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26 मार्च 2014

उत्तर भारत में कम होगी बारिश : रिपोर्ट

अल-नीनो का खतरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिससे आगामी मॉनसून सीजन के दौरान भारत के उत्तरी राज्यों में कम बारिश की ज्यादा आशंका है। स्काईमेट के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी जतिन सिंह ने कहा, 'दक्षिण भारत के दोनों तरफ महासागर हैं। इसलिए चालू सीजन में इस क्षेत्र को या तो बंगाल की खाड़ी या अरब सागर या दोनों की मदद से पर्याप्त बारिश मिलेगी। दूसरी ओर उत्तर भारत पूरी तरह महासागर पर निर्भर है और यह तट पर स्थित नहीं है, इसलिए उत्तर भारत को इस सीजन में बारिश की कमी झेलनी पड़ सकती है।' स्काईमेट का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत के मौसम पैटर्न के बारे में उसके पूर्वानुमान सबसे सटीक रहे हैं। पिछले 138 वर्षों के दौरान करीब 98 फीसदी अलनीनो की घटनाओं में सामान्य से कम बारिश हुई है और 60 फीसदी मामलों में सूखा रहा। इस दौरान अत्यधिक बारिश नहीं दर्ज की गई। अलनीनो की घटनाओं और इसके लिए लगाई गई मशीनों के बीच सांख्यिकी सह-संबंध रहा है। लेकिन समस्या यह है कि सिस्टम का आकार इतना बड़ा है कि कोई भी व्यक्ति वैज्ञानिक रूप से इन मशीनों की हर तरह से जांच नहीं कर सकता। इसका सिद्धांत यह है कि दक्षिण अमेरिका में गर्मी से बंगाल की खाड़ी की नमी उधर जा रही है, जिससे भारत के कुछ हिस्सों में कम बारिश होगी। सिंह ने कहा, 'पूरा सीजन 8-9 मिलीमीटर बारिश पर आधारित है। अगर हम भारत के सभी मौसम उपखंडों को अध्ययन में शामिल करें और 31 सितंबर 2014 तक 8-9 मिलीमीटर की 90-95 फीसदी बारिश होती है तो इसका वितरण कम हो सकता है।' वर्ष 2002 में अलनीनो सक्रिय था, जिस से बारिश सामान्य से 21 फीसदी कम रही और यह वर्ष सूखा रहा। फिर 2004 में अलनीनो की वजह से बारिश 12 फीसदी कम रही। वहीं, वर्ष 2009 और 2012 में अलनीनो के असर की वजह से बारिश लंबी अवधि के औसत से क्रमश: 27 फीसदी और 7 फीसदी कम रही। इसलिए इस बात के आसार हैं कि इस साल भी बारिश कम रहेगी। सभी अनुमानों में यह दिखाया जा रहा है कि जून में अलनीनो का असर दिखना शुरू हो जाएगा। सिंह ने कहा कि हालांकि 95 फीसदी औसत बारिश होना चिंताजनक नहीं होगा। मगर इससे कम बारिश होने पर सूखे से इनकार नहीं किया जा सकता। (BS Hindi)

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