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27 April 2016

उप्र में चीनी उत्पादन में कमी के आसार

उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सत्र 2015-16 में चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कमजोर रहने का अनुमान है क्योंकि पेराई सत्र समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। पिछले साल उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन लगभग 69.60 लाख टन पर रहा जबकि इस साल अब तक यह 67.90 लाख टन है। कुछ ही निजी मिलों के परिचालन में बने रहने की वजह से पेराई सत्र इस महीने के अंत तक समाप्त हो सकता है। इस उद्योग के एक अधिकारी ने  बताया, 'इस साल उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल के स्तर से थोड़ा कम रहने का अनुमान है। यह 2014-15 के सत्र की तुलना में 1.5 लाख टन कम रह सकता है।'
इस साल पेराई सत्र में शामिल हुए कुल 118 चीनी मिलों में से 111 मिलें अपने संबद्घ इलाकों में गन्ने की आपूर्ति सुस्त पडऩे के बाद अपना परिचालन समाप्त कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश चीनी क्षेत्र पर 94 मिलों के साथ निजी क्षेत्र का दबदबा है जिसके बाद सहकारी मिलों (24) और उत्तर प्रदेश स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएसएससीएल) का स्थान है। हालांकि इस साल 10.60 प्रतिशत पर चीनी की रिकवरी दर पिछले साल के 9.54 फीसदी की तुलना में बेहतर है।
उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) सचिव दीपक गुप्तारा ने कहा, 'रिकवरी कई कारकों की वजह से बेहतर रही है जिनमें अनुकूल मौसम हालात भी शामिल है जिससे गन्ने में चीनी की मात्रा बढ़ाने में मदद मिली। इसके अलावा किसानों ने नई वेरायटी की भी खेती की थी जिससे भी गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा में इजाफा हुआ है।' उन्होंने दावा कि गन्ने की नई किस्म का इस साल कुल गन्ना उत्पादन में 40 फीसदी का योगदान रहा है।
शुरू में अखिलेश यादव सरकार ने चालू 2015-16 के पेराई सत्र के लिए गन्ने की कीमत नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया था। गन्ने की सामान्य किस्म के लिए 280 रुपये प्रति क्विंटल की राज्य समर्थत कीमत (एसएपी) के साथ यह लगातार चौथा वर्ष है जब देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक और दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक उत्तर प्रदेश में यह कीमत समान बनी हुई है।  पिछली बार एसएपी में वृद्घि 2012-13 में की गई थी और तब इसे 17 फीसदी बढ़ाकर 280 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था।

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