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15 सितंबर 2018

नए पेराई सीजन में और बढ़ेगी गन्ना किसानों की मुश्किल, चालू खरीफ में बुवाई ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में गन्ने की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है जबकि उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश ठीक हुई है। ऐसे में पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले पेराई सीजन (अक्टूबर-नवंबर) में चीनी का उत्पादन बढ़कर 355 लाख टन होने का अनुमान है जिससे गन्ना किसानों की परेशानी और बढ़ने वाली है। 
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में गन्ने की बुवाई बढ़कर 51.94 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 49.86 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। उद्योग के अनुसार चीनी का उत्पादन बढ़कर पेराई सीजन 2018-19 में 355 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चालू पेराई सीजन के 325 लाख टन से ज्यादा है।
नया पेराई सीजन आरंभ होने में एक महीने से भी कम समय बचा हुआ है, जबकि अभी भी चीनी मिलों पर किसानों का करीब 13,000 करोड़ रुपये का बकाया बचा हुआ है। उद्योग के अनुसार चालू पेराई सीजन में मिलों ने किसानों से 92,000 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है जबकि गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में हुई बढ़ोतरी से पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन में एक लाख करोड़ रुपये के गन्ने की खरीद होने का अनुमान है।
केंद्र सरकार ने गन्ना पेराई सीजन 2018-19 के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जोकि 10 फीसदी रिकवरी पर है। नए पेराई सीजन देशभर में औसत रिकवरी 10.8 आती है तो चीनी मिलों को एक क्विंटल गन्ने की खरीद पर 300 रुपये प्रति क्विंटल खर्च करने होंगे। उत्तर भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड की राज्य सरकारें स्टेट एडवाइजरी प्राइस (एसएपी) तय करती हैं, जोकि आमतौर पर एफआरपी से ज्यादा ही होता हैं।
पहली अक्टूबर से शुरू होने वाले पेराई सीजन के शुरू में चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि 9,000 करोड़ रुपये बचने का अनुमान है जोकि पेराई सीजन के मध्य यानि अप्रैल के आखिर तक बकाया राशि बढ़कर 45 से 50 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच सकती है।
गन्ने के कीमतों में सुधार लाने के लिए चालू पेराई सीजन में केंद्र सरकार ने चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव 29 रुपये प्रति किलो तय करने के साथ ही मिलों पर चीनी बेचने के लिए कोटा प्रणाली तय की। इसके अलावा जहां आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 100 फीसदी किया, वहीं निर्यात शुल्क को भी शुन्य किया। इसके साथ ही चीनी मिलों को एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कर्ज मुक्त ऋण देने के साथ एक साल के लिए 30 लाख टन चीनी का बंपर स्टॉक बनाने को भी मंजूरी दी।
सूत्रों के अनुसार इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगामी पेराई सीजन में चीनी का न्यूनतम बिक्री भाव 29 रुपये से बढ़ाकर 36 रुपये प्रति किलो तय करने की मांग की है। इसके साथ ही आगामी पेराई सीजन में 70 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा भी तय करने की मांग की।
पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले पेराई सीजन के आरंभ में 105 लाख टन चीनी बकाया स्टॉक होगा, जबकि 355 लाख टन चीनी उत्पादन को मिलाकर कुल उपलब्धता 450 लाख टन के करीब होगी जोकि सालाना खपत 260 लाख टन से बहुत ज्यादा है।......  आर एस राणा

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