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30 January 2016

आयातित मक्का आने की संभावना से भाव में गिरावट


आर एस राणा
नई दिल्ली। आयातित मक्का आने की संभावना के कारण इसकी कीमतों में गिरावट बनी हुई है। षनिवार को दिल्ली में मक्का के भाव 1,650 रुपये, आंध्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में 1,460 से 1,510 रुपये तथा बिहार की गुलाबबाग मंडी में 1,550 से 1,610 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
हालांकि रबी में मक्का की बुवाई में कमी आई है जिससे पैदावार भी कम होने की आषंका है लेकिन आयातित मक्का आने से आगामी दिनों में मक्का की कीमतों में और भी गिरावट आने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में मक्का की बुवाई 14.64 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 14.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मालूम हो कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक कंपनी पीईसी लिमिटेड के माध्यम से 5 लाख टन मक्का आयात करने का फैसला लिया हुआ है। इसी के तहत पीईसी लिमिटेड 3.20 लाख टन मक्का आयात के लिए निविदा भी आमंत्रित कर चुकी है। फरवरी में आयातित मक्का आने षुरु हो जायेगी, जिसका असर रबी मक्का की कीमतों पर भी पड़ेगा।........आर एस राणा

Pakistan Not To Relax Duty On Cotton Imports From India


The government should not consider any proposal to relax duty and tax on the import of cotton from India, said the Pakistan Cotton Ginner Association (PGCA) as the same could hurt the domestic market by dumping of cheap raw material. It should be noted that government of Pakistan had imposed 10 per cent duty on imports of cotton yarn, grey and processed fabric specially coming from India which was effective from November 01, 2015. 

जनवरी के तीसरे सप्ताह में चावल निर्यात 50 फीसदी कम


आर एस राणा
नई दिल्ली। जनवरी महीने के तीसरे सप्ताह में चावल के निर्यात में करीब 50 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान देष से केवल 81,409.66 टन चावल का ही निर्यात हुआ जबकि इसके पिछले सप्ताह में 1,62,181.12 टन चावल का निर्यात हुआ था। जनवरी के तीसरे सप्ताह में चावल के निर्यात में बासमती चावल की हिस्सेदारी 51.29 फीसदी और गैर-बासमती की 48.71 फीसदी की थी। इस दौरान देष 41,756.39 टन बासमती चावल का निर्यात हुआ जबकि 39,653.26 टन गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ। ........आर एस राणा

चना की कीमतों में और गिरावट की आषंका


बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर, पैदावार में कमी आने की आषंका
आर एस राणा
नई दिल्ली। दालों में ग्राहकी कमजोर होने से चना की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। दिल्ली के लारेंस रोड़ पर चना के भाव षनिवार को घटकर 4,550 से 4,775 रुपये प्रति क्विंटल रहे। कर्नाटक में नए चना की आवक षुरु हो गई है तथा आगामी दिनों में अन्य उत्पादक राज्यों की मंडियों में भी नई फसल की आवक बढ़ेगी। हालांकि चना की बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है लेकिन उत्पादकता में कमी आने की आषंका है जिससे पैदावार पिछले साल की तुलना में घट सकती है इसके बावजूद भी आगामी दिनों में कीमतों और गिरावट आने की आषंका है।
रबी चना की नई फसल की आवक षुरु होने के साथ ही आस्ट्रेलिया से आयातित चना के षिपमेंट भी लगातार आ रहे हैं, यही कारण है कि चना की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। दिल्ली में चना की दैनिक आवक 12 से 15 मोटरों की हो रही है जबकि 90 फीसदी चना आस्ट्रेलियाई है। आगमी दिनों में नए चना की आवक और बढ़ेगी जबकि दलहन पर स्टॉक लिमिट लागू होने के कारण मिलर्स के साथ ही स्टॉकिस्टों की खरीद सीमित रहेगी, इसीलिए चना की कीमतों में और भी गिरावट आने की आषंका है। महाराष्ट्र की लातूर मंडी में चना के भाव 4,250 रुपये, मुंबई में आस्ट्रेलियाई चना के भाव 4,275 रुपये, मध्य प्रदेष की इंदौर मंडी में 4,200 रुपये तथा राजस्थान की जयपुर मंडी में 4,450 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में चना की बुवाई 85.48 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 85.74 लाख हैक्टेयर में हुई थी। हालांकि सबसे बड़े चना उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेष और राजस्थान में इसकी बुवाई में कमी आई है। मध्य प्रदेष में चालू रबी में चना की बुवाई 27.32 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 29.16 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। राजस्थान में भी चालू चालू सीजन में 12.38 लाख हैक्टेयर में ही चना बोया गया है जबकि पिछले साल 14.97 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। चालू रबी में प्रमुख चना उत्पादक राज्यों में षर्दियों की बारिष नहीं हुई जिसकी वजह से चना की प्रति हैक्टेयर में कमी आने की आषंका है।
कृषि मंत्रालय ने चालू रबी में 95 लाख टन चना पैदावार का लक्ष्य तय किया है लेकिन पैदावार पिछले साल के 71.7 लाख टन से भी कम होने की आषंका है। .......आर एस राणा

25 January 2016

Rabi Crops Sowing Crosess 589.95 Lakh Hactare


          As per preliminary reports received from the States, the total area sown under Rabi crops as on 22nd   January, 2015 stands at 589.95 lakh hectares.
             Wheat has been sown/transplanted in 291.97 lakh hectares, pulses in 139.08 lakh hectares, coarse cereals in 59.30 lakh hectares. Area sown under oilseeds is 77.32 lakh hectares and Rice is 22.28 lakh hectares.      
 The area sown so far and that sown during last year this time is as follows:
                                                                                                                              Lakh hectare 
Crop
Area sown in 2015-16
Area sown in 2014-15
Wheat
291.97
305.60
Pulses
139.08
143.01
Coarse Cereals
59.30
56.56
Oilseeds
77.32
78.73
Rice
22.28
23.99
Total
589.95
607.90

China Cotton Imports Reaches Nine Years Low: Reuters


China cotton imports have moved 9 years low, according the calculation of Reuters. The country imported 188,200 tons of cotton in December, around 28.85 per cent lower as compared to the volume in the same month previous year. However till December the total volume for the calendar year stood 1.48 million tons, the lowest level in last nine years, according to Reuters.

गेहूं का उत्पादन 4 साल के निचले स्तर तक आ सकता है. आईजीसी


आर एस राणा
इंटरनेशनल ग्रेन काउंसिल यानि आईजीसी ने साल 2016.17 के दौरान वैश्विक स्तर पर गेहूं का उत्पादन घटकर 4 साल के निचले स्तर तक आने का अनुमान लगाया है। आईजीसी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2016.17 सीजन के दौरान दुनियाभर में गेहूं का उत्पादन 70ण्6 करोड़ टन तक सीमित रह सकता है जो 2012.13 के बाद सबसे कम उत्पादन होगा। आईजीसी के मुताबिक 2016.17 के दौरान दुनियाभर में गेहूं के रकबे में कमी आने का अनुमान है और इन हालात में अगर उत्पादकता सामान्य रहने का अनुमान लगाया जाए तो गेहूं का उत्पादन 3 फीसदी घटकर 4 साल के निचले स्तर तक लुढ़क सकता है।
गौरतलब है कि इस साल देश में भी गेहूं का रकबा कम हुआ है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 22 जनवरी तक देशभर में 291ण्97 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल दर्ज की गई है जबकि पिछले साल इस दौरान 305ण्60 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हो चुकी थी। गेहूं की मौजूदा बुआई से जो फसल आएगी वह 2016.17 मार्केटिंग सीजन के लिए होगी और आईजीसी ने वैश्विक स्तर पर 2016.17 के लिए उत्पादन कम होने का अनुमान जारी किया है।.....आर एस राणा

22 January 2016

Weekly Rice Exports Were Up by 30%


Total Rice exported from India in the second week of January was 162181.12 tons out of which basmati rice contribute 46.12%, and non-basmati rice is 53.87% in this period with quantity of around 74799.78 tons and 87381.33 tons respectively as per latest data extract from IBIS. Major importers of Indian Basmati rice in this period were Saudi UAE and Iran. We expect Middle East countries to remain the major basmati buyers of Indian Basmati from Mundra and Kandla Port in coming months. Major non basmati importers were Guinea, Benin and Turkey. Weekly rice exports were down by around 30% from last week export of 230354 tons.

उद्योग ने चीनी उत्पादन अनुमान में 10 लाख टन की कटौती की


कीमतों में और भी सुधार आने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2015-16 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान उद्योग ने चीनी उत्पादन अनुमान में 10 लाख टन की कटौती की कर कुल उत्पादन 260 लाख टन होने का अनुमान लगाया है। इसका घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ सकता है।
इंडियन षुगर मिल्स एसोसिएषन (इस्मा) के अनुसार सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में मौसमी बारिष की कमी से गन्ने की पैदावार कम हुई है जिसका असर इसकी पैदावार पर पड़ा है। इसके साथ ही कर्नाटका में भी चीनी के अग्रिम उत्पादन अनुमान में कमी आने की संभावना है। इस्मा ने पहले आरंभिक अनुमान में देष में चालू पेराई सीजन में 270 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया था जोकि घटाकर 260 लाख टन का कर दिया है।
महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 87 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है जबकि पहले आरंभिक अनुमान में यहां 90 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान था। उत्तर प्रदेष में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन पिछले साल के 71 लाख टन से बढ़कर 71.50 लाख टन होने का अनुमान है। उत्तर प्रदेष में चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी की दर ज्यादा आ रही है।
बारिष की कमी का असर कर्नाटका में भी चीनी उत्पादन पर पड़ेगा, इसीलिए राज्य में चालू पेराई सीजन में केवल 43 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है जबकि पहले आरंभिक अनुमान में यहां 49.2 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान था। तमिलनाडु में 13.9 लाख टन होने का अनुमान है। आंध्रप्रदेष, तेलंगाना और मध्य प्रदेष में भी चीनी उत्पादन में पिछले साल की तुलना में कमी आने की आषंका है।
उद्योग के अनुसार चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव इस समय 2,950 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि मिलों की लागत करीब 3,300 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल है। जानकारों के अनुसार कम उत्पादन अनुमान से चीनी की कीमतों में तेजी का अनुमान है। दिल्ली में चीनी के भाव 3,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।----------आर एस राणा

आयात षुल्क बढ़ाने के बाजवूद गेहूं का आयात जारी


आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार गेहूं पर आयात षुल्क को बढ़ाकर 25 फीसदी करने से आयात में कमी तो आई है लेकिन आयात अभी भी जारी है। गत सप्ताह करीब 490 टन गेहूं का आयात 335.36 डॉलर प्रति टन (एफओबी) की दर से किया गया।
लारेंस रोड़ पर गेहूं के भाव षुक्रवार को 1,700 रुपये, कोटा मंडी में 1,700 से 1,800 रुपये, करनाल मंडी में 1,625 रुपये तथा मध्य प्रदेष की रतलाम मंडी में 1,500 से 1,625 रुपये प्रति क्विंटल रहे। मध्य फरवरी तक गेहूं के भाव स्थिर रह सकते हैं लेकिन उसके बाद इसकी कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। मध्य मार्च तक उत्पादक मंडियों में इसके भाव में करीब 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट बनी सकती है।
विष्व बाजार में गेहूं के दाम नीचे बने हुए है जिसकी वजह से 25 फीसदी आयात षुल्क लगाने के बावजूद भी दक्षिण भारत की मिलें आयात कर रही है। चालू रबी में गेहूं की बुवाई में कमी आई है जिससे पैदावार पिछले साल की तुलना में 4.79 फीसदी कम हुई है। चालू रबी में गेहूं की बुवाई अभी तक 288.98 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 303.51 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
पहली जनवरी को केंद्रीय पूल में 237.88 लाख टन है जोकि तय मानाकों बफर के 138 लाख टन से ज्यादा है। कृषि मंत्रालय ने चालू रबी में गेहूं की पैदावार का लक्ष्य 947.5 लाख टन का रखा है जबकि पिछले साल रबी में इसकी पैदावार 889.4 लाख टन की हुई थी। देष में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 2013-14 में 958.5 लाख टन की हुई थी।........आर एस राणा

बफर स्टॉक के लिए अब तक 15,000 टन दालों की खरीद


सरकार ने दालों का बफर स्टॉक बनाने के लिए 15,000 टन दलहन की खरीद की है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में पिछले महीने चालू वर्ष के लिए 1.5 लाख टन दालों का बफर स्टॉक बनाने को मंजूरी दी गई थी क्योंकि दलहन की कीमतें अभी भी अधिकांश जगहों पर करीब 180 रुपये किलो की ऊंचाई पर बनी हुई हैं।  खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने गुरुवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, 'दलहन का मुद्दा हमारे लिए चुनौती है। दलहनों की आपूर्ति और मांग में अंतर है। मांग हर वर्ष बढ़ रही है जबकि उस लिहाज से उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है।' उन्होंने कहा कि सरकारी उपक्रमों ने 5,000 टन अरहर दाल का आयात किया है और अतिरिक्त 10,000 टन के लिए निविदा जारी की गई है। निजी व्यापारियों ने चालू वित्त वर्ष में 44 लाख टन दलहन का आयात किया है।
 दलहन बफर स्टॉक के बारे में पासवान ने कहा कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के किसानों से सीधे तौर पर करीब 15,000 टन दालें खरीदी गई हैं। खरीफ और रबी सत्र 2015-16 में खरीद का काम मूल्य स्थिरीकरण कोष के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बाजार मूल्य पर किया जाएगा। बफर स्टॉक बनाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि फसल वर्ष 2014-15 (जुलाई से जून) में घरेलू उत्पादन 20 लाख टन घटकर 1.72 करोड़ टन रह जाने के बाद दालों की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। मॉनसून कमजोर रहने की वजह से फसल वर्ष (जुलाई से जून) 2015-16 में दलहन उत्पादन फिर से कम रहने अथवा पूर्ववत रहने की उम्मीद है। सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने और इसकी घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने के लिए इसके आयात की तैयारी कर रही है।

21 January 2016

खाद्य सुरक्षा अधिनियम सभी राज्‍यों में इस साल अप्रैल तक लागू हो जाएगा



राशन कार्डों का शतप्रतिशत डिजिटीकरण जल्‍दी ही, शिकायत दूर करने की ऑनलाइन व्‍यवस्‍था देश के सभी 36 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू

धान की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए खरीद नीति में संशोधन, चालू खरीफ मौसम में बड़ी मात्रा में धान की खरीद

निरंतर प्रयासों से गन्ना मूल्य की बकाया राशि कम होकर 27,00 करोड़ रुपये रह गई है

उपभोक्‍ता संरक्षण और गुणवत्‍ता संस्‍कृति को बढ़ावा देने के लिए नए उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम और बी.आई.एस. अधिनियम के इस साल क्रियान्वित होने की आशा है


सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सुधार और इसको अधिक पारदर्शी बनाने के लिए पिछले 19 महीनों में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने वाले राज्‍यों की संख्‍या पिछले वर्ष 11 से बढ़कर 25 हो गई थी। इस वर्ष सभी राज्‍यों में अप्रैल तक यह अधिनियम लागू होने की आशा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री रामविलास पासवान ने आज यहां अपने मंत्रालय के कार्यक्रमों, नीतियों और भावी रोडमैप की मीडिया कर्मियों को जानकारी देते हुए यह बताया। 
       श्री पासवान ने कहा कि राशन कार्डों का डिजिटीकरण पीडीएस को लीक प्रूफ बनाने की प्रक्रिया एक महत्‍वपूर्ण घटक है। अभी तक देश भर में 97 प्रतिशत राशन कार्डों का डिजिटीकरण किया जा चुका है। शीघ्र ही यह शत-प्रतिशत हो जाएगा। सभी 36 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों में पीडीएस संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए ऑनलाइन व्‍यवस्‍था शुरू कर दी है। प्रत्‍यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) की व्‍यवस्‍था चंडीगढ़ और पुदुचेरी में इस साल सितंबर में शुरू की जाएगी।
      मंत्री महोदय ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पुनर्गठन के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अधिक से अधिक किसानों तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए धान खरीद नीति में संशोधन किया गया। इसके परिणामस्‍वरूप चालू खरीफ मौसम में धान की बड़ी मात्रा में खरीद की गई है। सरकार ने भारी बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देने के लिए गेहूं की खरीद के नियमों में छूट दी है।
      श्री रामविलास पासवान ने कहा किसानों को गन्ना मूल्य की बकाया राशि के भुगतान के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के कारण बकाया राशि 21,000 करोड़ रुपये से घटकर 2014-15 के गन्ना सत्र के दौरान 12 जनवरी, 2016 को 2700 करोड़ रुपये रह गई है। 
       उपभोक्‍ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा की गई अन्‍य उल्‍लेखनीय पहल इस प्रकार हैं:
खाद्य सुरक्षा अधिनियम का क्रियान्‍वयन
·         पिछले साल तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) लागू करने वाले राज्‍यों की संख्‍या 11 से बढ़कर 25 हो गई थी। इस साल अप्रैल तक सभी राज्‍यों में इस अधिनियम के लागू होने की आशा है।
·         लीकेज और डायवर्जन को रोकने के लिए और खाद्य सब्सिडी का लाभार्थियों को प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण करने के लिए भारत सरकार ने ‘खाद्य सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण नियम, 2015’ को 21 अगस्त 2015 को एनएफएसए के तहत अधिसूचित किया है। इन नियमों के तहत डीबीटी योजना संबंधित राज्यों/संघ शासित प्रदेशों की सहमति से लागू की जाएगी। इस योजना के तहत खाद्य सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। वह बाजार में कहीं से भी खाद्यान्न खरीदने के लिए स्वतंत्र होगा। यह योजना सितंबर 2015 में चंडीगढ़ एवं पुड्डुचेरी में लागू की जा चुकी है। दादर एवं नगर हवेली भी नकद हस्तांतरण/डीबीटी योजना को लागू करने के लिए पूरी तैयारी है। 
·         केंद्र सरकार ने खाद्यान्न के रखरखाव और ढुलाई की लागत का 50 प्रतिशत (पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के मामले में 75%) राज्यों एवं डीलरों के मार्जिन से साझा करने का फैसला किया है। इसे लाभार्थियों के ऊपर नहीं डाला जाएगा और उन्हें मोटा अनाज एक रुपये प्रति किलो, गेहूं दो रुपये प्रति किलो और चावल तीन रुपये प्रति किलो की दर से मिलता रहेगा।
·         राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभार्थियों को उनकी हकदारी का खाद्यान्न हर हाल में मिले, इसके लिए खाद्यान्न की आपूर्ति न होने के स्थिति में लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम को जनवरी 2015 में अधिसूचित किया गया है।
·         समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को पौष्टिक भोजन मुहैया कराने के लिए और गरीबों के लिए ‘अन्‍य कल्‍याणकारी योजनाओं’ को बेहतर ढंग से लक्षित करने के लिए उपभोक्‍ता मामलेखाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री की अध्‍यक्षता में गठित मंत्रियों की समिति ने न सिर्फ अन्‍य कल्‍याणकारी योजनाओं के लिए अनाज का आवंटन जारी रखनेबल्कि उन्‍हें योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली दालों - दूध और अंडे आदि जैसी पोषण संबंधी सहायता करने की सिफारिश की है।
खाद्यान्न प्रबंधन में सुधार
·         एफसीआई के पुनर्गठन के लिए सिफारिशें तैयार करने की खातिर सांसद शांता कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर ही एफसीआई की कार्य पद्धति सुधारने और इसके संचालन में लागत कुशलता लाने की खातिर कुछ उपायों की शुरुआत की गई है।
·         निरंतर प्रयासों से ही टीपीडीएस में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

1.         देश भर में 24 करोड़ 99 लाख 95 हजार 458 राशन कार्डों में से 24 करोड़ 17 लाख 32 हजार 202 कार्डों का डिजिटीकरण किया जा चुका है, यह 97% उपलब्धि है। शीघ्र ही इसके शत-प्रतिशत होने की उम्‍मीद है।
2.         10.10 करोड़ से ज्यादा राशन कार्डों को आधार के साथ जोड़ा जा चुका है।
3.         19 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में खाद्यान्न का ऑनलाइन आवंटन शुरू हो चुका है।
4.         प्लाइंट ऑफ सेल’ डिवाइस लगाकर 61,904 एफपीएस को स्वचालित बनाया गया है। इस साल मार्च तक लगभग 2 लाख राशन की दुकानों पर यह डिवाइस लगा दी जाएगी।
5.         32 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में टोल फ्री हेल्पलाइन स्थापित की गई है।
6.         36 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में ऑनलाइन शिकायत निवारण सुविधा शुरू की गई है।
7.         2राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में टीपीडीएस के सभी कामों को दिखाने के लिए पारदर्शिता पोर्टल लांच किया गया है।

किसानों के लिए राहत
·         इस साल अप्रत्याशित बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने गेहूं की खरीद के लिए गुणवत्ता के नियमों में ढील दी है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को ऐसी छूट पर मूल्य कटौती की राशि की प्रतिपूर्ति करने का फैसला भी किया, जिससे किसान भी सूखे और टूटे गेहूं और बदरंग अनाज के लिए पूर्ण न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्राप्त कर सकते हैं। किसानों के लिए इस तरह का केंद्रित कदम किसी भी केंद्र सरकार द्वारा पहली बार उठाया गया है। सरकारी एजेंसियों ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों से रबी वर्ष 2015-16 के दौरान 280.88 लाख टन गेहूं की खरीद की।
·         न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) की पहुंच ज्‍यादा किसानों तक बनाने के लिए और धान की खरीद में बढ़ोत्‍तरी के प्रयासों के तहत पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में निजी फर्मों को साथ जोड़ने की नीति निरूपित की गई। असम, बिहारपूर्वी उत्‍तर प्रदेशझारखंड और पश्चिम बंगाल में संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा चिन्हित किसानों से निजी फर्मों को अधिक मात्रा में धान खरीदने की इजाजत दी गईजहां भारतीय खाद्य निगम की सुदृढ़ खरीद व्‍यवस्‍था नहीं होने की वजह से अक्‍सर किसानों को हताशा में बिक्री करने के लिए विवश होना पड़ता है। निजी फर्मे एफसीआई अथवा सरकार के स्‍वामित्‍व वाली एजेंसी के गादामों तक कस्‍टम मिल्‍ड राइस (सीएमआर) पहुंचाएंगे।
·         एफसीआई ने चालू खरीद मौसम में अब तक 224.80 लाख टन धान की खरीद की जबकि पिछले खरीद मौसम की इसी अवधि में यह 174.04 लाख टन थी।
·         1.5 लाख टन दालों का बफर स्‍टॉक बनाने के लिए एफसीआई ने किसानों से बाजार मूल्‍य पर दालों की खरीद बाजार मूल्‍य या एमएसपी, जो भी अधिक हो, पर शुरू की है। खरीफ विपणन मौसम 2015-16 के दौरान 20 हजार टन अरहर और 2500 टन (कुल 22500 टन) खरीद करने का लक्ष्‍य है। इसी प्रकार रबी विपणन मौसम 2015-16 के दौरान 40 हजार टन चना और 10 हजार टन मसूर (कुल 50 हजार टन) खरीद का लक्ष्‍य है। 
·         आयातित तेलों के अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों में कमी का घरेलू स्‍तर पर उत्‍पादित होने वाले खाद्य तेलों के दामों पर असर पड़ा हैजिसके परिणामस्‍वरूप किसानों के हित प्रभावित हुए हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने आयात शुल्‍क बढ़ाने की सिफारिश की थी। तदनुसार 17.09.2015 को कच्‍चे तेलों पर आयात शुल्‍क मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर12.5 प्रतिशत कर दिया गया और रिफाइन्‍ड तेलों पर आयात शुल्‍क मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया।

एफसीआई में सुधार
·           एफसीआई के गोदामों की सभी गतिविधियों को ऑनलाइन करने के लिए "डिपो ऑनलाइन" प्रणाली शुरू की गई। 30 संवेदनशील डिपो में यह प्रणाली शुरू हो गई है और इस साल मई तक एफसीआई के शेष डिपुओं में और साल के आखिर तक एफसीआई द्वारा किराए पर लिए गए सभी डिपुओं में भी लागू हो जाएगी।
·           एफसीआई से 100 लाख टन भंडारण वाले आधुनिक साइलो बनाने को कहा गया है। यह पीपीपी व्‍यवस्‍था के तहत देश के विभिन्‍न राज्‍यों में बनाए जाएंगे। इनसे खाद्यान्‍नों की गुणवत्‍ता बनाए रखने, नुकसान को कम करने और अनाज की तेज ढुलाई में मदद मिलेगी। इनके निर्माण का समयबद्ध कार्यक्रम इस प्रकार है:

2015-16 तक 5 लाख क्षमता का सृजन
2016-17 तक 15 लाख क्षमता का सृजन
2017-18 तक 30 लाख क्षमता का सृजन
2018-19 तक 30 लाख क्षमता का सृजन
2019-20 तक 20 लाख क्षमता का सृजन

·          भारत सरकार ने खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही में बफर मानकों से अधिक खाद्यान्‍न के विपणन की मंजूरी दी थी। दिनांक 2 जनवरी 2016 तक इस योजना के तहत 44.81 लाख टन गेहूं और 0.73 लाख टन ग्रेड-ए चावल बेचा जा चुका है।
·          वर्ष 2014 और वर्ष 2015 के दौरान खराब मानसून के बावजूद एफसीआई के मजबूत खरीद प्रबंधों के परिणामस्‍वरूप केंद्रीय पूल में पर्याप्‍त मात्रा में खाद्यान्‍न उपलब्‍ध हैं। दिनांक 1 जनवरी 2016 को केंद्रीय पूल में 237.88 लाख गेहूं और 126.89 लाख टन चावल उपलब्‍ध था।  चावल की यह मात्रा पिछले वर्ष इसी अवधि के भंडार से 50.7 लाख टन अधिक है। खाद्यान्‍न की अधिक मात्रा से भविष्‍य में मानसून खराब होने या प्राकृतिक आपदा के समय आकस्मिक आवश्‍यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी।
·         विकेंद्रीकृत खरीद के तहत 12 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के अलावातेलंगाना चावल की खरीद के लिए एक नया डीसीपी राज्य बन गया। आंध्र प्रदेश और पंजाब में भी खाद्यान्न के खरीद में दक्षता और वितरण के संचालन में सुधार के लिए वर्ष 2014-15 के दौरान आंशिक रूप से इस प्रणाली को अपनाया है।
·         पूर्वोत्तर राज्यों में खाद्यान्न की पर्याप्त आपूर्ति के लिए लुमडिंग से बदरपुर तक गेज रूपांतरण के कारण रेल मार्ग में व्यवधान के बावजूद मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट का उपयोग किया गया। क्षेत्र में 20,000 मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण के लिए हर महीने 80,000 मीट्रिक टन खाद्यान्न सड़कों से ले जाया गया। बांग्लादेश से गुजरने वाली नदी के रास्‍ते से भी त्रिपुरा तक खाद्यान्न ले जाया गया।
·         1,03,636 टन चावल नदी/तटीय रास्‍ते से पहली बार आंध्र प्रदेश से केरल ले जाया गया।
·         सरकार ने खाद्यान्न के भंडारण के बेहतर प्रबंधन के लिए जनवरी2015 में बफर मानदंड को संशोधित किया। 2015-16 के दौरान भंडारण और पारगमन दोनों में नुकसान कम होकर (-) 0.03% (गेहूं में स्‍टोरेज गेन के कारण) और 0.39% रह गया है, जबकि समझौता ज्ञापन में इनके लिए निर्धारित लक्ष्‍य क्रमश: 0.15% और 0.42% था।
·         खाद्यान्न के केंद्रीय पूल स्‍टॉकों की भंडारण क्षमता में 796.08 लाख टन की वृद्धि हुई।  20 राज्यों में निजी उद्यमी गारंटी योजना (पीईजी) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले नए गोदामों का निर्माण किया गया। इस योजना स्कीम के तहत उत्तर-पूर्व में 62,650 टन की इस भंडारण क्षमता के अलावा और 12 राज्यों में 1.78 लाख टन के सीडब्ल्यूसी के माध्यम से और जोड़ी जाएगी।
·         वर्ष 2015-16 के दौरान (18.01.2016 तक) 610.50 लाख टन खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याण योजनाओं के तहत वितरण के लिए राज्यों/संघ राज्य प्रदेशों को आवंटित किया गया था
·         केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) ने भी 2014-15 में अभी तक का सबसे ज्‍यादा 1562 करोड़ रुपए का कारोबार किया।
·         भंडारण क्षेत्र को सक्रिय बनाने के लिए भण्डारण विकास और नियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) के रूपांतरण की एक योजना शुरू की गई है। आईटी प्‍लेटफार्म प्रदान करने और नियमों एवं प्रक्रियाओं को सुधारने का काम शुरू किया गया है।
गन्‍ना किसानों का बकाया चुकाने के लिए उठाए गए कदम
·          सरकार ने गन्‍ना किसानों की बकाया राशि मिलों द्वारा भुगतान के लिए इस क्षेत्र में नकदी प्रवाह में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं।
·          गन्‍ना किसानों की बकाया राशि के भुगतान में सहायता प्रदान करने के लिए चीनी उद्योग को 6000 करोड़ रुपये तक के सुलभ ऋण प्रदान करने की योजना 23 जून 2015 को अधिसूचित की गई। इस योजना के तहत 4152 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। सरकार ने सुलभ ऋण योजना के तहत पात्रता प्राप्‍त करने की अवधि भी एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है और बढ़ी हुई अवधि के लिए 600 करोड़ रुपये की सीमा तक ब्‍याज पर वित्‍तीय सहायता लागत का वहन करने का फैसला किया है।
·          किसानों को सीधे सब्सिडीसरकार ने 2015-16 सीजन में गन्‍ने के मूल्‍य को समायोजित करने और 2015-16 के चीनी सीजन के लिए किसानों के बकाये का समय पर भुगतान सुगम बनाने के लिए मिलों को 4.50 रुपये प्रति क्विंटल उत्‍पादन संबंधी सब्सिडी का भुगतान करने का फैसला किया है। इस संबंध में 2 दिसम्‍बर,2015 को एक अधिसूचना जारी की गई। योजना के अंतर्गत जारी होने वाली राशि सीधे किसानों के खातों में डाली जाएगी।
·         कच्‍ची चीनी पर निर्यात प्रोत्‍साहन 3200 रुपए प्रति टन से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति टन कर दिया गया है। पिछले वर्ष प्राप्‍त 7.5 लाख टन की तुलना में 40 लाख टन कच्‍ची चीनी के निर्यात के लिए राशियों का आवंटन किया गया है। सितम्‍बर 2015 में सरकार ने 2015-16 में चार मिलियन टन चीनी के अनिवार्य निर्यात के लिए मिलों और सहकारी समितियों के लिए कोटे की भी घो‍षणा की है।
·         सरकार ने आयात को हतोत्‍साहित करने के लिए चीनी पर आयात शुल्‍क 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। उन्‍नत प्राधिकृत योजना के अंतर्गत घरेलू बाजारों में चीनी की लीकेज रोकने के लिएनिर्यात उत्‍तरदायित्‍व अवधि 18 महीने से घटाकर 6 महीने कर दी गई है।
·         इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के अंतर्गत सम्मिश्रण लक्ष्‍य 5 प्रतिशत से  बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिए गए हैं।

·         सम्मिश्रण के लिए आपूर्ति किए गए इथेनॉल के लिए लाभकारी मूल्‍य बढ़ाकर 49 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया हैपिछले वर्षों के मुकाबले यह वृद्धि काफी ज्‍यादा है। इसके परिणामस्‍वरूपसम्मिश्रण के लिए इथेनॉल की आपूर्ति प्रतिवर्ष करीब 32 करोड़ लीटर से बढ़कर सालाना 83 करोड़ लीटर हो गयी है। इससे चीनी उद्योग अब इथनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम 6.82 करोड़ लीटर इथनॉल तेल कंपनियों को चालू चीनी मौसम के दौरान (अक्‍तूबर 2015 से) उपलब्‍ध करा चुकी है जबकि पिछले मौसम की इसी अवधि में यह मात्रा सिर्फ 1.92 करोड़ लीटर थी। इसके अलावा, इस कार्यक्रम के अंतर्गत चालू चीनी मौसम के दौरान अनुबंधित इथनॉल की मात्रा 120 करोड़ लीटर है जो अब तक की सबसे अधिक है।
·         निरंतर प्रयासों के परिणामस्‍वरूप गन्‍ने का बकाया जो चीनी सीजन 2014-15 के अप्रैल में 21,000  करोड़ रुपये थाजो कम होकर 12 जनवरी 2016 को 2700 करोड़ रुपए रह गया है।
उपभोक्‍ता उत्‍पादों और सेवाओं की गुणवत्‍ता बढ़ाने के लिए नए प्रावधान
·          सामान्‍य उपभोक्‍ता के लिए उत्‍पादों और सेवाओं की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 29 साल पुराने बीआईएस अधिनियम को बदलने के लिए भारतीय मानक ब्‍यूरो विधेयक2015 संसद में प्रस्‍तुत किया। लोकसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया है। नए विधेयक में मानकों के बेहतर अनुपालन के लिए सरल स्‍व-प्रमाणन व्‍यवस्‍थाअनिवार्य हॉलमार्किंग और उत्‍पाद को वापस लेने तथा उत्‍पाद के उत्‍तरदायित्‍व हेतु प्रावधान किए गए हैं।
·         स्‍वास्‍थ्‍यसुरक्षापर्यावरणधोखाधड़ी से संबंधित चलन से रोकथामरक्षा से संबंधित और ज्‍यादा मदों को अनिवार्य प्रमाणन के अंतर्गत लाया गया है। कीमती धातु से बनी वस्‍तुओं की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। ‘’कारोबार करने में सुगमता प्रदान करने’’  की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए इंस्‍पैक्‍टरों के फैक्‍टरी में दौरा करने के लिए जाने के स्‍थान पर स्‍व-प्रमाणन और बाजार पर निगरानी जैसी सरलीकृत अनुपालन आकलन योजनाएं शुरू की गई हैं। इस प्रकार मानकों पर इंस्‍पैक्‍टर राज समाप्‍त हो गया है। 

·         प्रस्‍तावित नए प्रावधान मानकीकरण से जुड़ी गतिविधियों के सामंजस्‍यपूर्ण विकास को बढ़ावा देते हुए भारत सरकार को स्‍वास्‍थ्‍यसुरक्षापर्यावरण और धोखाधड़ी से संबंधित चलन की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण समझी जाने वाली वस्‍तुओं अथवा सेवाओं के लिए अनिवार्य प्रमाणन की व्‍यवस्‍था लाने में समर्थ बनाएंगे। कीमती धातु से बनी वस्‍तुओं की हॉलमार्किंग अनिवार्य करकेअनुपालन आकलन की संभावना बढ़ाकर और जुर्माना राशि में वृद्धि तथा कानून के प्रावधानों का महत्‍व बढ़ाकर निकृष्‍ट स्‍तर के उत्‍पादों के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। नए विधेयक में ज्‍यादा प्रभावी अनुपालन और उल्‍लंघनों के लिए अपराध के समायोजन के लिए जुर्माना राशि बढ़ाने के प्रावधान भी किए गए हैं।
·         नया विधेयक संबंधित भारतीय मानकों की कसौटी पर खरे नहीं उतरने वाले उत्‍पादों के लिए उत्‍पाद उत्‍तरदायित्‍व सहित उन्‍हें वापस लेने का प्रावधान करता है।
·         आयातित घटिया उत्‍पादों से उपभोक्‍ताओं/उद्योगों की सुरक्षा हेतु इलैक्‍ट्रॉनिक उत्‍पादों के विनिर्माताओं के पंजीकरण का प्रावधान किया गया है।
·         स्‍वच्‍छ भारत अभियान के अंतर्गतपेयजलसड़क के खाने और कचरे के निपटान संबंधी मानकों को निरूपित करने/उन्‍नत बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
उपभोक्‍ता संरक्षण को बढ़ावा
·         उपभोक्‍ता शिकायत निवारण प्रक्रिया को सरलीकृत और सशक्‍त बनाने वाला उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक2015 इस साल संसद में पेश किया गया। केंद्रीय संरक्षण प्राधिकरण की स्‍थापनाजिसे उत्‍पादों को वापस लेने और खुदरा कारोबारियों सहित दोषी कम्‍पनियों के विरुद्ध मुकदमा दायर करने के अधिकार देने का प्रस्‍ताव है। उपभोक्‍ता अदालतों में शिकायतों की ई-फाइलिंग और समयबद्ध स्‍वीकृति इस विधेयक में किया गया एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण प्रावधान है।
·         सरकार ने उपभोक्‍ता जागरूकता और संरक्षण के लिए उद्योग के साथ 6 सूत्रीय संयुक्‍त कार्य योजना  बनाई है। इसकी मुख्‍य बातें हैं:
1.      शिकायत निवारण के लिए उद्योग स्‍वयं मानक बनाएं और उन्‍हें क्रियान्वित करें।
2.      उद्योग संघों के सभी सदस्‍यों को राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन और राज्‍य उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन के साथ जोड़ना।
3.      संयुक्‍त जागरूकता अभियान चलाना।
4.      उपभोक्‍ता कल्‍याण कार्यों के लिए उद्योग जगत कॉर्पोरेट उपभोक्ता दायित्व निधि बनाएं।
5.      भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ स्व-नियामक संहिता बनाएं।
6.      नकली, घटिया और जाली उत्‍पादों के विरुद्ध कार्रवाई करें।

·         उपभोक्‍ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए स्‍वास्‍थ्‍यवित्‍तीय सेवाएं और अन्‍य विभागों के साथ मिलकर संयुक्‍त अभियान चलाया गया। इस वर्ष उपभोक्‍ता मामलों संबंधी विभाग ने जागो ग्राहक जागो के बैनर तले अपना मल्‍टी मीडिया अभियान तेज कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रोंजनजातीय क्षेत्रों और पूर्वोत्‍तर पर विशेष बल देते हुए  इस अभियान ने उपभोक्‍ताओं को उनके अधिकारों/उत्‍तरादायित्‍वों के बारे में जागरूक बनाया।
·         उपभोक्‍ताओं से संबंधित प्रमुख क्षेत्रों यथा- कृषिखाद्यस्‍वास्‍थ्‍य सेवाआवास,वित्‍तीय सेवाएं और परिवहन के लिए एक अंतर-मंत्रालयी निगरानी समिति  का गठन किया गयाताकि उपभोक्‍ताओं के संबंध में नीतिगत सामंजस्‍य  और समन्वित कार्रवाई की जा सके।
·         भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के लिएएक समर्पित पोर्टल www.gama.gov शुरू किया गया। उपभोक्‍ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में समर्थ बनाने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों यथा-खाद्य एवं कृषिस्‍वास्‍थ्‍यशिक्षारियल एस्‍टेटपरिवहन एवं वित्‍तीय सेवाओं को इस उद्देश्‍य से शामिल किया गया है। दर्ज की गई शिकायतों को संबंधित प्राधिकरणों अथवा क्षेत्र के विनियामकों के समक्ष उठाया गया है और कार्रवाई करने के बाद उपभोक्‍ता को सूचित किया गया है।
·         उपभोक्‍ता सेवाओं को एक ही जगह उपलब्‍ध कराने के लिए छह स्‍थानों अहमदाबादबेंगलुरुजयपुरकोलकातापटना और दिल्‍ली में 18 मार्च 2015 को ग्राहक सुविधा केंद्र प्रारम्‍भ किए गए । ऐसे केंद्र चरणबद्ध रूप से प्रत्‍येक राज्‍य में स्‍थापित किए जाएंगे। वे उपभोक्‍ता कानूनोंउपभोक्‍ताओं के अधिकारो,उपभोक्‍त अदालतों का दरवाजा खटखटाने की प्रक्रिया और उत्‍पादों की गुणवत्‍ता का भरोसा और सुरक्षा सहित उपभोक्‍ताओं से जुड़े अन्‍य मामलों के बारे में उपभोक्‍ताओं को जानकारी उपलब्‍ध कराएंगे।

आवश्‍यक खाद्य वस्‍तुओं की उपलब्‍धता किफायती मूल्‍यों पर सुनिश्चित कराने के उपाय

आवश्‍यक खाद्य वस्‍तुओं की उपलब्‍धता किफायती दामों पर सुनिश्चित कराने के लिए सरकार ने निम्‍नलिखित फैसले लिए हैं :
·         आवश्‍यक वस्‍तुओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम कार्य योजना तैयार की गई है, उपभोक्‍ता मामले विभाग के सचिव की अध्‍यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति साप्‍ताहिक समीक्षा बैठक करती है। 
·         1.50 लाख टन दालों का बफर स्‍टॉक बनाने का फैसला किया गया है। 10 हजार टन दाल के आयात का फैसला किया जा चुका है।
·         खरीफ की दालों में अरहर और उड़द के लिए एमएसपी बढ़ाकर 275 रुपए प्रति क्विंटल और मूंग के लिए बढ़ाकर 250 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
·         काबुली चना और ऑर्गेनिक दालों एवं  मसूर की दाल की 10000 एमटी मात्रा तक के अतिरिक्‍त सभी प्रकार की दालों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
·         शून्‍य आयात शुल्‍क की अवधि 30 सितम्‍बर 2016 तक बढ़ायी गई।
·         अनिवार्य वस्‍तु अधिनियम1955 के तहतजमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों को प्‍याज और दालों पर भंडारण की सीमा निर्धारित करने का अधिकार दिया गया।
·         5 किलोग्राम तक के पैकेटबंद ब्रांडेड उपभोक्‍ता पैक में अन्‍य खाद्य तेल की बिक्री दिनांक 6 फरवरी 2015 से 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के न्‍यूनतम निर्यात मूल्‍य (एमईपी) पर करने की अनुमति दी गई।