं, क्योंकि सरकार ने स्वर्ण अयस्क व कच्चे सोने से तैयार किए जाने वाली  सिल्लियों पर 1.5 फीसदी का उत्पाद शुल्क लगाया है, जो कच्चे व रिफाइंड सोने  के आयात शुल्क के अंतर से मिलने वाले लाभ को समाप्त कर देता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उद्योग और कारोबार को हालांकि ऊंचे शुल्क का बोझ सहना पड़ेगा, इसके बदले सरकार से किस चीज की उम्मीद है?&lt;br /&gt;एक ओर जहां सरकार विकसित देशों की तरह जीएसटी जैसी सरलीकृत कर व्यवस्था  लागू करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह कच्चे माल पर आयात शुल्क  बढ़ा रही है।&lt;br /&gt;विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी से तस्करी को बढ़ावा मिलेगा। आपकी राय?&lt;br /&gt;आयात शुल्क में बढ़ोतरी से निश्चित तौर पर पड़ोसी देशों से तस्करी को बढ़ावा मिलेगा। (BS Hindi)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4470796776129172978?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4470796776129172978/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4470796776129172978' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4470796776129172978'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4470796776129172978'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_27.html' title='आकर्षक हुई सोने की तस्करी : जीजेएफ'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-3870305828461074294</id><published>2012-01-25T05:51:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:53:16.898-08:00</updated><title type='text'>एमआईएस के तहत आलू खरीद का मामला फाइलों में अटका</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;lt;&amp;gt; नई दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;lt;&amp;gt;मार्केट &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;इंटरवेंशन  स्कीम (एमआईएस) के तहत उत्तर प्रदेश में आलू की खरीद में विलंब हो रहा है।  पिछले महीने भर से मामले की फाइल राज्य सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्रालय  के बीच अटकी हुई है। 18 जनवरी को दिल्ली में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों  और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव की इस संबंध में बैठक हुई है जिसमें राज्य  सरकार से नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया है।&lt;br /&gt;कृषि मंत्रालय के  एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 19 दिसंबर को मंत्रालय ने आलू किसानों को  राहत देने के लिए पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार को एमआईएस के  तहत आलू खरीदने को कहा था।&lt;br /&gt;इसके तहत उत्तर प्रदेश ने एमआईएस के  तहत आलू की खरीद के लिए कृषि मंत्रालय को आवेदन भेजा था लेकिन आवेदन में  खामियां होने के कारण राज्य सरकार को नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया है।  इस संबंध में राज्य के प्रमुख सचिव के साथ 18 जनवरी को दिल्ली में बैठक  हुई है।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि जैसे ही नया आवेदन मिलेगा खरीद शुरू कर  दी जायेगी। राज्य में आलू की खरीद नेफेड और राज्य सरकार की एजेंसियां  मिलकर करेगी। आलू की बंपर पैदावार के कारण कई राज्यों में लागत भी वसूल न  होने के कारण किसान आलू को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हैं।&lt;br /&gt;इसी को  ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एमआईएस के तहत आलू खरीद करने की योजना  बनाई है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के अनुसार वर्ष 2010-11 में  देश में आलू की पैदावार बढ़कर चार करोड़ टन से ज्यादा होने का अनुमान है।  जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 3.65 करोड़ टन का हुआ था। उन्होंने बताया कि  एमआईएस के तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर उन जिंसों की खरीद करती हैं  जिनका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सरकार तय नहीं करती और बंपर पैदावार  होने के एवज में किसान अपनी उपज को लागत से भी कम मूल्य पर बेचने को मजबूर  हो जाते हैं। एमआईएस के तहत खरीदे जाने वाली जिंसों को बेचने में होने वाले  नुकसान की भरपाई केंद्र और राज्य सरकारें पचास-पचास फीसदी के आधार पर करती  हैं।&lt;br /&gt;भले ही उपभोक्ताओं को आलू का दाम आठ-दस रुपये प्रति किलो  चुकाना पड़ रहा हो लेकिन किसान 2 से 2.5 प्रति किलो की दर से आलू बेचने को  मजबूर हैं। एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में आलू के थोक दाम घटकर  200 से 300 रुपये प्रति 50 किलो रह गए हैं।(Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-3870305828461074294?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/3870305828461074294/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=3870305828461074294' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3870305828461074294'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3870305828461074294'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_8705.html' title='एमआईएस के तहत आलू खरीद का मामला फाइलों में अटका'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-5892596957205421085</id><published>2012-01-25T05:50:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:51:29.591-08:00</updated><title type='text'>फरवरी में बासमती का एमईपी हटने की संभावना</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;gt;नई दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;lt;&amp;gt;सरकार &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;बासमती  चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) व्यवस्था को खत्म करने और चीनी पर  कुछ नियंत्रण हटाने के अलावा ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के तहत पांच लाख टन  और चीनी निर्यात की अनुमति देने पर विचार कर सकती है। बासमती चावल के  निर्यात पर इस समय 900 डॉलर प्रति टन एमईपी लागू है। चीनी के मामले में  सरकार नियंत्रण हटाने की दिशा में मासिक चीनी कोटा सिस्टम को त्रैमासिक  आधार पर करने के बारे में विचार कर सकती है। इन सभी मसलों पर प्रणब मुखर्जी  की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्री समूह (ईजीओएम) की अगली बैठक में  विचार होने की संभावना है। यह बैठक आगामी सात फरवरी को हो सकती है।&lt;br /&gt;खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बासमती निर्यात को बढ़ावा  देने के लिए एमईपी को हटाया जा सकता है। इस पर फैसला ७ फरवरी को प्रस्तावित  ईजीओएम की बैठक में हो सकता है। बासमती के एमईपी को हटाने का प्रस्ताव  वाणिज्य मंत्रालय का है जिसे खाद्य मंत्रालय ने भी हरी झंडी दे दी है।  अधिकारी के अनुसार बैठक में ओजीएल के तहत पांच लाख टन और चीनी के निर्यात  को भी अनुमति दी जा सकती है। साथ ही चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने की  दिशा में कोटा रिलीज सिस्टम में बदलाव करने पर विचार हो सकता है। इस समय  हर महीने खुले बाजार में बिक्री के लिए कोटा तय होता है। नए सिस्टम में  मिलों के लिए तीन महीने का कोटा जारी करने पर चर्चा हो सकती है। बासमती  चावल के निर्यात पर 900 डॉलर का एमईपी लागू होने की वजह से निर्यात में  तेजी नहीं आ रही है। एमईपी के कारण भारतीय निर्यातकों को पाकिस्तान से कड़ी  प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। जबकि चालू खरीफ में बासमती चावल की पैदावार  में बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के दौरान 16.22  लाख टन बासमती चावल का ही निर्यात हुआ है।&lt;br /&gt;सरकार ने 22 नवंबर को  चालू पेराई सीजन 2011-12 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए ओजीएल के तहत दस लाख  टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। जिसमें से 17 जनवरी तक 5.39 लाख टन के  रिलीज आर्डर जारी किए हैं। चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक चीनी के  उत्पादन में 19 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल उत्पादन 104.5 लाख टन का हो चुका  है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 87.68 लाख टन का उत्पादन हुआ था।(Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-5892596957205421085?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/5892596957205421085/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=5892596957205421085' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5892596957205421085'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5892596957205421085'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_2891.html' title='फरवरी में बासमती का एमईपी हटने की संभावना'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-3206051711341064579</id><published>2012-01-25T05:48:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:49:43.813-08:00</updated><title type='text'>सरसों का उत्पादन 20 फीसदी तक कम होने का अनुमान</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;lt;&amp;gt; नई दिल्ली&lt;br /&gt;&amp;lt;&amp;gt;रबी &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;तिलहन  की प्रमुख तिलहन फसल सरसों की बुवाई में 12.3 फीसदी की कमी आई है जबकि  प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में इसकी बुवाई पिछले साल के मुकाबले 21.4  फीसदी घटी है। ऐसे में सरसों की पैदावार करीब 20 फीसदी घटकर 60 लाख टन  उत्पादन रहने का अनुमान है। सरसों का उत्पादन घटने से अगले महीनों में  खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी आ सकती है।&lt;br /&gt;कृषि मंत्रालय के एक  वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बुवाई में कमी आने से चालू रबी में सरसों की  पैदावार में 15-16 लाख टन की कमी आने की आशंका है। वर्ष 2010-11 में देश  में सरसों का उत्पादन 76.67 लाख टन का हुआ था जबकि चालू सीजन में उत्पादन  घटकर 60 लाख टन के करीब ही होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि प्रमुख  उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों की बुवाई 21.4 फीसदी घटकर 26.42 लाख  हेक्टेयर में ही हो पाई है। जबकि पिछले साल की समान अवधि में 32.10 लाख  हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी। सरसों रबी तिलहनों की प्रमुख फसल है।  कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू रबी में तिलहनों  की कुल बुवाई 83.8 लाख हेक्टेयर में हुई है इसमें सरसों की हिस्सेदारी  63.31 लाख हेक्टेयर है। पिछले साल की समान अवधि में सरसों की बुवाई 71.12  लाख हेक्टेयर में हुई थी। जबकि पिछले साल तिलहनों की कुल बुवाई 71.12 लाख  हेक्टेयर में हुई थी। दिल्ली वेजिटेबल ऑयल एसोसिएशन के सचिव हेमंत गुप्ता  ने बताया कि सरसों की पैदावार में कमी आने से आयात पर निर्भरता बढ़ जाएगी,  जिसका असर खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ सकता है। राजस्थान में सरसों तेल  का भाव 750 रुपये प्रति दस किलो है जबकि सरसों का भाव 3,300 रुपये प्रति  क्विंटल है। नई फसल की आवक मार्च महीने में बनेगी इसलिए मार्च में तेल और  सरसों के दाम में हल्की गिरावट आ सकती है लेकिन भविष्य में दाम तेज ही बने  रहने की संभावना है।&lt;br /&gt;अमेरिकी कृषि विभाग के भारत में स्थित एक  वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूएसडीए की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण  अमेरिका में सोयाबीन के उत्पादन में 22 लाख टन और ब्राजील में 10 लाख टन की  कमी आने की आशंका है। सूखे और गर्म मौसम के कारण ब्राजील में सोयाबीन का  उत्पादन 740 लाख टन होने की संभावना है। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-3206051711341064579?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/3206051711341064579/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=3206051711341064579' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3206051711341064579'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3206051711341064579'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/20.html' title='सरसों का उत्पादन 20 फीसदी तक कम होने का अनुमान'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2767551774148423209</id><published>2012-01-25T05:46:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:47:41.740-08:00</updated><title type='text'>वित्त मंत्रालय ने सस्ते कर्ज के लिए दिशानिर्देश जारी किए</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;आर.एस. राणा &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;lt; नई दिल्ली&lt;br /&gt;&amp;lt;&amp;gt;क्रेडिट कार्डधारक  किसानों को वेयरहाउस रसीद पर बैंकों से सात फीसदी ब्याज दर पर कर्ज  मिलेगा। इस संबंध में नए दिशानिर्देश वित्त मंत्रालय ने 28 दिसंबर को सभी  संबंधित विभागों को भेज दिए हैं। सस्ती दर पर जिंस की एवज में ऋण मिलने से  देशभर के किसान लाभान्वित होंगे और वे भंडारण विकास एवं नियामक प्राधिकरण  (डब्ल्यूडीआरए) से मान्यता प्राप्त गोदामों में कृषि उपज रखने के लिए  प्रोत्साहित होंगे। डब्ल्यूडीआरए ने देशभर में 200 वेयरहाउसों को रसीद जारी  करने के लिए मान्यता दी है।&lt;br /&gt;डब्ल्यूडीआरए के डायरेक्टर  (टेक्निकल) डॉ. एन. के. अरोड़ा ने बिजनेस भास्कर को बताया कि मान्यता  प्राप्त वेयरहाउस की रसीद पर क्रेडिट कार्डधारक किसानोंं को बैंकों से अब  सात फीसदी की दर से ऋण मिलेगा। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे  दी है। इससे देशभर के करोड़ों किसानो को फायदा होगा। हालांकि जिन किसानों  के पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है, उन किसानों और कारोबारियों को 11-12  फीसदी की ब्याज दर पर ही वेयरहाउस रसीद के आधार पर ऋण मिलेगा। इन वर्गों को  भी कम ब्याज पर कर्ज उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत चल रही  है।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि डब्ल्यूडीआरए अभी तक वेयरहाउस रसीद देने के  लिए देशभर में 200 वेयरहाउसों को मान्यता प्रदान कर चुका है। जिनकी  खाद्यान्न भंडारण क्षमता लगभग 6.5 लाख टन की है। इसमें सबसे ज्यादा 47  वेयरहाउस राजस्थान में हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में 43 वेयरहाउस, आंध्र  प्रदेश में 35 वेयरहाउस, महाराष्ट्र में 22, हरियाणा में 15, केरल में 9,  पंजाब में 4 और मध्य प्रदेश में 3 वेयरहाउस है। उन्होंने बताया कि अब  किसानों पर नई फसल की आवक के समय अपनी जिंस बेचने का दबाव नहीं होगा। किसान  वेयरहाउस में अपनी जिंस रखकर उसके द्वारा प्राप्त हुई रसीद के आधार पर  बैंकों से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे।&lt;br /&gt;अभी तक वेयरहाउस  रजिस्ट्रेशन के लिए देशभर से 404 आवेदन मिल चुके हैं जिनकी भंडारण क्षमता  लगभग 15 लाख टन की है। इनमें सबसे ज्यादा आवेदन राजस्थान से प्राप्त हुए  हैं। अरोड़ा ने बताया कि अभी तक मान्यता प्राप्त वेयरहाउसों की ओर से 958  नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (एनडब्ल्यूआर) जारी की जा चुकी हैं। निगम ने  वेयरहाउस में रखने के लिए 40 एग्री जिंसों को अधिकृत किया है।&lt;br /&gt;वेयर हाउसों को मान्यता देने के लिए डब्ल्यू डीआरए ने सात एजेंसियों को  अधिकृत किया है। इनमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मार्केटिंग  (एनआईएएम) को राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और  पंजाब में वेयरहाउसों को मान्यता देने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने  कहा कि किसान को अपनी जिंस की ग्रेडिंग, क्लीनिंग, पैकिंग और लेवलिंग करके  वेयरहाउस में रखना चाहिए। इससे जिंस की क्वालिटी अच्छी रहेगी।(Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2767551774148423209?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2767551774148423209/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2767551774148423209' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2767551774148423209'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2767551774148423209'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_8001.html' title='वित्त मंत्रालय ने सस्ते कर्ज के लिए दिशानिर्देश जारी किए'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-9133444499948896043</id><published>2012-01-25T05:43:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:45:12.737-08:00</updated><title type='text'>क्रूड पाम तेल व आरबीडी पामोलीन पर निर्यात शुल्क बढऩे से खाद्य तेल महंगे होंगे</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;आर.एस. राणा &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&amp;lt;&amp;gt;नई दिल्ली&lt;br /&gt;&amp;lt;&amp;gt;इंडोनेशिया &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;फरवरी  से क्रूड पाम तेल पर निर्यात शुल्क में 1.5 फीसदी और आरबीडी पामोलीन के  निर्यात शुल्क में 1 फीसदी की बढ़ोतरी करेगा। इंडोनेशिया पाम ऑयल एसोसिएशन  के अनुसार फरवरी से क्रूड पाम तेल पर निर्यात शुल्क बढ़कर 16.5 फीसदी और  आरबीडी पामोलीन पर 8 फीसदी हो जाएगा। इंडोनेशिया के इस फैसले से भारतीय  बाजारों में खाद्य तेलों के दाम बढऩे की संभावना है। इससे भारतीय खाद्य तेल  रिफाइनरी इकाइयों के लिए मुश्किल और बढ़ जाएगी। क्रूड पाम तेल का निर्यात  शुल्क आरबीडी पाम तेल के निर्यात शुल्क से करीब दोगुना होने से रिफाइनरी  इकाइयों के मार्जिन पर दबाव बढ़ जाएगा।&lt;br /&gt;इंडोनेशिया पाम ऑयल  एसोसिएशन के अनुसार घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खाद्य तेलों के  निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है। इस समय क्रूड पाम तेल पर 15 फीसदी  और आरबीडी पामोलीन में 7 फीसदी निर्यात शुल्क लगता है। फरवरी से इनके  निर्यात शुल्क में क्रमश: 1.5 फीसदी और 1 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। विजय  सॉल्वैक्स लिमिटेड के डायरेक्टर विजय डाटा ने बताया कि क्रूड पाम तेल पर  निर्यात शुल्क ज्यादा होने के कारण आयातक आरबीडी पामोलीन का आयात ज्यादा  मात्रा में करेंगे। इससे घरेलू रिफाइनिंग इंडस्ट्री प्रभावित होगी। इस समय  भी घरेलू उद्योग कुल क्षमता का केवल 50 फीसदी ही उपयोग कर पा रहा है।  उन्होंने बताया कि इससे क्रूड पाम तेल और आरबीडी पामोलीन की कीमतों में  अंतर भी कम होगा। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के  कार्यकारी अधिकारी डॉ. बी. वी. मेहता ने बताया कि इंडोनेशिया द्वारा क्रूड  पाम तेल और आरबीडी पामोलीन के निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी का असर घरेलू  बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ेगा। वैसे भी रबी सीजन में तिलहनों  की बुवाई में कमी आई है। उन्होंने बताया कि आरबीडी पामोलीन का आयात ज्यादा  मात्रा में होगा तथा आयातक इंडोनेशिया के बजाय मलेशिया से ज्यादा मात्रा  में आयात करेंगे। भारतीय बंदरगाह पर इस समय क्रूड पाम तेल का भाव 1,035  डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) और आरबीडी पामोलीन का भाव 1,070 डॉलर प्रति टन  (सीएंडएफ) है। जबकि दिसंबर महीने में क्रूड पाम तेल का भाव 1,047 और आरबीडी  पामोलीन का 1,152 डॉलर प्रति टन था। एसईए के अनुसार नवंबर-दिसंबर में  खाद्य तेलों के आयात में सात फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 15.25 लाख टन  का हुआ है। इसमें क्रूड पाम तेल की हिस्सेदारी 10.47 लाख टन है। (Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-9133444499948896043?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/9133444499948896043/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=9133444499948896043' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9133444499948896043'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9133444499948896043'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_2171.html' title='क्रूड पाम तेल व आरबीडी पामोलीन पर निर्यात शुल्क बढऩे से खाद्य तेल महंगे होंगे'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-5396446889487731248</id><published>2012-01-25T05:40:00.001-08:00</published><updated>2012-01-25T05:40:27.639-08:00</updated><title type='text'>एक्सचेंज के सदस्यों पर एफएमसी की बढ़ी सख्ती</title><content type='html'>राष्ट्रीय एक्सचेंजों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए  वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने सभी जिंस एक्सचेंजों के सदस्यों से कहा है कि  शेयरधारिता आदि में बदलाव से पहले वे आयोग से मंजूरी लें। नाम व  शेयरधारिता में परिवर्तन और सदस्यता के समर्पण के बारे में अभी तक सदस्यों  को संबंधित एक्सचेंज से मंजूरी लेनी पड़ती थी। एफएमसी के इस निर्देश को न  मानने वाले सदस्यों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।&lt;br /&gt;एमके कॉमट्रेड लिमिटेड के सीईओ अशोक मित्तल ने कहा, 'एक्सचेंज और सदस्यों  के संबंधों के लिए विभिन्न जरिए मौजूद हैं। कुछ मामलों में हम संबंधित  एक्सचेंज से मंजूरी लेते हैं। लेकिन दूसरे मामलों में बदलाव के बाद हम  पूर्वानुमति के बिना एक्सचेंज को सूचित करते हैं। इस निर्देश के बाद  हालांकि कंपनी में महत्वपूर्ण बदलाव से पहले हमें नियामक की मंजूरी लेनी  होगी।'&lt;br /&gt;एनसीडीईएक्स ने अपनी वेबसाइट पर एफएमसी का सर्कुलर डाला है। इसमें कहा गया  है कि एफएमसी के निर्देशों के मुताबिक सदस्यों को नाम में बदलाव और सदस्यता  के हस्तांतरण के अलावा सदस्यता के समर्पण के मामले में नियामक से पहले  इजाजत लेनी होगी। सर्कुलर में कहा गया है कि शेयरधारिता में परिवर्तन के  प्रस्ताव से कंपनी या फर्म के नियंत्रण में बदलाव होता है, लिहाजा इसके लिए  सबसे पहले एफएमसी से मंजूरी जरूरी है। प्रोप्राइटरशिप में बदलाव के लिए भी  पहले नियामक की मंजूरी लेनी होगी और फिर एक्सचेंज समेत दूसरी संस्थाओं को  बताना होगा। इसमें हिंदू अविभाजित परिवार के भीतर हस्तांतरण के मामले भी  शामिल होंगे।&lt;br /&gt;अब तक सदस्य इस तरह के बदलाव की सूचना संबंधित एक्सचेंजों को देते रहे हैं।  अन्य बदलावों की बाबत हालांकि अधिकृत एक्सचेंज मंजूरी देते हैं। मित्तल ने  कहा, हो सकता है एक्सचेंजों पर बेहतर नियंत्रण, निगरानी आदि की खातिर  एफएमसी ने यह कदम उठाया हो।&lt;br /&gt;आम चलन के मुताबिक नाम में बदलाव की मंजूरी पहले रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज देते  हैं और बाद में एक्सचेंज इसे प्रमाणित करता है। इस काम में काफी समय भी  लगता है। उदाहरण के तौर पर, एक बार जब आरओसी नाम में बदलाव की मंजूरी देकर  इसे एक्सचेंज को भेज देते हैं और अगर पाया जाता है कि यह नाम पहले से ही है  तो फिर से बदलाव की दरकार होती है।&lt;br /&gt;मित्तल ने कहा, इसके अलवा भ्रम पैदा करने वाले नाम मसलन एबीसी स्टॉक ऐंड  शेयर ब्रोकिंग से बचा जाना चाहिए, जो न तो जिंस कारोबार में शामिल कंपनी का  संकेत देती है, न ही वह साख वाली कंपनी की तरह नजर आती है। ऐंजल ब्रोकिंग  के सहायक निदेशक नवीन माथुर के मुताबिक एफएमसी के दिशानिर्देश से पूरे जिंस  वायदा कारोबार में और पारदर्शिता आएगी। 31 दिसंबर 2011 को समाप्त पखवाड़े  में वायदा एक्सचेंजों का कुल कारोबार 50 फीसदी उछलकर 665112.10 करोड़ रुपये  पर पहुंच गया जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 438394.74 करोड़ रुपये  था। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-5396446889487731248?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/5396446889487731248/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=5396446889487731248' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5396446889487731248'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5396446889487731248'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_8754.html' title='एक्सचेंज के सदस्यों पर एफएमसी की बढ़ी सख्ती'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-484453999894017625</id><published>2012-01-25T05:39:00.001-08:00</published><updated>2012-01-25T05:39:56.322-08:00</updated><title type='text'>विनिवेश के काम में जुटा है एनएमसीई</title><content type='html'>अहमदाबाद स्थित नैशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एनएमसीई) नियामकीय  दिशा-निर्देशों को पूरा करने की विस्तारित सीमा 31 मार्च 2012 से पहले  वर्तमान शेयरधारकों की हिस्सेदारी  बेचने के लिए 5 प्राइवेट इक्विटी (पीई)  कंपनियों और निजी बैंकों से बातचीत कर रहा है। &lt;br /&gt;वर्तमान में एक्सचेंज के पास कुल 19.12 करोड़ रुपये की शेयर पूंजी है। इसे  नए दिशा-निर्देशों के तहत 31 मार्च, 2012 से पहले इसे न्यूनतम 50 करोड़  रुपये किया जाना है। इसकी पुष्टि करते हुए एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और  मुख्य कार्याधिकारी अनिल मिश्रा ने कहा, 'कुछ प्रमुख पीई कंपनियों और निजी  क्षेत्र के बड़े बैंकों सहित 5 कंपनियों ने एनएमसीई में हिस्सेदारी खरीदने  की इच्छा जाहिर की है। हम इनमें कुछ सबसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों को चुनने  की प्रक्रिया में हैं।' हालांकि मिश्रा ने संभावित बोली लगाने वालों के नाम  के बारे में कोई खुलासा नहीं किया।&lt;br /&gt;जुलाई 2009 में शुरू हुए राष्ट्रीय स्तर के जिंस वायदा कारोबार  प्लेटफार्मों में हिस्सेदारी को लेकर जारी किए गये संशोधित दिशा-निर्देशों  में बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग(एफएमसी) ने नेटवर्थ की सीमा 100 करोड़  रुपये तय की थी, जिसमें इक्विटी पूंजी की सीमा 50 करोड़ रुपये जरूरी की गई  थी। ये दिशा-निर्देश राष्ट्रीय स्तर के 3 एक्सचेंजों मल्टी कमोडिटी  एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स), नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज  (एनसीडीईएक्स) और एनएमसीई पर लागू किये गए थे। इन तीनों एक्सचेंजों ने वर्ष  2003 में कारोबार शुरू किया था, उस समय इक्विटी पूंजी की सीमा 10 करोड़  रुपये की थी, जिसे वर्ष 2009 में बाजार के बढ़ते कारोबार को देखते हुए  संशोधित किया गया था।&lt;br /&gt;इन तीनों में से एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स इस शर्त को पिछली समय सीमा 31  अक्टूबर 2011 से पहले ही पूरी कर चुके हैं। जबकि एनएमसीई ने समय सीमा  बढ़ाने की मांग की थी, जिसे उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 6 महीने बढ़ाकर  31 मार्च, 2012 कर दिया है। मिश्रा ने कहा, 'हमने फिर से समय सीमा में  विस्तार की कोई मांग नहीं की है क्योंकि हमें उम्मीद है कि हम समय से पहले  ही इस शर्त को पूरा कर लेंगे।'&lt;br /&gt;राष्ट्रीय स्तर के नए एक्सचेंज इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) और ऐश  डेरिवेटिव्ज ऐंड कमोडिटी एक्सचेंज(एसीई) ने न्यूनतम 100 करोड़ रुपये की  शेयर पूंजी के साथ कारोबार शुरू किया था जिसमें से 50 करोड़ रुपये शेयर  इक्विटी पूंजी के लिए आवंटित किए गये थे। इसलिए ये नये एक्सचेंज कारोबार  शुरू करने से पहले ही इस शर्त को पूरा कर रहे थे। एनएमसीई में रबर, कॉफी और  मसालों का वायदा कारोबार होता है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-484453999894017625?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/484453999894017625/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=484453999894017625' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/484453999894017625'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/484453999894017625'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_6883.html' title='विनिवेश के काम में जुटा है एनएमसीई'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-3075584009989540774</id><published>2012-01-25T05:37:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:39:04.441-08:00</updated><title type='text'>कपड़ा मिलों में कपास की खपत बढऩे के संकेत</title><content type='html'>कपास सलाहकार बोर्ड ने कहा है कि कपड़ा मिलों में कपास की खपत पहले के  अनुमान के मुकाबले बढऩे की संभावना है। उसने मिलों में कपास की खपत के  अनुमान में बढ़ोतरी भी की है। बोर्ड ने कहा कि मिलों में कपास की मांग में  बढ़ोतरी की खबरें मिलने के बाद इसकी खपत के अनुमान में संशोधन किया जा रहा  है। विश्लेषकों की नजर में यह भारतीय कपड़ा उद्योग के पटरी पर लौटने का  संकेत है।&lt;br /&gt;कपास सलाहकार बोर्ड ने मंगलवार को हुई बैठक के बाद कहा, मौजूदा कपास वर्ष  (अक्टूबर-सितंबर) में कपड़ा मिलों में कपास की खपत का अनुमान बढ़ाकर 216  लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) कर दिया गया है जबकि पहले 210 लाख  गांठ की खपत का अनुमान था।&lt;br /&gt;छोटी इकाइयों की खपत का अनुमान भी संशोधित कर 24 लाख गांठ कर दिया गया है  जबकि इन इकाइयों में पहले 20 लाख गांठ की खपत का अनुमान था। इस तरह से छोटी  व बड़ी मिलें पहले के अनुमान के मुकाबले 10 लाख गांठ ज्यादा खपत कर सकती  हैं। ऐसा तब हो रहा है जब कुल उत्पादन के अनुमान में 11 लाख गांठ की कटौती  की गई है। ये दोनों संकेत बताते हैं कि कपास की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी और  यहां तक कि निर्यात के अनुमान में भी संशोधन करते हुए इसमें बढ़ोतरी की गई  है।&lt;br /&gt;सूती धागे की निर्यात मांग के साथ-साथ घरेलू बाजार में मजबूत मांग के चलते  देश में कच्चे कपास की खपत में ठीक-ठाक सुधार दर्ज किया गया है। चीन,  श्रीलंका, बांग्लादेश, वियतनाम और मिस्र जैसे देशों से सूती धागे की मांग  ने जोर पकड़ा है।&lt;br /&gt;कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सिटी) के महासचिव डी के नायर ने  कहा, मार्च के बाद सूती धागे की मांग में मजबूती की संभावना है। साथ ही  देसी-विदेशी परिधान उद्योग की मांग ने भी जोर पकड़ा है। नायर ने कहा कि  अमेरिका से मांग में ठीक-ठाक तेजी आई है, जो भारत के सबसे बड़े निर्यात  देशों में से एक है। पर यूरो जोन में कर्ज संकट के चलते मांग घटी है।&lt;br /&gt;इस साल कपास का निर्यात भी पहले के 80 लाख गांठ के मुकाबले बढ़कर 84 लाख  गांठ हो जाने का अनुमान है। आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कपास की फसल को  हुए नुकसान के चलते कपास सलाहकार बोर्ड ने उत्पादन अनुमान संशोधित कर 345  लाख गांठ कर दिया है जबकि पहले 356 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान था। पिछले  कपास वर्ष (2010-11) में देश में 325 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था और  यह अब तक का सर्वोच्च उत्पादन है। कपास सलाहकार बोर्ड द्वारा उत्पादन  अनुमान में संशोधन के बावजूद कुल उत्पादन अब तक का सर्वोच्च होगा। पिछले  साल कीमतों में काफी गिरावट आई थी। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-3075584009989540774?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/3075584009989540774/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=3075584009989540774' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3075584009989540774'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3075584009989540774'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_8961.html' title='कपड़ा मिलों में कपास की खपत बढऩे के संकेत'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6115728798025092862</id><published>2012-01-25T05:36:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:37:06.821-08:00</updated><title type='text'>ग्वार में कारोबार से रोके गए 2 ब्रोकर</title><content type='html'>सर्किट के जाल से ग्वार को बाहर निकालने की अपनी कवायद के तहत वायदा बाजार  आयोग (एफएमसी) ने दो ब्रोकरों को इसके कारोबार से बाहर कर दिया। नैशनल  कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सेंज  ने भी ग्वार गम और ग्वार सीड के बिकवाली  सौदों पर 10 फीसदी का विशेष मार्जिन लगा दिया, जो 25 जनवरी से लागू होगा।&lt;br /&gt;एफएमसी ने ग्वार सौदों में गड़बड़ी रोकने और सटोरियों पर अंकुश लगाने के  लिए विनोद कमोडिटीज को कारोबार से 1 साल के लिए और श्रेष्ठ कमोडिटीज ऐंड  फाइनैंशियल सर्विसेज को 6 महीने के लिए रोक दिया। यह खबर मिलते ही बाजार  में ग्वार गम और ग्वार सीड की बिकवाली चालू हो गई और दोनों जिंस  एनसीडीईएक्स पर टॉप गेनर्स की सूची से निकलकर टॉप लूजर्स में शामिल हो गए।  सुबह ग्वार सौदों में 3.5 फीसदी की तेजी थी, लेकिन शाम को लगभग सभी सौदों  पर 4 फीसदी का निचला सर्किट लग गया। एनसीडीईएक्स पर ग्वार गम फरवरी अनुबंध  39,056 रुये प्रति क्विंटल पर और ग्वार सीड मार्च अनुबंध 11,915 रुपये  प्रति क्विंटल पर बंद हुए। हाजिर बाजार में भी जयपुर मंडी में ग्वार सीड  1,2500 रुपये तथा ग्वार गम 40,000 रुपये प्रति क्ंिवटल से नीचे गिर गए।&lt;br /&gt;एफएमसी और एनसीडीईएक्स के संयुक्त दल ने पिछले महीने राजस्थान और मध्य  प्रदेश के कई कमोडिटी ब्रोकरों पर छापे मारकर कुछ अहम दस्तावेज जब्त किए  थे। एफएमसी सूत्रों ने बताया था कि उसके बाद 6 ब्रोकरों और 30 सदस्यों को  नोटिस भेजे गए हैं। उन्हीं में से 2 को एफएमसी ने वायदा कारोबार से बाहर कर  दिया। सूत्रों के मुतािबक कुछ और ब्रोकरों तथा कारोबारियों के खिलाफ ऐसी  कार्रवाई जल्द ही हो सकती है।&lt;br /&gt;एफएमसी ने ग्वार सौदों पर मार्जिन सीमा रिकॉर्ड 72 फीसदी कर दी है और  पोजिशन सीमा घटाकर ग्वार सीड के लिए 12,000 टन तथा ग्वार गम के लिए 3,000  टन रोजाना कर दी है। ग्राहकों के लिए सीमा ग्वार सीड में 2,400 टन और ग्वार  गम में 1,000 टन तय की गई है। निकट माह के ग्वार सीड सौदों में ब्रोकरों  के लिए पोजिशन सीमा 4,000 टन और ग्राहकों के लिए 800 टन की गई है। ग्वार गम  में ब्रोकरों की सीमा 600 और ग्राहकों की 200 टन रह गई है। एनसीडीईएक्स ने  25 जनवरी से दोनों जिंसों के सभी बिकवाली सौदों पर 10 फीसदी विशेष मार्जिन  लगाने का ऐलान किया है। ऐंजल ब्रोकिंग की विश्लेषक नलिनी राव के मुताबिक  अब ग्वार की कीमतें नीचे आएंगी क्योंकि एफएमसी सख्त है और अंतरराष्ट्रीय  बाजार में इतने ऊंचे भाव पर खरीदार नहीं हैं। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6115728798025092862?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6115728798025092862/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6115728798025092862' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6115728798025092862'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6115728798025092862'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/2.html' title='ग्वार में कारोबार से रोके गए 2 ब्रोकर'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6764440588604372741</id><published>2012-01-25T05:35:00.000-08:00</published><updated>2012-01-25T05:36:30.765-08:00</updated><title type='text'>निर्यात पर टिकी चीनी की मिठास</title><content type='html'>लागत से भी कम दाम पाकर परेशान चीनी मिलों को अब निर्यात पर सरकारी रुख से  ही सहारा मिल सकता है। चीनी उद्योग ने सरकार से 10 लाख टन अतिरिक्त चीनी के  निर्यात की अनुमति मांगी है। कारोबारियों के मुताबिक अगले महीने इसे हरी  झंडी मिली तो चीनी 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल सुधर सकती है। वैश्विक  बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों का फायदा भी तब मिल सकता है।&lt;br /&gt;मवाना शुगर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुनील ककरिया ने बिजनेस स्टैंडर्ड से  कहा कि गन्ने पर मिलें अभी ढुलाई समेत 255 रुपये प्रति क्विंटल खर्च कर रही  हैं। चीनी की रिकवरी 8.5 फीसदी है और इस हिसाब से उत्पादन लागत 3,000  रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि थोक भाव 2,900 से 2,950 रुपये प्रति क्विंटल  यानी लागत से कम हैं।&lt;br /&gt;चीनी का कारोबार करने वाली कंपनी एसएनबी एंटरप्राइजेज के मालिक सुधीर  भालोटिया ने बताया कि मांग से ज्यादा चीनी उपलब्ध होने के कारण दाम गिरे  हैं। पिछले 2 महीने में उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्टरी दाम में 200  रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। इसके उलट वैश्विक बाजार में चीनी 40  डॉलर बढ़कर 640 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। ऐसे में निर्यात की अनुमति  मिलने पर चीनी के दाम 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ सकते हैं। चीनी कारोबारी  आर पी गर्ग को ऐसे में भाव 150 रुपये प्रति क्विंटल बढऩे की उम्मीद है।&lt;br /&gt;भारतीय चीनी उत्पादक संघ (इस्मा) के मुताबिक चालू चीनी वर्ष में 2.6 करोड़  टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। 15 जनवरी तक ही 1.04 करोड़ टन चीनी तैयार हो  चुकी है, जो पिछले साल 15 जनवरी तक के आंकड़े से 17 लाख टन अधिक है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6764440588604372741?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6764440588604372741/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6764440588604372741' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6764440588604372741'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6764440588604372741'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_25.html' title='निर्यात पर टिकी चीनी की मिठास'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-120833231580561576</id><published>2012-01-20T06:35:00.000-08:00</published><updated>2012-01-20T06:39:10.457-08:00</updated><title type='text'>फ्लश सीजन में भी ग्राहकों की जेब पर दूध की मार</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;आर. एस. राणा &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt; दिल्ली&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;&lt;br /&gt;आमतौर  पर फ्लश सीजन के दौरान उपभोक्ता दूध के मूल्य में राहत मिलने की उम्मीद कर  सकते हैं। देश में दूध की सुलभता और मूल्य के ग्राफ को देखें तो सदियों से  यह रुख हमेशा देखा गया लेकिन इस साल सर्दियों में भी उपभोक्ताओं को दूध के  मूल्य में राहत के मामले में मायूसी ही हाथ लग रही है। दरअसल, डेयरी  कंपनियों ने किसानों से दूध की खरीद के मूल्य में तो कमी की है लेकिन इसका  फायदा आगे उपभोक्ताओं को नहीं दिया, बल्कि उन्होंने यह फायदा अपनी जेब में  रख लिया। बात यहीं खत्म नहीं होती है, होली के बाद दूध की सप्लाई कम होती  है तो उपभोक्ताओं की जेब पर भार बढऩे की संभावना पूरी-पूरी है क्योंकि दूध  कंपनियां खुदरा दरें बढ़ाने में कोई संकोच नहीं करेंगी। दूध की सप्लाई बढऩे  के कारण दूध की खरीद कीमतें तो कंपनियों ने कम कर दी लेकिन बिक्री मूल्य  ज्यों के त्यों हैं। दूध की खरीद में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है इसके  अलावा 30 हजार टन स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) और 15 हजार टन बटर ऑयल आयात  होने से इस समय दूध की उपलब्धता अच्छी है। देश में दूध वितरण की सबसे बड़ी  सहकारी संस्था गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ)  अमूल दिल्ली में 38 रुपये प्रति लीटर (फुल क्रीम) की दर से दूध बेच रही है।  मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड 37 रुपये प्रति लीटर की  दर से दूध बेच रही है। अमूल ने दूध का खरीद भाव 450 रुपये प्रति किलो फैट  से घटाकर 420 रुपये कर दिया है। ऐसे में किसानों को पहले 29 रुपये प्रति  लीटर का भाव मिल रहा था लेकिन अब 27 रुपये मिल रहा है। मदर डेयरी ने भी दूध  की खरीद के दाम 27.50-29.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 25.50-27.50 रुपये  कर दिए हैं। ऐसे में कंपनियों के मार्जिन में तो बढ़ोतरी हो गई है लेकिन  इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। दिल्ली में मदर डेयरी करीब 30 लाख  और अमूल 15 लाख लीटर दूध रोजाना बेच रही हैं।&lt;br /&gt;इंडियन डेयरी  एसोसिएशन के अध्यक्ष एन. आर. भसीन ने बताया कि कंपनियां दूध के खरीद भाव  में कटौती कर देती है जिससे किसानों की दूध बिक्री से आय कम हो गई है।  लेकिन कंपनियों ने बिक्री भाव कम नहीं किए हैं। भसीन का कहना है कि सहकारी  संस्थाओं को किसानों को दूध का उचित दाम देना चाहिए। इसके अलावा उपभोक्ताओं  को भी वाजिब दाम पर दूध की सप्लाई करनी चाहिए। खरीद भाव में कटौती करने से  कंपनियों के मार्जिन में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन उसका फायदा उपभोक्ताओं  तक नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में दूध का उत्पादन 10.85  करोड़ टन और वर्ष 2011 में 11.25 करोड़ टन का हुआ है। चालू वर्ष में  उत्पादन बढ़कर 11.50-11.60 करोड़ टन होने का अनुमान है। वर्ष 2011 में दूध  की मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण 30 हजार टन एसएमपी और 15 हजार  टन बटर ऑयल का आयात किया गया था। चालू सीजन में अभी दूध की उपलब्ध्ता अच्छी  रहने की संभावना है। ऐसे में आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टर्लिंग  एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर कुलदीप सलूजा ने बताया कि  फ्लश सीजन होने के दूध की सप्लाई बढ़ी है। साथ ही एसएमपी और बटर ऑयल आयात  कर लेने से उपलब्ध्ता अच्छी है लेकिन होली के बाद दूध की सप्लाई कम हो  जाएगी जिससे दूध और दूध उत्पादों की कीमतों में तेजी आ सकती है। देसी घी का  भाव दिल्ली में 3,800-4,000 रुपये प्रति 15 किलो और एसएमपी का भाव 175 से  185 रुपये प्रति किलो है। दिवाली के बाद से घी की कीमतों में 200 रुपये  प्रति 15 किलो की और एसएमपी की कीमतों में 15 से 25 रुपये प्रति किलो की  गिरावट आई है।(Business Bhaskar...R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-120833231580561576?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/120833231580561576/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=120833231580561576' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/120833231580561576'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/120833231580561576'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_5418.html' title='फ्लश सीजन में भी ग्राहकों की जेब पर दूध की मार'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-3705327053232874001</id><published>2012-01-20T06:33:00.000-08:00</published><updated>2012-01-20T06:35:21.939-08:00</updated><title type='text'>चीनी मिलें चुकाएंगी 1100 करोड़</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;font-family:Arial;" &gt;&lt;span class="bodyd" style="color: rgb(44, 44, 44);font-family:Mangal;" &gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--&lt;span title="Click to correct" class="transl_class" id="2"&gt;क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्&lt;/span&gt;--&gt;&lt;!--&lt;span title="Click to correct" class="transl_class" id="3"&gt;ङ्खद्बठ्ठद्दस्रद्बठ्ठद्दह्य&lt;/span&gt;--&gt; दिल्ली&lt;br /&gt;&amp;lt;&amp;gt;सुप्रीम &lt;!--&lt;span title="Click to correct" class="transl_class" id="6"&gt;क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्&lt;/span&gt;--&gt;कोर्ट  ने उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को किसानों को पेराई सीजन 2006-07 और  2007-08 के बकाया भुगतान के रूप में गन्ना किसानों को करीब 1,100 करोड़  रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा  जारी आदेश के अनुसार चीनी मिलों को अगले तीन महीने में इसका भुगतान करना  होगा। इस कदम का फायदा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के गन्ना किसानों को  मिलेगा। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम के इस आदेश का राजनीतिक लाभ  लेने की स्थिति में कोई भी बड़ा राजनीतिक दल नहीं है जबकि इन दोनों राज्यों  में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस को इसका फायदा हो  सकता था क्योंकि किसानों के पक्ष में याचिका दायर करने वाले राष्ट्रीय  किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह हाल तक कांग्रेस में थे, लेकिन  कुछ राजनीतिक मतभेदों के चलते वह कांग्रेस से अलग हो चुके हैं।&lt;br /&gt;सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पेराई सीजन 2006-07 और 2007-08 के लिए चीनी  मिलों पर किसानों के बकाया राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) के आधार पर भुगतान  के लिए है। इस अवधि के लिए चीनी मिलों ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के  आधार पर भुगतान किया था जिसके आधार पर 2007-08 के लिए मिलों पर गन्ना  किसानों का 15 रुपये प्रति क्विंटल का बकाया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के  मुताबिक चीनी मिलों को यह भुगतान तीन माह में करना है। एसएपी तय करने के  राज्यों के संवैधानिक अधिकार का मामला सुप्रीम कोर्ट के सात न्यायाधीशों की  बड़ी बेंच को भेजने का फैसला भी सुप्रीम कोर्ट ने लिया है। सुप्रीम कोर्ट  का यह आदेश उत्तर प्रदेश के करीब 50 लाख गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद  साबित होगा। लेकिन जहां 2006-07 में राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी  वहीं 2007-08 में मायावती की बसपा सरकार थी। ऐसे में &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;font-family:Arial;" &gt;&lt;span class="bodyd" style="color: rgb(44, 44, 44);font-family:Mangal;" &gt;कांग्रेस  को इसका राजनीतिक फायदा हो सकता था लेकिन अब शायद उसे भी इसका फायदा नहीं  मिलेगा। संयोग की बात है कि एसएपी के लिए राज्य के अधिकार को जायज ठहराने  वाला फैसला 2004 के लोकसभा चुनावों के अंतिम दौर के चुनावों एकदम पहले आया  था और अब यह राज्य के विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया के दौरान आया है। इस  फैसले पर बिजनेस भास्कर के साथ बात करते हुए वी.एम. सिंह ने कहा कि 2004  में और उसके बाद अब दोनों बार सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के लिए न्याय किया  है हम सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहते हैं। साथ ही इसके चलते किसानों  का विश्वास न्यायपालिका में और अधिक मजबूत होगा। राजनीतिक सवाल पर उनका  कहना है कि आगामी चुनाव में इसका फायदा राज्य में किसी पार्टी को मिलने  वाला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद शुगर कंपनियों के शेयरों  में भी गिरावट दर्ज की गई। चीनी उद्योग संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन  एक पदाधिकारी का कहना है कि इससे उद्योग पर भारी बोझ पड़ेगा लेकिन राज्यों  के एसएपी के अधिकार का मामला बड़ी बेंच को जाने से हमें भविष्य में कुछ  राहत जरूर मिलती दिखती है। उनके मुताबिक अधिकांश बकाया 2007-08 के सीजन का  है क्योंकि उस साल 75 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। उसके चलते यह  बकाया करीब 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है। (Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-3705327053232874001?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/3705327053232874001/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=3705327053232874001' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3705327053232874001'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/3705327053232874001'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/1100.html' title='चीनी मिलें चुकाएंगी 1100 करोड़'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2068967372491191020</id><published>2012-01-20T06:32:00.000-08:00</published><updated>2012-01-20T06:33:16.701-08:00</updated><title type='text'>गहने होंगे और महंगे</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&lt;!--ङ्खद्बठ्ठद्दस्रद्बठ्ठद्दह्य--&gt; दिल्ली/जयपुर&lt;br /&gt;सरकार  ने सोना, चांदी और प्लेटिनम जैसी कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी  कर दी है। हालांकि इसे व्यापार घाटा कम करने की एक कोशिश के रूप में देखा  जा रहा है, लेकिन इससे गहनों की ऊंची कीमतों की मार से जूझ रहे उपभोक्ताओं  की जेब और ज्यादा ढीली होगी। सरकार द्वारा मंगलवार को जारी अधिसूचना के  अनुसार सोने के आयात पर मूल्य का दो फीसदी और चांदी पर छह फीसदी आयात शुल्क  निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही सरकार ने इन धातुओं पर लगने वाले  उत्पाद शुल्क की संरचना को भी मूल्य आधारित कर दिया है। इससे सरकार को चालू  वित्त वर्ष के बाकी महीनों में करीब 500-600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय  होने का अनुमान है।&lt;br /&gt;सोने पर अभी तक 300 रुपये प्रति दस ग्राम की  दर से आयात शुल्क लिया जाता था। अब कीमत का दो फीसदी बतौर आयात शुल्क  चुकाना होगा। इसी तरह चांदी पर अभी तक 1500 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब  से आयात शुल्क लिया जा रहा था जिसे बदलकर मूल्य का छह फीसदी कर दिया गया  है। सोने पर उत्पाद शुल्क भी 200 रुपये प्रति दस ग्राम के बजाय मूल्य का  1.5 फीसदी कर दिया गया है। चांदी पर यह मूल्य का चार फीसदी होगा जो पहले  1,000 रुपये प्रति किलोग्राम था। अधिसूचना के मुताबिक अब हीरे पर भी दो  फीसदी आयात शुल्क लगेगा। मंगलवार को दिल्ली सराफा बाजार में सोने के दाम 35  रुपये बढ़कर 27,925 रुपये प्रति दस ग्राम हो गए। चांदी की कीमतों में 575  रुपये की तेजी आई और भाव 52,725 रुपये प्रति किलो हो गए।&lt;br /&gt;केंद्रीय  उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के चेयरमैन एस.के. गोयल ने कहा कि पिछले कुछ  वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में बहुत अधिक तेजी आई है। इसलिए यह  बदलाव बाजार के अनुरूप ही किया गया है। राजेश एक्सपोट्र्स के एक्जीक्यूटिव  चेयरमैन राजेश मेहता ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इसे  वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, पहले सोने पर 30 रुपये प्रति 10 ग्राम  की दर से ड्यूटी लगती थी। तीन फीसदी सेस के साथ यह 30.90 रुपये पड़ता था।  नए आदेश से इसमें मौजूदा भाव पर करीब 25 रुपये (या 250 रुपये प्रति 10  ग्राम) का इजाफा हो जाएगा। ज्वेलर लागत में इस वृद्धि को रिटेल उपभोक्ता पर  ही डालेंगे। हालांकि इससे मांग पर ज्यादा असर की संभावना कम है क्योंकि  सोने के भाव में वैसे ही रोजाना एक से पांच फीसदी तक का उतार-चढ़ाव होता  रहता है। ड्यूटी के कारण बढऩे वाली कीमत को भी उपभोक्ता एक मूल्यवृद्धि मान  लेंगे। मेहता ने कहा कि चांदी पर ड्यूटी को 1500 रुपये प्रति किलो से  बढ़ाकर छह फीसदी किया गया है, इससे आज के भाव पर वास्तविक ड्यूटी करीब 3100  रुपये की होगी। यानी उपभोक्ता के लिए इसकी कीमत लगभग 1600 रुपये प्रति  किलो बढ़ जाएगी। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के  अध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि इससे घरेलू बाजार में कीमतों में और इजाफा  होगा। बढ़े आयात शुल्क का सीधा भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। आयात शुल्क में  दोगुने से अधिक बढ़ोतरी सहने की दशा में फिलहाल ज्वैलरी उद्योग नहीं है,  क्योंकि कीमती धातुओं में अरसे से लगातार तेजी का माहौल है। नंदकिशोर  मेघराज फर्म के मनोहर मेघराज के अनुसार आयात शुल्क बढ़ाना वर्तमान  परिस्थितियों के अनुसार उचित नहीं है। कीमतों में भारी तेजी रहने से  ज्वैलर्स का मुनाफा पहले ही प्रभावित हो रहा है। बढ़ी दरों को जोडऩे से  ग्राहकी पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे निर्यात कारोबार में मंदी के बाद घरेलू  बाजार में बिक्री की आस देख रहे ज्वैलर्स को निराशा होंगी। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2068967372491191020?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2068967372491191020/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2068967372491191020' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2068967372491191020'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2068967372491191020'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_6083.html' title='गहने होंगे और महंगे'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6731875756648018937</id><published>2012-01-20T06:30:00.000-08:00</published><updated>2012-01-20T06:31:35.181-08:00</updated><title type='text'>एमआईएस के तहत आलू खरीद का मामला फाइलों में अटका</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt; दिल्ली&lt;br /&gt;स्कीम (एमआईएस) के तहत उत्तर प्रदेश में आलू की खरीद में विलंब हो रहा है।  पिछले महीने भर से मामले की फाइल राज्य सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्रालय  के बीच अटकी हुई है। 18 जनवरी को दिल्ली में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों  और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव की इस संबंध में बैठक हुई है जिसमें राज्य  सरकार से नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया है।&lt;br /&gt;कृषि मंत्रालय के  एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 19 दिसंबर को मंत्रालय ने आलू किसानों को  राहत देने के लिए पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार को एमआईएस के  तहत आलू खरीदने को कहा था।&lt;br /&gt;इसके तहत उत्तर प्रदेश ने एमआईएस के  तहत आलू की खरीद के लिए कृषि मंत्रालय को आवेदन भेजा था लेकिन आवेदन में  खामियां होने के कारण राज्य सरकार को नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया है।  इस संबंध में राज्य के प्रमुख सचिव के साथ 18 जनवरी को दिल्ली में बैठक  हुई है।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि जैसे ही नया आवेदन मिलेगा खरीद शुरू कर  दी जायेगी। राज्य में आलू की खरीद नेफेड और राज्य सरकार की एजेंसियां  मिलकर करेगी। आलू की बंपर पैदावार के कारण कई राज्यों में लागत भी वसूल न  होने के कारण किसान आलू को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हैं।&lt;br /&gt;इसी को  ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एमआईएस के तहत आलू खरीद करने की योजना  बनाई है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के अनुसार वर्ष 2010-11 में  देश में आलू की पैदावार बढ़कर चार करोड़ टन से ज्यादा होने का अनुमान है।  जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 3.65 करोड़ टन का हुआ था। उन्होंने बताया कि  एमआईएस के तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर उन जिंसों की खरीद करती हैं  जिनका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सरकार तय नहीं करती और बंपर पैदावार  होने के एवज में किसान अपनी उपज को लागत से भी कम मूल्य पर बेचने को मजबूर  हो जाते हैं। एमआईएस के तहत खरीदे जाने वाली जिंसों को बेचने में होने वाले  नुकसान की भरपाई केंद्र और राज्य सरकारें पचास-पचास फीसदी के आधार पर करती  हैं।&lt;br /&gt;भले ही उपभोक्ताओं को आलू का दाम आठ-दस रुपये प्रति किलो  चुकाना पड़ रहा हो लेकिन किसान 2 से 2.5 प्रति किलो की दर से आलू बेचने को  मजबूर हैं। एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में आलू के थोक दाम घटकर  200 से 300 रुपये प्रति 50 किलो रह गए हैं।(Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6731875756648018937?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6731875756648018937/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6731875756648018937' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6731875756648018937'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6731875756648018937'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_9219.html' title='एमआईएस के तहत आलू खरीद का मामला फाइलों में अटका'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-594144359351004441</id><published>2012-01-20T06:28:00.000-08:00</published><updated>2012-01-20T06:29:38.282-08:00</updated><title type='text'>फरवरी में बासमती का एमईपी हटने की संभावना</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt; दिल्ली&lt;br /&gt;चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) व्यवस्था को खत्म करने और चीनी पर  कुछ नियंत्रण हटाने के अलावा ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के तहत पांच लाख टन  और चीनी निर्यात की अनुमति देने पर विचार कर सकती है। बासमती चावल के  निर्यात पर इस समय 900 डॉलर प्रति टन एमईपी लागू है। चीनी के मामले में  सरकार नियंत्रण हटाने की दिशा में मासिक चीनी कोटा सिस्टम को त्रैमासिक  आधार पर करने के बारे में विचार कर सकती है। इन सभी मसलों पर प्रणब मुखर्जी  की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्री समूह (ईजीओएम) की अगली बैठक में  विचार होने की संभावना है। यह बैठक आगामी सात फरवरी को हो सकती है।&lt;br /&gt;खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बासमती निर्यात को बढ़ावा  देने के लिए एमईपी को हटाया जा सकता है। इस पर फैसला ७ फरवरी को प्रस्तावित  ईजीओएम की बैठक में हो सकता है। बासमती के एमईपी को हटाने का प्रस्ताव  वाणिज्य मंत्रालय का है जिसे खाद्य मंत्रालय ने भी हरी झंडी दे दी है।  अधिकारी के अनुसार बैठक में ओजीएल के तहत पांच लाख टन और चीनी के निर्यात  को भी अनुमति दी जा सकती है। साथ ही चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने की  दिशा में कोटा रिलीज सिस्टम में बदलाव करने पर विचार हो सकता है। इस समय  हर महीने खुले बाजार में बिक्री के लिए कोटा तय होता है। नए सिस्टम में  मिलों के लिए तीन महीने का कोटा जारी करने पर चर्चा हो सकती है। बासमती  चावल के निर्यात पर 900 डॉलर का एमईपी लागू होने की वजह से निर्यात में  तेजी नहीं आ रही है। एमईपी के कारण भारतीय निर्यातकों को पाकिस्तान से कड़ी  प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। जबकि चालू खरीफ में बासमती चावल की पैदावार  में बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के दौरान 16.22  लाख टन बासमती चावल का ही निर्यात हुआ है। (Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार ने 22 नवंबर को  चालू पेराई सीजन 2011-12 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए ओजीएल के तहत दस लाख  टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। जिसमें से 17 जनवरी तक 5.39 लाख टन के  रिलीज आर्डर जारी किए हैं। चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक चीनी के  उत्पादन में 19 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल उत्पादन 104.5 लाख टन का हो चुका  है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 87.68 लाख टन का उत्पादन हुआ था। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-594144359351004441?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/594144359351004441/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=594144359351004441' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/594144359351004441'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/594144359351004441'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_3937.html' title='फरवरी में बासमती का एमईपी हटने की संभावना'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2832996118036409591</id><published>2012-01-20T06:26:00.001-08:00</published><updated>2012-01-20T06:26:34.363-08:00</updated><title type='text'>तांबा 10 फीसदी तेज, आगे नरमी के संकेत</title><content type='html'>इस माह वैश्विक बाजार में तांबे के दाम करीब 10 फीसदी और घरेलू बाजार में 5  फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। धातु विश्लेषकों का कहना है कि बीते साल  खासतौर पर यूरोप में तेजी से आर्थिक हालात बिगड़े, लेकिन फिलहाल यूरोप,  अमेरिका में स्थिरता देखी जा रही है। भंडारण बढ़ाने के लिए पिछले माह चीन  ने भी तांबे की ज्यादा खरीदारी की है। साथ ही डॉलर भी यूरो की तुलना में  नरम हुआ है। यही कारण है कि तांबे की कीमतों में तेजी आई है। धातु  विश्लेषकों के मुताबिक अगले सप्ताह से चीन में छुट्टियों के चलते बाजार बंद  रहने वाले हैं, जिससे तांबे की मांग घट सकती है। ऐसे में तांबे की कीमतों  में तेजी थमने की संभावना है। ऊपरी स्तरों पर खरीद घटने से भी तांबा नरम हो  सकता है।&lt;br /&gt;लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में बीते दो सप्ताह के दौरान तांबे के दाम  7,537 डॉलर से बढ़कर 8,300 डॉलर प्रति टन को पार कर चुके हैं। एमसीएक्स में  तांबा फरवरी अनुबंध के भाव 402 रुपये से बढ़कर 425 रुपये प्रति किलोग्राम  हो गए हैं।&lt;br /&gt;ऐंजल ब्रोकिंग के सह निदेशक (जिंस व मुद्रा) नवीन माथुर ने बिजनेस  स्टैंडर्ड को बताया कि अमेरिका में आर्थिक हालात सुधर रहे हैं और यूरोप में  भी स्थिरता का माहौल है। आर्थिक मोर्चे पर इसी स्थिरता से तांबे की कीमतों  में तेजी को समर्थन मिल रहा है। कमोडिटीइनसाइटडॉटकॉम के धातु विश्लेषक  अभिषेक शर्मा का कहना है कि पिछले महीने चीन ने तांबे का भंडारण बढ़ाया है,  जिससे दिसंबर में चीन का तांबा आयात 47.7 फीसदी बढ़कर 5.08 लाख टन हो गया।  दिल्ली के तांबा कारोबारी सुरेशचंद गुप्ता ने कहा कि घरेलू बाजार में मांग  सामान्य ही है, पर वैश्विक कारणों से दाम जरूर बढ़े हैं।  &lt;br /&gt;शर्मा का कहना है कि अगले स्पताह से प्रमुख उपभोक्ता देश चीन में छुट्टियों  (लुनार नव वर्ष) के कारण 10 दिन बाजार बंद रहने वाले हैं। इससे वैश्विक  बाजार में तांबे की मांग गिरेगी। ऐसे में अगले माह तक तांबे के दाम गिरकर  400 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे जा सकते हैं। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2832996118036409591?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2832996118036409591/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2832996118036409591' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2832996118036409591'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2832996118036409591'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/10.html' title='तांबा 10 फीसदी तेज, आगे नरमी के संकेत'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6112172644175555980</id><published>2012-01-20T06:24:00.000-08:00</published><updated>2012-01-20T06:25:56.624-08:00</updated><title type='text'>रबर के उत्पादन में बढ़ोतरी</title><content type='html'>मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल-दिसंबर के दौरान प्राकृतिक रबर के उत्पादन  में 4.3 फीसदी की उछाल आई है। इस तरह से नौ महीने में कुल उत्पादन बढ़कर  6,79,100 टन पर पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में  6,51,150 टन प्राकृतिक रबर का उत्पादन हुआ था।&lt;br /&gt;अप्रैल-दिसंबर के दौरान 7,17,485 टन रबर की खपत हुई, जो पिछले साल की समान  अवधि के 7,08,705 टन के मुकाबले 1.2 फीसदी ज्यादा है। इस अवधि में रबर के  निर्यात में 320 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल-दिसंबर के दौरान  22,472 टन रबर का निर्यात हुआ जबकि पिछले साल की समान अवधि में 7,293 टन  रबर का निर्यात हुआ था। इस अवधि में हालांकि आयात में गिरावट आई है और यह  1,33,693 टन रह गया है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,66,463 टन रबर का  आयात हुआ था।&lt;br /&gt;रबर बोर्ड के संशोधित आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2011 के आखिर में  प्राकृतिक रबर के कुल भंडार में गिरावट आई है। इस अवधि में प्राकृतिक रबर  का कुल भंडार 2,62,000 टन रहा जबकि पिछले साल इसी दौरान 3,14,890 टन रबर का  भंडार था। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6112172644175555980?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6112172644175555980/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6112172644175555980' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6112172644175555980'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6112172644175555980'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_20.html' title='रबर के उत्पादन में बढ़ोतरी'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-46892022214304954</id><published>2012-01-13T06:31:00.000-08:00</published><updated>2012-01-13T06:32:00.161-08:00</updated><title type='text'>नेफेड की देनदारियां बढ़कर हुई 1,735 करोड़ रुपये</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt;बिजनेस भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;नई दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;&lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;  कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) की देनदारियां बढ़कर 1,735 करोड़ रुपये हो  गई हैं। हालांकि इस दौरान निगम की लेनदारियां भी करीब 1,780 करोड़ रुपये की  हैं। पिछले साल निगम ने करीब 9 करोड़ रुपये की लेनदारियां निपटाई हैं।  निगम को उम्मीद है कि सरकार चालू वित्त वर्ष के आखिर मार्च 2012 तक निगम की  देनदारियों का निपटारा कर देगी।&lt;br /&gt;नेफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर  राजीव गुप्ता ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के आखिर मार्च 2012 तक सरकार  निगम की देनदारियां निपटा देगी जिससे की वित्त वर्ष 2012-13 में निगम  सुचारू रुप से कार्य कर सकेगा। उन्होंने बताया कि नेफेड की 1,780 करोड़  रुपये की लेनदारियां भी है तथा लेनदारियां के लिए निगम ने प्रयास तेज कर  दिए हैं। चालू वित्त वर्ष में अभी तक 9 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई है तथा  आगामी वित्त वर्ष में इसमें और बढ़ोतरी होने की संभावना है। गुप्ता ने कहा  कि हमने ब्याज की रकम का भुगतान करने के लिए बैंकों से मार्च 2012 तक का  समय लिया हुआ है जिससे निगम को विभिन्न कृषि जिंसों की खरीद-फरोख्त में  सुविधा हो रही है।&lt;br /&gt;कृषि मंत्रालय ने नेफेड को 1,200 करोड़ रुपये  का राहत पैकेज देने का मसौदा तैयार किया था तथा इसके आधार पर सरकार ने  नेफेड में 51 फीसदी हिस्सेदारी की शर्त रखी थी। नेफेड तिलहन, दलहन, कोपरा  और कपास की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए सरकार की नोडल  एजेंसी है। नेफेड ने वर्ष 2003 में देशभर की 62 कंपनियों से व्यापार के लिए  3,962 करोड़ रुपये का समझौता किया था जिसके आधार पर वाणिज्यिक बैंकों से  लोन लिया था। इसमें ज्यादातर कंपनियां न तो आयात करती थी न ही निर्यात करती  थी। इससे कंपनियां नेफेड को पैसे का भुगतान नहीं कर पाई जिससे नेफेड की  बैंकों की देनदारियां बढ़कर 1,735 करोड़ रुपये हो गई है। वर्ष 2010-11 में  नेफेड को 48 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ लेकिन इस दौरान बैंकों के ब्याज के  रुप में ही नेफेड को 170 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा।(Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-46892022214304954?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/46892022214304954/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=46892022214304954' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/46892022214304954'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/46892022214304954'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/1735.html' title='नेफेड की देनदारियां बढ़कर हुई 1,735 करोड़ रुपये'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-5156555885236401896</id><published>2012-01-13T06:28:00.000-08:00</published><updated>2012-01-13T06:30:57.950-08:00</updated><title type='text'>मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का समर्थन</title><content type='html'>&lt;span id="lblmatter" class="Detail" style="font-family: Arial; height: 16px; width: 750px; margin-left: 10px;"&gt;&lt;span class="bodyd"   style="font-family:Mangal;color:#2c2c2c;"&gt; भास्कर &lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt; दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;!--क्चद्धड्डह्यद्मड्डह्म्--&gt;  ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई)  का समर्थन किया है। संगठन के अधिकारियों के मुताबिक इससे उपभोक्ताओं को  विश्वस्तरीय उत्पाद मिल सकेंगे और उत्पादों की गुणवत्ता भी अच्छी होगी।  कंपनियों में आपसी प्रतिस्पर्धा बढऩे के कारण उपभोक्ताओं को वाजिब कीमत पर  उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। हालांकि देशभर के कारोबारी मल्टीब्रांड रिटेल में  एफडीआई की खिलाफत कर रहे हैं।&lt;br /&gt;उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने  गुरुवार को उपभोक्ता संगठनों के साथ बैठक की। बैठक में देशभर के करीब 12  उपभोक्ता संगठन के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद उपभोक्ता समन्वय  परिषद (सीसीसी) के चेयरमैन अमृत लाल साहा ने कहा कि मल्टी ब्रांड रिटेल  में एफडीआई आने से उपभोक्ताओं को बेहतर दाम पर विश्वस्तरीय उत्पाद मिल  सकेंगे। मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई के तहत मौजूदा मसौदे में  विदेशी कंपनियों को कुल खरीद में 30 फीसदी खरीद घरेलू मझौले उद्योगों से  करनी अनिवार्य होगी। इससे घरेलू मझौली कंपनियों को तो फायदा होगा ही साथ ही  देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।&lt;br /&gt;उपभोक्ता संगठन बिंटी के  संयोजक जी सी माथुर ने कहा कि मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई से उपभोक्ताओं  के हितों को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि देश में उपभोक्ताओं के हितों के  लिए पर्याप्त कानून हैं। उन्होंने कहा कि मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई  से देशभर में आधारभूत ढांचा मजबूत होगा जिसका उपभोक्ताओं के साथ ही  उत्पादकों को भी फायदा होगा।&lt;br /&gt;कोर सेंटर के डायरेक्टर एस सी शर्मा  ने कहा कि विदेशी निवेश से कंपनियों में आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे  उपभोक्ताओं को वाजिब दाम पर अच्छे उत्पाद मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि  विदेशी कंपनियों को न्यूनतम 10 करोड़ डॉलर का निवेश करना होगा तथा कुल  निवेश की 50 फीसदी राशि बैक-एंड सुविधा पर खर्च करना अनिवार्य होने के कारण  बुनियादी सुविधाएं बढ़ेगी। हालांकि देशभर के व्यापारी सरकार के इस फैसले  को बड़ी शक की नजर से देख रहे हैं। व्यापारियों का मानना है कि दुनिया की  दैत्याकार रिटेल कंपनियों के सामने छोटे व्यापारियों की दुकान नहीं चल  पाएगी और वे खत्म हो जाएंगे।(Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-5156555885236401896?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/5156555885236401896/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=5156555885236401896' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5156555885236401896'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/5156555885236401896'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/51.html' title='मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का समर्थन'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-9207187555933690936</id><published>2012-01-13T06:27:00.000-08:00</published><updated>2012-01-13T06:28:15.358-08:00</updated><title type='text'>मजबूत डॉलर से इलायची निर्यात बढ़कर पांच गुना</title><content type='html'>&lt;b&gt;मजबूत &lt;/b&gt;डॉलर  और अच्छी क्वालिटी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची को भरपूर  फायदा मिल रहा है। पिछले अप्रैल से नवंबर के दौरान आठ माह में इलायची का  निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बढ़कर पांच गुने से भी ज्यादा  हो गया।&lt;span style="text-align: justify;" class="introTxt"&gt; &lt;p&gt;चालू वित्त वर्ष के पहले आठ माह में इलायची का निर्यात बढ़कर 3,100 टन  हो गया जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 570 टन इलायची का निर्यात  हुआ था इसी तरह इलायची का निर्यात होता रहा तो चालू वित्त वर्ष 2011-12 की  समाप्ति तक इलायची का निर्यात बढ़कर 4,500 से 5,000 टन तक पहुंचने की  संभावना है। निर्यातकों की भारी मांग को देखते हुए घरेलू बाजार में इलायची  की मौजूदा कीमतों में 10 से 12 फीसदी तेजी आने की संभावना है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;सेमैक्स एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर एम. बी. रुबारल ने बताया कि  ग्वाटेमाला के मुकाबले भारतीय इलायची की क्वालिटी अच्छी होने के कारण भारत  से निर्यात लगातार बढ़ रहा है। घरेलू बाजार में इलायची के दाम कम है जबकि  डॉलर की मजबूती से निर्यातकों को मार्जिन अच्छा मिल रहा है। चालू वित्त  वर्ष के पहले आठ महीनों अप्रैल से नवंबर के दौरान निर्यात बढ़कर 3,100 टन  का हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 570 टन का निर्यात हुआ था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;निर्यातकों की मौजूदा मांग को देखते हुए मार्च 2012 तक निर्यात बढ़कर 4,500 से 5,000 टन होने की संभावना है।&lt;br /&gt;इलायची  निर्यातक दीपक पारिख ने बताया कि भारतीय इलायची का भाव अंतरराष्ट्रीय  बाजार में 10 से 16 डॉलर प्रति किलो है जबकि ग्वाटेमाला के निर्यातक 8 से  13 डॉलर प्रति किलो की दर से सौदे कर रहे हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;घरेलू बाजार में इलायची के दाम घटकर न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं जबकि  पिछले दो महीनों से रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत हुआ है। इसीलिए निर्यातकों  का मार्जिन भी बढ़ गया है। कार्डमम ग्रोवर एसोसिएशन के सचिव के. के.  देवेशिया ने बताया कि चालू फसल सीजन में देश में इलायची की पैदावार बढ़कर  17,000-1,8000 टन से भी ज्यादा होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 12,000 टन  की पैदावार हुई थी।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;नीलामी केंद्रों पर इलायची की साप्ताहिक आवक 4.5 से 5 लाख किलो की हो  रही है। दाम नीचे होने के कारण निर्यातकों के साथ घरेलू मांग भी अच्छी है।  उधर ग्वाटेमाला में इलायची की पैदावार 22,000 से 23,000 टन होने की संभावना  है।&lt;br /&gt;अग्रवाल स्पाइसेज के पार्टनर अरुण अग्रवाल ने बताया कि नीलामी  केंद्रों पर 6.5 एमएम की इलायची का भाव 475-475 रुपये, 7 एमएम की इलायची का  500-540 रुपये, 7.5 एमएम का भाव 600-620 रुपये और 8 एमएम का भाव 700-750  रुपये प्रति किलो चल रहा है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पिछले दो महीनों में इसकी कीमतों में 150 से 200 रुपये की गिरावट आई है।  मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में  पिछले सप्ताहभर में इलायची की कीमतों में 4.6 फीसदी की गिरावट आई है। चार  जनवरी को वायदा में इलायची का भाव 646 रुपये प्रति किलो था जबकि गुरुवार को  भाव घटकर 616 रुपये प्रति किलो रह गया। (Business Bhaskar....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;/span&gt; &lt;!--end print text--&gt;   &lt;!--Start_PreviousNews_Next_News--&gt; &lt;div style="float: left; margin-top: 5px; width: 100%;"&gt; &lt;div class="w100p"&gt; &lt;div align="left"&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="cb10"&gt; &lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-9207187555933690936?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/9207187555933690936/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=9207187555933690936' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9207187555933690936'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9207187555933690936'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_6652.html' title='मजबूत डॉलर से इलायची निर्यात बढ़कर पांच गुना'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1242124295188207674</id><published>2012-01-13T06:24:00.002-08:00</published><updated>2012-01-13T06:25:18.566-08:00</updated><title type='text'>शीत से आएगी गेहूं उत्पादन की लहर</title><content type='html'>उत्तरी राज्यों और देश के अन्य हिस्सों में जारी ठंडे मौसम का गेहूं की फसल  पर बढिय़ा असर होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा रबी सत्र 2011-12  के दौरान गेहूं का उत्पादन 8.7 करोड़ टन तक पहुंच सकता है, जबकि लक्ष्य 8.4  करोड़ टन उत्पादन का है। पिछले साल अनुकूल मौसम और प्रौद्योगिकी के ज्यादा  इस्तेमाल की वजह से 8.593 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।&lt;br /&gt;फिर भी, इस मर्तबा गेहूं का रकबा पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम या ज्यादा  रह सकता है क्योंकि देश के कुछ हिस्सों में बुआई अब भी जारी है, जिसके 20  जनवरी तक पूरा होने की संभावना है।&lt;br /&gt;केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस वर्ष 6 जनवरी तक गेहूं  बुआई की स्थिति पिछले साल की तुलना में बेहतर थी, फिर भी अंतिम आंकड़े  फिलहाल तैयार होने हैं। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'पूरी बुआई अब तक  नहीं हुई है, इसलिए हमने गेहूं उत्पादन संबंधी पहले के अनुमान में संशोधन  नहीं किया है।'&lt;br /&gt;वैज्ञानिकों का मानना है कि तापमान में अचानक गिरावट आना रबी फसलों के लिए  बढिय़ा है, खास तौर पर गेहूं की फसल के लिए यह मौसम ज्यादा अनुकूल है। लेकिन  देश के उत्तरी हिस्से में बारिश के बाद चलने वाली शीतलहर से  धुंध बढ़ गई  है जिसका गेहूं की फसल पर विपरीत असर हो सकता है क्योंकि इससे प्रकाश  संश्लेषण की अवधि घट जाती है, लिहाजा रबी फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने  की आशंका है। शीतलहरी को आम तौर पर गेहूं की फसल के लिए अच्छा माना जाता  है। उत्तरी राज्यों में गेहूं की फसल फिलहाल शुरुआती चरण में है।&lt;br /&gt;गेहूं अनुसंधान संस्थान की परियोजना निदेशक इंदु शर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड  को बताया, ' इस वर्ष मौसम में कोई असामान्य बदलाव नहीं आया है, इसलिए इस  साल गेहूं उत्पादन 8.7 करोड़ टन के स्तर पर पहुंच सकता है। पिछले साल 8.2  करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अनुकूल मौसम की वजह  से इस फसल का उत्पादन 8.593 करोड़ टन तक पहुंच गया था। इस वर्ष भी गेहूं का  रकबा 2.9 करोड़ हेक्टेयर रहने की संभावना है, जो पिछले साल के रकबे के  लगभग समान ही है।'&lt;br /&gt;पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पौध क्लिनिक प्रभारी एवं वैज्ञानिक एस के थिंड  को उम्मीद है कि उत्तरी राज्यों में इस वर्ष गेहूं की 5-10 फीसदी  उत्पादकता बढ़ेगी। पूर्व कृषि अधिकारी यशपाल वर्मा ने कहा कि गेहूं का  उत्पादन मुख्य रूप से गेहूं के पौधों में अंकुरणं की स्थिति पर निर्भर करता  है।&lt;br /&gt;उच्च तापमान की वजह से 20 दिसंबर तक थोड़ी पहले उगाई जाने वाली फसल के  पौधों में कम अंकुरण थे। फिर भी अब, मौसम बदलने और तापमान में बहुत गिरावट  के कारण फसल को फायदा हो सकता है।&lt;br /&gt;पंजाब में फसल विविधीकरण की वजह से गेहूं का रकबा तकरीबन 35 लाख हेक्टेयर  रह सकता है, जो कमोबेश पिछले साल के समान ही है। राज्य का कृषि विभाग  उम्मीद कर रहा है कि इस वर्ष 1.554 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होगा।  हरियाणा में 24 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन में गेहूं की बुआई हुई है।  यहां इस साल 1.17 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1242124295188207674?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1242124295188207674/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1242124295188207674' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1242124295188207674'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1242124295188207674'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_3044.html' title='शीत से आएगी गेहूं उत्पादन की लहर'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1548032361059608805</id><published>2012-01-13T06:24:00.001-08:00</published><updated>2012-01-13T06:24:52.640-08:00</updated><title type='text'>पाम तेल व जेट्रोफा के लिए होंगी बेंचमार्क कीमतें!</title><content type='html'>खाद्य तेल के बढ़ते आयात बिल पर लगाम कसने की खातिर सरकार ने पाम तेल व  जेट्रोफा के लिए औपचारिक संकेतक के रूप में बेंचमार्क कीमतें तय करने का  फैसला किया है। इसके लिए कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) कवायद शुरू कर  चुका है। अगर हम घरेलू उपभोग के लिए आयात करते हैं तो भी इस पर विचार होना  चाहिए कि आयात कीमतों के समतुल्य घरेलू बाजार में उचित कीमतें क्या हो।  सीएसीपी ने पहले ही नारियल तेल के लिए ऐसी कवायद शुरू कर दी है।&lt;br /&gt;आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि संकेतक के रूप में बेंचमार्क कीमतें एमएसपी की  तरह काम नहीं करेंगी क्योंकि सरकार ने किसी और फसल को एमएसपी के दायरे में  शामिल नहीं करने का फैसला किया है क्योंकि अगर इन जिंसों की कीमतें एमएसपी  से नीचे आती हैं तो उसे खरीदने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। चूंकि  पीडीएस के तहत सरकार पर खाद्य तेल की सब्सिडी का बोझ है और खाद्य तेल का  आयात बिल बढ़ रहा है, ऐसे में इसकी बेंचमार्क कीमतों की दरकार है। सूत्रों  ने कहा कि ज्यादातर कच्चे तेल का आयात होता है और फिर घरेलू बाजार में इसे  बेचने से पहले शोधित किया जाता है। बेंचमार्क कीमतों से इसका विश्लेषण करने  में मदद मिलेगी कि क्या आयात बिल ज्यादा है या फिर विक्रय मूल्य लागत से  ज्यादा है, साथ ही खाद्य महंगाई में यह कितना योगदान दे रहा है।&lt;br /&gt;खाद्य तेल का आयात बिल साल 2011-12 में यह करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता  है, जो ऊर्जा व यूरिया के बाद तीसरा सबसे बड़ा बिल होगा। भारत दुनिया का  चौथा सबसे बड़ा खाद्य तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का आधा हिस्सा आयात  के जरिए पूरा करता है।&lt;br /&gt;देश में उत्पादन बढऩे और रुपये में कमजोरी के चलते आयात लागत बढ़ी है। इससे  2010-11 में भारत का खाद्य तेल आयात पिछले साल के 92.4 लाख टन के मुकाबले  6.2 फीसदी घटकर 86.7 लाख टन रह गया। मौजूदा समय में सरकार की बाजार  हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) है। वानिकी व उन कृषि जिंसों की कीमतों के लिए यह  अस्थायी फॉर्मूला है, जो जल्द खराब हो सकते हैं और जो न्यूनतम समर्थन  मूल्य के दायरे में नहीं है।&lt;br /&gt;कृषि मंत्रालय ने राज्यों व कृषि विश्वविद्यालयों को दलहन व तिलहन की  हाइब्रिड किस्में विकसित करने की सलाह दी है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया  है कि देश में उपलब्ध मौजूदा किस्मों की हाइब्रिड किस्में विकसित की जानी  चाहिए, न कि जीएम बीज। ये चीजें घरेलू कीमत का फॉर्मूला, आयात शुल्क और पाम  तेल व अन्य तिलहनों के लिए एमआईएस पर मंत्रालय की कवायद का हिस्सा है। पाम  तेल का उत्पादन अभी काफी कम होता है। दूसरी ओर बायोफ्यूल का बड़ा स्रोत  जेट्रोफा है। फिलहाल फिलिपींस व ब्राजील में जेट्रोफा तेल का इस्तेमाल  बायोडीजल के उत्पादन में होता है, जहां यह अपने आप उगता है। ब्राजील के  दक्षिण पूर्वी, उत्तरी व उत्तर पूर्वी इलाके में इसकी खेती होती है। भारत  में भी इस तेल को प्रोत्साहित किया गया है। कई शोध संस्थाओं व महिला  स्वसहायता समूहों ने भी देश में बड़े पैमाने पर जेट्रोफा की खेती शुरू की  है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1548032361059608805?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1548032361059608805/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1548032361059608805' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1548032361059608805'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1548032361059608805'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_13.html' title='पाम तेल व जेट्रोफा के लिए होंगी बेंचमार्क कीमतें!'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1149885581211714525</id><published>2012-01-12T01:36:00.001-08:00</published><updated>2012-01-12T01:36:51.742-08:00</updated><title type='text'>सीसीआई ने कपास की खरीद शुरू की</title><content type='html'>आर. एस. राणा नई दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;कॉटन &lt;/b&gt;कारपोरेशन  ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने मंगलवार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास  की खरीद शुरू कर दी। पिछले अक्टूबर से शुरू मौजूदा विपणन सीजन वर्ष 2011-12  में खरीद के लिए सीसीआई ने देशभर की मंडियों में 250 खरीद केंद्र बनाए  हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू विपणन सीजन के लिए निगम  ने मंगलवार से कपास की खरीद शुरू कर दी है और खरीद के लिए देशभर की मंडियों  में 250 केंद्र स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में  कपास के दाम एमएसपी से ऊपर बने हुए हैं इसलिए सीसीआई के खरीद केंद्रों पर  आवक सीमित मात्रा में ही हुई। खरीफ विपणन सीजन 2011-12 के लिए केंद्र सरकार  ने (मीडियम स्टेपल) वाली कपास का एमएसपी 2,800 रुपये और (लांग स्टेपल)  वाली कपास का एमएसपी 3,300 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उन्होंने बताया कि पिछले 20 दिनों में उत्पादक मंडियों में कपास की  कीमतों में करीब 7.7 फीसदी की तेजी आ चुकी है। मंगलवार को अहमदाबाद में  शंकर-6 किस्म की कपास का भाव बढ़कर 37,000 से 37,500 रुपये प्रति कैंडी (एक  कैंडी-356 किलो) हो गया जबकि 20 दिसंबर को इसका भाव घटकर 34,500 से 34,800  रुपये प्रति कैंडी रह गया था। दाम ऊंचे बने रहे तो निगम के खरीद केंद्रों  पर आवक कम ही रहेगी लेकिन अगर कीमतों में गिरावट आई तो आवक बढ़ जाएगी।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उन्होंने बताया कि निगम को रिजर्व स्टॉक के लिए करीब 20 लाख गांठ (एक  गांठ-170 किलो) कपास की खरीद तो करनी ही होगी। पिछले साल दाम एमएसपी से ऊपर  होने के बावजूद निगम ने 13 लाख गांठ कपास की खरीद बाजार मूल्य पर की थी।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में कपास  की दैनिक आवक 30,000 गांठ की हो रही है। उधर गुजरात और महाराष्ट्र की  मंडियों में आवक क्रमश: 65,000 और 55,000 गांठ की आवक हो रही है।  अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पिछले बीस दिनों में कपास की कीमतों में तेजी  आई है। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1149885581211714525?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1149885581211714525/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1149885581211714525' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1149885581211714525'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1149885581211714525'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_4678.html' title='सीसीआई ने कपास की खरीद शुरू की'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-9218449749344920305</id><published>2012-01-12T01:34:00.000-08:00</published><updated>2012-01-12T01:35:35.169-08:00</updated><title type='text'>आवक कम होने से तेजी आने लगी दालों में</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;दालों &lt;/b&gt;की  कीमतों में फिर से तेजी आने लगी है। पिछले सप्ताह भर में दालों की थोक  कीमतों में 250 से 700 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। उत्पादक  मंडियों में दलहन की आवक में कमी आई है जबकि रुपये के मुकाबले डॉलर की  मजबूती से आयात पड़ता महंगा पड़ रहा है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दालों की घरेलू मांग भी पहले की तुलना में बढ़ी है इसीलिए मौजूदा कीमतों  में और भी तेजी की संभावना है। दलहन के थोक कारोबारी निशांत मित्तल ने  बताया कि दालों की मांग पहले की तुलना में बढ़ गई है जबकि उत्पादक मंडियों  में आवकों में कमी आई है। रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से आयात पड़ता  महंगा होने के कारण आयात सौदे भी सीमित मात्रा में हो रहे हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;हालांकि अब डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ है। आयात कम हो पाने के कारण दालों की  थोक कीमतों में पिछले सप्ताहभर में 250 से 700 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी  आ चुकी है। दिल्ली में उड़द दाल का भाव बढ़कर 4,100 से 6,200 रुपये, अरहर  दाल का 4,900 से 6,300 रुपये, मूंग दाल का 5,000 से 6,400 रुपये, मसूर दाल  का भाव 3,450 से 4,400 रुपये और चना दाल का 3,900 से 4,500 रुपये प्रति  क्विंटल हो गया।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;बंदेवार दाल एंड बेसन मिल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनिल बंदेवार ने बताया  कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों की मंडियों में दालों की आवकों  में कमी आई है। रबी दलहन की आवक मार्च-अप्रैल में बनेगी तथा रबी में बुवाई  में कमी आई है जिससे तेजी को बल मिल रहा है। महाराष्ट्र की मंडियों में  उड़द का भाव बढ़कर 3,700 रुपये, अरहर का भाव 3,400-3,700 रुपये, मूंग का  भाव 4,300 रुपये और चने का भाव 3,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;रिक्का ग्लोबल इम्पैक्स लिमिटेड के डायरेक्टर कर्ण अग्रवाल ने बताया कि  रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होने से नवंबर-दिसंबर के दौरान आयात सौदे कम  हुए हैं। जबकि तंजानिया की मूंग मुंबई पहुंच 4,175 रुपये और पेडीसेवा की  4,560 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। लेमन अरहर का भाव 3,400 रुपये, उड़द  एसक्यू 3,800 रुपये और आस्ट्रेलियाई चने का भाव 3,500 रुपये प्रति क्विंटल  हो गया है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर के दौरान  16.59 लाख टन दलहन का आयात हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 16.29  लाख टन का आयात हुआ था। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में दलहन की  बुवाई घटकर 140.66 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान  अवधि में 142.38 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-9218449749344920305?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/9218449749344920305/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=9218449749344920305' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9218449749344920305'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9218449749344920305'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_9369.html' title='आवक कम होने से तेजी आने लगी दालों में'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2763746680436615136</id><published>2012-01-12T01:33:00.000-08:00</published><updated>2012-01-12T01:34:01.747-08:00</updated><title type='text'>प्याज ने बिगाड़ा किसानों और निर्यातकों का साज</title><content type='html'>पिछले साल ग्राहकों की आंखों से आंसू निकालने वाला प्याज इस बार किसानों,  कारोबारियों और निर्यातकों को रुला रहा है। भारी पैदावार होने से मंडियों  में प्याज की भरमार है, जिसके चलते किसानों को फसल के सही भाव नहीं मिल रहे  हैं।&lt;br /&gt;अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन और मिस्र का सस्ता प्याज भी भारतीय  कारोबारियों का सिरदर्द बना हुआ है। अगले महीने से मंडी में नए प्याज की  आवक शुरू होने के बाद कीमतों में और गिरावट की आशंका है। महाराष्ट्र की  प्रमुख थोक मंडी पुणे, नासिक, मुंबई और अहमदनगर में प्याज का दाम घटकर 250  रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है। फिलहाल थोक मंडियों में प्याज 250 रुपये  से 600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा है।&lt;br /&gt;थोक बाजार में प्याज के भाव का असर खुदरा बाजार पर भी दिख रहा है। कुछ  हफ्ते पहले तक 22 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकने वाले  प्याज का  दाम खुदरा बाजार में अब 10 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। नवी मुंबई  एपीएमसी मार्केट के प्याज व्यापारी मोहनलाल पुतलानी के अनुसार बाजार में  प्याज की आवक बहुत ज्यादा है जबकि ग्राहक नहीं के बराबर हैं। प्याज के  गिरते भाव से किसानों के साथ निर्यातक भी परेशान हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार  में घरेलू प्याज की मांग कमजोर पड़ी है। नेफेड से मिली जानकारी के अनुसार  अप्रैल-दिसंबर 2011 में देश से कुल 10,37,978 टन प्याज का निर्यात हुआ है,  जो पिछले साल की सामान्य अवधि से 23 फीसदी कम है। अप्रैल-दिसंबर 2010 में  13,40,772 टन प्याज का निर्यात किया गया था। &lt;br /&gt;कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन और मिस्र से आने  वाला प्याज 200 डॉलर प्रति टन से भी कम कीमत पर बिक रहा है। जबकि भारतीय  प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 250 डॉलर प्रति टन है। कारोबारियों  का कहना है कि अब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में देसी प्याज के दाम ज्यादा  हैं, जिस कारण ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।&lt;br /&gt;पिछले साल प्याज के ऊंचे भाव देखते हुए किसानों ने इसकी ज्यादा खेती की।  मौसम अनुकूल होने के कारण भी पैदावार बढ़ी है लेकिन किसानों के लिए लागत  निकालना भी मुश्किल हो रहा है। पुणे मंडी में प्याज लाने वाले किसानों का  कहना है कि उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं और मजबूरी में औने पौने दाम पर  माल बेचना पड़ रहा है।&lt;br /&gt;किसानों की बात मानी जाए, तो कारोबारी 100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर भी प्याज खरीदने को तैयार नहीं हैं।&lt;br /&gt;एपीएमसी अधिकारियों के अनुसार पिछले तीन दिन में महाराष्ट्र की विभिन्न  मंडियों में 40 हजार टन से ज्यादा प्याज आया है। आने वाले समय में आवक और  बढ़ेगा। ऐसे में प्याज का भाव और गिरने की आशंका है।&lt;br /&gt;थोक मंडियों में दो-ढाई रुपये किलो बिकने वाला प्याज मुंबई के खुदरा बाजार  में 10-20 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। इस पर कांग्रेस के प्रवक्ता संजय  निरुपम ने राज्य के कृषि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल से मुलाकात की है।  उन्होंने उम्मीद जताई कि मार्च के बाद दाम घटने शुरू हो जाएंगे। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2763746680436615136?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2763746680436615136/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2763746680436615136' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2763746680436615136'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2763746680436615136'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_6413.html' title='प्याज ने बिगाड़ा किसानों और निर्यातकों का साज'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-8797997284237110366</id><published>2012-01-12T01:32:00.002-08:00</published><updated>2012-01-12T01:33:20.934-08:00</updated><title type='text'>लाख हुए जतन, पर ग्वार में जारी रहा उफान</title><content type='html'>ग्वार की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) की सभी  कोशिशें विफल साबित होती दिख रही हैं। वायदा और हाजिर दोनों बाजारों में  ग्वार की कीमतें हर दिन रिकॉर्ड बना रही हैं। बुधवार को हाजिर और वायदा  दोनों बाजारों में ग्वार गम की कीमतें 30,000 रुपये प्रति क्ंिवटल और ग्वार  की कीमतें 9,000 रुपये प्रति क्ंिवटल को पार कर गईं।&lt;br /&gt;एनसीडीईएक्स पर ग्वार गम का मार्च अनुबंध बुधवार को चार फीसदी बढ़त के साथ  30,123 रुपये प्रति क्ंिवटल पर पहुंच गया जबकि दूसरे अनुबंध भी 30 हजार  रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बोले जा रहे हैं। एनसीडीईएक्स पर ग्वार का  मार्च अनुबंध बढ़कर 9,127 रुपये और फरवरी अनुबंध 9,015 रुपये प्रति क्ंिवटल  पर पहुंच गया। ग्वार के सबसे बड़े हाजिर बाजार जयपुर मंडी में भी ग्वार गम  की कीमतें 30 हजार और ग्वार 9,000 रुपये प्रति क्विंटल के मनोवैज्ञानिक  स्तर को छू गईं।&lt;br /&gt;ग्वार की फर्राटा भरती कीमतों को मार्जिन का लगाम और एफएमसी का चाबुक भी  नहीं रोक पाया है। एनसीडीईएक्स के तीन बार विशेष मार्जिन बढ़ाए जाने के  बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। इस समय ग्वार और ग्वार गम के सौदों पर  कुल 40 फीसदी मार्जिन है, जिसमें 10 फीसदी विनिमय मार्जिन और 30 फीसदी  विशेष मार्जिन शामिल है। मार्जिन बढ़ाने के साथ ही एफएमसी ने ग्वार सौदों  की जांच के लिए एक समिति भी गठित की थी, जिसने ऐसे कारोबारियों की पहचान भी  की जो ग्वार सौदों में गड़बड़ी कर कीमतें बढ़ा रहे थे। बावजूद पिछले एक  महीने में ग्वार और ग्वार गम के वायदा सौदों में लगभग हर दिन सर्किट लगा है  और एक महीने में कीमतों में करीब 55 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक साल  में ग्वार गम की कीमतों में 320 फीसदी और ग्वार की कीमतों में 250 फीसदी  बढ़ोतरी हो चुकी है।&lt;br /&gt;ग्वार गम और ग्वार की बढ़ती कीमतों की वजह निर्यात मांग अधिक होने, कमजोर  पैदावार और सटोरियों की दिलचस्पी को बताया जा रहा है। ऐंजल कमोडिटी की  वेदिका नार्वेकर कहती हैं कि विदेशों में भारी मांग के कारण कीमतें बढ़ रही  हैं, लेकिन मौजूदा स्तरों पर पैसा लगाना मेरे विचार से सही नहीं होगा।  एफएमसी ग्वार की कीमतों को इस तरह नहीं बढऩे देगा और संभव है कि वह जल्द ही  ग्वार के वायदा सौदों पर ट्रेड टू ट्रेड का नियम लागू कर दे यानी 100  फीसदी मार्जिन।&lt;br /&gt;अप्रैल से सितंबर के बीच ग्वार गम का निर्यात 68 फीसदी बढ़ा है। इस दौरान  भारत से 3,710.83 करोड़ रुपये का 2.85 लाख टन ग्वार गम का निर्यात हुआ है  जबकि पिछले साल 1.70 लाख टन ग्वार गम का निर्यात हुआ था। माना जा रहा है कि  2011 में ग्वार कम का 4.03 लाख टन का हुआ है। कारोबारियों की मानी जाए तो  अमेरिका, रूस, चीन, जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रेलिया में ग्वार की जोरदार मांग  बनी हुई है।&lt;br /&gt;राजस्थान सरकार द्वारा मंगलवार देर शाम जारी दूसरे अग्रिम अनुमान में कहा  गया है कि ग्वार का कुल उत्पादन बढ़कर 12.09 लाख टन पर पहुंच जाएगा। सितंबर  में जारी पहले अग्रिम अनुमान में 11.36 लाख टन उत्पादन का अनुमान था।  राज्य में ग्वार का औसत रकबा बढ़कर 30.9 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-8797997284237110366?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/8797997284237110366/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=8797997284237110366' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/8797997284237110366'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/8797997284237110366'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_3206.html' title='लाख हुए जतन, पर ग्वार में जारी रहा उफान'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4980632363343874389</id><published>2012-01-12T01:32:00.001-08:00</published><updated>2012-01-12T01:32:46.766-08:00</updated><title type='text'>उर्वरक की ऊंची लागत से मुनाफे को चपत</title><content type='html'>कच्चे कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और विनिमय दरों की विपरीत चाल की  वजह से मिश्रित उर्वरकों की कीमतें करीब 25 फीसदी बढ़ी हैं। लिहाजा तीसरी  तिमाही में उर्वरक कंपनियों की शुद्ध बिक्री में 20 फीसदी की उछाल की  संभावना है। कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को शामिल करते हुए गैर-यूरिया  उर्वरकों की कीमतें पिछले एक साल में 80 फीसदी से ज्यादा बढ़ी हैं।&lt;br /&gt;बाटलीवाला ऐंड करनानी के विश्लेषक ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिति  सामान्य होने के बाद प्रमुख कच्चे माल मसलन फॉस्फोरिक एसिड का आयात स्थिर  हो रहा है। डॉलर में मजबूती के चलते पडऩे वाला प्रभाव थोड़ा कम हुआ है  क्योंकि आपूर्ति करने वाली कंपनियां कच्चे माल की कीमतों में दिसंबर 2011  से कटौती पर सहमत हुई हैं।&lt;br /&gt;ऑपरेटिंग मार्जिन पर अभी दबाव है और रुपये में आई गिरावट के चलते यह 1.25  फीसदी नीचे है। इस वजह से आयातित उर्वरकों की लागत में बढ़ोतरी की संभावना  है। एक ओर जहां चंबल फर्टिलाइजर, जीएनएफसी और जीएसएफसी के मुनाफे पर ज्यादा  दबाव होगा, वहीं टाटा केमिकल्स के मुनाफे में सुधार की संभावना है।&lt;br /&gt;उर्वरक विनिर्माताओं के शुद्ध मुनाफे में महज 2 फीसदी की उछाल की संभावना  है और इसकी वजह सब्सिडी के भुगतान में देरी के चलते ब्याज पर बढ़ता खर्च  है। शिपिंग कारोबार में चंबल फर्टिलाइजर को नुकसान, कैपरोलेक्टम सेगमेंट  में जीएसएफसी का कम मुनाफा और उच्च बेस इफेक्ट के चलते कोरोमंडल इंटरनैशनल,  टाटा केमिकल्स और जुआरी एग्रो के शुद्ध मुनाफे में हुई 20 फीसदी की&lt;br /&gt;ज्यादा बढ़ोतरी खत्म हो जाने&lt;br /&gt;की संभावना है।&lt;br /&gt;ऐडलवाइस रिसर्च के मुताबिक कच्चे माल आदि की आसान उपलब्धता के चलते मिश्रित  उर्वरक की मात्रा स्थिर रहने की संभावना है, वहीं यूरिया के मामले में यह  नरम रह सकता है। आयात के चलते डीएपी व एमओपी की उपलब्धता में सुधार हुआ है,  लिहाजा उर्वरकों की विनिर्मित मात्रा नरम रह सकती है, वहीं कारोबारी  उर्वरक की मात्रा मजबूत रह सकती है।&lt;br /&gt;इस बीच, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि  नीतिगत मोर्चे पर सरकार ज्यादा काम नहीं कर पाई है। राजकोषीय घाटे की  स्थिति में सुधार के लिए पी ऐंड के उर्वरकों पर सब्सिडी में कटौती और इस  क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नई यूरिया निवेश नीति अब तक  पटरी पर नहीं आ सकी है।&lt;br /&gt;विश्लेषकों ने कहा कि प्रस्तावित एनपीके सब्सिडी में कटौती यूरिया को  विनियंत्रित किए बिना नहीं हो पाएगी और इससे उर्वरक के उपभोग में असंतुलन  पैदा हो सकता है क्योंकि सब्सिडी में कटौती के बाद यूरिया के मुकाबले डीएपी  छह गुना महंगा हो जाएगा। इससे मिट्टी भी असंतुलित हो सकती है और यह स्थिति  1992 की जैसी होगी जब गैर-यूरिया उत्पाद पूरी तरह विनियंत्रित कर दिए गए  थे। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4980632363343874389?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4980632363343874389/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4980632363343874389' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4980632363343874389'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4980632363343874389'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_2352.html' title='उर्वरक की ऊंची लागत से मुनाफे को चपत'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-7629504364605341682</id><published>2012-01-12T01:31:00.000-08:00</published><updated>2012-01-12T01:32:13.656-08:00</updated><title type='text'>कपास की गर्मी से महंगा हो सकता है परिधान</title><content type='html'>कपास के भावों में लगातार तेजी ने परिधान उद्योग की मुश्किल बढ़ा दी है।  मांग कम होने से पहले ही दुखी परिधान निर्माताओं पर अब लागत का भी बोझ पड़  रहा है। उनके मुताबिक कपास के दामों में इजाफा जारी रहा तो कपड़े 3 से 5  फीसदी महंगे किए जा सकते हैं।&lt;br /&gt;विदेशी बाजारों की मांग से पिछले 20 दिन में कपास 7 फीसदी तक उछल गई है।  बाजार के जानकार मान रहे हैं कि कीमतें अभी नरम नहीं होंगी। क्लोदिंग  मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बिजनेस  स्टैंडर्ड से कहा कि परिधान उद्योग की लागत कपास की वजह से बढ़ रही है,  जिसका सीधा असर कपड़ों की कीमत पर होगा। अगर कपास और महंगा हुआ तो कीमत  बढ़ानी ही पड़ेगी।&lt;br /&gt;महिलाओं के लिए परिधान बनाने वाली फर्म नसीम क्रिएटिव के असद फकीह के  मुताबिक फैब्रिक के दाम 30 से बढ़कर 35 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गए हैं,  इसलिए परिधान महंगे करने पड़ सकते हैं। देहली हिंदुस्तानी मर्कंटाइल  एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश बिंदल को भी कपड़ा महंगा होने के आसार दिख रहे  हैं। (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-7629504364605341682?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/7629504364605341682/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=7629504364605341682' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7629504364605341682'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7629504364605341682'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_6091.html' title='कपास की गर्मी से महंगा हो सकता है परिधान'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-4722634004330958485</id><published>2012-01-12T01:29:00.000-08:00</published><updated>2012-01-12T01:30:38.079-08:00</updated><title type='text'>बजट में सरकार से बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं!</title><content type='html'>&lt;p&gt;बजट की तारीख का ऐलान अभी नहीं हुआ है लेकिन बजट कि तैयारियां जोरों पर शुरू हैं। &lt;strong&gt;वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी&lt;/strong&gt; ने किसानों के साथ बजट से पहले बैठक की है। इस बैठक में वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र की जरूरतों को समझने की कोशिश भी की है।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वित्त  मंत्री के मुताबिक कृषि उत्पादों की कीमतें तय करने के लिए रणनीति बनाना  बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने कृषि क्षेत्र में सब्सिडी के तौर-तरीकों  में सुधार करने की जरूरत को अहम बताया है। को-ऑपरेटिव सोसायटी पर चर्चा  करते हुए वित्तमंत्री ने  कहा कि कोऑपरेटिव सोसायटी को टैक्स छूट मिलनी  चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वित्त मंत्री के साथ बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े  लोगों ने बजट से जुड़ी अपनी मांगों और जरूरतों को सामने रखा। वहीं अगले 10  दिनों तक यह सिलसिला जारी रहेगा, जहां हर क्षेत्र के प्रतिनिधी अपनी-अपनी  मांगे रखेंगे। लेकिन माना जा रहा है 2 महीने बाद जब बजट पेश किया जाएगा तो  लोगों के हाथों में निराशा ही लगने वाली है। क्योंकि सरकारी खजाने पर बढ़ते  बोझ से परेशान सरकार इस बार बजट मे कोई ऐसा ऐलान नही करने वाली है जिसे  सरकारी खर्च बढ़े।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस साल बजट में सरकार से किसी बड़े ऐलान की  उम्मीद लगाना उचित नहीं होगा। कयोंकि आमदानी के मुकाबले सरकार का खर्च  ज्यादा है और सरकार का वित्त घाटा 4.5 फीसदी के लक्ष्य को पार करता दिखाई  दे रहा है।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वहीं कर वसूली के लक्ष्य को हासिल कर पाना भी  सरकार के लिए मुश्किल लग रहा है। डिसइंवेस्टमेंट से सरकार का 40 हजार करोड़  रूपये जुटाने का लक्ष्य था। लेकिन अब तक सरकार सिर्फ करीब 1100 करोड़ रुपये  ही जुटा पायी हैं। ऐसे में बजट में बड़े ऐलान करके सरकार सकरारी खजाने के  बोझ को और बढ़ाना नहीं चाहेगी।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;विकास की रफ्तार भी धीमी  पड़ती जा रही है। ऐसे में टैक्स की दर बढ़ाना भी मुश्किल है। हालांकि बजट  में आर्थिक सुधार के नाम पर सेवा कर की नकारात्मक सूची का ऐलान हो सकता है।  जिससे सर्विस टैक्स कलेक्शन मे 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। (CNBC Awaj)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-4722634004330958485?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/4722634004330958485/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=4722634004330958485' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4722634004330958485'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/4722634004330958485'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_12.html' title='बजट में सरकार से बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं!'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-6127081680112928309</id><published>2012-01-10T05:52:00.000-08:00</published><updated>2012-01-10T05:53:04.815-08:00</updated><title type='text'>बैंकों को कमोडिटी कारोबार की अनुमति देने की सिफारिश</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;हाल &lt;/b&gt;ही में  उपभोक्ता मामलों पर संसदीय स्थाई समिति ने कमोडिटी वायदा बाजार में बैंक  और घरेलू वित्तीय संस्थाओं को कारोबार करने के लिए अनुमति देने की सिफारिश  की है। समिति का तर्क है कि इससे जिंस वायदा कारोबार में तो बढ़ोतरी होगी  ही, साथ में बैंकों के शामिल होने से किसानों की भागीदारी बढ़ सकेगी।  हालांकि इस पर फैसला वित्त मंत्रालय ही करेगा। वित्त मंत्रालय की अनुमति  मिलने के बाद ही बैंकों और वित्तीय संस्थाएं जिंस वायदा में कारोबार कर  सकेंगी।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उपभोक्ता मामले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उपभोक्ता  मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने बैंकों तथा घरेलू वित्तीय संस्थाओं को  जिंस वायदा में कारोबार करने की मंजूरी देने की सिफारिश कर दी है। हालांकि  स्थायी समिति ने जिंस वायदा कारोबार में विदेशी निवेश को मंजूरी देने से  इंकार कर दिया है। स्थायी समिति के अनुसार विदेशी निवेश को मंजूरी देने से  जिंसों की मांग और सप्लाई पर अंतर पड़ सकता है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उन्होंने बताया कि बैंक और वित्तीय संस्थाओं के शामिल होने से जिंस  वायदा के कारोबार में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। साथ ही इसमें  किसानों की भागीदारी भी बढ़ेगी।  जिंस वायदा का कारोबार लगातार बढ़ रहा है  तथा इसमें भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है लेकिन किसानों की भागीदारी अभी भी  नगण्य है। बैंक छोटे-छोटे किसानों को एक सामूहिक मंच उपलब्ध करा सकते हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बैंकों पर सबसे ज्यादा विश्वास भी करते  हैं। बैंकों के सहयोग से किसान जिंसों का वायदा कारोबार करेंगे तो उन्हें  अपनी उपज का सही दाम मिलने में भी आसानी होगी। इसके अलावा वेयर हाउस में  रखी जिंसों के बदले में बैंक किसानों को तात्कालिक ऋण भी प्रदान कर सकते  हैं। इससे बाजार में धन की उपलब्धता के साथ ही प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-6127081680112928309?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/6127081680112928309/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=6127081680112928309' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6127081680112928309'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/6127081680112928309'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_9068.html' title='बैंकों को कमोडिटी कारोबार की अनुमति देने की सिफारिश'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-7321056649162731825</id><published>2012-01-10T05:51:00.000-08:00</published><updated>2012-01-10T05:52:02.846-08:00</updated><title type='text'>फीड में उछाल से पोल्ट्री उत्पादकों को हुआ घाटा</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;फीड&lt;/b&gt; की  कीमतों के मुकाबले अंडे और चिकन के दाम लुढ़कने के कारण पोल्ट्री उत्पादकों  को घाटा उठाना पड़ रहा है। पिछले तीन महीनों में मक्का की कीमतों में 33.3  फीसदी, सोयाखली के भाव में 26.6 फीसदी और बाजरा के दाम 23.5 फीसदी बढ़  चुके हैं। जबकि चिकन के दाम पिछले साल की तुलना में 20 फीसदी और अंडे का  दाम 8.7 फीसदी कम है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;गहलोत फीड मिल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस गहलोत ने बताया कि कच्चे  माल की कीमतों में आई तेजी से पोल्ट्री फीड के दाम 350 से 400 रुपये बढ़कर  भाव 1,900 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि फीड  में सबसे ज्यादा उपयोग मक्का, सोयाखली और बाजरा का होता है। मक्का की  कीमतें बढ़कर 1,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जबकि अक्टूबर के शुरू में  इसका भाव 1,050 रुपये प्रति क्विंटल था। (Business Bhaskar)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-7321056649162731825?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/7321056649162731825/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=7321056649162731825' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7321056649162731825'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/7321056649162731825'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_2315.html' title='फीड में उछाल से पोल्ट्री उत्पादकों को हुआ घाटा'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-1303260241776420703</id><published>2012-01-10T05:49:00.000-08:00</published><updated>2012-01-10T05:51:11.344-08:00</updated><title type='text'>पीडीएस के लिए दलहनों का आयात तिहाई रह गया</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;b&gt;कंपनियां &lt;/b&gt;सार्वजनिक  वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आवंटन के लिए दलहन आयात में बेरुखी बरत रही  हैं। चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले आठ महीनों अप्रैल से नवंबर के दौरान  पीडीएस में आवंटन के लिए सार्वजनिक कंपनियों ने केवल 76,000 टन दलहन का ही  आयात है जबकि वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान 2.6 लाख टन दालों का आयात किया  गया था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उपभोक्ता मामले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घरेलू बाजार  में दालों की कीमतों में कमी आने के कारण चालू वित्त वर्ष में राज्यों की  मांग में कमी आई है। इसलिए सार्वजनिक कंपनियां आयात सीमित मात्रा में कर  रही है। पीडीएस में आवंटन के लिए सरकार ने चार सार्वजनिक कपंनियों एसटीसी,  एमएमटीसी, पीईसी और नेफेड को अधिकृत किया हुआ है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पीडीएस के तहत आवंटन के लिए सार्वजनिक कंपनियों को सरकार आयातित दालों  पर 10 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी देती है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष  2010-11 में पीडीएस में आवंटन के लिए 12 राज्यों ने दालों का उठान किया था।  इस दौरान सार्वजनिक कंपनियों ने 2.6 लाख टन दलहन का आयात किया था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;चालू वित्त वर्ष 2011-12 में केवल छह राज्य ही पीडीएस में आवंटन के लिए  दालों का उठान कर रहे हैं। अप्रैल से नवंबर के दौरान केवल 76 हजार टन दलहन  का ही आयात हुआ है। वित्त वर्ष 2009-10 में पीडीएस में आवंटन के लिए  सार्वजनिक कपंनियों ने 2.5 लाख टन दालों का आयात किया था तथा इस दौरान 10  राज्यों ने दालों का उठान किया था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर तक देश में दलहन का कुल आयात  16.59 लाख टन हो चुका है जो पिछले साल की समान अवधि के 16.29 लाख टन से  थोड़ा ज्यादा है। दलहन आयात में सबसे बड़ी भागीदारी प्राइवेट आयातकों की  है। कृषि मंत्रालय के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2010-11 में देश  में दालों का रिकॉर्ड 180.9 लाख टन का उत्पादन होने का अनुमान है जबकि इसके  पिछले साल 146.6 लाख टन का उत्पादन हुआ था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;देश में दलहन की सालाना खपत 185 से 195 लाख टन की मानी जाती है। जबकि  चालू रबी में दलहन की बुवाई में पिछले साल की तुलना में 1.72 लाख हैक्टेयर  की कमी आई है जिसका असर दलहन उत्पादन पर पडऩे की आशंका है। (Business Bhaskar.....R S Rana)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-1303260241776420703?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/1303260241776420703/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=1303260241776420703' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1303260241776420703'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/1303260241776420703'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_2430.html' title='पीडीएस के लिए दलहनों का आयात तिहाई रह गया'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-2110142805464134210</id><published>2012-01-10T05:48:00.003-08:00</published><updated>2012-01-10T05:48:57.556-08:00</updated><title type='text'>एनएमसीई को छह माह का और समय</title><content type='html'>&lt;p&gt;जिंस बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने नैशनल मल्टी कमोडिटी  एक्सचेंज (एनएमसीई) को न्यूनतम पूंजी संबंधी शर्तों को पूरा करने के लिए और  छह माह का समय दिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक्सचेंज अपनी पूंजी संबंधी शर्तें 31 मार्च तक पूरा कर सकता है।  एफएमसी के बयान में कहा गया है कि इक्विटी ढांचे के बारे में अनिवार्यता को  पूरा करने के लिए एनएमसीई को 1 अक्टूबर, 2011 से 31 मार्च, 2012 तक छह माह  का विस्तार दिया गया है। जुलाई, 2009 में एफएमसी ने पांच साल पुराने जिंस  एक्सचेंजों के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये नेटवर्थ  अनिवार्य किया था।  इसमें शेयर पूंजी के 50 करोड़ रुपये होने का प्रावधान किया गया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;पहले इस दिशानिर्देश को पूरा करने की समय सीमा सितंबर, 2011 थी।  एनएमसीई ने पूंजी अनिवार्यता दिशानिर्देश को पूरा करने के लिए अक्टूबर,  2010 में 12.82 फीसदी हिस्सेदारी बजाज होल्डिंग्स ऐंड इंवेस्टमेंट लिमिटेड  को 25 करोड़ रुपये में बेची थी। एनएमसीई के अन्य प्रमुख शेयरधारकों में  नेपट्यून ओवरसीज लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की सेंट्रल वेयरहाउसिंग  कॉरपोरेशन, बजाज होल्डिंग्स और रिलायंस मनी शामिल हैं। (BS HIndi)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-2110142805464134210?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/2110142805464134210/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=2110142805464134210' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2110142805464134210'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/2110142805464134210'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_1321.html' title='एनएमसीई को छह माह का और समय'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-9050140445457646936</id><published>2012-01-10T05:48:00.001-08:00</published><updated>2012-01-10T05:48:25.726-08:00</updated><title type='text'>घाटा कम करने के लिए चीनी रिफाइनरियों ने घटाई क्षमता</title><content type='html'>घरेलू चीनी रिफाइनरियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि स्थानीय  बाजार में चीनी की अत्यधिक आपूर्ति के कारण वे अपनी आधी उत्पादन क्षमता पर  परिचालित हो रही हैं। पिछले साल के बचे स्टॉक और इस साल ज्यादा उत्पादन से  देश में चीनी की उपलब्धता में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके नतीजतन  रिफाइनरियां भविष्य में शोधन के लिए घरेलू कच्ची चीनी का स्टॉक कर रही हैं।&lt;br /&gt;आमतौर पर भारत में चीनी रिफाइनरियां अक्टूबर-नवंबर से शुरू होने वाले चीनी  सीजन के पहले छह महीनों में कच्ची चीनी का स्टॉक करती हैं। वे कच्ची चीनी  का स्टॉक सीजन के शेष छह महीनों के दौरान प्रसंस्करण के लिए करती हैं। यह  स्टॉक घरेलू मिलों से खरीद और आयात के जरिए किया जाता है।&lt;br /&gt;श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड (एसआरएसएल) के प्रबंध निदेशक और इस्मा के  तात्कालिक पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र मुरुकुंबी ने कहा, 'इस समय घरेलू मूल की  कच्ची चीनी आयातित कच्ची चीनी से 60 डॉलर प्रति टन सस्ती है। कमजोर सीजन के  दौरान चीनी के प्रसंस्करण के लिए अभी कच्ची चीनी का स्टॉक करना तर्कसंगत  है। इसलिए हमारी रिफाइनरियां अपनी स्थापित क्षमता के 50 फीसदी पर ही चल रही  हैं।'&lt;br /&gt;सामान्य तौर पर पेराई सीजन के दौरान घेरलू रिफाइनरियां अपनी क्षमता के  70-75 फीसदी पर परिचालित होती हैं। विदेशों से भारत में आने वाली कच्ची  चीनी की लागत 580 डॉलर प्रति टन आ रही है, जबकि घरेलू स्तर पर यह 520 डॉलर  प्रति टन की दर पर उपलब्ध है। इस समय पेराई सीजन चल रहा है और छोटी  रिफाइनरियां घरेलू मिलों से कच्ची चीनी खरीदकर रिफाइंड चीनी उत्पादित कर  रही हैं। इसके कारण देश में सफेद चीनी की आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी हुई है।&lt;br /&gt;देश में चालू सीजन में 31 दिसंबर 2011 तक चीनी का उत्पादन 17 फीसदी बढ़ोतरी  के साथ 75.78 लाख टन दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में  64.58 लाख टन था। उत्पादन में प्रमुख बढ़ोतरी भारत के तीन सबसे बड़े  उत्पादक राज्यों-महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में दर्ज की गई है।  इस्मा द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान उत्पादन में हुई वृद्धि  में उत्तर प्रदेश का अहम योगदान रहा है, जहां संदर्भित अवधि में चीनी  उत्पादन पिछले साल की समान अवधि से 5 लाख टन अधिक रहा है। महाराष्ट्र में  उत्पादन 3 लाख टन और कर्नाटक में 2 लाख टन अधिक रहा है।&lt;br /&gt;31 दिसंबर 2011 को पेराई कर रहीं चीनी फैक्टरियों की संख्या 503 थी, जो  पिछले साल इस तारीख को 490 ही थी। आने वाले समय में संभावित नुकसान से बचने  के लिए रिफाइनरियों ने चीनी का आयात बंद कर दिया है। एसआरएसएल कच्ची चीनी  के आयात के बजाए खुले सामान्य लाइसेंस के तहत रिफाइंड चीनी का निर्यात कर  रही है। उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा, 'कच्ची चीनी का प्रसंस्करण कर इसे  सफेद चीनी बनाने के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों का होना जरूरी है। इसलिए  वर्तमान घरेलू कीमतों पर स्टॉक को रोके रखना ज्यादा बेहतर है। आज घरेलू  कीमतें विश्व में सबसे कम हैं। कीमतों के स्थिर होने या सुधरने से  रिफाइनरियां परिचालन क्षमता बढ़ाएंगी।' (BS Hindi)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8655653204007284677-9050140445457646936?l=ranars.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ranars.blogspot.com/feeds/9050140445457646936/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8655653204007284677&amp;postID=9050140445457646936' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9050140445457646936'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8655653204007284677/posts/default/9050140445457646936'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ranars.blogspot.com/2012/01/blog-post_3502.html' title='घाटा कम करने के लिए चीनी रिफाइनरियों ने घटाई क्षमता'/><author><name>Randhir Singh Rana</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00763085406308247996</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://bp3.blogger.com/_jJN2zHnhJCs/SI7GLQ0yW3I/AAAAAAAAAAU/c_-EUez70iU/S220/R+S+Rana+-+Photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8655653204007284677.post-8766387292834322170</id><published>2012-01-10T05:47:00.001-08:00</published><updated>2012-01-10T05:47:52.892-08:00</updated><title type='text'>लौह अयस्क में नरमी के आसार</title><content type='html'>लौह अयस्क पर आयात शुल्क 30 फीसदी किए जाने के हालिया सरकारी फैसले के चलते  घरेलू बाजार में इसकी कीमतें औसतन 20 से 40 फीसदी घट सकती हैं और लौह  अयस्क की विभिन्न किस्मों में कटौती अलग-अलग होंगी। हालांकि देश में लौह  अयस्क के सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी नैशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन  (एनएमडीसी) को लौह अयस्क की कीमतोंं में कटौती पर फैसला लेना बाकी है।  स्टील उद्योग सरकारी फैसले से खुश है।&lt;br /&gt;जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक और ग्रुप सीएफओ शेषगिरि राव ने  कहा - 'वैश्विक बाजार में लौह अयस्क की कीमतें करीब 50 डॉलर प्रति टन घटी  हैं और ऐसे समय में भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले करीब 22 फीसदी लुढ़का  है। इसके अलावा लौह अयस्क पर निर्यात शुल्क में भी इजाफा हुआ है। इन सभी  चीजों को ध्यान में रखते हुए हमारा मानना है कि 62.5 फीसदी लौह कण वाले  अयस्क की कीमतें मौजूदा 3300 रुपये प्रति टन के मुकाबले घटकर 2000 रुपये  प्रति टन से नीचे आनी चाहिए, इस तरह कुल गिरावट करीब 40 फीसदी की बैठती  है।'&lt;br /&gt;जेएसडब्ल्यू स्टील कर्नाटक में 1 करोड़ टन सालाना क्षमता वाला संयंत्र  संचालित करती है और लौह अयस्क की कीमतों में गिरावट से सबसे ज्यादा फायदा  हासिल करने वाली कंपनियों में एक यह भी होगी। कंपनी को अपने संयंत्र के लिए  रोजाना करीब 50,000 टन लौह अयस्क की दरकार होती है।&lt;br /&gt;मौजूदा समय में कर्नाटक में ई-नीलामी की आधार कीमतें 63 फीसदी लौह कण वाले  अयस्क के लिए 2700 रुपये प्रति टन है और एनएमडीसी इसके लिए 3800 रुपये  प्रति टन का भाव वसूलती है। राव ने कहा कि निश्चित तौर पर जेएसडब्ल्यू  स्टील मौजूदा वित्त वर्ष में 75 लाख टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर  लेगी कर्नाटक में अब तक 180 लाख टन लौह अयस्क की नीलामी हो चुकी है। इसमें  से करीब 120 लाख टन की बिक्री हो चुकी है। अब तक चाहे जितनी भी बिक्री हुई  है, लेकिन इसकी सुपुर्दगी में 55 फीसदी से ज्यादा का सुधार आया है।&lt;br /&gt;राव ने कहा - 'लंबे समय तक स्टील उद्योग का अस्तित्व बने रहने के लिए  सरकारी कदम काफी लाभदायक है। हम 47 अरब डॉलर का लौह अयस्क निर्यात कर रहे  हैं जबकि 100 अ
