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16 May 2017

अप्रैल में वनस्पति तेलों का आयात 7 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव कम होने के कारण अप्रैल महीने में वनस्पति तेलों के आयात में 7 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 1,339,489 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अप्रैल महीने में इनका आयात 1,248,887 टन का हुआ था। अप्रैल महीने में वनस्पति तेलों के आयात में खाद्य तेलों की हिस्सेदारी 1,324,014 टन की रही जबकि इस दौरान 15,475 टन अखाद्य तेलों का आयात हुआ है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2016-17 (नवंबर-16 से अप्रैल-17) के पहले छह महीनों में वनस्पति तेलों के आयात में 6 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 7,134,265 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 7,568,709 टन का हुआ था।
एसईए के अनुसार मार्च के अप्रैल महीने में क्रुड तेल के बजाए रिफाइंड तेलों के आयात में जरुर कमी आई है। अप्रैल महीने में हुए कुल आयात में रिफाइंड तेलों की हिस्सेदारी 18 फीसदी रही जबकि मार्च में रिफाइंड खाद्य तेलों की हिस्सेदारी 20 फीसदी थी।
मलेशिया के साथ ही इंडोनेशिया में भी पॉम तेल का उत्पादन ज्यादा होने से विश्व बाजार में अप्रैल में आयातित तेलों की कीमतों में भी कमी आई है, जिसका असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पड़ा है। आरबीडी पामोलीन का भाव घटकर अप्रैल महीने में भारतीय बंदरगाह पर 705 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि मार्च में इसका भाव 731 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव मार्च में 734 डॉलर प्रति टन था, जोकि अप्रैल में घटकर 706 डॉलर प्रति टन रह गया। क्रुड पाम तेल और रिफाइंड आरबीडी पामोलीन की कीमतों में अंतर कम होने के कारण पिछले कुछ महीनों में रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात में बढ़ोतरी हुई थी। क्रुड सोयाबीन तेल का भाव भी अप्रैल महीने में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 756 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि मार्च महीने में इसका भाव 767 डॉलर प्रति टन था। क्रुड सनफ्लावर का भाव अप्रैल में घटकर 783 डॉलर प्रति टन भारतीय बंदरगाह पर रह गया जबकि मार्च में इसका भाव 791 डॉलर प्रति टन था।
खरीफ के साथ ही रबी सीजन में घरेलू बाजार में तिलहनों की पैदावार ज्यादा होने के कारण खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा बनी हुई है, ऐसे में अप्रैल में आयात में भी बढ़ोतरी हुई है इसलिए घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा है, जबकि मांग कमजोर है इसलिए घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में अभी तेजी की संभावना नहीं है।..................  आर एस राणा

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