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30 July 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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09811470207

मूंग की बुवाई 38 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मूंग की बुवाई में 38 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल बुवाई 26.14 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 18.88 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। राजस्थान में चालू खरीफ में 11.97 लाख हैक्टेयर में, महाराष्ट्र में 4.70 लाख हैक्टेयर में और कर्नाटका में 2.76 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई है।.......आर एस राणा

अरहर की बुवाई 68 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अरहर की बुवाई 68 फीसदी बढ़कर 42.93 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 25.61 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। महाराष्ट्र में अरहर की बुवाई 13.94 लाख हैक्टेयर में, कर्नाटका में 10.01 लाख हैक्टेयर में और मध्य प्रदेष में 6.03 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है।..........आर एस राणा

उड़द की बुवाई 35 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में उड़द की बुवाई 35 फीसदी बढ़कर 26.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 19.78 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मध्य प्रदेष में उड़द की बुवाई 9.72 लाख हैक्टेयर में, उत्तर प्रदेष में 4.51 लाख हैक्टेयर में ओर महाराष्ट्र में 4.11 लाख हैक्टेयर में उड़द की बुवाई हो चुकी है।......आर एस राणा

29 July 2016

एमएसपी पर 330 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। अक्टूबर से षुरु होने वाले खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए खाद्य मंत्रालय ने चावल की खरीद का लक्ष्य 330 लाख टन का तय किया है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2015-16 में खरीद का लक्ष्य 299.70 लाख टन का था जबकि अभी तक खरीद करीब 341.43 लाख टन चावल की खरीद हो चुकी है। खरीफ विपणन सीजन 2014-15 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 320.40 लाख टन चावल की खरीद हुई थी।......आर एस राणा

दलहन बुआई में 41 फीसदी बढ़ोतरी

आर एस राणा
देश के ज्यादातर हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून लगातार अच्छा बना हुआ है। ऐसा लगता है कि बेहतर मॉनसून का सबसे ज्यादा फायदा दलहन फसलों को मिला है। इस साल दलहन का रकबा पिछले साल के औसत रकबे का स्तर पहले ही पार कर चुका है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 29 जुलाई तक दलहन की बुआई करीब 110.3 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल इस समय तक के रकबे से करीब 41 फीसदी अधिक है। आमतौर पर खरीफ सीजन के दौरान दलहन की बुआई करीब 108 लाख हेक्टेयर में होती है। इसका मतलब है कि 2016-17 में रकबा सामान्य रकबे से ज्यादा हो चुका है। दलहन में अरहर की सबसे ज्यादा रकबे में बुआई की गई है।
शुक्रवार तक के आंकड़ों से पता चलता है कि अरहर की बुआई करीब 42.9 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के रकबे से करीब 68 फीसदी अधिक है। इस साल की शुरुआत में अरहर के दाम 200 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच गए थे। हो सकता है कि उसी वजह से किसानों ने अरहर की फसल की ज्यादा बुआई की। केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अहम बढ़ोतरी करने और अपना बफर स्टॉक बनाने के लिए बाजार दरों पर फसल की खरीद की वादे से किसान दलहन फसलों की बुआई को प्रोत्साहित हुए हैं। खरीफ में  उगाई जाने वाली मुख्य दालों उड़द और मूंग के रकबे में पिछले साल के मुकाबले क्रमश: 35 फीसदी और 38 फीसदी  बढ़ोतरी हुई है। दलहन के रकबे में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक के असिंचित इलाकों में हुई है। अधिकारियों ने कहा कि इस साल मध्य प्रदेश में सोयाबीन, राजस्थान में ग्वार और गुजरात एवं महाराष्ट्र में कपास के रकबे में दलहन की बुआई हुई है।
उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र में किसानों ने दालों विशेष रूप से अरहर की बुआई की है। यह क्षेत्र पिछले दो साल से भयंकर सूखे के दौर से गुजर रहा है। लेकिन इस बार यहां पर्याप्त बारिश हुई है। अगस्त के पहले सप्ताह में उत्तर और मध्य भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अधिक सक्रिय होने के आसार हैं, इसलिए रकबे में और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। केंद्र सरकार का अनुमान है कि इस साल दालों का उत्पादन 2 करोड़ टन से अधिक रहेगा, जो पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक होगा। लेकिन अगर बुआई की यह रफ्तार आगे भी जारी रही तो कुल उत्पादन उम्मीद से ज्यादा रह सकता है।.........आर एस राणा

नई इलायची की आवक में देरी की आषंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में इलायची की नई तुड़ाई में एक महीने की देरी की आषंका है जबकि त्यौहारी सीजन होने के कारण आगामी दिनों में इसकी खपत बढ़ेगी। ऐसे में इलायची की कीमतों में आगामी दिनों मंे 50 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी आने की संभावना है।
कुमली मंडी में 8 एमएम इलायची का भाव 1,120 से 1,140 रुपये, बोल्ड क्वालिटी का भाव 1,230 रुपये, 7 एमएम की इलायची का भाव 840 से 860 रुपये और 6 एमएम की इलायची का भाव 680 से 720 रुपये प्रति किलो रहा।
प्रमुख उत्पादक राज्य केरल के इदुक्की जिले में अप्रैल-मई में मौसम प्रतिकूल रहने का असर इलायची की पैदावार पर पड़ेगा। हालांकि चालू सीजन में कुल पैदावार का अनुमान आंकलन अगस्त महीने में ही आयेगा। नीलामी केंद्र पर 29 जुलाई को इलायची की दैनिक आवक 18,429 किलो की हुई तथा नीलामी में 14,781 किलो की बिक्री हुई। नीलामी में इलायची का भाव 775 से 1,062 रुपये प्रति किलो रहा।
वित्त वर्ष 2015-16 में देष से 5,500 टन इलायची का निर्यात हुआ है जबकि मसाला बोर्ड ने निर्यात का लक्ष्य 3,500 टन का रखा था। इसके पिछले वित्त वर्ष 2014-15 में निर्यात 3,795 टन का हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची का भाव 14.58 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले महीने इसका भाव 14.52 डॉलर प्रति किलो था।.......आर एस राणा

अनुकूल मानसून से खरीफ फसलों की बुवाई में हुई बढ़ोतरी

दलहन के साथ ही तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई ज्यादा
आर एस राणा
नई दिल्ली। देषभर में मानसूनी बारिष अच्छी होने से खरीफ फसलांे खासकर के दलहन, तिलहन धान और मोटे अनाजों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है हालांकि कपास की बुवाई अभी भी पिछड़ रही है। दलहन की बुवाई में इस दौरान भारी बढ़ोतरी हुई है। देषभर में अभी तक 110.35 लाख हैक्टेयर में दलहन की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 78.25 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 92.33 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 101.91 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 799.51 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 752.29 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 231.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 225.68 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 150.76 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 144.84 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 46.83 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 45.91 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।......आर एस राणा

28 July 2016

चीनी मिलों पर लगेगी स्टॉक लिमिट

त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों को थामने के लिए सरकार मिलों पर भी स्टॉक लिमिट लगाने पर विचार कर रही है। फिलहाल सिर्फ चीनी कारोबारियों पर भी स्टॉक लिमिट लागू है। पूरे देश में ये लिमिट 500 टन है जबकि कोलकाता के लिए 1000 टन की लिमिट है। स्टॉक लिमिट के अलावा सरकार मिलों के लिए रिलीज ऑर्डर की व्यवस्था फिर से शुरु करने पर विचार कर रही है जिसमें हर मिल को मासिक बिक्री का कोटा मिलता है। सरकार 2013 में इस व्यवस्था को खत्म कर दिया था।

आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की बुवाई बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की बुवाई बढ़कर 11,247 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 2,032 हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
राज्य के कृषि निदेषालय के अनुसार चालू खरीफ में मानसूनी बारिष अच्छी होने से बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, राज्य में खरीफ में 1,18,022 हैक्टेयर में लालमिर्च की बुवाई होती है। राज्य के कुरनूल जिले में बुवाई बढ़कर 2,326 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 697 हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह गुंटूर में बुवाई बढ़कर 6,184 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 490 हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। कृष्णा जिले में बुवाई 1,529 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 185 हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।.........आर एस राणा

गुजरात के साथ ही राजस्थान में भी केस्टर की बुवाई कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई अभी तक केवल 73,000 हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 1.02 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात के साथ राजस्थान में भी इसकी बुवाई में कमी आई है जबकि इस समय मिलों की मांग अच्छी बनी हुई है जिससे केस्टर सीड की कीमतों में तेजी आई है। गुजरात की दिसा मंडी में केस्टर सीड का भाव बढ़कर 3,450 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में गुजरात में केस्टर सीड की बुवाई अभी तक केवल 17,700 हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 22,000 हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। सामान्यतः गुजरात में केस्टर सीड की बुवाई 7,14,400 हैक्टेयर में होती है। केस्टर सीड के भाव नीचे होने के कारण किसान ने दूसरी फसलों की बुवाई को प्राथमिकता दी है जिससे इसकी बुवाई में कमी आई है।
राजस्थान में चालू खरीफ में अभी तक 2 हजार हैक्टेयर में ही केस्टर सीड की बुवाई हो पाई है जबकि सामान्यत 2.20 लाख हैक्टेयर में बुवाई होती है। इसके अलावा आंध्रप्रदेष में अभी तक 15,000 हैक्टेयर में और तेलंगाना में 13,000 हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है।..................आर एस राणा

खरीफ में मक्का की बुवाई 9 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में कर्नाटका के साथ ही महाराष्ट्र और मध्य प्रदेष में मक्का की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 68.26 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 62.61 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
मंत्रालय के अनुसार कर्नाटका में चालू खरीफ में मक्का की बुवाई बढ़कर 10.12 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 7.65 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह से महाराष्ट्र में बुवाई बढ़कर 6.71 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.31 फीसदी ज्यादा है। मध्य प्रदेष में अभी तक 11.71 लाख हैक्टेयर में मक्का की बुवाई हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.98 लाख हैक्टेयर ज्यादा है।...........आर एस राणा

27 July 2016

आयातित 5,000 टन गेहूं और पहुंचा भारत

आर एस राणा
नई दिल्ली। तुतीकोरन बंदरगाह पर चालू महीने में लगातार तीसरा वैसल 5,000 टन गेहूं लेकर पहुंचा है। चालू महीने में अभी तक करीब 34,500 टन टन भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है। यूक्रेन से आयातित गेहूं के आयात सौदे 191.94 डॉलर प्रति टन सीएंडएफ की दर से हुए हैं। उधर बलैक सी रीजन के देषों में गेहूं के भाव घटकर 160 डॉलर प्रति टन रह गए हैं।
24 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में देष से 463.88 टन गेहूं का निर्यात भी हुआ है। जोकि इसके पहले सप्ताह के 395.94 टन से ज्यादा है। देष से गेहूं का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात, मलेषिया और श्रीलंका को हुआ है।.......आर एस राणा

महंगाई को लेकर सख्त-केंद्र



केंद्र सरकार ने आने वाले त्योहारी सीजन में महंगाई को लेकर काफी सख्त तेवर दिखाए हैं। सरकार ने चीनी मिलों को हिदायत देने के साथ-साथ राज्यों को भी जमोखारों से सख्ती से निपटने को कहा है।

26 July 2016

गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान



भारतीय मौसम विभाग ने आज से गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान दिया है। अब तक राज्य में सामान्य से करीब 50 फीसदी कम बारिश हुई है। ऐसे में खास तौर से कपास की खेती पर असर पडा है।

कैबिनेट -----आलू-------चीनी.....दलहन

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में आलू के निर्यात पर दुबारा एमईपी लगाने का फैसला हुआ। इस बैठक में चीनी मिलों और कारोबारियों को कृत्रिम रूप से चीनी के दाम न बढ़ाने की चेतावनी देने का निर्णय भी हुआ। फिर भी उन्होंने दाम बढ़ाए तो सरकार कीमतें नियंत्रित करने के लिए चीनी नियंत्रण आदेश के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेगी। सरकार ने फसल वर्ष 2016-17 में गन्ने का रकबा 50-51 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले साल के बराबर ही है। दालों के बारे में अधिकारी ने कहा कि बैठक में राष्टï्रीय दलहन मिशन और 20 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने पर हुई प्रगति केबारे में भी चर्चा हुई। राज्य सरकारों को जमाखोरों और कालाबाजारी करने वाले लोगों के खिलाफ सभी संभव कार्रवाई करने की सलाह दी गई। जिससे कि दालों के भाव नियंत्रित किए जा सकें।

केंद्र सरकार ने आलू पर फिर लगाया न्यूनतम निर्यात मूल्य

आलू के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे मे केंद्र सरकार ने आलू के निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए इसके निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगा दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने आज आलू के निर्यात के लिए 360 डॉलर प्रति टन के एमईपी की अधिसूचना जारी कर दी। एमईपी लगाने का उद्देश्य घरेलू बाजार में आलू की आपूर्ति बढ़ाना है। इससे पहले केंद्र सरकार ने फरवरी 2015 में आलू के दाम काफी गिरने के कारण इसके निर्यात पर एमईपी की बाध्यता हटा दी थी। सरकार द्वारा 360 डॉलर के आधार पर अब रुपये में आलू का न्यूनतम निर्यात मूल्य करीब 24,242 रुपये प्रति टन हो गया है। 
 
इस माह देश भर के घरेलू खुदरा बाजार में आलू के दाम 2 से 4 रुपये प्रति किलो बढ़ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के खुदरा बाजार में आलू 29 रुपये किलो बिक रहा है। जानकारों के मुताबिक आलू महंगा होने की वजह आलू उत्पादक राज्यों में बारिश के कारण खेतों में लगी फसल को नुकसान पहुंचना है। राष्टï्रीय बागवानी अनुसंधान व विकास प्रतिष्ठïान के मुताबिक वर्ष 2014-15 में 4.8 करोड़ टन आलू पैदा हुआ, जबकि वर्ष 2013-14 में यह आंकड़ा 4.15 करोड़ टन रहा।

कपास का रिकार्ड आयात होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में तेजी के कारण कपास के आयात में भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार चालू फसल सीजन 2016-17 में करीब 18 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास का आयात होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 15 लाख गांठ का आयात हुआ था। पिछले दो साल से कपास की घरेलू पैदावार में कमी के कारण भी आयात में बढ़ोतरी हुई है। देष से कपास का निर्यात भी बड़े पैमाने पर होता है तथा चालू खरीफ में इसका निर्यात करीब 67 लाख गांठ का हो चुका है।....आर एस राणा

देश में मॉनसून फिर से पड़ा कमजोर



आर एस राणा
देश में मॉनसून फिर से कमजोर पड़ गया है और 25 जुलाई तक सामान्य से 1 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो देश के 30 फीसदी इलाकों में बेहद कम बारिश हुई है, जबकि 25 फीसदी इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई है। महज 20 फीसदी इलाके ऐसे रहे जहां सामान्य बारिश दर्ज हुई है, जबकि 25 फीसदी में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं इस पूरे सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश के इलाके का दायरा बढ़कर 27 फीसदी तक पहुंच गया है।  फिलहाल बारिश वाले इलाके ज्यादा पूर्वी और उत्तर भारत में हैं, भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में पूर्वोत्तर के असम और अरुणाचल प्रदेश के अलावा पूर्व में बिहार के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी तेज बारिश का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश का दौर अभी आगे भी जारी रहेगा। वहीं पश्चिम भारत के गोवा और दक्षिण के कर्नाटक में भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा भी देश के कई इलाकों में छिटपुट बारिश हो सकती है।........
आर एस राणा

दाल पर माथापच्ची, कैबिनेट सचिव आज करेंगे बैठक

आर एस राणा
दाल की महंगाई से निपटने के लिए सरकार आज फिर बैठक करेगी। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली इस बैठक में वित्त और कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा उपभोक्ता मामलों के सचिव भी शामिल होंगे।  सूत्रों के मुताबिक दालों में चने की कीमतें सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। आमतौर पर दालों में सबसे सस्ता बिकने वाले चने का दाम अरहर के भी पार चला गया है। सूत्रों का कहना है कि चने की महंगाई से निपटने के लिए इस बैठक में खास रणनीति पर विचार हो सकता है। कैबिनेट सचिव दाल की बुआई और इसके स्टॉक का भी ब्यौरा लेंगे। आपको बता दें इस साल खरीफ दालों की बुआई में करीब 40 फीसदी की बढ़त हुई है, इसके बावजूद अभी तक इसका कीमतों पर खास असर देखने को नहीं मिला है।........आर एस राणा

25 July 2016

मैंथा की कीमतों में और तेजी की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। मैंथा तेल में इस समय निर्यातकों की मांग निकली हुई है जबकि उत्पादक मंडियों में दैनिक आवक सामान्य के मुकाबले कम है। ऐसे में मैंथा की कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में सोमवार को मैंथा तेल का भाव 1,075 रुपये प्रति क्विंटल रहा जबकि दैनिक आवक 400 (ड्रम-180 किलो) की हुई।
जानकारों के अनुसार चालू सीजन में मैंथा की पैदावार तो पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान है लेकिन बकाया स्टॉक कम होने  के साथ ही पाईप लाईन खाली होने के कारण मैंथा तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। एक अनुमान के अनुसार चालू सीजन में मैंथा तेल का उत्पादन 35 से 37 हटार टन होने का अनुमान है। ऐसे में चालू सीजन में मैंथा तेल की कीमतें तेज ही बनी रहेंगी।
माना जा रहा है कि मैंथा की मौजदा कीमतों में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी और आयेगी, उसके बाद भाव एक बार रुकेंगे, लेकिन भविष्य फिर भी तेजी का ही है। आमतौर पर जून से अगस्त तक मैंथा तेल की आवक का पीक सीजन रहता है। इस समय मैंथा तेल की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में केवल 400 ड्रम की हो रही है जबकि आमतौर पर इस दौरान आवक 800 से 900 ड्रम की रहती है।
इस समय मैंथा में निर्यातकों की मांग भी आ रही है तथा इसके निर्यात सौदे करीब 18 से 19 डॉलर प्रति किलो की दर से हुए हैं। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में इसके निर्यात में तेजी आयेगी।......आर एस राणा

पीईसी 2 लाख टन मक्का का आयात करेंगी

आर एस राणा
नई दिल्ली। सार्वजनिक कंपनी पीईसी लिमिटेड ने 2 लाख टन मक्का आयात के निविदा मांगी है। निविदा के अनुसार विदेषों से नोन जीएम मक्का का आयात किया जायेगा तथा आयात की अवधि 15 दिसंबर 2016 से 31 जनवरी 2017 होगी।...........आर एस राणा

कनाडा में मटर की पैदावार 28 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। कनाडा में मटर की आने वाली फसल की पैदावार में 28 फीसदी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। कनाडा कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में मटर की पैदावार 41 लाख टन टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल पैदावार 32 लाख टन की हुई थी। सोमवार का मुंबई में कनाडा की पीली मटर के भाव 3,351 रुपये प्रति क्विंटल रहे जबकि हरी मटर के भाव 3,100 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
कनाडा में मटर की पैदावार ज्यादा होने का असर इसकी कीमतों पर भी दिखने लगा है। अगस्त महीने के आयात सौदे 2,841 रुपये और सितंबर-अक्टूबर महीने सौदे 2,631 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मुबई बदरगाह पहंुच के हुए हैं। हालांकि जानकारों का मानना है चना के भाव उंचे बने हुए हैं इसलिए पीली मटर की कीमतों में अभी ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं है।.............आर एस राणा

ओएमएसएस के तहत 8.81 लाख टन गेहूं की बिक्री

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) अभी तक खुले बाजार बिक्री योजना के माध्यम से 8.81 लाख टन गेहूं बेच चुकी है। एफसीआई के अनुसार अभी तक हुई बिक्री में 5.23 लाख टन गेहूं की बिक्री बड़ी कंपनियों को की गई है जबकि 3.44 लाख टन गेहूं की बिक्री राज्यों को की गई है। इसके अलावा 13,250 टन गेहूं डेटीकेट मूंवमेंट में आधार पर बिका है।
21 जुलाई को जारी की गई निविदा में गेहूं की फ्लोर मिलों ने 1,698 से 1,707 रुपये प्रति क्विंटल की दर से निविदा भरी थी, जबकि पंजाब की फलोर मिलों ने रिजर्व भाव 1,640 रुपये प्रति क्विंटल की दर से निविदा भरी थी। मध्य प्रदेष की फ्लोर मिलों ने 1,640 से 1,730 रुपये, कर्नाटका की फलोर मिलों ने 1,894 से 1,943 रुपये, गुजरात की फलोर मिलों ने 1,792 से 1,813 रुपये, राजस्थान की फ्लोर मिलों ने 1,712 से 1,778 रुपये, हरियाणा की फ्लोर मिलों ने 1,640 से 1,655 रुपये, महाराष्ट्र की फ्लोर मिलों ने 1,840 से 1,894 रुपये प्रति क्विंटल की दर से निविदा भरी थी। .......आर एस राणा

23 July 2016

कालीमिर्च के निर्यात में हल्की बढ़त

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह (4 जुलाई से 10 जुलाई) के दौरान देष से कालीमिर्च का निर्यात बढ़कर 386 टन का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 376 टन कालीमिर्च का निर्यात हुआ था। इस दौरान यूएसए, यूके, कनाडा, साउदी अरब और कुवैत को ज्यादा निर्यात हुआ है। जून के आखिर सप्ताह में 826 टन कालीमिर्च का निर्यात हुआ था। नीलामी केंद्रों पर चालू महीने में कालीमिर्च की साप्ताहिक आवक घटकर 50 टन के करीब रह गई है जबकि इसके पहले महीने में 100 टन से ज्यादा की आवक हो रही थी।
जानकारों के अनुसार कालीमिर्च का स्टॉक कम है तथा आगे निर्यात में बढ़ने का अनुमान है जिससे इसके भाव में सुधार आ सकता है। फसल सीजन 2016-17 में कालीमिर्च की पैदावार 50 हजार टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 70,000 टन की हुई थी। कालमिर्च के निर्या सौदे इस समय यूरोप के लिए 10,850 डॉलर में और यूएस के लिए 11,100 डॉलर प्रति टन की दर से सीएंडएफ के हो रहे हैं।
इंटरनेषनल पीपर कंम्यूनिटी (आईपीसी) के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में विष्व में कालीमिर्च की पैदावार 4,14,000 टन होने का अनुमान है जबकि जबकि इसकी सालाना खपत 4,63,000 टन की होती है। ऐसे में विष्व बाजार में कालीमिर्च की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है।........आर एस राणा