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16 January 2018

दालों के आयात में आई कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। नवंबर महीने में दालों का आयात घटकर 7.56 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल नवंबर महीने में इनका आयात 11.7 लाख टन का हुआ था। आयात घटने के बावजूद भी दलहन की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे ही बनी हुई है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की आवक दक्षिण भारत के राज्यों में शुरु हो चुकी है, जबकि अगले महीने से इसकी दैनिक आवक बढ़ जायेगी। मसूर की नई फसल की आवक अप्रैल में बनेगी। अत: अभी दालों की कीमतों में तेजी की संभावना भी नहीं है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पिछले दो महीनों अक्टूबर और नवंबर में दलहन के आयात में कमी आई है। चना और मसूर के आयात पर दिसंबर में आयात शुल्क लगाया गया था इसलिए दिसंबर—जनवरी में दालों के आयात में और भी कमी आयेगी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने में दलहन का आयात 5.51 लाख टन का हुआ था जबकि पिछले साल के अक्टूबर महीने में दालों का आयात 6.50 लाख टन का हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 8 महीनों अप्रैल से नवंबर के दौरान दलहन का कुल आयात 20 फीसदी बढ़कर 46.89 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका आयात केवल 39.18 लाख टन का ही हुआ था।
केंद्र सरकार ने अगस्त में अरहर की 2 लाख टन और मूंग—उड़द के आयात की 3 लाख टन आयात की सीमा तय की थी जबकि नवंबर में मटर के आयात पर 50 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। उसके बाद दिसंबर महीने में केंद्र सरकार ने चना और मसूर के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया था।
वित्त वर्ष 2016—17 में दलहन का रिकार्ड आयात 66.1 लाख टन का हुआ था जबकि उसके पिछले वित्त वर्ष में दलहन का आयात 58 लाख टन का हुआ था।


कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में देश में दलहन का उत्पादन 229.5 लाख टन का हुआ है जबकि देश में दालों की सालाना खपत सामान्यत: 240 से 245 लाख टन की होती है। .............  आर एस राणा

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