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30 November 2013

'India exported Rs 2.32 lakh cr agricultural produce this yr

Gangtok, Nov 30. Agriculture Minister Sharad Pawar today said the country exported agricultural produce worth Rs 2.32 lakh crore this year after addressing the consumption need of 1.2 billion population and stocking foodgrains much above the buffer norms. Addressing a function at the College of Agriculture Engineering and Post Harvest Technology near Ranipool in Sikkim today, Pawar said India is today highest producer of milk, pulses, jute and second in the production of rice, wheat, sugarcane, groundnuts, vegetable foods and cotton in the world. "It is also the leading producer of spices and plantation crops as well as livestock, fisheries and poultry. India is thus emerging as a major player in the international market," he said. The credit for this goes to farming community, scientists, technologists and the state governments, he added.

Gold extends gains on sustained buying, firm global cues

New Delhi, Nov 30. Gold prices extended gains for the second straight day by adding Rs 205 to reach Rs 31,525 per ten grams here today on sustained buying for the ongoing marriage season amid a firming global trend. Silver also strengthened by Rs 175 to Rs 45,075 per kg on increased offtake by industrial units and coin makers. Traders said sustained buying by stockists and retailers to meet the ongoing marriage season demand amid a firming global trend mainly helped gold prices to extend gains. Gold in New York, which normally sets price trend on the domestic front, rose by one per cent to USD 1,250.40 an ounce and silver by 1.8 per cent to USD 20.03 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity advanced by Rs 205 each to Rs 31,525 and Rs 31,325 per ten grams, respectively. It had gained Rs 105 yesterday. Sovereign held steady at Rs 25,200 per piece of eight gram. Similarly, silver ready rose by Rs 175 to Rs 45,075 per kg and weekly-based delivery by Rs 195 to Rs 44,275 per kg. The white metal had gained Rs 100 in the previous session. Silver coins also spurted by Rs 1,000 to Rs 85,000 for buying and Rs 86,000 for selling of 100 pieces.

भारतीय बाजारों में रबर की कीमत वैश्विक स्तर से नीचे

छह महीने के अंतराल के बाद प्राकृतिक रबर की स्थानीय कीमतें वैश्विक स्तर से नीचे 152 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। बेंचमार्क आरएसएस-4 ग्रेड का भाव आज 152 रुपये रहा, जबकि बैंकॉक बाजार में कीमत 154 रुपये प्रति किलोग्राम रही। इस साल मई में स्थानीय कीमत 168 रुपये थी, जबकि बैंकॉक में 171 रुपये प्रति किलोग्राम। उसके बाद से स्थानीय बाजार में कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से ऊंची बनी हुईं थीं। कई बार यह अंतर 15-17 रुपये प्रति किलोग्राम था और इस वजह से देश में प्राकृतिक रबर का भारी आयात हुआ। स्थानीय कीमतें आपूर्ति में भारी वृद्धि और कमजोर स्थानीय मांग के कारण पिछले कुछ महीनों से गिर रही हैं। इसके बावजूद अब तक कीमतें वैश्विक बाजारों से 3-5 रुपये प्रति किलोग्राम ज्यादा थीं। रबर बागानों में यह वर्ष के सबसे अधिक उत्पादन का समय है, इसलिए कोट्टायम और कोच्चि जैसे स्थानीय बाजारों में आपूर्ति बढ़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक आपूर्ति में इजाफे से स्थानीय बाजार में गिरावट का रुख है और यह जनवरी तक जारी रहने की संभावना है। रबर उत्पादन का सबसे बेहतर सीजन अक्टूबर से दिसंबर तक होता है और जनवरी में भी टैपिंग सक्रिय रहेगी। इसलिए आने वाले सप्ताह में रबर की आवक और बढ़ेगी, जिससे कीमतों में और गिरावट आएगी। विशेषज्ञों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि वैश्विक कीमतों में भी गिरावट का रुख है, क्योंकि दुनियाभर में मांग कमजोर बनी हुई है। इसकी प्रति किलोग्राम कीमत 2 डॉलर पर आकर रुकने की संभावना है, क्योंकि इस जिंस की मांग में साफ तौर पर कमजोरी दिखाई दे रही है। कोचिन रबर मर्चेन्ट एसोसिएशन (सीआरएमए) के पूर्व अध्यक्ष एन राधाकृष्णन ने कहा कि आपूर्ति बढ़ रही है, लेकिन मांग कमजोर है। इस वजह से उत्पादकों पर बिकवाली का भारी दबाव है और इससे कीमतों में गिरावट आ रही है। कारोबारियों के एक वर्ग का मानना है कि दिसंबर के अंत तक कीमत गिरकर 130 रुपये प्रति किलोग्राम पर आने की संभावना है। कीमतों में ऐसी भारी गिरावट की आशंका से ज्यादातर उत्पादक केद्रों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर मांग विशेष रूप से चीन में कम है। चीन रबर का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। (BS Hindi)

ग्वार ने बढ़ाई सियासी धार

कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव को लेकर सुर्खियों में रहने वाला ग्वार एक बार फिर चर्चा में है। देश में ग्वार का 80 फीसदी उत्पादन करने वाले राज्य राजस्थान में इस बार ग्वार प्रमुख चुनावी मुद्दा है। राजस्थान विधानसभा चुनावों में नेता ग्वार बचाव का नारा लगा किसानों को लुभा रहे हैं वहीं जयपुर से मुंबई तक सटोरिये ग्वार पर दांव लगाकर करोड़ों के वारे न्यारे करने में जुटे हैं। राजस्थान में लगभग सभी राजनीतिक दल ग्वार किसानों के हितों की बात कर रहा है। ग्वार के बड़े कारोबारी बी डी अग्रवाल तो ग्वार किसानों और कारोबारियों के हितों का दावा करते हुए जमींदारा पार्टी का गठन कर मैदान में अपने 21 उम्मीदवारों को भी उतार दिया है। जमींदारा के झंडा ताले अग्रवाल अपने पूरे परिवार को ग्वार के सहारे चुनावी वैतरणी पार कराना चाह रहे हैं। अग्रवाल का दावा है कि नई सरकार के गठन में उनकी अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि जो पार्टी ग्वार कारोबारियों और किसानों के हितों की रक्षा करेगी वह उसी को समर्थन देंगे। हालांकि सट्टïा बाजार में जमींदारा पार्टी की औकात महज एक-दो सीटों की ही बताई जा रही है। ग्वार कारोबारियों की मानी जाए तो पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई कृषि उत्पाद राजस्थान के चुनाव में प्रमुख मुद्दा बना है। बीकानेर उद्योग मंडल के प्रवक्ता पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि सभी दल ग्वार किसानों और कारोबारियों का हितैषी बताने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव में ग्वार को मुद्दा बनने की प्रमुख वजह राजनीतिक दलों को ग्वार कारोबारियों से मिलने वाला मोटा चंदा है। जमींदारा पार्टी के उम्मीदवार पिछले साल ग्वार वायदा पर पाबंदी के लिए जिम्मेदार भाजपा को ठहरा रहे हैं, वहीं कांग्रेस भी इसका ठीकरा भाजपा पर फोड़ रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि सटोरियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। इस बीच सटोरिये भी खूब दांव लगा रहे हैं। भाजपा के 116 सीटों के लिए एक रुपये का भाव लग रहा है जबकि कांग्रेस की महज 60 सीटों का भाव एक रुपया है। सट्टïे के जानकारों की मानें तो राजस्थान के चुनाव पर इस बार रिकॉर्ड 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सट्टïा लगा हुआ है, जिसमें ग्वार की अहम भूमिका रही है। राज्य में ग्वार का उत्पादन 2008-09 में 12.61 लाख टन था जो 2012-13 में बढ़कर 20.23 लाख टन तक पहुंच गया है। राज्य में उत्पादन बढऩे की वजह ग्वार की ऊंची कीमतों की वजह से किसानों का ग्वार की तरफ आकर्षित होना है। (BS Hindi)

चीनी उत्पादन 10 फीसदी गिरेगा

उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में गन्ना किसानों और मिल मालिकों के बीच गतिरोध जारी है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन विशेषज्ञों से संपर्क किया, उनका मानना है कि अगर अगले 15 दिनों में सामान्य रूप से पेराई शुरू नहीं हुई तो 2013-14 में भारत का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 10 से 15 फीसदी गिर सकता है। उनमें से एक ने कहा कि हालांकि इससे आपूर्ति पर कोई असर नहीं होगा, क्योंकि चीनी का ओपनिंग स्टॉक जरूरत से काफी ज्यादा (90 लाख टन) है। जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) के चेयरमैन अशोक गुलाटी ने कहा, 'हमारे पास अतिरिक्त स्टॉक है और उत्पादन में 10-15 फीसदी गिरावट से बाजार में संतुलन आएगा।' हालांकि बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन पर असर पड़ सकता है। एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा, 'गन्ना जितना ज्यादा खेतों में खड़ा रहेगा, उतनी ही उत्पादन पर असर पडऩे की संभावना है, क्योंकि इससे गन्ने में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है।Ó खाद्य मंत्री के वी थॉमस और उनके विभाग के अन्य अधिकारियों ने गुरुवार को कहा था कि अभी उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर यह गतिरोध समाप्त नहीं हुआ और किसान मिलों में गन्ना नहीं लाते हैं तो उत्पादन में कमी आ सकती है। थॉमस ने संवाददाताओं से कहा, 'इस गतिरोध की वजह से उत्पादन में गिरावट की अभी कोई संभावना नहीं है।' उन्होंने कहा कि फसल विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) 2013-14 के दौरान चीनी का उत्पादन करीब 244 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से करीब 2.7 फीसदी कम है। हालांकि इस गिरावट की वजह पिछले साल महाराष्ट्र और गुजरात में रहा सूखा है न कि इस समय मिलों और गन्ना किसानों के बीच बना हुआ गतिरोध। जहां भारत में चीनी का उत्पादन 2013-14 में 244 लाख टन रहने का अनुमान है, वहीं खपत 235 लाख टन अनुमानित है। थॉमस ने कहा, 'चीनी की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर 85-90 लाख टन रहने का अनुमान है।' गन्ने की कीमतों पर बने हुए गतिरोध से पेराई पर असर पड़ा है। उत्तर प्रदेश में 99 से ज्यादा निजी मिलों में से 70 ने परिचालन रोक दिया है। यह पेराई नवंबर मध्य से शुरू हो जानी थी। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी पेराई ठीक ढंग से शुरू नहीं हो पाई है, क्योंकि वहां भी किसान गन्ने की ऊंची कीमत मांग रहे हैं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा, 'मेरा भी यही मानना है कि अगर अगले 10-15 दिन में उत्पादन शुरू नहीं होता है तो भारत का चीनी उत्पादन घटेगा।' (BS Hindi)

राहत देने के बाद भी गन्ना मूल्य पर टकराव

दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र तक चीनी और गन्ना का मसला गुरुवार को हावी रहा। केंद्र सरकार जहां चीनी उद्योग को राहत पैकेज देने की तैयारी कर रही है। वहीं, गन्ना उत्तर प्रदेश में टैक्सों में राहत देने के बावजूद गन्ना मूल्य पर गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों ने ज्यादा मूल्य के लिए आंदोलन का ऐलान कर दिया है जबकि मिलों ने पेराई शुरू करने से साफ इंकार कर दिया है। महाराष्ट्र में भी गन्ना मूल्य को लेकर आंदोलन उग्र हो गया है। उत्तर प्रदेश में गन्ना मुद्दे पर संकट और गहराया सरकार : मिलों को राहत देने के लिए टैक्स में छूट का ऐलान मिलें : मूल्य में कटौती न होने तक पेराई शुरू न करने का निर्णय किसान : मूल्य बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र में आंदोलन उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य को लेकर संकट गुरुवार को और गरमा गया। राज्य सरकार ने मिलों को करों में राहत देने की पेशकश करने के साथ मिलों में पेराई एक हफ्ते के अंदर शुरू करने का अल्टीमेटम दे दिया है। निजी क्षेत्र की मिलों ने गन्ने की पेराई से स्पष्ट इंकार कर दिया है। दूसरी ओर किसान संगठनों ने गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर चक्का जाम का ऐलान किया है। गन्ना मूल्य पर महाराष्ट्र में भी राजनीति गरमा गई है। निजी क्षेत्र की 99 मिलों द्वारा किसानों से गन्ना न खरीदने से चिंतित उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने एंट्री टैक्स हटाने और खरीद शुल्क में राहत देने की घोषणा की है। सरकार ने गन्ने की ऊंची कीमत से राहत देने के इरादे से यह कदम उठाया है। राज्य में कुल 122 मिलों में से 99 मिलें निजी क्षेत्र की हैं। चीनी उद्योग व गन्ना विकास विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर ने इसके साथ ही कहा कि अब मिल मालिकों को और कोई राहत देना संभव नहीं है। मिलों को 2 रुपये प्रति क्विंटल खरीद शुल्क नहीं देना होगा। इससे उन्हें करीब 160 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। एंट्री टैक्स हटने से भी उन्हें 219 करोड़ रुपये का लाभ होगा। तीन माह सरकार बाजार भाव की समीक्षा करेगी और अगर जरूरत होगी तो और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने मिलों को पेराई शुरू करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में गन्ने पर सियासत गरमा गई है, वहीं महाराष्ट्र में भी किसानों की आवाज बुलंद हो गई है। उत्तर प्रदेश में हालात बेकाबू होने का खतरा पैदा हो गया है। गन्ने की कीमतों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासत गरमाती जा रही है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने 2 दिसंबर को चक्का जाम का ऐलान किया है। साथ ही इस बात की चेतावनी दी है कि मिल मालिकों की मनमानी पर रोक नहीं लगी तो किसान अपने पशुओं को साथ में लेकर आंदोलन करेंगे। वहीं, भाजपा किसान मोर्चा ने राज्य सरकार पर चीन मिल मालिकों के सामने घुटने टेकने का आरोप लगाया है। उधर, राष्ट्रीय लोकदल ने भी एक दिसंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चक्का जाम का ऐलान किया है। किसान नेता और महाराष्ट्र से लोकसभा के सांसद राजू शेट्टी ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। राजू शेट्टी की पार्टी ने पश्चिमी महाराष्ट्र में बंद का ऐलान किया है। महाराष्ट्र के कराड में गन्ना किसानों ने एक बस फूंक दी है, साथ ही रत्तागिरी में भी इसके विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया है। कर्नाटक सरकार ने राज्य के गन्ना किसानों को प्रति क्विंटल 15 रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की है। इस बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि गन्ने के मौजूदा एसएपी सामान्य किस्म के लिए 280 रुपये प्रति क्विंटल पर मिलें पेराई शुरू करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि या तो राज्य सरकार गन्ने के एसएपी में कटौती करे या फिर, चीनी की मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी हो, तभी मिलें चलाना संभव हो पायेगा। चीनी की मौजूदा कीमतों पर मिलों को भारी घाटा हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें सहायता करती है, तो भी गन्ने की मौजूदा कीमतों के आधार पर पेराई करने से मिलों को घाटा होगा। ऐसे में चीनी उद्योग को राहत देने के लिए केंद्र सरकार निर्यात पर सब्सिडी दे सकती है, या फिर चीनी का करीब 20 लाख टन का बफर स्टॉक बना सकती है। ऐसा करने से चीनी की मौजूदा कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे उद्योग को राहत मिल सकती है। (Business Bhaskar)

28 November 2013

ईरान को निर्यात पर खत्म होगा भारत का एकाधिकार

ईरान के पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौते के बाद उसको चावल और सोयाखली के निर्यात में भारत का एकाधिकार खत्म हो सकता है। इस समझौते से प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ता देशों को इस तेल समृद्ध देश (ईरान) के साथ कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। ईरान और विश्व की छह महाशक्तियों के बीच रविवार को हुए ऐतिहासिक समझौते से ईरान के साथ कारोबार पर कुछ प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं। इन प्रतिबंधों की वजह से ओपेक के सदस्य (ईरान) का तेल निर्यात घटकर करीब आधा रह गया है और उसके पास खाद्य एवं कृषि वस्तुओं के आयात के लिए कुछ देशों का ही विकल्प बच गया है। इन प्रतिबंधों की वजह से ही भारत को ईरान से तेल की खरीद घटाने के लिए बाध्य होना पड़ा। लेकिन फिर भी भारत एक बड़ा खरीदार बना रहा। वर्ष 2012 में प्रतिबंधों की वजह से डॉलर में भुगतान रुक गया था। इसके बाद भारत ने ईरान से तेल खरीद का कुछ भुगतान रुपये में करना शुरू कर दिया था। ईरान इस पैसे का इस्तेमाल भारत से वस्तुएं खरीदने में कर रहा था। रुपये में इस कारोबार से भारत को अन्य चावल और सोयाखली आपूर्तिकर्ताओं जैसे पाकिस्तान और ब्राजील पर बढ़त मिल गई, जिन पर ईरान का ज्यादा बकाया नहीं है। इससे भारत का निर्यात में लगभग एकाधिकार हो गया। गुडग़ांव स्थित चावल निर्यातक टिल्डा राइसलैंड के निदेशक आर एस शेषाद्रि ने रॉयटर्स को बताया, 'ईरान को भारत का चावल निर्यात इसलिए बढ़ा क्योंकि भुगतान व्यवस्था भारत के पक्ष में थी। अब से प्रतिबंध समाप्त हो रहे हैं, इसलिए भारत को अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनना होगा।' वहीं, पश्चिमी देशों और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौते के बीच कच्चे तेल का आयात आसान होने के मद्देनजर भारत तेल भुगतान प्रणाली पर चर्चा के लिए जल्दी ही एक दल भेजेगा। (BS Hindi)

स्वर्ण आभूषण निर्यात घटने की संभावना

सरकारी पाबंदियों के बाद कच्चे माल की उपलब्धता घटने से चालू वित्त वर्ष में स्वर्ण आभूषण निर्यात करीब 50 प्रतिशत तक घट सकता है। यह बात गीतांजलि जेम्स के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी ने कही है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के मुताबिक, वर्ष 2012-13 में स्वर्ण आभूषण निर्यात 1,293 करोड़ रुपये का रहा था। चोकसी ने कहा, 'बाजार में कम स्टाक उपलब्ध है और घरेलू बाजार में प्रीमियम 8 से 10 प्रतिशत तक ऊंचा है। इससे तस्करी को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात के लिए बहुत ही कम सोना उपलब्ध है।' यूबीएम इंडिया और फिक्की द्वारा आयोजित मुंबई जूलरी एंड जेम्स फेयर 2013 के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में चोकसी ने कहा, 'पिछले सात महीने से निर्यात 55 प्रतिशत तक घटा है। हमें चालू वित्त वर्ष में कुल स्वर्ण आभूषण निर्यात में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आने का अनुमान है।'

गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार का अनुमान

आर एस राणा नई दिल्ली | Nov 28, 2013, 01:22AM IST विभिन्न राज्यों में गेहूं की बुवाई पिछले साल से कहीं ज्यादा : कृषि आयुक्त चालू रबी में अनुकूल मौसम से गेहूं की बुवाई पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है। देशभर में जलाशय पानी के भरे हुए हैं जबकि सितंबर-अक्टूबर महीने में हुई बारिश से समय पर बुवाई करने में मदद मिली है। मध्य प्रदेश में चालू रबी में सीजन गेहूं की पिछले साल से ज्यादा होने की संभावना है। ऐसे में चालू रबी में देश में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार होने का अनुमान है। कृषि आयुक्त डॉ. जे एस संधू ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चालू रबी में गेहूं की बुवाई बढ़कर 127.47 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 101.64 लाख हैक्टेयर में हुई थी। चालू रबी में गेहूं की समय से हो रही है, जिससे फसल को पकने के लिए पूरा समय मिलेगा। इससे प्रति हैक्टेयर उत्पादकता ज्यादा होगी। उन्होंने बताया कि जलाशयों में पानी पूरा भरा हुआ है साथ ही सितंबर-अक्टूबर में हुई बारिश फसल की बुवाई के लिए अनुकूल रही है। ऐसे में चालू रबी में गेहूं की कुल बुवाई पिछले साल से ज्यादा ही होने की संभावना है। इसलिए चालू रबी में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में चालू रबी में गेहूं की बुवाई पिछले साल से ज्यादा होगी। वैसे भी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बुवाई पिछले साल से आगे चल रही है। अभी तक मध्य प्रदेश में 25.54 लाख हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि के 20.43 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। अन्य राज्यों में हरियाणा में गेहूं की बुवाई पिछले साल के 13.05 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 15.40 लाख हैक्टेयर में, पंजाब में पिछले साल के 23.72 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 25.40 लाख हैक्टेयर में, उत्तर प्रदेश में 30.35 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 43.20 लाख हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई हो चुकी है। पंजाब और हरियाणा में खरीफ में बासमती धान की बुवाई ज्यादा हुई थी, जिसकी कटाई लेट होती है। अत: इन राज्यों में गेहूं की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में बढऩे का अनुमान है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारें पिछले दो सालों से गेहूं की सरकारी खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अलग से किसानों को बोनस दे रही है, जिससे इन राज्यों के किसान गेहूं की बुवाई को तरजीह दे रहे हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2011-12 में देश में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार 948.8 लाख टन की हुई थी जबकि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2012-13 में गेहूं का उत्पादन 924.6 लाख टन होने का अनुमान है। (Business Bhaskar....R S Rana)

Govt projects nearly 3 pc drop in sugar output this yr

New Delhi, Nov 28. The country's sugar production is likely to drop by nearly three per cent to 24.4 million tonnes this year, but sufficient to meet the domestic demand, Food Minister K V Thomas said today. The government's sugar output projections are, however, lower than the industry estimate of 25 million tonnes for the ongoing 2013-14 marketing year (October-September). "As of now, we project total sugar production at 24.4 million tonnes this year, against 25.1 million tonnes in 2012-13," Thomas told reporters. However, availability of sugar in India, the world's biggest consumer and second largest producer after Brazil, would be sufficient to meet the estimated domestic demand of 23.5 million tonnes this year, he said. "We require 23.5 million tonnes of sugar this year. We already have an opening stock of 89 lakh tonnes. Internally, our position is comfortable," Thomas said. The country’s production of the sweetener is seen higher than the demand for the fourth marketing year in a row. Asked if sugar output would be affected due to shut down of crushing operations by some mills in Uttar Pradesh over cane price issue, Food Secretary Sudhir Kumar said: "If the logjam continues and crushing delays, obviously, there will be some impact." Meanwhile, Indian Sugar Mills Association (ISMA) has estimated total sugar production at 25 million tonnes this year, slightly lower than 25.1 million tonnes last year. It had said a possible fall in output is expected in Uttar Pradesh, the country's second biggest sugar producing state, and Tamil Nadu.

BKU activists protest outside DM's office

Muzaffarnagar, Nov 28. BKU activists continued their protest outside District Magistrate's office for the second day today to press for their demands of starting crushing work in sugar mills and pay dues to the farmers here. The protests continued even as district authorities registered cases against the owners of three sugar mills -- Uttam sugar mill, Tikola sugar mill and Bhensani sugar mill -- for not starting crushing work here. Acting on the directive of the state government, district authorities had on Tuesday registered cases against three sugar mill owners for not starting crushing work in the district. Bhartiya Kisan Union chief Naresh Tikait has announced that the agitation would continue till all their demands met. The BKU activists entered in tractor trollies in the collectorate compound and gheraod the DM's office here. BKU has also launched protests in Bijnore, Meerut and Shamli district headquarters to press for their demands, Tikait said.

Centre asks states to soon break impasse on sugar issue

New Delhi, Nov 28. With the logjam in Uttar Pradesh over higher sugarcane price continuing, the Centre today asked the state government to settle the issues with sugar industry at the earliest so that mills start crushing operations in the current season that started from October. Assuring Centre's full assistance in solving the UP sugar crisis, Union Food Minister K V Thomas asked sugar mills and farmers not to "precipitate" the crisis. He said domestic supply is comfortable on the back of huge opening stocks of nearly 9 million tonnes. Cash-starved UP private millers have decided not to start operation in 2013-14 marketing year (October-September) saying they cannot pay more than Rs 225 per quintal to farmers as against the state advised price (SAP) of Rs 280 a quintal announced by the state government. "Our request is the state government should take initiative so that crushing starts. Farmers and millers' issues should be settled. All problems should be discussed and settled. Whatever assistance is needed from the government of India, we will do it within our norms," Thomas told reporters. "We request farmers and millers make things smooth. The state government should take initiative to settle the issue earliest. We appeal to farmers and mills not to precipitate the issue," he added. The Minister informed that 101 out of 170 mills have started functioning in Maharashtra. "Out of 122 mills in UP, 50 mills have started. More mills will start operations". However, it may be noted that most of the private sugar mills have shut crushing operations. Yesterday, crucial talks between UP government and mill owners to break the logjam over cane crushing operations failed, with millers refusing to run their plants at current high cane price. Asked about the Centre's plan to give financial package to sugar industry, Thomas said: "Today, we had discussion with the Finance Minister. We also had discussion with C Rangarajan on the sugar issue. An informal group of ministers will look into the financial package. Whatever possible within our norms, we will definitely support". The informal group of ministers, headed by Agriculture Minister Sharad Pawar, would take a decision on all sugar related issues including financial package. "As soon as the Agriculture Minister comes, a meeting will be held to decide on the issue," he added. Thomas said the Rangarajan panel had made eight suggestions to decontrol the sugar sector. The Centre has implemented three of them and the rest needs to be done by the state governments. We have taken a strong decision and removed 3 major controls. States have to seriously look into the rest of the recommendations. Whatever assistance needed, we will provide," Thomas added. The Centre has given freedom to mills to sell sugar in the open market and has also removed the obligation of supplying the sweetener to the government for PDS purpose. The rest of the controls were left to the state governments to do away with.

Thomas discusses financial package to sugar mills with FM

New Delhi, Nov 28. Food Minister K V Thomas today met Finance Minister P Chidambaram and discussed the issue of providing a financial package including interest-free loans to the beleaguered sugar mills in the country. He also deliberated on the ongoing logjam between the Uttar Pradesh government and private sugar mills over higher sugarcane price of Rs 280 per quintal fixed by the state. "We discussed about the sugar issue. We are working on a financial package and discussing interest-free loans to mills," Thomas told after meeting the Finance Minister. Recently, Maharashtra Chief Minister Prithviraj Chavan had met Prime Minister Manmohan Singh and made a representation for bailing out the sugar industry. "The Prime Minister has sent me a note. I am going through it," he said. Chavan said the UP sugar industry issue was also discussed. Meanwhile, the Food Ministry is working on a Cabinet note on giving a financial package to the sugar industry. The sugar industry is facing financial crunch after a huge loss last year due to increased cost of production and lower price. Cash-starved mills have not been able to pay their dues to sugarcane farmers and their arrears stood at Rs 3,400 crore last year. In Uttar Pradesh, many private mills have shut down crushing operations till the time the government comes up with a 'viable' cane price policy. The state authorities have filed FIR against three mill owners for not commencing operations. Uttar Pradesh is the second biggest sugar producer after Maharashtra. Any delay in crushing of sugarcane in Uttar Pradesh is likely to affect the country's overall sugar production. Later, Thomas also met PMEAC Chairman C Rangarajan on the issue.

27 November 2013

Gold climbs as drop to four-month low may lure buyers

London, Nov 27. Gold today gained on speculation prices that fell to a four-month low on the outlook for less US stimulus will spur physical purchases. Gold rose 0.5 per cent to USD 1,248.59 an ounce. Silver also rose 0.6 per cent to USD 19.97 an ounce. Bullion reached USD 1,225.55 an ounce on November 25, the lowest since July 8. China's net imports of gold from Hong Kong in October reached the second-highest level on record. Gold is set for the first annual drop in 13 years as some investors lost faith in the metal as a store of value and on speculation a strengthening economy will spur the Federal Reserve to slow its 85 billion dollar of monthly debt purchases. A report yesterday showed US building permits increased in October and economists expect American data today to show consumer confidence rose, while durable-goods orders declined.

Gold, silver fall on sluggish demand, global cues

New Delhi, Nov 27. Gold fell by Rs 200 to Rs 31,425 per ten grams in the national capital today on sluggish demand at prevailing higher levels amid a weak global trend. Silver also plunged by Rs 510 to Rs 45,280 per kg on lack of buying support from jewellers and industrial units. A weak global trend on speculation that signs of a strengthening US economy might reduce demand for the precious metals as safe haven also influenced the sentiment, traders said. Gold in New York, which normally sets the price trend on the domestic front, fell by 0.8 per cent to USD 1,241.58 an ounce and silver by 1.8 per cent to USD 19.86 an ounce last night. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity fell by Rs 200 each to Rs 31,425 and Rs 31,225 per ten grams, respectively. It had gained Rs 575 yesterday. Sovereign, however, held steady at Rs 25,300 per piece of eight grams in restricted buying. In line with a general weak trend, silver ready declined by Rs 510 to Rs 45,280 per kg and weekly-based delivery by a similar margin to Rs 44,480 per kg. The white metal had jumped by Rs 790 in the previous session. Silver coins also met with resistance at existing higher levels and plunged by Rs 1,000 to Rs 84,000 for buying and Rs 85,000 for selling of 100 pieces.

ज्यादा कीमत की आस में कम कपास

पंजाब और हरियाणा में कपास की आवक मौजूदा सत्र में 30 फीसदी तक कम हो गई है। अधिक कीमत की चाह में किसान मंडियों में कपास की आपूर्ति नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति से कताई क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उत्तर भारत कपास संघ के अध्यक्ष महेश शारदा ने कहा, 'पंजाब और हरियाणा के कपास उत्पादक अधिक कीमतों की चाह में आपूर्ति नहीं कर रहे हैं और उसे अपने पास ही जमा कर रहे हैं। इससे कपास की आवक कम हो गई है।' इन दोनों राज्यों में कपास की कीमतें 5,000 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल हैं। कारोबारियों का कहना है कि यह पिछले साल की कीमतों के मुकाबले लगभग 30 फीसदी तक कम है। मौजूदा सत्र में कपास का उत्पादन 30 फीसदी कम होकर इन दोनों राज्यों में 6.2 लाख गांठ रह गया है। पिछले साल की समान अवधि में पंजाब और हरियाणा में कपास की आवक 9.25 लाख गांठ थी। जानकारों का कहना है कि कपास किसान, जिन्होंने बासमती चालव की भी खेती की थी, फिलहाल कपास बेचने के मूड में नहीं दिख रहे हैं क्योंकि उन्हें बासमती की बिक्री से पहले ही ऊंची कीमतें मिल रही हैं। एक जानकार ने कहा, 'कुछ किसानों को बासमती चावल की बिक्री से ऊंची कीमतें प्राप्त हुई हैं। इसे देखते हुए वे कपास की आपूर्ति के प्रति लापरवाही दिखा रहे हैं।Ó पंजाब और हरियाणा में खरीफ विपणन सत्र के दौरान बासमती धान की कीमतों में 50 फीसदी से अधिक तेजी आई है। कारोबारियों का कहना है कि राजस्थान में चुनाव के कारण भी इस पर असर पड़ा है। इनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों अबोहर, फाजिल्का, सिरसा, हिसार के किसान चुनाव में व्यस्त थे, जिससे आपूर्ति बाधित हुई है। कपास की आवक कम होने से पंजाब और हरियाणा में कताई क्षेत्र के लिए संकट खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र में लगे लोगों का कहना है कि उनकी उत्पादन क्षमता 80 फीसदी तक कम हो गई है। पंजाब कपास कताई संघ के अध्यक्ष भगवान बंसल ने कहा, 'हमारी ज्यादातर कताई इकाइयों में क्षमता उपयोग कपास की कमी के कारण 70-80 फीसदी तक कम हो गया है।Ó पंजाब और हरियाणा में क्रमश: 165 और 140 कताई इकाइयां हैं। इस बीच, बड़ी बुनकर इकाइयां अपनी जरूरतों के लिए मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्टï्र से कपास खरीद रही हैं। वद्र्धमान टैक्सटाइल के मुख्य महाप्रबंधक आई जे धुरिया ने कहा, 'बुनकर इकाइयां मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्टï्र जैसे राज्यों से कपास खरीद रहे हैं। इन क्षेत्रों में दरें भी 3-4 फीसदी सस्ती हैं।' (BS Hindi)

मक्का उत्पादकों को रास आ रही मंडी

खरीद केंद्रों पर मक्का और धान बेचने की सुविधा दिए जाने के बावजूद मक्का उत्पादक किसान यहां मक्का बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे। 58 खरीद केंद्रों में अब तक धान खरीदारी एक दर्जन केंद्रों में हो चुकी है, लेकिन यहां अब भी मक्का आने का इंतजार है। जगदलपुर ब्लॉक के बाबूसेमरा में खरीद प्रभारी राजू राव ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर मक्के की खरीद की व्यवस्था की गई है, लेकिन अब तक इसकी शुरुआत भी नहीं हुई है। दूसरी ओर कृषि उपज मंडी में 25 जुलाई से लेकर 25 नवंबर तक 4,596 क्विंटल मक्के की खरीद हो चुकी है। मंडी में किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी नहीं होती, जबकि खरीद केंद्रों पर उनके मन में नियमों के जाल में फंसने की आशंका रहती है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विपणन अधिकारी आरबी सिंह कहते हैं कि शासन ने किसानों को राहत देने के लिए इस साल मक्के की कीमत1200-1310 प्रति क्विंटल कर दी है, लेकिन किसान मक्का बेचने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस साल अभी तक धान खरीद के लिए 25,258 किसानों ने पंजीयन करवाया है। बढ़ा रकबा और उत्पादन खास बात यह है कि जिले में नकदी फसल के तहत मक्के का रकबा और उत्पादन हर साल बढ़ रहा है। वर्ष 13-14 में 7 ब्लॉक में 5,000 से अधिक किसानों ने 29,882 हेक्टेयर में मक्के की खेती की थी और उत्पादन 73,000 टन रहा था। पिछले साल ही जिले के किसानों ने खरीद केंद्रों में 8,56,231 क्विंटल धान बेचा था, जिसमें मोटे धान की मात्रा अधिक रही। किसानों की मानें तो मक्के में अधिक फायदा देख व्यापारियों ने अपनी पहुंच बिचौलिए के माध्यम से उनके घर तक बना ली है। बकावंड ब्लॉक के एक किसान के मुताबिक व्यापारी अधिक दाम देने के साथ ही घर से ही माल उठा रहे हैं। सरगीपाल के किसान गोपाल धुर्वे ने बताया कि नगदी पैसा मिलने के चलते वे बड़े व्यापारियों को उपज बेचना पसंद करते हैं। (BS Hindi)

कर्नाटक में चीनी मिलों ने शुरू की पेराई

उत्तरी कर्नाटक में चीनी मिल मालिक गन्ने की पेराई के लिए तैयार हो गए हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा तय कीमत चुकाने पर अनिच्छा जताते हुए गन्ने की पेराई शुरू करने से इनकार कर दिया था। बेलगाम और बगलकोट जिलों में सभी चीनी फैक्टरियों ने पिछले पांच दिनों से पेराई शुरू कर दी है। हालांकि मिलें अपने रुख पर अड़ी हैं और उन्होंने घोषणा की है कि वे गन्ने का भुगतान 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेंगे। हालांकि राज्य सरकार ने सोमवार को अधिसूचना जारी करते हुए घोषणा की कि उत्तरी कर्नाटक में गन्ना खरीद की न्यूनतम कीमत 2,500 रुपये होगी। कर्नाटक देश का तीसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है और सालाना वार्षिक उत्पादन में इसका 13 फीसदी योगदान होता है। चीनी वर्ष 2012-13 में राज्य की चालू 58 मिलों ने 330 लाख टन की पेराई की थी, जिससे 34.3 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। हालांकि किसानों ने ऊंची कीमत की मांग की है। लेकिन उन्होंने कटाई और पेराई में देरी के चलते वजन की चिंता से अपने क्षेत्र की फैक्टरियों को गन्ने की आपूर्ति शुरू कर दी है। बगलकोट के किसानों के नेता मुत्तप्पा कुमार ने कहा, 'बगलकोट जिले की सभी 9 फैक्टरियों ने पेराई शुरू कर दी है। किसान अपनी उपज फैक्टरियों में पहुचने और पेराई होने के बाद आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। शुरुआत में वे फैक्टरियों द्वारा दी जा रही कीमत 2000 रुपये प्रति टन को स्वीकार करेंगे और शेष राशि के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे।Ó समीरवाडी़ चीनी फैक्टरी ने 2,000 रुपये प्रति टन की दर से किसानों को चेक देने शुरू कर दिए हैं। इसी तरह बेलगाम जिले की फैक्टरियों ने भी पेराई शुरू कर दी है और किसान अपना गन्ना उन्हें आपूर्ति कर रहे हैं। इस बीच कर्नाटक राज्य रैयत संघ (केआरआरएस) ने बेलगाम में सुवर्ण विधान सौंध के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जहां राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है। उन्होंने गन्ने की ऊंची कीमत देने और बीटी कपास की खेती में हुए नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त हर्जाना देने की मांग की है। कर्नाटक में 65 चीनी फैक्टरियां हैं, जिनमें से 58 चल रही हैं। इनमें से 22 सहकारी मिलें, दो सरकारी और 34 निजी हैं। निजी मिलों में से 33 का स्वामित्व या नियंत्रण राजनेताओं के हाथ में है। कर्नाटक में बेलगाम जिला सबसे ज्यादा गन्ने का उत्पादन करता है, जिसका राज्य के कुल उत्पादन में करीब 35 फीसदी हिस्सा है। इस जिलें 21 चीनी फैक्टरियां हैं और यहां हर साल 1.3 करोड़ टन गन्ने का उत्पादन होता है, जबकि राज्य में कुल गन्ना उत्पादन 3.5 करोड़ टन होता है। बगलकोट में 9 फैक्टरियां हैं, जबकि बीजापुर, गुलबर्गा और डावानागरे प्रत्येक में तीन चीनी मिलें हैं। (BS Hindi)

एनएसईएल मसले पर सदस्यों को अलर्ट किया एनएमसीई ने

डिफॉल्टर कंपनियों के साथ लेनदेन में अतिरिक्त सावधानी बरतने का सुझाव नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एनएमसीई) ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लि. (एनएसईएल) के भुगतान संकट और डिफॉल्टरों की समस्या सामने आने के बाद अपने सदस्यों को अलर्ट रहने की निर्देश दिया है। एक्सचेंज ने कहा है कि डिफॉल्टरों के साथ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लेनदेन करते समय सावधानी बरती जाए। एनएसईएल में कुछ माह पहले 5600 करोड़ रुपये के भुगतान की समस्या पैदा हुई थी। भुगतान प्रक्रिया में दिक्कतें आने के बाद सरकार के निर्देश पर इस एक्सचेंज के कामकाज को रोक दिया गया था। जिग्नेश शाह द्वारा प्रवर्तित फाइनेंशियल टेक्नॉलोजीज की कंपनी एनएसईएल ने यह संकट सामने आने के बाद 19 कंपनियों और फर्मों को डिफॉल्टर घोषित किया है। अहमदाबाद स्थित एनएमसीई ने सदस्य ब्रोकरों को भेजे पत्र में निर्देश दिया है कि एनएसईएल द्वारा जारी डिफॉल्टरों की सूची पर गौर करें। सदस्यों को इन कंपनियों के साथ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लेनदेन करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। एनएसईएल द्वारा 19 डिफॉल्टरों की सूची में एआरके इम्पोट्र्स प्रा. लि., लॉयल ओवरसीज फूड, लोटस रिफाइनरीज, एनके प्रोटीन्स, एनसीएस शुगर, स्पिन कॉट टेक्सटाइल्स और ताविशी एंटरप्राइजेज के नाम हैं। इस सूची में विमलादेवी एग्रोटेक, याथुरी एसोसिएट्स, एलओआईएल कांटीनेंटल फूड, एलओएल हैल्थ फूड, मोहन इंडिया, नामधारी फूड इंटरनेशनल और नामधारी राइस एंड जनरल मिल्स भी शामिल हैं। इसके अलावा वाटर फूड्स, श्री राधे ट्रेडिंग कंपनी, पीडी एग्रो प्रोसेसर्स, स्वास्तिक ओवरसीज कॉर्प और जुगरनॉट प्रोजेक्ट को भी डिफॉल्टर बताया गया है। राष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज के रूप में एनएमसीई प्लांटेशन, मसाले, अनाज, अलौह धातुओं और तिलहन व इसके उत्पादों में कारोबार की सुविधा देता है। (Business Bhaskar)

चीनी मिलों को वित्तीय मदद देने के लिए सरकार सक्रिय

आर एस राणा नई दिल्ली | Nov 27, 2013, 00:04AM IST फॉर्मला - यूपी में गतिरोध खत्म करने और राहत देने का रास्ता निकला नया सीजन उत्तर प्रदेश में गन्ने का एसएपी पूर्ववत लेकिन मिलों को मंजूर नहीं मांग न माने जाने पर मिलों ने गन्ने की पेराई अभी तक शुरू नहीं की नियत तिथि एक अक्टूबर से पेराई में करीब दो माह की देरी हो चुकी महाराष्ट्र, कर्नाटक व आंध्र प्रदेश में कुछेक मिलों ने पेराई आरंभ की यूपी में चीनी का एक्स- फैक्ट्री भाव त्र2,925-3,000 प्रति क्विंटल दिल्ली में चीनी की थोक कीमतें त्र3,150 से 3,200 प्रति क्विंटल चीनी मिलों के ऋण के ब्याज में वित्तीय मदद देने के लिए कैबिनेट नोट तैयार आर्थिक घाटे से जूझे रहे चीनी उद्योग को राहत देने के लिए खाद्य मंत्रालय ने तैयारी शुरू कर दी है। चीनी मिलों को बैंकों से मिलने वाले ऋण के ब्याज का भुगतान शुगर डेवलपमेंट फंड (एसडीएफ) से करने के लिए खाद्य मंत्रालय कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है। सरकार इस मदद के जरिये उत्तर प्रदेश में उत्पन्न गतिरोध खत्म करने और समूचे उद्योग को राहत देने पर विचार कर रही है। उद्योग की मांग के अनुरूप गन्ने का खरीद मूल्य घटाए न जाने के कारण उत्तर प्रदेश में मिलों ने अभी तक पेराई शुरू नहीं की है। खाद्य मंत्रालय के सचिव सुधीर कुमार ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चीनी उद्योग को राहत देने के लिए बैंकों से लिए जाने वाले ऋण के ब्याज का भुगतान एसडीएफ से करने के लिए कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। चीनी मिलें अगर बैंकों से 3,000 करोड़ रुपये का ऋण लेती है तो ब्याज के रूप में करीब 350-400 करोड़ रुपये बनेगा, जबकि इस समय शुगर डेवलपमेंट फंड में लगभग 900 करोड़ रुपये का फंड जमा है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय इस आशय का प्रस्ताव तैयार कर रहा है तथा इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट कमेटी को करना है। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में वित्त मंत्री पी चिदंबरम और नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह ने चीनी उद्योग को राहत देने के लिए गत सप्ताह विभिन्न उपायों पर विचार-विमर्श किया था। इन उपायों में बैंकों से लिए जाने वाले ऋण के ब्याज का भुगतान करने के साथ ही रॉ-शुगर को आयात करके निर्यात करने की अवधि को भी करने जैसे उपायों पर चर्चा हुई थी। चीनी मिलों को चीनी की बिक्री पर प्रति क्विंटल 71 रुपये उत्पाद शुल्क देना होता है। इस आधार पर पेराई सीजन 2012-13 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान चीनी मिलों ने उत्पाद शुल्क के रूप में लगभग 1,750 रुपये करोड़ रुपये दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) पिछले साल के बराबर ही तय किया है। राज्य सरकार ने पेराई सीजन 2013-14 के लिए अगेती किस्म के गन्ने का एसएपी 290 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य किस्म के लिए 280 रुपये प्रति क्विंटल तथा दोयम किस्म के गन्ने के लिए 275 रुपये प्रति क्विंटल का दाम पूर्ववत रखा है। चीनी उद्योग गन्ने का एसएपी रंगराजन समिति के फार्मूले के आधार पर तय करने की मांग कर रहा है। अगर यह फॉर्मूला लागू किया जाता है तो गन्ने का खरीद मूल्य काफी घट जाएगा। इस वजह से राज्य सरकार ने उद्योग की यह मांग नामंजूर कर दी। लेकिन गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी भी नहीं है। मांग न माने जाने के कारण उत्तर प्रदेश में अभी तक चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू नहीं की है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कुछ चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई आरंभ कर दी है। चीनी के एक्स-फैक्ट्री भाव उत्तर प्रदेश में 2,925 से 3,000 रुपये और दिल्ली में चीनी की थोक कीमतें 3,150 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है। (Business Bhaskar....R S Rana)

26 November 2013

चीनी संकट: महाराष्ट्र के किसानों ने लगाई गुहार

सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं महाराष्ट्र में भी चीनी संकट गहराता जा रहा है। मामले को संभालने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ प्रधानमंत्री मुलाकात मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात की। महाराष्ट्र के नेताओं ने मनमोहन सिंह के सामने राज्य के किसानों की मांग रखी। महाराष्ट्र के किसानों ने प्रधानमंत्री से चीनी एक्सपोर्ट पर 500 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी दिए जाने की मांग की है। साथ ही, किसान चाहते हैं कि चीनी इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी की जाए। इसके अलावा सरकार से चीनी का 6 महीने का बफर स्टॉक बनाने की मांग रखी। किसानों की मांग है कि चीनी मिलों पर बकाए कर्ज को 7 साल में चुकाने की छूट दी जाए। महाराष्ट्र के 170 में 74 मिल अभी भी बंद हैं। (Hindi>moneycantorl.com)

सब्जियां महंगी पर किसान लाभ से वंचित

कर्नाटक के धारवाड़ जिले में उप्पीनाबेटागेरी गांव के एक किसान भिमान्ना डिंडालकोप्पा ने कहा, 'जब हम प्याज बहुत अधिक ऊंची कीमतों के बारे में सुनते हैं तो हमें अचंभा होता है कि हमें ये कीमतें क्यों नहीं मिल रही हैं। प्याज की खुदरा कीमत उत्तरी कर्नाटक में 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई थी, लेकिन इसका फायदा मुझे नहीं मिल सका, हालांकि बिचौलियों को मिला।' केवल वही अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जो सब्जियों में तेजी के फायदे से वंचित रहे हैं। कर्नाटक में अमीनाभावी के एक सब्जी उत्पादक रवींद्र देसाई बहुत कम बोलते हैं, लेकिन जब उन्होंने बातचीत की तो यह काफी तर्कसंगत थी। उन्होंने कहा, 'हमने यह पाया है कि जब सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं तो केवल खुदरा विक्रेताओं को ही फायदा मिलता है।' देश में उनके जैसे किसानों ने भी यही कहानी बयां की। किसानों का कहना है कि जब भी सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं तो उन्हें इसका सबसे कम फायदा मिलता है। पहले भी और हाल के महीनों में भी यह साबित हो गया है कि देशभर के खुदरा बाजारों में कीमतें किसानों को मिलने वाली कीमत से 3-4 गुना ज्यादा होती हैं। जब भी सौदेबाजी की बात आती है तो किसानों के हाथ बंधे होते हैं। क्योंकि सब्जियों की प्रकृति ऐसी होती है कि ये जल्दी खराब हो जाती हैं। इस वजह से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों से सौदे करने होते हैं, क्योंकि उनके पास पर्याप्त भंडारण सुविधाएं होती हैं। भारतीय किसान संघ (बीकेएस) के सचिव मगनभाई पटेल ने कहा, 'सब्जी किसान सबसे ज्यादा आसान शिकार होते हैं। जब भी कीमतें सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचती हैं तो खुदरा कीमतों का एक-तिहाई या चौथाई मिलता है। सब्जियां खराब होने वाली जिंस हैं, इसलिए खुदरा विक्रेता बची हुई सब्जियों से नुकसान झेलने का जोखिम नहीं ले सकते।' उत्पादन लागत भी बढ़ रही है और ज्यादातर कृषि जिंसों के किसान कह रहे हैं कि उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है, जिससे अच्छी कीमत लेने के लिए इंतजार करने की स्थिति में नहीं होते हैं। उर्वरक, मजदूरी, बिजली शुल्क और अन्य खर्च बढ़ रहे हैं। तमिलनाडु में कोयंबटूर के एक किसान वी मुरुगननधाम कहते हैं कि पिछले साल उनकी उत्पादन लागत करीब 5-5.50 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो बढ़कर 6-6.50 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। जबकि बिक्री कीमत महज 50-80 पैसे बढ़कर 8-10 रुपये प्रति किलोग्राम हुई है। बाजार में आलू 35-30 रुपये प्रति किलोग्राम था और कई बार यह 80 रुपये तक भी हो गया था। उल्लेखनीय है कि शहरों के खुदरा बाजारों में प्याज, टमाटर, बंद गोभी और फूल गोभी 80 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही हैं, जो किसानों को मिलने वाली कीमत से करीब 3-4 गुना ज्यादा है। मध्य गुजरात के एक सब्जी उत्पादक किसान शंकर पटेल कहते हैं, 'जब सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं तो हम इन लोगों को हमारी उपज से पैसे बनाते हुए देखते हैं।' तमिलनाडु के एक खुदरा सब्जी विक्रेता परमशिवम ने कहा, 'अगर किसान को अपनी फसल से पहले ही पैसे की जरूरत है तो उसे बिचौलिये के मनमाफिक कीमत पर ही उसे अपनी फसल बेचनी पड़ती है। अगर कीमतें ऊपर जाती हैं तो बिचौलिये किसान की फसल से होने वाले फायदे का कुछ हिस्सा उसे भी दे देते हैं। यह बिचौलिये के साथ संबंधों और किसान की सौदेबाजी की कीमत पर निर्भर करता है।' साफ है कि मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा खुदरा विक्रेताओं को मिलता है। उत्तरी गुजरात के आलू उत्पादक किसानों के एक संगठन बाटाटा उत्पादक खेडुत संगठन समिति के सदस्य गुनपाभाई लाधाभाई ने कहा, 'सब्जियों की कीमतों को बढ़ाने के पीछे थोक कारोबारियों और खुदरा विक्रेता सहित अन्य बिचौलिये खरीदारों का होता है।' (BS Hindi)

फल, सब्जियां बेचने के लिए शुरू होगा प्लेटफॉर्म

फल और सब्जी किसानों के अपनी उपज बेचने के लिए अब एक प्लेटफॉर्म शुरू होगा, जहां उन्हें अब मिल रही कीमत से बेहतर दाम मिलेंगे और अच्छी किस्म की उपज के लिए और भी अधिक कीमत। यह एक सरकारी कंपनी स्मॉल एग्रीबिजनेस फार्मर्स कंसोर्टियम (एसएफएसी) और एनसीडीईएक्स स्पॉट एक्सचेंज (एनस्पॉट) के संयुक्त प्रयास से संभव हो सकेगा। एसएफएसी ने एनस्पॉट की सदस्यता ली है और यह किसानों की उपज (फल और सब्जियों) को एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर बेचेगा। इसके लिए एसएफएसी फार्म प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) के अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा। एफपीओ की देशभर में पहुंच होगी और यह बतौर संग्रहण केंद्र काम करेगा। किसान अपनी उपज इन केंद्रों पर लाएंगे, जहां इसे ग्रेड दिया जाएगा। एनस्पॉट एक या ज्यादा गुणवत्ता और जांच करने वाली एजेंसियों को चिह्नित कर रही हैं, जो गुणवत्ता को प्रमाणित करेंगी और कीमतें ग्रेड पर आधारित होंगी। एनस्पॉट के प्रमुख राजेश सिन्हा ने कहा, 'किसानों को यह फायदा होगा कि उन्हें एक्सचेंज की पारदर्शी कीमतें मिलेंगी और एफपीओ एक एग्रीगेटर के रूप में काम करेगा, जो किसानों के पक्ष में उपज बेचेगा।' प्रारंभ में यह योजना उन जगहों पर शुरू की जाएगी, जहां सरकार ने भंडारण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत ग्रेड में बांटी हुई जिंसें एफपीओ द्वारा एक्सचेंज पर लाई जाएंगी और कारोबारी, या संगठित खुदरा शृंखलाएं या खाद्य प्रसंस्करणकर्ता खरीदारी करेंगे। जिंसों के बिकने के बाद किसानों को कीमत मिलेगी। एक्सचेंज मार्जिन के आधार पर काम कर रहा है। यह खरीदारों के न खरीदने पर कीमतों में गिरावट और किसानों के न बेचने पर कीमतों में तेजी की स्थिति को संभालेगा। इस व्यवस्था के तहत कारोबार अगले एक या दो तिमाहियों में शुरू होने की संभावना है। (BS Hindi)

Gold, silver surge on seasonal demand, global cues

New Delhi, Nov 26. Snapping its two-day fall, gold prices today soared by Rs 575 to Rs 31,625 per ten gram on fresh buying by stockists at current lower levels for the ongoing marriage season amid a firming global trend. Silver prices also shot up by Rs 790 to Rs 45,790 per kg on increased offtake by jewellery fabricators and industrial units. Traders said fresh buying by stockists at existing lower levels after the recent fall to meet the ongoing marriage season demand mainly pushed up the bullion prices. They said a firming global trend as the dollar weakened and lower prices spurred demand in China, the second-largest consumer, further fuelled the uptrend. Gold in Singapore, which normally sets price trend on the domestic front, rose by 0.6 per cent to USD 1,258.30 an ounce. In addition, some investors shifting their funds from weakening equity market to rising bullion also influenced the sentiment, they added. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity jumped up by Rs 575 each to Rs 31,625 and Rs 31,425 per ten gram, respectively. It had lost 550 in the previous two sessions. Sovereign followed suit and rose by Rs 100 to Rs 25,300 per piece of eight gram. In a similar fashion, silver ready spurted by Rs 790 to Rs 45,790 per kg and weekly-based delivery by Rs 900 to Rs 44,990 per kg. The white metal had lost Rs 870 in last two trade. Silver coins flared up by Rs 1,000 to Rs 85,000 for buying and Rs 86,000 for selling of 100 pieces on upsurge in demand.

25 November 2013

यूपी चीनी संकट खत्म करने की कोशिश जारी

उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों का संकट बरकरार है। वहीं, चीनी मिलों को पेराई शुरू करने की सरकार की डेडलाइन आज खत्म हो रही है। सूत्रों से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस संकट को खत्म करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य के किसानों को सीधे सब्सिडी देने पर विचार रही है। हालांकि, सरकार पूरा नुकसान सब्सिडी के जरिए देने के पक्ष में नहीं है। सब्सिडी के मुद्दे पर अभी तक सरकार को कोई भरोसा नहीं मिला है। पहली बार सरकार ने रंगराजन कमिटी का फॉर्मूला लागू करने का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के मुताबिक गन्ने का 225 रुपये प्रति क्विंटल भाव बहुत कम है। वहीं, सरकार गन्ने के लिए 55 रुपये प्रति क्विंटल का पूरा अंतर देने को तैयार नहीं है। सरकार चीनी मिलों पर दबाव बना रही है कि मिलें कम से कम 240-250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर गन्ना खरीदें। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के डीजी अविनाश वर्मा का कहना है कि चीनी की कीमतें 29-29.50 रुपये पर हैं जबके चीनी की उत्पादन लागत करीब 36 रुपये आ रही है। इसके आधार पर चीनी मिलें 225 रुपये प्रति क्विंटल तक का ही दाम गन्ना किसानों को दे सकती हैं। इसके चलते चीनी मिलें राज्य सरकार से मांग कर रही हैं कि रंगराजन कमेटी की सिफारिशें जल्द लागू की जाएं। उम्मीद है कि सरकार कुछ सब्सिडी देने के लिए राजी हो जाएगी लेकिन इसके बाद भी चीनी उत्पादन शुरु करने में 7-10 दिन लग ही जाएंगे। (Hindi>Moneycantorl.com)

रुपया 37 पैसे मजबूत होकर 62.50 पर बंद

डॉलर के मुकाबले रुपये में आज अच्छी तेजी देखी गई और रुपया 37 पैसे मजबूत होकर 62.50 पर बंद हुआ। आज दिन के कारोबार में ही रुपये ने डॉलर के मुकाबले 62.50 का स्तर छू लिया था और ये इसी स्तर पर बंद हुआ। वहीं आज सुबह डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे मजबूत होकर 62.65 पर खुला था। एंजेल कमोडिटीज के अनुज गुप्ता का कहना है कि रुपये में आगे भी अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि आज दिन के कारोबार में रुपया 62.39 तक मजबूत होने के बावजूद 62.50 पर बंद हुआ लेकिन अभी भी रुपये में तेजी का ही रुख बना हुआ है। इस हफ्ते जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं और अगर ये अच्छे आते हैं तो रुपये को और भी सहारा मिल सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में 62 तक के स्तर देखे जा सकते हैं और अगर रुपया 62 के नीचे जाता है तो 61.75 रुपये तक के स्तर देखने को मिल सकते हैं। (Hindi.Moneycantorl.com)

Gold extends losses on sustained selling, global cues

New Delhi, Nov 25. Gold extended losses for the second straight session by falling Rs 50 to Rs 31,050 per ten grams in the national capital today on sustained selling by stockists amid a weakening global trend. Silver lost Rs 300 to Rs 45,000 per kg on lack of buying support from jewellers and industrial units. Traders said sustained selling by stockists against sluggish demand kept pressure on gold and silver prices. A weak global trend after gold fell due to accord between Iran and world powers damped demand for a safe haven, also influenced the sentiment, they said. Gold in Singapore, which normally sets price trend on the domestic front, lost 1.5 per cent to USD 1,225.55 an ounce and silver by 1.3 per cent to USD 19.61 an ounce. Firm trend at equity market lured investors to park their funds for quick gains which further reduced the bullion demand, they added. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity remained under selling pressure and shed Rs 50 each to Rs 31,050 and Rs 30,850 per ten grams, respectively. It had lost Rs 500 in the previous session. Sovereign held steady at Rs 25,200 per piece of eight gram. In line with a general weak trend, silver ready fell by Rs 300 to Rs 45,000 per kg and weekly-based delivery by Rs 455 to Rs 44,090 per kg. The white metal had lost Rs 570 in last trade. However, silver coins spurted by Rs 1,000 to Rs 84,000 for buying and Rs 85,000 for selling of 100 pieces on retail buying for gifting purpose in the ongoing marriage season.

23 November 2013

एनएसईएल संकट दूर करने के लिए बड़ी पहल!

एनएसईएल संकट दूर करने के लिए जिग्नेश शाह ने बड़ी पहल की है। खबर है कि एनएसईएल निवेशकों के साथ फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज 1100-1200 करोड़ रुपये का सेटलमेंट कर सकती है। उधर एनएसईएल इंवेस्टर सिंगापुर मर्केंटाइल एक्सचेंज में हिस्सेदारी बेचने के फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। एनएसईएल इंवेस्टर फोरम के प्रेसिडेंट अरुण डालमिया का कहना है कि एनएसईएल संकट के लिए फाइनेंशियल टेक भी जिम्मेदार है। लिहाजा फाइनेंशियल टेक, एनएसईएल की पेरेंट कंपनी होने के नाते पैसे वापस करने की जिम्मेदारी ले और सिंगापुर मर्केंटाइल एक्सचेंज में हिस्सा बेचने से मिले पैसों से निवेशकों का बकाया चुकाए। अरुण डालमिया के मुताबिक निवेशक चाहते हैं कि जिग्नेश शाह कम से कम 1,000-1,500 करोड़ रुपये दें ताकि इससे दूसरे देनदारों पर भी दबाव बने। इस सेटलमेंट के लिए निवेशक आपस में भी बात कर रहे हैं। (Hindi>moneycantorl.com)

एनसीडीईएक्स पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्ती

एग्री कमोडिटी में कारोबार कराने वाला देश का सबसे बड़ा कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स और बेतूल ऑयल आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल काली मिर्च वायदा में हुए गोलमाल का मामला फिर से गरमा गया है। कारोबारियों की शिकायत पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनसीडीईएक्स से 1 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। कारोबारियों का आरोप है कि एनसीडीईएक्स ने अबतक उनके 6800 टन काली मिर्च की डिलिवरी नहीं दी है। हालांकि इस आरोप के जवाब में एनसीडीईएक्स ने एक बयान जारी कर कहा है कि ये सारे आरोप बेतूल ऑयल और उसकी सहयोगी कंपनियों के सांठगांठ का नतीजा है। इस बीच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा भी एनसीडीईएक्स पर हुए काली मिर्च घोटाले की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने बेतूल ऑयल से सारे दस्तावेज मांग लिए हैं। (Hindi>moneycantorl.com)

कमजोर आंकड़ों से पिघलीं मूल धातुएं

चीन के कमजोर विनिर्माण आंकड़ों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के तीसरे दौर के प्रोत्साहन पैकेज (क्यूई3) में कमी की बढ़ी चिंताओं से पिछले एक महीने के दौरान मूल धातुएं 8.27 फीसदी गिरी हैं। एचएसबीसी का चाइना परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) नवंबर में गिरकर 50.4 के स्तर पर आ गया है, जो 50 की कंस्ट्रैक्शन लाइन से मामूली ही ऊपर है। अक्टूबर में पीएमआई सात महीने के सर्वोच्च स्तर 50.9 के स्तर पर था। इससे आगामी समय में चीन की मूल धातुओं की खरीद पर अनिश्चितता बन गई है। कॉमट्रेंज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशेखर त्यागराजन ने कहा, 'मूल धातुओं की कीमतों में गिरावट पर अमेरिका के प्रोत्साहन पैकेज में कमी करने की चर्चाओं से ज्यादा असर चीन के कमजोर विनिर्माण आंकड़ों का पड़ रहा है। इसके अलावा मूल धातुओं का स्टॉक भी लगातार बढ़ रहा है।Ó ब्लूमबर्ग सर्वे के मुताबिक विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की वृद्धि दर अगले साल 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जिसकी वृद्धि इस साल 7.6 फीसदी के स्तर पर है। मूल धातुओं की खपत के लिए आर्थिक वृद्धि एक मापक है, लिहाजा अलौह धातुओं की खपत आने वाले समय में कम रहने की संभावना है। अर्थशास्त्रियों ने कम्यूनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में चीनी सरकार के आर्थिक सुधारों की घोषणा करने का अनुमान लगाया था। चार दिन तक चला यह सम्मेलन पिछले सप्ताह हुआ, जिसे तीसरा सम्मेलन नाम दिया गया था। लेकिन चीनी सरकार ने बाजार को निराश किया है। इसलिए आगे मूल धातुओं को लेकर चिंता बनी रहेगी। इस बीच बार्कलेज कैपिटल की हाल की रिपोर्ट में चीन का तांबे का आायात मासिक आधार पर 27 फीसदी बढ़कर 2,78,000 टन रहा है। विश्लेषकों ने तांबे की मांग में बढ़ोतरी की वजह निचले स्तरों पर सौदेबाजी में आई तेजी है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये में दो फीसदी से ज्यादा गिरावट से वैश्विक कीमतों में गिरावट का असर भारत में ज्यादा नहीं दिखा है। ऐंजल ब्रोकिंग में विश्लेषक भावेश चौहान ने कहा, 'रुपये में गिरावट से भारतीय मूल धातु विनिर्माता कंपनियों की आमदनी में सुधार होगा। हालांकि बहुत सी एल्युमीनियम कंपनियों के उत्पादन में कटौती की घोषणा के बावजूद वैश्विक स्तर पर अभी उत्पादन में कोई गिरावट दिखाई नहीं दी है। इसके बावजूद हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2015 में एलएमई पर कीमतें सुधरेंगी, क्योंकि उत्पादन में कटौती से मांग-आपूर्ति का अंतर खत्म हो जाएगा।Ó इंटरनैशनल कॉपर स्टडी ग्रुप (आईसीएसजी) के आंकड़ों से पता चलता है कि ज्यादा उत्पादन के चलते वैश्विक बाजार में रिफाइंड तांबे का सरप्लस अगस्त में 21,000 टन पर पहुंच गया, जबकि इससे पहले के लगातार तीन महीनों में इसकी किल्लत थी। त्यागराजन का मानना है कि मूल धातुओं में नरमी लंबी अवधि तक जारी रहेगी, क्योंकि कमजोर आर्थिक सुधारों से एल्युमीनियम, निकल और जस्ते की मांग कम रहेगी।a (BS Hindi)

Gold plummets Rs 500 on profit-selling

New Delhi, Nov 23. Gold plunged Rs 500 to Rs 31,100 per ten grams in the national capital today on profit-selling by stockists at prevailing higher levels and sluggish local demand. Silver also nosedived by Rs 570 to Rs 45,300 per kg on reduced offtake by jewellers and industrial units. Traders said profit-selling by stockists at prevailing higher levels and sluggish local demand mainly pulled down both gold and silver prices. In the national capital, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity tumbled by Rs 500 each to Rs 31,100 and Rs 30,900 per ten grams, respectively. It had gained Rs 300 yesterday. Sovereign followed suit and declined Rs 100 to Rs 25,200 per piece of eight gram. In a similar fashion, silver ready plunged by Rs 570 to Rs 45,300 per kg and weekly-based delivery by Rs 575 to Rs 44,545 per kg. The white metal had gained Rs 270 in the previous session. Silver coins also witnessed a huge decline of Rs 1,000 to Rs 83,000 for buying and Rs 84,000 for selling of 100 pieces.

22 November 2013

आगामी माह भी खुलेंगी गेहूं निविदा

सरकारी गोदामों से गेहूं बेचने के लिए जारी निविदाओं को मिली तगड़ी प्रतिक्रिया से उत्साहित सरकार जनवरी, फरवरी और मार्च में भी ऐसी निर्यात निविदाएं खोलने की योजना बना रही है। इनके जरिये विदेशी बाजार में करीब 20 लाख टन गेहूं बेचा जाएगा। खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक 2,10,000 टन गेहूं के निर्यात के लिए अगली निविदा 12 दिसंबर को खोली जाएगी। यह गेहूं कांडला, विजाग और पीपावाव बंदरगाहों से निर्यात किया जाएगा। इस सप्ताह की शुरुआत में सरकारी ट्रेडिंग कंपनियों- एसटीसी, एमएमटीसी और पीईसी को एफसीआई के गोदामों से 3.4 लाख टन गेहूं निर्यात के लिए 284.7 से 289.9 डॉलर प्रति टन की बोली मिली थी। इन तीनों ट्रेडिंग कंपनियों को मिलीं बोलियां एफसीआई द्वारा खरीदे गए गेहूं के निर्यात के लिए सरकार द्वारा तय की गई आधार कीमत 260 डॉलर प्रति टन से ज्यादा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हमने आने वाले महीनों में भी अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है।Ó डेढ़ लाख टन गेहूं के निर्यात में सफल न रहने पर सरकार को आधार कीमत 300 डॉलर से घटाकर 260 डॉलर प्रति टन करना पड़ी। यह निविदा इसलिए रद्द करनी पड़ी थी, क्योंकि प्राप्त हुई बोलियां आधार कीमत से काफी कम थीं। अधिकारी ने कहा, 'हम कीमत 270-275 डॉलर प्रति टन मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन बोली की कीमत (290 डॉलर प्रति टन) अप्रत्याशित है। यह इस बात को दर्शाता है कि भारतीय गेहूं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा कीमत मिलनी शुरू हो गई है।Ó उन्होंने कहा कि बोली की कीमत ब्लैक सी व्हीट से भी ज्यादा रही है, जो वैश्विक बाजार में सबसे कीमती गेहूं ब्रांड है। उन्होंने कहा, 'आने वाले महीनों में भी यह रुझान बने रहने की संभावना है। खबरों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में गेहूं की फसल उम्मीद के मुताबिक अच्छी नहीं है, जिससे हमें विदेशी बाजारों में ज्यादा गेहूं बेचने में मदद मिलेगी।Ó उन्होंने कहा कि सरकार के लिए गेहू निर्यात घरेलू बाजार में बेचने से ज्यादा फायदेमंद था। सरकार को गेहूं निर्यात से 18,000 रुपये प्रति टन की आमदनी होगी, जबकि इसे घरेलू बाजार में बेचने पर 16,000 रुपये प्रति टन की आमदनी होती। वित्त वर्ष 2012-13 में सार्वजनिक कंपनियों द्वारा किए गए 42 लाख टन के निर्यात से सरकार को 1.4 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी। * हाल में 3.4 लाख टन गेहूं निर्यात के लिए जारी हुई थी निविदा * बोली 284.7 से 289.9 डॉलर प्रति टन मिली बुखारी बनाने के लिए निविदा जारी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने आज खाद्यान्न लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण के लिए एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना शुरू की। इसने देश के विभिन्न हिस्सों में अत्याधुनिक इस्पात की बुखारियां बनाने के लिए निविदा जारी की है। निगम ने एक बयान में कहा कि इस्पात की ये बुखारियां 9 राज्यों में 36 जगहों पर बनाई जाएंगी। इनकी कुल क्षमता करीब 17.5 लाख टन होगी। एफसीआई के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सी विश्वनाथ ने कहा, 'एफसीआई डीबीएफओओ पद्धति के लिए मॉडल दस्तावेज तैयार करने के लिए पहला सरकारी संगठन है।Ó डीबीएफओओ मॉडल के तहत डेवलपर को बुखारियों के निर्माण के लिए रेलवे के पास जमीन खरीदनी होती है। डेवलपर को 20 वर्षों तक निर्धारित भंडारण शुल्क चुकाया जाता है। यह इस परियोजना की बोली का मानक है। (BS Hindi)

एक दशक बाद एफएमसी को मिलेंगे कुछ अधिकार

* जिंस वायदा बाजार नियामक को मौद्रिक शक्तियों में होगा इजाफा * अब एफएमसी ज्यादा कर्मचारियों और विशेषज्ञ कर सकेगा नियुक्त * वित्त मंत्रालय ने कुछ मामलों में रियायतों का दिया आश्वासन जिंस वायदा बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) को एक दशक के इंतजार के बाद अब कुछ परिचालन रियायत मिल सकती है। इस समय एफएमसी अपना ज्यादातर समय एनएसईएल संकट से उपजे मसलों को सुलझाने में दे रहा है। चाहे इसे एनएसईएल का असर कहें या वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने का प्रभाव, पर अब नियामक को कुछ अधिकार मिलने जा रहे हैं। हालांकि पूर्ण अधिकार संपन्न बनने के लिए इसे अभी इंतजार करना होगा। नियामक को अब और ज्यादा मौद्रिक शक्तियां मिलेंगी। इसके अलावा यह ज्यादा कर्मचारियों व विशेषज्ञों को भर्ती कर सकेगा। इन कर्मचारियों और विशेषज्ञों की तादाद अधिकतम 200 हो सकती है। इसके अलावा नियामक को एक बड़ा कार्यालय मिलेगा। वर्ष 2003 में देशभर में ऑनलाइन जिंस एक्सचेंज शुरू होने के बाद से एफएमसी को ज्यादा शक्तियां देने की बातें और प्रयास हो रहे हैं। हालांकि नियामक को ज्यादा शक्तियां देने और बाजार के विस्तार के लिए जिंस वायदा का संचालन करने वाले वायदा अनुबंध नियमन अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन के प्रयास असफल रहे हैं। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय ने एफएमसी को कानूनी सलाहकार, कर्मचारियों और विशेषज्ञ नियुक्त करने में ज्यादा रियायत देने का आश्वासन दिया है। मंत्रालय ने खर्च में भी कुछ वित्तीय रियायत देने का भी आश्वासन दिया है। इस बारे में जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया कि एफएमसी पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के नजदीक आ सकता है और कुछ आवश्यक दूरी बनाए रखते हुए दोनों एक्सचेंजों की नीतियों एकसमान हो सकती हैं। एनएसईएल मामले के बाद नियामक कानूनी राय लेने में व्यस्त है। बंबई उच्च न्यायालय में दायर कई मामलों में एफएमसी को पार्टी बनाया गया है। नियामक को इन मामलों में जवाब देना होगा। इसके पास अपना पक्ष रखने के लिए केवल एक सरकारी वकील है, जबकि अन्य वादी जाने-माने वकीलों को नियुक्त करने पर बड़ी राशि खर्च कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एफएमसी से ई-सीरीज अनुबंधों के निपटान पर नजर रखने को कहा था। लेकिन बाद में इन अनुबंधों को भी फाइनैंशियल टेक्नोलॉजिस प्रवर्तित एनएसईएल ने स्थगित कर दिया था। अब एफएमसी को ऐसे और विशेषज्ञों को नियुक्त करने और खर्च करने की ज्यादा शक्तियां मिलेंगी। (BS Hindi)

चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने के मूड में नहीं खाद्य मंत्रालय

यूपी में गन्ने का मूल्य घटाने की मांग कर रही मिलों का पेराई से इंकार मौजूदा सीजन में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों की पेराई से इंकार के बावजूद खाद्य मंत्रालय कोई और राहत देने के मूड में नहीं है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के. वी. थॉमस ने गुरुवार को कहा कि चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। इस समय चीनी पर 15 फीसदी आयात शुल्क है जबकि उद्योग आयात शुल्क को बढ़ाकर 60 फीसदी करने की मांग कर रहा है। सरकार ने बुधवार को चीनी उद्योग को कुछ अन्य रियायतें देने की पहल की थी। थॉमस ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मिलों पर गन्ना किसानों की जो बकाया राशि बची हुई है, वह राज्य सरकार का मसला है तथा इससे निपटने में राज्य सरकार उद्योग की सहायता कर सकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार पहले ही उद्योग से लेवी चीनी और रिलीज मेकेनिज्म को समाप्त करके राहत दे चुकी है। चीनी उद्योग का कहना है कि चीनी की कीमतों में पिछले साल की तुलना में भारी कमी आई है जबकि राज्य सरकार ने गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) पिछले साल के बराबर ही तय किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सीजन 2013-14 के लिए अगेती किस्म के गन्ने का एसएपी 290 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य किस्म के लिए 280 रुपये प्रति क्विंटल तथा दोयम किस्म के गन्ने के लिए 275 रुपये प्रति क्विंटल का ही दाम तय किया है। मिलें गन्ने के खरीद मूल्य में कटौती चाहती हैं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार पिछले साल पेराई सीजन के शुरू में चीनी की कीमतें 3,150 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि इस समय दाम 2,900 से 2,950 रुपये प्रति क्विंटल है। पेराई सीजन 2013-14 का ही मिलों पर अभी भी करीब 2,400 करोड़ रुपये बकाया है। राज्य सरकार ने सामान्य किस्म के गन्ने का एसएपी 280 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, इससे नए पेराई सीजन में मिलों पर बकाया राशि का बोझ बढ़कर 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये हो सकता है जिससे किसान गन्ने की खेती से पलायन करने को मजबूर होंगे। मौजूदा चीनी की कीमतों के आधार पर चालू पेराई सीजन में गन्ने का एसएपी घटाकर 225 रुपये प्रति क्विंटल ही तय होना चाहिए। (Business Bhaskar.....R S Rana)

'Potato prices may remain in Rs 450-500/qtl range in Feb-Mar'

Chandigarh, Nov 22. Punjab Agricultural University (PAU) today said potato prices are likely to be in the range of Rs 450-550 per quintal during February-March 2014. Stating this, PAU'S Agricultural Market Intelligence Centre (AMIC) incharge Jagrup S. Sidhu said that the prices of the potato crop in the major markets of the state ruled between Rs 400 and Rs 500 per quintal during January 2012 to April 2013, and increased in the range of Rs 500-750 during May to October 2013. Due to rising demand and shrinking supply, the potato prices were up recently, he added. The demand for potato increased due to its substitution for other costly vegetables, he said, while pointing out disruption in the supply of vegetables because of delayed summer and late rainfall during September-October 2013. At the same time, the high temperature during these months adversely affected the yield of new pre-mature harvested potato crop, he observed. "High potato prices during November have prompted the farmers to harvest pre-mature potato from larger area. Therefore, the supply of main crop during February 2014 onwards may be tightened which will put upward pressure on potato prices during 2013-14," said Sidhu. Moreover, the potato production is also likely to decline marginally as the untimely rainfall during its harvesting time in February 2013 has adversely affected the quality of potato seed in most parts of the state, he added. Highlighting that potato is the most important vegetable in India, Sidhu said the country is the second largest producer of this crop with more than 10 per cent share in world potato production after China, with a share of 22 per cent. "In India, about 85 per cent potato is grown in Uttar Pradesh, West Bengal, Bihar, Karnataka, Madhya Pradesh, Gujarat, Jharkhand and Punjab," he informed. Most of the potato produced in the country is consumed within the country with very little export mainly to neighbouring countries such as Pakistan, Nepal and Bangladesh. Punjab accounts for about five per cent of the total potato production in the country, he said. The area and production of potato in the country remained almost same during 2012-13 as that of last year around 19 lakh hectares and 450 lakh tonnes, respectively. Similarly in Punjab, the area and production of potato remained around 85 thousand hectares and 21 lakh tonnes, respectively, during the same period, he said.

Gold jumps Rs 300 on wedding season buying

New Delhi, Nov 22. Gold jumped Rs 300 to Rs 31,600 per ten grams in the national capital today on wedding season buying at existing lower levels. Silver also gained Rs 270 to Rs 45,870 per kg on increased offtake. Traders said wedding season buying at existing lower levels led the recovery in gold and silver prices. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity rebounded by Rs 300 each to Rs 31,600 and Rs 31,400 per ten grams, respectively. It had lost Rs 520 yesterday. Sovereign followed suit and rose by Rs 100 to Rs 25,300 per piece of eight gram. Similarly, silver ready recovered by Rs 270 to Rs 45,870 per kg and weekly-based delivery by Rs 420 to Rs 45,120 per kg. The white metal had lost Rs 850 in last trade. However, silver coins held steady at Rs 84,000 for buying and Rs 85,000 for selling of 100 pieces.

18 November 2013

कालीमिर्र्च की पैदावार में बढ़ी रुचि

काली मिर्च की कीमतें अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के साथ ही अगले साल वियतनाम और भारत में इसकी पैदावार को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। अगले साल बाजार में काली मिर्च की कीमतें तय करने में यह कारक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले समय में काली मिर्च की आपूर्ति कम होगी या इसका उत्पादन बढ़ेगा, यह सवाल किसानों, कारोबारियों और निर्यातकों को खासा परेशान कर रहा है। केरल में कटाई शुरू होने के साथ ही वैश्विक फसल सत्र भारत में अगले महीने शुरू हो जाएगा। सबसे पहले केरल के दक्षिणी जिलों, इसके बाद इडुकी क्षेत्र से काली मिर्च की आवक होती है। इसके साथ ही मालाबार क्षेत्र से भी आपूर्ति शुरू हो जाती है। अंत में कर्नाटक से भी आवक शुरू हो जाती है। हालांकि अभी 45,000 टन पैदावार का अनुमान है लेकिन कारोबारियों और किसानों को यह आंकड़ा 35,000 टन ही रहने की उम्मीद है। इडुकी जिले के किसानों के अनुसार अगले सत्र में उत्पादन 40 प्रतिशत तक कम होगा। इडुकी में कुमिली के एक किसान ने कहा कि खराब मौसम, रकबे में कमी और केरल के विभिन्न जिलों में पत्तों में बीमारियां लगने के कारण उत्पादन कम रह सकता है। अधिक बारिश के कारण राज्य में काली मिर्च के बड़े उत्पादक जिलों में काली मिर्च के फू लों को खासा नुकसान पहुंचा है। लगातार 90 दिनों में भारी बारिश से फू लों को भारी क्षति पहुंची है। विभिन्न कारणों से कर्नाटक में उत्पादन कम रह सकता है। यहां फसल 4000-5000 टन कम रह सकती है जिससे कुल उत्पादन 20,000 टन के आस-पास रह सकता है। अगले सत्र में केरल में उत्पादन खासा कम रह सकता है। कोच्चि के एक बड़े कारोबारी ने कहा कि कुल उत्पादन 35,000 टन रह सकता है। इस बीच, काली मिर्च के सबसे बड़े उत्पादक देश वियतनाम के किसान बंपर पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं। 2014 में यहां 150,000 टन काली मिर्च की पैदावार की उम्मीद है। वियतनाम में काली मिर्च उत्पादन सत्र फरवरी तक शुरू हो जाता है। हो-ची-मिन्ह शहर के एक अग्रणी निर्यातक के अनुसार काली मिर्च की फसल इस बार अच्छी है और फसल कीटों और किसी भी बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित है। (BS Hindi)

शाह पर 25 के बाद फैसला लेगा एफएमसी

जिंस बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के निदेशकों और फाइनैंशियल टेक्नोलॉजीज (एफटीआईएल) के प्रवर्तक जिग्नेश शाह के काबिल होने के दर्जे के संबंध में फैसला इन कंपनियों के बारे में ग्रांट थॉर्नटन की ऑडिट रिपोर्ट पर पूछताछ (क्रॉस एग्जामिनेशन) के बाद लेगा। यह पूछताछ 25 नवंबर तक होनी है। यह जानकारी एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक ने आज पूंजी बाजारों पर फिक्की के सीएपीएएम सम्मेलन से इतर दी। एनएसईएल 5574 करोड़ रुपये के भुगतान संकट का सामना कर रहा है। फाइनैंशियल टेक्नोलॉजीज के एक्सचेंज एनएसईएल ने अगस्त के मध्य में अपने भुगतान में डिफॉल्ट किया था। इसके बाद एफएमसी ने 4 अक्टूबर को निदेशकों, जिग्नेश शाह और एफटीआईएल को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि एक जिंस एक्सचेंज के संचालन के उनके काबिल होने के दर्जे को क्यों न रद्द कर दिया जाए? नोटिस के जवाब में और बाद में 12 नवंबर को व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान शाह और अन्य निदेशकों ने ऑडिटर से पूछताछ का एक मौका मांगा था। इस ऑडिटर ने फॉरेंसिक ऑडिट किया था और इसी आधार पर एफएमसी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। माना जा रहा है कि शाह और अन्य ने कानूनी सलाह ली है जिमें पाया गया है कि ऑडिट रिपोर्ट कई पहलुओं से कमजोर है और इसे फॉरेंसिक ऑडिट नहीं कहा जा सकता। इस रिपोर्ट में कई शर्तें जुड़ी हैं, जिससे उन्होंने पूछताछ का विचार बनाया। अभिषेक ने कहा, 'हम 25 नवंबर तक पूछताछ पूरी होने के बाद उनके काबिल होने पर फैसला लेंगे। एमसीएक्स की विशेष ऑडिट के संबंध में उन्होंने कहा, 'निदेशक मंडल और उनकी ऑडिट समिति एमसीएक्स की विशेष ऑडिट के लिए ऑडिटर चुनने का काम कर रहे हैं। उनकी सिफारिशों के आधार पर अगले कुछ दिनों मे हम यह फैसला करेंगे कि कौन विशेष ऑडिट करेगा।Ó एफएमसी प्रमुख ने कहा कि विशेष ऑडिट के दायरे में संबंधित पार्टियों एक्सचेंंज में की गई ट्रेडिंग, एनएसईएल की सब्सिडियरी आईबीएमए, दान, गोदाम शुल्क जैसी मदों पर व्यय और अन्य पार्टी लेन-देन आएंगे। एनएसईएल से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे बंबई उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए एफएमसी ने एक्सचेंज के ई-सीरीज अनुबंधों की फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया था। अभिषेक ने कहा, 'हमने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से फॉरेंसिक ऑडिटरों का नाम सुझाने को कहा था। उन्होंने 99 ऑडिटरों की सूची दी थी। इनमें से हमने मुंबई स्थित दो ऑडिटरों को छांटा। हम उनको नियम और शर्तें भेज चुके हैं। अगले सप्ताह निश्चित रूप से ई-सीरीज के लिए ऑडिटर नियुक्त कर लेंगे। (BS Hindi)

एनएसईएल मामलाः ग्रांट थॉर्टन से सवाल-जवाब

एफएमसी चेयरमैन रमेश अभिषेक ने कहा है कि जिग्नेश शाह और जोसेफ मैसी फोरेंसिक ऑडिटर ग्रांट थॉर्टन से सवाल जवाब करेंगे। इसके लिए उन्हें एफएमसी से मंजूरी मिल गई है। रमेश अभिषेक ने ये भी कहा है कि एमसीएक्स के लिए अगले कुछ दिनों में नए ऑडिटर नियुक्त कर दिए जाएंगे। वहीं ई सीरीज के लिए अगले हफ्ते फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति की जाएगी। एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक ने कहा है कि इसके लिए आईसीएआई से 99 ऑडिटर्स की सूची मिली है जिसमें से 2 को शॉर्टलिस्ट किया गया है। (Hindi>moneycantrol.com)

Gold falls on stockists selling, weak global cues

New Delhi, Nov 18. Gold fell by Rs 170 to Rs 31,680 per ten grams in the national capital today on stockists selling on the back of sluggish demand amid weak global trend. On the other hand, Silver lost Rs 200 to Rs 47,300 per kg on reduced offtake by jewellers and industrial units. Traders said stockists selling on the back of sluggish demand at prevailing higher levels mainly kept pressure on precious metals. They said weakening global trend, as a rally in stock markets curbed demand for the metal as an alternate investment, further influenced the sentiment. Gold in Singapore, which normally sets price trend on the domestic front, dropped by 0.4 per cent to USD 1,284.73 an ounce and Silver by 0.6 per cent to USD 20.67 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity fell by Rs 170 each to Rs 31,680 and Rs 31,480 per ten grams, respectively. Sovereign, however, held steady at Rs 25,300 per piece of eight gram. In line with a general weak trend, silver ready declined by Rs 200 to Rs 47,300 per kg and weekly-based delivery by Rs 150 to Rs 46,590 per kg, while its coins held steady at Rs 86,000 for buying and Rs 87,000 for selling of 100 pieces.

क्या आपको अपना गोल्ड ईटीएफ बेच देना चाहिए?

घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ हाल के दिनों में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) को भुनाने का सिलसिला तेज हुआ है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पीली धातु में बिकवाली का यह सही समय नहीं है, क्योंकि कमजोर रुपये के चलते इसकी कीमतें स्थिर रहने का अनुमान है। कमजोर रुपये के कारण घरेलू बाजार मेंं सोने की कीमतों में मजबूती है और यह धातु फिलहाल लगभग 30,845 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है। वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन के आंकड़ों के मुताबिक औसतन छह महीने की अवधि के दौरान ईटीएफ पर लगभग 8.34 फीसदी का रिटर्न देखने को मिला है।इस तेजी को देखते हुए कुछ निवेशक अपने निवेश को भुना रहे हैं और मुनाफा कमा रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक गोल्ड ईटीएफ के तहत प्रबंधित संपत्तियों का आंकड़ा अक्टूबर में गिरकर 9,894 करोड़ रुपये रह गया था, जो जुलाई में 10,669 करोड़ रुपये था। इस श्रेणी में इस साल जुलाई से अक्टूबर के बीच 1,277 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी। अगर आपके पास नकदी की कमी नहीं है तो फिलहाल गोल्ड ईटीएफ में बिकवाली से परहेज कीजिए। घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में कमजोर रुपये की स्थिति का सामना करने के लिए हेज की सुविधा उपलब्ध है, क्योंकि रुपया गिरने पर सोने की कीमतें चढ़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें स्थिर रहने का अनुमान है, जबकि रुपया कमजोरी के संकेत दे रहा है। इस परिदृश्य में निवेशकों को सोने में अपना निवेश बनाए रखना चाहिए। म्युचुअल फंड शोध कंपनी फंड्स इंडिया डॉट कॉम की प्रमुख विद्या बेला कहती हैं, 'सोने की कीमतों में तेजी का फायदा उठाने के लिए बड़े स्तर पर बिकवाली मत कीजिए। पांच साल के दौरान सोने ने दहाई अंक में रिटर्न दिया है और इस रुझान में बदलाव की उम्मीद कम ही है।Ó वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन के मुताबिक गोल्ड ईटीएफ ने तीन साल और पांच साल की अवधि में क्रमश: 11.43 फीसदी और 19.34 फीसदी का रिटर्न दिया है। सोना महंगाई के खिलाफ हेज की सुविधा उपलब्ध कराता है। वेल्थरेज ग्रुप (प्रतिभूति और कमोडिटी) निदेशक किरण कुमार कविकोंडला कहते हैं, 'घरेलू स्तर पर ऊंचे आयात शुल्क और कमजोर रुपये के कारण कीमतें ऊंची चल रही हैं। लेकिन निवेशकों को सोने से पूरी तरह दूरी नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि संपत्ति की यही एक मात्र श्रेणी है जो महंगाई को शिकस्त दे सकती है।Ó यदि आपके पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है तो आपको अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करना चाहिए। आईडीबीआई म्युचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी देवाशिष मलिक बिकवाली का रुझान बढऩे से सहमति जताते हुए कहते हैं कि निवेशकों को अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर महंगी धातु के साथ बने रहना चाहिए। मलिक कहते हैं, 'उदाहरण के लिए किसी एक निवेशक को अपनी कुल रकम का 5 से 10 फीसदी से ज्यादा सोने में निवेश नहीं करना चाहिए। अगर यह आंकड़ा ज्यादा है तो आप निकट भविष्य में जोखिम से बचाव के उपाय कर सकते हैं। (BS Hindi)

15 November 2013

सोने का आयात 32 फीसदी गिरने की संभावना

सप्लाई की किल्लत और महंगाई के चलते सोने की मांग पर असर : डब्ल्यूजीसी देश में मौजूदा वर्ष की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान सोने का आयात करीब एक तिहाई कम रहने की संभावना है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) का कहना है कि सोने की सप्लाई में दिक्कत होने और ऊंची महंगाई दर के कारण सोने की मांग प्रभावित होने का अनुमान है। हालांकि जुलाई-सितंबर तिमाही के मुकाबले मांग में सुधार के आसार हैं। डब्ल्यूजीसी के अनुसार इस साल अक्टूबर-दिसंबर के दौरान सोने का आयात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 148.2 टन रहने की संभावना है। पिछले साल इस अवधि में 219.1 टन सोने का आयात किया गया था। डब्ल्यूजीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर (इंडिया) सोमसुंदरम पीआर ने संवाददाताओं को बताया कि त्योहारी खरीद में तेजी आने की वजह से तीसरी तिमाही के मुकाबले आखिरी तिमाही में आयात बढऩे की संभावना है। हर साल त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ जाती है। त्यौहारों के अलावा शादियों की भी खरीद बढऩे से इस दौरान मांग में सुधार होता है। हालांकि पिछले साल की चौथी तिमाही के मुकाबले इस साल की आलोच्य अवधि में आयात 32 फीसदी कम रहने का अनुमान है क्योंकि सरकार की पाबंदियों के कारण सोने की सप्लाई सीमित है। पिछले साल चौथी तिमाही में 262 टन सोने का आयात हुआ था। मूल्य के लिहाज से इस साल तीसरी तिमाही के दौरान सोने का आयात 39 फीसदी घटकर 39,278 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इस अवधि में 64,200.9 करोड़ रुपये के सोने का आयात हुआ था। तीसरी तिमाही में ज्वैलरी की मांग 23 फीसदी घटकर 104.7 करोड़ रुपये रह गई। पिछले साल इस दौरान 136.1 टन सोने की मांग रही थी। आलोच्य अवधि में ज्वैलरी की मांग मूल्य के लिहाज से 30 फीसदी घटकर 27,749.2 करोड़ रुपये रह गई। पिछले साल इस अवधि में 39,880.2 करोड़ रुपये की ज्वैलरी की बिक्री हुई थी। आलोच्य अवधि में निवेश के लिए सोने की मांग 48 फीसदी घटकर 43.5 टन रह गई। पिछले साल जुलाई-सितंबर में 83 टन सोने की निवेश के लिए मांग रही थी। मूल्य के लिहाज से निवेश के लिए सोने की मांग 53 फीसदी घटकर 11,529 करोड़ रुपये रह गई। पिछले साल जुलाई-सितंबर में 24320.7 करोड़ रुपय के सोने की निवेश के लिए खरीद हुई। आलोच्य अवधि में पुरानी ज्वैलरी के सोने की मांग 34 टन से बढ़कर 61.3 टन हो गई। विदेशी तेजी से सोना और महंगा नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढऩे से गुरुवार को घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। दिल्ली सराफा बाजार में सोने की कीमतों में 220 रुपये की तेजी आकर भाव 31,720 रुपये प्रति दस ग्राम हो गए। चांदी की कीमतें इस दौरान 48,000 रुपये प्रति किलो के पूर्वस्तर पर ही स्थिर बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में 2 डॉलर की तेजी आकर भाव 1,284 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते देखे गए। जबकि 13 नवंबर को विदेशी बाजार में सोने का भाव 1,282 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था। चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस दौरान 20.61 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 20.79 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते देखी गई। (Business Bhaskar)

धान खरीद के गुणवत्ता मानक शिथिल करने की तैयारी

आर एस राणा नई दिल्ली | Nov 15, 2013, 00:05AM IST योजना - पंजाब के बाद हरियाणा, यूपी व तमिलनाडु के किसानों को राहत मिलेगी खरीद की प्रगति बेमौसमी बारिश से चावल उत्पादन अनुमान में कमी की भी आशंका है चालू सीजन 103.07 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हुई पंजाब में 78.23 लाख टन व हरियाणा में 23.67 लाख टन खरीद खाद्य मंत्रालय ने 331.34 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य रखा पिछले सीजन में 340.20 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हुई थी खाद्य मंत्रालय की टीमें बेमौसमी बारिश से प्रभावित राज्यों का दौरा कर रही चालू खरीफ में असमय की बारिश से धान की क्वालिटी प्रभावित हुई थी। इसलिए खाद्य मंत्रालय ने प्रभावित राज्यों में किसानों से खरीदे जाने वाले धान के खरीद मानकों में छूट देने की योजना बनाई है। पंजाब से खरीदे वाले धान की गुणवत्ता में किसानों को छूट दी जा रही है। उत्तर प्रदेश में खाद्य मंत्रालय की टीम जल्द ही स्थिति का जायजा लेने जायेगी। उधर, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु ने भी गुणवत्ता में छूट देने की मांग की है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चालू खरीफ में असमय की बारिश से कई राज्यों में धान की फसल की क्वालिटी प्रभावित हुई है। इसलिए धान के खरीद मानकों में छूट देने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की राज्य सरकारों ने मांग की है। उन्होंने बताया कि पंजाब में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे जाने वाले धान की गुणवत्ता में किसानों को छूट दी जा रही है। उत्तर प्रदेश में जल्द ही मंत्रालय की टीम स्थिति का जायजा लेने जायेगी, उसके बाद ही गुणवत्ता नियमों में छूट दी जायेगी। हरियाणा में चावल की खरीद का लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भी चालू खरीफ में असमय की बारिश से धान की फसल की क्वालिटी प्रभावित हुई है। इन राज्यों में धान की नई फसल की आवक दिसंबर महीने में बनेगी, इसलिए इन राज्यों में अगले महीने खाद्य मंत्रालय की टीम फसल का जायजा लेने के लिए जायेगी। उसी के आधार पर इन राज्यों में भी धान की सरकारी खरीद में किसानों को गुणवत्ता के नियमों में छूट दी जायेगी। उन्होंने बताया कि उड़ीसा में भी धान की फसल प्रभावित हुई है लेकिन अभी उड़ीसा की राज्य सरकार से इस बारे में कोई पत्र नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में असमय की बारिश से कई राज्यों में धान की फसल की क्वालिटी तो प्रभावित हुई ही है, इससे चावल के कुल उत्पादन अनुमान में भी कमी आने की आशंका है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ विपणन सीजन 2013-14 में अभी तक 103.07 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हो चुकी है। अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 78.23 लाख टन और हरियाणा की 23.67 लाख टन की है। चालू खरीफ में पंजाब से खरीद का लक्ष्य 83 लाख टन और हरियाणा से 23.95 लाख टन था। खाद्य मंत्रालय ने चालू खरीफ में 331.34 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले विपणन सीजन में 340.20 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हुई थी। (Business Bhaskar.....R S Rana)

Commexes' turnover down 30% in Apr-Oct due to CTT

New Delhi, Nov 15. The turnover of the commodity exchanges fell by 30 per cent to Rs 71,60,162.84 crore in the first seven months of this fiscal due to sharp fall in trading volumes in most commodities, according to the Forward Markets Commission (FMC). The business at these bourses stood at Rs 101,55,637 crore in the same period last year, the commodity markets regulator FMC said in its latest report. The futures trading volumes on most commodity bourses took a beating after the imposition of commodity transaction tax (CTT) of 0.01 per cent since July 1 on non-agri commodities and processed foods, analysts said. Besides, the Rs 5,600-crore payment crisis at National Spot Exchange Ltd (NSEL), promoted by Financial Technologies India Ltd (FTIL), also dented investors' confidence on the commodity futures trading platform, they added. Consequently, trading volumes at Multi Commodity Exchange (MCX), also promoted by FTIL, were affected. MCX holds a majority of market share in the Indian commodity futures trading business, they added. According to the FMC data, the turnover from farm items fell by 36 per cent to Rs 8,82,208.70 crore in the April-October period of this fiscal, from Rs 13,81,549.95 crore in the same period last year. Similarly, the turnover from gold and silver trading declined by 31 per cent to Rs 32,17,715.34 crore from Rs 46,48,533.64 crore, while the business from metals too dropped by 30 per cent to Rs 13,11,921 crore from Rs 18,73,645 crore in the review period. Also, the turnover from energy items like crude oil fell by over 22 per cent to Rs 17,48,317 crore in the first seven months of this fiscal from Rs 22,51,906 crore in the year-ago period. MCX, NCDEX, NMCE, ACE, ICEX and UCX are the six national commodity bourses operating in the country. There are 11 exchanges that offer futures trading in commodities at regional level.

Gold rises further on seasonal demand, global cues

New Delhi, Nov 15. Amid rising wedding season demand and firm global trend, gold prices rose further by Rs 105 to Rs 31,825 per ten gram while silver remained steady at Rs 48,000 per kg in the national capital today. Traders said pick up in gold demand for wedding season amid a firm global trend mainly helped the prices to gain further ground. Gold in New York, which normally sets price trend on the domestic front, rose by USD 5 to USD 1587.30 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity advanced by Rs 105 each to Rs 31,825 and Rs 31,625 per ten gram, respectively. It had gained Rs 220 yesterday. Sovereign, however, held steady at Rs 25,300 per piece of eight gram. Silver ready remained steady at Rs 48,000 per kg while weekly-based delivery fell further by Rs 200 to Rs 47,000 per kg. Silver coins continued to be asked at last level of Rs 86,000 for buying and Rs 87,000 for selling of 100 pieces.

Outlook for this week......soybean......guar complex.....

Copper: Copper futures traded lower on the back of subdued industrial production in euro area and in India escalated concerns on lower demand while China’s communist party meet on economic reforms has shortened the investor’s expectations. China is the world’s largest metals consuming country posted better than expected trade balance report for the month of October. However, economic growth in developed countries like Japan, France and Germany slowed in the June-September quarter, making unfavorable macro economic conditions for metals consumption. But some relief came for metals when the Fed testimony showed there is urgency for reducing quantitative easing as U.S. economy is not showing enough growth to its potentiality. Euro area economic worries mounted when the S&P cut France sovereign rating by one notch to “AA”, citing concerns about the country’s growth prospects. The contraction in France and slowing growth in Germany shows that the euro area economy remains weak despite dragging itself out of recession. Germany’s statistics body warned that trade was weak in the last quarter, pulling GDP growth down to rise only 0.3 percent. The French national statistics agency said that GDP fell 0.1 percent in the July to September quarter. Japan’s economy slowed less than expected in July-September. In the month of October, India’s trade deficit jumped to $10.56 billion compared with $6.7 billion in September, the trade ministry said. Price movement in the last week: MCX November copper prices opened the week at Rs 457.90/kg, initially traded slightly higher, but found strong resistance at Rs 460.15/kg. Later, copper prices fell sharply made a low of Rs 440.65/kg and finally managed to close Rs 442.15/kg (November 14, Thursday) with a loss of Rs 14.85/kg or 3.25% as compared to previous week’s close of Rs 457/kg. Outlook for this week: MCX November copper is expected to trade lower due to slowdown in growth of global economy. Release of the U.S. retail sales, U.S. existing home sales and flash manufacturing data of France, Germany and the U.S. will have effect on metals market in this week. MCX-November copper shall find a supports at 432/424 levels and resistances at 452/458 levels. Soybean: NCDEX soybean December contract traded slightly lower in the last week on account of short covering after continuous rise from the last three weeks. Higher sowing acreage of rabi oilseeds and arrival pressure kharif crop also added bearish market sentiments. According to Ministry of Agriculture (GOI), total sowing acreage of rabi oilseeds covered to 53.93 lakh hectares as on November 14, 2013, up about 23% as compared to 43.94 lakh hectares during the same period last year. However, firm overseas market and higher export figures of domestic oil meal in the month of October restricted from sharp fall in soybean prices. As per Solvent Extractors’ Association of India (SEA), export of oil-meals for the month of October 2013 reported at 368,317 tonnes, up more than 3 times or 200% compared to 122,108 tonnes in October, 2012. The export of oil-meals during first seven month of financial year (April-October 2013) is reported at 2,019,582 tons, up more than 15% compared to 1,749,412 tons during the same period of last year. Price movement in the last week: NCDEX December Soybean futures opened the week at Rs 3996/qtl, initially traded mildly higher. But found good resistance at Rs 4019.50/bbl. Later price came under pressure and made a low of Rs 3850/qtl and finally manage to close at Rs 6865/qtl (November 14, Thursday) with a loss of Rs 48/qtl or 1.23% as compared to previous week’s close of Rs 3913/qtl. Outlook for this week: NCDEX December soybean is expected to trade slightly higher on the back of firm overseas market as solid export demand and ideas that crush demand is also strong due to hefty meal exports. U.S. traders expects weekly export sales above 1 million tonnes for soybeans and 275,000 tonnes for meal as compared with sales needed each week to reach the USDA projections at 92,800 tonnes and 76,400 tonnes respectively. Further, higher export figures of domestic soy meal coupled with weakness in Indian rupee against the U.S. dollar is also positive for prices as exporter will get more return on soy meal exports. Additionally, Last year’s soybean crop revised downward to 107.00 lakh tons from 113.40 lakh tons. In the current year, in-spite of sizable increase in area under soybean, the crop is lower than last year i.e. 102.30 lakh tonnes, compared with 107 lakh tonnes in the last year due to extensive damage both in term of quality and quantity due to heavy rain fall during end September also early October at the time of harvesting. For the year 2013-14, soybean yield declined to 837kg/hectare from 1000kg/hectare in 2012-13. NCDEX December soybean shall find a support at 3760/3700 levels and resistance 4045/4120 levels. Guar Complex Guar complex traded sharply higher on the back of improved demand from stockists and as millers started crushing operations. Arrivals of fresh crop have recorded less than expectations during the last as farmers are holding their stocks in anticipation of prices will increase in coming days. Further, there is a talk about the crop damage or lower yield in rainfed areas of Western Rajasthan and higher guar gum export figures in the last month are also added bullish market sentiments. Guar gum (split and powder) export surged to 33723 tonnes in the month of October 2013, up 38% on comparing with 24504 tonnes in the month of September 2013. While, India exported 408574.82 tonnes in the year 2012-13, this was down by 42% from 707326.42 tonnes in the year 2011-12. However, in the long term, guar seed/gum may come under pressure due to higher existing carry over stocks coupled with higher sowing acreage estimates for this year as compared to last year. According to Ministry of Agriculture, Rajasthan, guar seed sowing acreage increased to 34.71 lakh hectares; up more than 15% from 30 lakh hectares in the last year. According to Ministry of Agriculture, Rajasthan, fourth advance estimates for guar seed production stood at 20.23 lakh tons in 2012-13. Arrival of fresh crop started in Haryana and Ganganagar region (Rajasthan) is also negative for prices. Price movement in the last week: NCDEX December Guar Seed prices opened at Rs 4960/qtl, initially traded slightly lower, but found strong support at Rs 4860/qtl. Later prices bounced back and finally managed to close at Rs 5350/qtl with a gain of Rs 110/qtl or 2% as compared to previous week’s close of Rs 5240/qtl Outlook for this week: Guar is expected to slightly higher on the back of improved demand from millers as started crushing operations. Higher exports data in the month of October and lower arrivals than expectation in major mandis as farmers expects prices will rise in coming days. Weakness in Indian rupee against the U.S. dollar is also supportive for prices. NCDEX December guar seed shall find a support at 5040/4730 levels and resistance 5460/5600 levels. NCDEX December guar gum shall find a support at 13900/13000 levels and resistance 15330/16000 levels.

14 November 2013

चालू वर्ष में 9 फीसदी बढ़ेगा कॉफी उत्पादन

देश का कॉफी उत्पादन वर्ष 2013-14 के दौरान 9 फीसदी बढ़कर 3,47,000 टन होने की संभावना है। पिछले साल उत्पादन 3,18,000 टन था। कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक कॉफी बोर्ड ने अरेबिका का उत्पादन 12.5 फीसदी बढ़कर 1,11,000 टन और रोबस्टा का उत्पादन 7.5 फीसदी बढ़कर 2,36,000 टन होने का अनुमान जताया है। देश के कुल कॉफी उत्पादन में 75 फीसदी योगदान कॉफी प्लांटर्स एसोसिएशन का होता है। कॉफी उत्पादकों के समक्ष बहुत सी समस्याएं होने के बावजूद उत्पादन में यह बढ़ोतरी होगी। प्रमुख कॉफी उत्पादक देशों जैसे ब्राजील और वियतनाम की तुलना में देश में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता घट रही है। कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के चेयरमैन निशांत आर गुर्जर ने बताया कि वियतनाम की उत्पादकता भारत से करीब 2.6 गुना ज्यादा है, जबकि ब्राजील की 1.5 गुना। भारत में उत्पादकता 850 किलोग्राम से घटकर 748 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर आ गई है। उन्होंने कहा, 'हमें बहुत सी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। हम आज भी दो पीढिय़ों पहले की किस्में उगा रहे हैं और नई किस्मों के विकास के क्षेत्र में कोई खोज नहीं हुई है। नई किस्मों की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है।Ó केपीए ब्राजील से दो जाने-माने विशेषज्ञों को ला रहा है, जो यह बताएंगे कि भारतीय कॉफी उत्पादक किस तरह मुनाफा कमा सकते हैं। गुर्जर ने कहा, 'हमें ऐसी किस्मों की जरूरत है, जो तने को काटने वाले कीड़ों के प्र्रति प्रतिरोधक हों और बेहतर उत्पादन दें। उदाहरण के लिए पिछले 25 वर्षों में ब्राजील के उत्पादकों ने शोध में भारी निवेश किया है और वहां उत्पादकता करीब तीन गुना बढ़ गई है।Ó गुर्जर ने कहा, 'उर्वरकों की किल्लत है, इसलिए हमने राज्य सरकार से रसायनों, उर्वरकों, पोषक तत्वों, कृषि उपकरणों और प्लांटेशन पर वैट माफ करने का आग्रह किया है, क्योंकि इससे हम पर बोझ कम होगा। (BS HIndi)

नई फ सल से आलू रहा गल

देश के कई हिस्सों में जिस वक्त आलू की खुदरा कीमत 40 रुपये प्रति किलोग्राम की सीमा लांघ रही थी, उसी वक्त पश्चिम बंगाल की सरकार ने तय किया था कि अपने राज्य में वह आलू को 13 रुपये प्रति किलो से ऊपर नहीं जाने देगी। आलू पर अंकुश कसने के लिए ममता बनर्जी की अगुआई वाली सरकार ने कोई कोर-कसर भी नहीं छोड़ी और राज्य की नाकेबंदी कर आलू बाहर नहीं जाने दिया। लेकिन पश्चिमी मेदिनीपुर, वर्धमान और बांकुड़ा जिले के कई कारोबारी इस वजह से अपने महीने भर पुराने सौदे पूरे नहीं कर सके और उनका गुस्सा फूट रहा है। इन तीन जिलों से ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश, झारखंड और बिहार को आलू की आपूर्ति की जाती है। बनर्जी सरकार की सख्ती की वजह से इन राज्यों में आलू का संकट पैदा हो गया, जिसके विरोध में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पश्चिम बंगाल सरकार को चि_ïी भी लिख चुके हैं। अलबत्ता नई फसल आने और शीत भंडारगृहों से आलू बाहर निकलने के कारण उत्तरी राज्यों में कीमतें नरम होने लगी हैं। पश्चिम बंगाल में कल तक कारोबारी अवैध तरीके से आलू दूसरे राज्यों में भेज रहे थे। लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें रोकने के लिए मुस्तैदी दिखाई और राज्य की सीमा पर विशेष पुलिस बल तैनात कर दिए, जो आने-जाने वाले उत्पादों पर नजर रखेंगे। सरकारी सख्ती से सब्जी विक्रेता घबरा गए हैं और छापामारी से बचने के लिए 17 से 20 रुपये प्रति किलो आलू बेच रहे हैं। राज्य सरकार आलू बॉन्ड के जरिये शीत भंडारगृहों से 11 रुपये प्रति किलो के भाव आलू खरीद रही है। सितंबर में 50 किलो आलू के बॉन्ड की कीमत 120 से 200 रुपये थी, जो अब बढ़कर 400 से 500 रुपये हो गई है। उधर उत्तर भारत में पंजाब से नये आलू की आवक बढऩे के बाद किसान और कारोबारी शीत भंडारगृहों में रखा आलू तेजी से निकाल रहे हैं। दिल्ली के आलू कारोबारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि बारिश से आलू को नुकसान कम हुआ है, जिससे आवक बढ़ी है और भंडारगृह का आलू भी आ रहा है। इससे नए आलू का भाव 200 रुपये गिरकर 800 से 1000 रुपये प्रति कट्टïा (1 कट्टïे में 50 किलो आलू) और भंडारगृह वाले आलू के भाव 600 से 800 रुपये कट्टïा रह गए हैं। आजादपुर मंडी में आवक बढ़कर करीब 21 हजार क्विंटल हो गई। उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोर एसोसिएशन के सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि यूपी के भंडारगृहों में अभी 8 से 10 फीसदी आलू बचा है। उतरने लगे प्याज के छिलके प्याज के आंसू रो रही आम जनता को राहत मिलने के संकेत दिखने लगे हैं। देश की प्रमुख प्याज मंडियों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। उम्मीद है कि इस वजह से आने वाले समय में प्याज के भाव में नरमी आ सकती है। बाजार के सूत्रों ने बताया कि राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्टï्र की मंडियों में प्याज की नई फसल की आवक शुरू हो गई है। मंडियों में प्याज का भाव अगस्त के बाद सबसे कम स्तर पर है।राष्टï्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास संस्थान के निदेशक आर पी गुप्ता ने कहा, 'गुजरात, महाराष्टï्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से प्याज की आवक बढ़ेगी, जिससे थोक बाजार में प्याज का भाव 20 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ जाएगा।Ó अहमदाबाद और मुंबई के खुदरा बाजार में प्याज का भाव 50 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। कारोबारियों को उम्मीद है कि खुदरा बाजार में भाव 40 रुपये प्रति किलोग्राम से कम भी हो सकते हैं। लासलगांव में आवक बढ़कर 8100 क्विंटल हो गई है। (BS Hindi)

प्याज के भाव होंगे नरम!

प्याज के आंसू रो रही आम जनता को राहत मिलने के संकेत दिखने लगे हैं। देश की प्रमुख प्याज मंडियों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। उम्मीद है कि इस वजह से आने वाले समय में प्याज के भाव में नरमी आ सकती है। दरअसल प्याज के भाव में आई जबरदस्त तेजी आम जनता ही नहीं बल्कि सरकार के लिए भी चिंता का सबब बन चुकी है। बाजार के सूत्रों ने बताया कि राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्टï्र की मंडियों में प्याज की नई फसल की आवक शुरू हो गई है। मंडियों में प्याज का भाव अगस्त के बाद सबसे कम स्तर पर है। राष्टï्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास संस्थान के निदेशक आर पी गुप्ता ने कहा, 'नई फसल की आवक शुरू हो गई है और अभी गुजरात, महाराष्टï्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से प्याज की आवक बढ़ेगी। इससे थोक बाजार में प्याज का भाव 20 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ जाएगा। अब प्याज के भाव गिरेंगे।Ó अहमदाबाद और मुंबई के खुदरा बाजार में प्याज का भाव 50 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। दिवाली से कुछ दिन पहले तक देश के कई हिस्सों में प्याज का खुदरा भाव 70 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा था। कारोबारियों को उम्मीद है कि खुदरा बाजार में भाव 40 रुपये प्रति किलोग्राम से कम भी हो सकते हैं। अहमदाबाद के चिमनभाई पटेल एपीएमसी के एक कारोबारी ने बताया, 'बाजार में सौराष्टï्र और महाराष्टï्र इलाके से प्याज की आवक शुरू हो गई है। बाजार में मांग स्थिर होने और नई फसल की आवक से भाव नरम हुए हैं। हमें भाव में और गिरावट आने की उम्मीद है।Ó देश के सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में इस महीने के शुरू में जहां प्याज की आवक 400 क्विंटल थी वहीं अब यह बढ़कर 8100 क्विंटल हो गई है। मंडी में 6 नवंबर को प्याज 4,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा था लेकिन आज यह लुढ़ककर 2,950 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। (BS Hindi)

'जीएम फसलों पर संशय मिटाना जरूरी'

92% न क्षेत्र में जीएम कपास का उत्पादन हो रहा है देश में कई वर्षों से महानिदेशक ने कहा- बीटी कपास के बिनौला का पशुचारे में उपयोग से कोई परेशानी नहीं आई जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलों के बारे में नीति-निर्माताओं और किसानों के बीच गलतफहमी को दूर करने की जरूरत है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एस अय्यप्पन ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जीएम फसलों के प्रति आम जनता की धारणा में बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में कपास के कुल उत्पादन में 92 फीसदी जीएम कपास का उत्पादन हो रहा है। बीटी कपास की पैदावार से किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है। कपास से निकलने वाले बिनौला का उपयोग पशुआहार में किया जा रहा है तथा अभी तक इसके कोई नकारात्मक परिणाम सामने नहीं आये हैं जबकि बिनौला तेल का उपयोग खाने में हो रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के निदेशक एच एस गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि जब बड़ी आबादी वाले तमाम विकासशील देश जीएम फसलों पर अनुसंधान कर रहे हैं, तब भारत में भी इसे रोकना उचित नहीं है। बीजों में वैज्ञानिक ढंग से सुधार करने से खाद्यान्न की पैदावार बढ़ाने में मदद मिली है। हरित क्रांति में संकर बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका थी जबकि यह तकनीक अब और आगे बढ़ी है, हालांकि इसके उपयोग में सतर्कता जरूरी है। नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के प्रेसिडेंट प्रो. आर बी सिंह ने बताया कि बढ़ती आबादी की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए जीएम फसलों को अपनाया जाना जरूरी है। जीएम फसलों से सुरक्षा को जो खतरा बताया जाता है, उस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि अगर परीक्षण ही रुक गए, तो फसलों की सुरक्षा से जुड़े प्रयोगों पर भी विराम लग जायेगा। ऐसे में वह समय आ ही नहीं पायेगा, जब जीएम फसलों को सुरक्षित मानकर उनकी खेती की जाए। (Business Bhaskar)

पैदावार में कमी से उड़द और मूंग महंगी होने का अनुमान

मंडियों में दालें महाराष्ट्र, कर्नाटक व राजस्थान में मूंग की पैदावार घटने की आशंका आयातित मूंग 200 डॉलर बढ़कर मुंबई में 1,000 डॉलर प्रति टन उत्पादक मंडियों में मूंग की कीमत 6,000-6,500 रुपये प्रति क्विंटल आयातित उड़द 170 डॉलर बढ़कर 670 डॉलर प्रति टन हो गई उत्पादक मंडियों में उड़द का भाव 4,800-4,900 रुपये प्रति क्विंटल सर्दियों में खपत बढऩे के अलावा शादियों में भी इन दालों की मांग बढ़ेगी खरीफ सीजन में उड़द और मूंग की पैदावार में कमी आने की आशंका से इनकी कीमतों में तेजी बनी हुई है। महीने भर में आयातित मूंग की कीमतों में 200 डॉलर और उड़द की कीमतों में 170 डॉलर प्रति टन की तेजी आ चुकी है। ब्याह-शादियों के साथ ही त्योहारी मांग से इनकी कीमतों में और भी तेजी की संभावना है। हालांकि चना, अरहर और मसूर के दाम अभी स्थिर ही रहने का अनुमान है। दलहन आयातक संतोष उपाध्याय ने बताया कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान में मूंग की पैदावार कम होने की आशंका है जबकि दाल मिलों की मांग बराबर बनी हुई है। आयातित मूंग की कीमतें बढ़कर बुधवार को मुंबई में 1,000 डॉलर प्रति टन हो गई। महीने भर में इसकी कीमतों में करीब 200 डॉलर प्रति टन की तेजी आ चुकी है। उत्पादक मंडियों में मूंग की कीमतें 6,000 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है। इस दौरान आयातित उड़द की कीमतों में 170 डॉलर की तेजी आकर बुधवार को मुंबई पहुंच भाव 670 डॉलर प्रति टन हो गए। उत्पादक मंडियों में उड़द का भाव 4,800-4,900 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। ब्याह-शादियों के साथ ही त्योहारी मांग होने से इनकी मौजूदा कीमतों में और भी तेजी की संभावना है। श्रीकृष्ण मुरारी कन्वेसिंग कंपनी के प्रबंधक दुर्गा प्रसाद ने बताया कि सब्जियों के दाम ऊंचे होने के कारण दालों की मांग पहले की तुलना में बढ़ी है, जिससे इनकी कीमतों में तेजी आई है। सर्दियों में दालों की खपत बढ़ जाती है जबकि ब्याह-शादियों का सीजन होने के कारण मांग अच्छी रहने के आसार हैं। हालांकि आयातित चना सस्ता है जबकि ऑस्ट्रेलिया में स्टॉक भी ज्यादा है इसलिए चना, अरहर और मसूर की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई चने के भाव मुंबई में 3,200 रुपये, आयातित अरहर के भाव 4,200 से 4,300 रुपये और आयातित मसूर के भाव 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे। दिल्ली में चने का भाव 3,100 रुपये, अरहर का भाव 4,400 रुपये और मसूर का 4,100 रुपये प्रति क्विंटल रहा। कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2013-14 खरीफ में उड़द की पैदावार पिछले साल के 14.5 लाख टन से घटकर 13.3 लाख टन ही होने का अनुमान है। हालांकि चालू खरीफ में मूंग की पैदावार पिछले साल के 7.6 लाख टन से बढ़कर 9 लाख टन होने का अनुमान है। अरहर की पैदावार खरीफ में 30.7 लाख टन से कम होकर 30.4 लाख टन होने का अनुमान है। (Business Bhaskar....R S Rana)

Gold rebounds on marriage season demand, global cues

New Delhi, Nov 14. Gold prices moved up by Rs 220 to Rs 31,720 per ten gram in the national capital today on marriage season demand amid a firm global trend. However, silver held steady at Rs 48,000 per kg on lack of buying support from industrial units. Traders said increased buying by stockists and retail customers for the marriage season mainly led to recovery in gold prices. Firm global trend further supported the uptrend, they said. Gold in Singapore, which normally sets price trend on the domestic front, rose by 0.6 per cent to USD 1,289 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity recovered by Rs 220 each to Rs 31,720 and Rs 31,520 per ten gram, respectively. It had lost Rs 315 yesterday. Sovereign followed suit and went up by Rs 100 to Rs 25,300 per piece of eight gram. On the other hand, silver ready held steady at Rs 48,000 per kg while weekly-based delivery lost Rs 110 at Rs 47,200 per kg on lack of speculators support, while silver coins spurted by Rs 1,000 to Rs 86,000 for buying and Rs 87,000 for selling of 100 pieces on marriage season demand.

13 November 2013

सोने के घटते आयात से बढ़ी ज्वैलर्स की चुनौतियां

देश में सोने के बढ़ते आयात पर लगाम कसने के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देश के बाद घटते आयात के कारण अधिकांश सूचीबद्ध ज्वैलरों के लिए जुलाई से सितंबर की तिमाही आसान नहीं रही। उद्योग सूत्रों का कहना है कि इन बड़े ज्वैलरों के कारखाने को सोने की किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल उनके पास 2013 के अंत तक उत्पादन के लायक कच्चा माल ही उपलब्ध है। दूसरी ओर ज्वैलरों को बढ़ते कर्ज बोझ का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अब उन्हें पहले पट्टïे पर लिए गए सोने का भुगतान भी करना पड़ रहा है। एक ज्वैलरी फर्म के शीर्ष अधिकारी ने कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन्वेंटरी में कच्चे माल का अभाव है। कुछ ज्वैलर इन्वेंटरी के लिए पर्याप्त मात्रा में कच्चे माल का भंडार मौजूद रखते हैं लेकिन कुछ अन्य ज्वैलरों को आरबीआई के प्रावधानों से प्रभावित होना पड़ा है।Ó टाइटन कंपनी लिमिटेड ने कहा कि उसने केवल नवंबर तक की जरूरतों के लिए सोने की खरीद की है। जबकि नाम जाहिर न करने की शर्त पर अन्य ज्वैलरों ने कहा कि उसके पास दिसंबत तक की जरूरतों के लायक सोना मौजूद है। त्रिभुवनदास भीमजी जावेरी लिमिटेड, गीतांजलि जेम्स लिमिटेड और पीसी ज्वैलर्स लिमिटेड सहित लगभग सभी ज्वैलरों का कहना है कि घरेलू और अंतरराष्टï्रीय बाजारों में बेचने लायक आभूषण तैयार करने के लिए वे सोने के आयात पर निर्भर हैं। टाइटन को 10 टन तक सोना सीधे आयात करने का लाइसेंस प्राप्त है। टाइटन अपने इस लाइसेंस का उपयोग कर सकती है लेकिन अन्य ज्वैलर्स के पास इस प्रकार का लाइसेंस मौजूद नहीं है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत केवल 80 फीसदी आयातित सोने का इस्तेमाल ही घरेलू बाजारों के लिए किया जा सकता है जबकि शेष 20 फीसदी आयातित सोने से निर्यात के लिए आभूषण तैयार करना अनिवार्य है। इससे घरेलू आभूषण कारोबार को काफी धक्का लगा है। जेम्स ऐंड ज्वैलरी फेडेरेशन के चेयरमैन हरेश सोनी ने कहा, 'इस उद्योग को घरेलू बाजार में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। (BS Hindi)

यूपी में गन्ने के मूल्य पर नहीं हो सका फैसला

मुख्य सचिव ने मिलों को इसी महीने पेराई शुरू करने के निर्देश दिए उत्तर प्रदेश में गन्ना खरीद के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भी कोई फैसला नहीं हो सका। मंगलवार को लखनऊ में राज्य के मुख्य आयुक्त के साथ हुई चीनी मिलों और किसानों की बैठक में मुख्य आयुक्त ने चीनी मिलों को चालू महीने में गन्ने की पेराई शुरू करने के निर्देश दिए। इससे पहले आठ नवंबर को गन्ना आयुक्त सुभाष चंद शर्मा के साथ चीनी मिलों और किसानों की पहली बैठक बेनतीजा रही थी। सूत्रों के अनुसार मुख्य आयुक्त की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में जहां किसानों ने पेराई सीजन वर्ष 2013-14 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए गन्ने का एसएपी 350 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की, वहीं चीनी मिलों ने रंगराजन समिति की सिफारिशों के आधार पर गन्ने का मूल्य चीनी की कीमतों से जोड़कर तय करने की मांग की। इसके आधार पर गन्ने का मूल्य 240 रुपये प्रति क्विंटल बनता है। मुख्य आयुक्त ने चीनी मिलों से कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें 20 से 25 नवंबर तक और राज्य की बाकी मिलें 30 नवंबर तक गन्ने की पेराई आरंभ कर दें। ऐसा पहले भी कई बार हुआ है कि मिलों ने पेराई पहले आरंभ कर दी हो, और गन्ने का एसएपी बाद में तय हुआ है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने कहा कि हमने राज्य सरकार से गन्ना नीति तय करने की मांग की है। इस बार स्थिति एकदम अलग है, चीनी के दाम कम होने के कारण मिलों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। इसलिए राज्य सरकार को इस उद्योग को बचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। चीनी के एक्स-फैक्ट्री दाम उत्तर प्रदेश में इस समय 2,900 से 3,050 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि मिलों को लागत करीब 3,500 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल की आती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में पेराई सीजन 2012-13 का चीनी मिलों पर अभी करीब 2,300 करोड़ रुपये बकाया बचा हुआ है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को यह फैसला एक महीने पहले ही ले लेना चाहिए था क्योंकि मिलों द्वारा पेराई आरंभ नहीं करने से किसानों को मजबूरन अपना गन्ना औने-पौने दाम पर कोल्हू संचालकों को बेचना पड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और चीनी मिलें आपस में मिली हुई है तथा किसानों को मोहरा बना रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सीजन वर्ष 2012-13 के लिए गन्ने का एसएपी 275 से 290 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, इसमें सामान्य किस्म के गन्ने का एसएपी 280 रुपये प्रति क्विंटल था। (Business Bhaskar....R S Rana)