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31 July 2013

चीनी हो सकती है महंगी!

सब्सिडी बोझ कम करने के लिए सरकार कुछ राज्यों को जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) यानी राशन के जरिये 13.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जाने वाली चीनी की खुदरा कीमतें बढ़ाने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि कई राज्यों ने शिकायत की थी कि केंद्र ने चीनी की बिक्री पर 18.50 रुपये प्रति किलोग्राम की समान सब्सिडी निर्धारित की है जो खरीद कीमत अधिक होने से सस्ती दर पर चीनी की बिक्री के लिए अपर्याप्त है। सरकार ने चीनी क्षेत्र से नियंत्रण हटाने के प्रयासों के तहत चीनी पर कर व्यवस्था खत्म करनेे का फैसला किया था। साथ ही, उसने सस्ती दरों पर चीनी की बिक्री के लिए राज्यों को वित्तीय रियायत देने का भी निर्णय लिया है। सब्सिडी की गणना राज्यों द्वारा चीनी की खरीद कीमत 32 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से की गई है जबकि सब्सिडी के साथ बिक्री कीमत 13.50 रुपये प्रति किलोगा्रम तय की गई है। एक अधिकारी ने कहा, 'नई व्यवस्था में ढुलाई आदि की लागत शामिल नहीं है, खासकर उन राज्यों के लिए जहां चीनी नहीं है।Ó चीनी पर लेवी व्यवस्था समाप्त करने से पहले केंद्र सरकार 13.50 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दरों पर हर साल लगभग 27 लाख टन चीनी की बिक्री राशन दुकानों के जरिए करती रही है। अधिकारियों का कहना है कि दिशा-निर्देशों के अनुसार केंद्र सरकार नियमित बिक्री और त्योहारों के लिए अतिरिक्त आवंटन के लिए राशन चीनी की बिक्री पर सब्सिडी का भुगतान हर तीन महीने में करेगी। हालांकि केंद्र सरकार सब्सिडी का भुगतान आवंटन के मौजूदा स्तर पर आधारित मात्रा के हिसाब से करेगी। इस व्यवस्था की जरूरत पिछले महीने चीनी की लेवी व्यवस्था खत्म करने के फैसले के बाद महसूस की गई है। चीनी की लेवी व्यवस्था के तहत निजी चीनी मिल मालिकों को रियायती दर पर सरकार को चीनी की निर्धारित मात्रा बेचनी पड़ती थी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सीसीईए ने चीनी को नियमित रूप से जारी किए जाने की व्यवस्था भी समाप्त कर दी जिसके तहत चीनी मिलों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर सिर्फ तय मात्रा की बिक्री की अनुमति थी। (BS Hindi)

खाद्य सुरक्षा की खातिर गेहूं व चावल निर्यात की समीक्षा

आर एस राणा नई दिल्ली | Jul 31, 2013, 02:34AM IST दो अगस्त को सचिवों की बैठक में किया जाएगा पूरे मसले पर मंथन मौजूदा निर्यात गेहूं का निर्यात सरकारी और प्राइवेट स्तर पर हो रहा गैर बासमती चावल का निर्यात प्राइवेट व्यापारियों के जरिये विदेश में दाम घटने से गेहूं का सरकारी निर्यात नहीं हो रहा पिछले 22 माह में कुल 81.45 लाख टन गेहूं का निर्यात हुआ इसमें 41.95 लाख टन गेहूं का निर्यात सरकारी गोदामों से सितंबर 2011 से गैर बासमती चावल निर्यात 115 लाख टन रहा देश में खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने के साथ ही सरकार खाद्यान्न निर्यात की समीक्षा करने जा रही है। सरकार तय करेगी कि घरेलू आवश्यकता और उपलब्धता को देखते हुए गेहूं व चावल के निर्यात की कैसी नीति होनी चाहिए। खाद्यान्न निर्यात की समीक्षा करने के लिए केंद्र सरकार ने दो अगस्त को सचिव स्तर की बैठक बुलाई है। खाद्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में गेहूं और गैर-बासमती चावल के घरेलू स्टॉक, निर्यात की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों की समीक्षा की जायेगी। केंद्रीय पूल में पहली जुलाई को 739.05 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक जमा है जो तय बफर मानकों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्यान्न निर्यात की समीक्षा करने के लिए दो अगस्त को सचिव स्तर की बैठक प्रस्तावित है। खाद्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों के सचिव भाग लेंगे। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के जरिए लागू कर रही है तथा कुछ राज्य अगस्त-सितंबर से ही इसे लागू करना चाहते हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लागू होने के बाद ज्यादा खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में आई गिरावट से गेहूं के नए निर्यात सौदे नहीं हो रहे हैं। गेहूं निर्यात के लिए सरकार ने 300 डॉलर प्रति टन का बेस प्राइस तय किया हुआ है जबकि विश्व बाजार भाव 275-285 डॉलर प्रति टन रह गए हैं। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 9 सितंबर 2011 से 5 जुलाई 2013 के दौरान 81.45 लाख टन गेहूं का निर्यात हुआ है। इसमें सार्वजनिक कंपनियों एसटीसी, एमएमटीसी और पीईसी ने 41.95 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है। गैर-बासमती चावल का निर्यात 9 सितंबर 2011 से 5 जुलाई 2013 के दौरान 115 लाख टन रहा। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान 34.56 लाख टन बासमती चावल का भी निर्यात हुआ है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले ज्यादा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2013-14 के पहले तीन महीनों (अप्रैल से जून) के दौरान 3,363.13 करोड़ रुपये मूल्य का गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 15.11 फीसदी कम है। हालांकि इस दौरान गेहूं और बासमती चावल का निर्यात मूल्य के हिसाब से बढ़ा है। इस दौरान 3,963.57 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं निर्यात हुआ है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 288.79 फीसदी ज्यादा है। बासमती चावल का निर्यात मूल्य के लिहाज से इस दौरान 67.70 फीसदी बढ़कर 7,756.95 करोड़ रुपये का हुआ है। (business Bahskar.....R S Rana)

Gold regains Rs 29k level first time in nearly 4 months

New Delhi, Jul 31. Gold today regained the Rs 29,000 level after nearly four months by surging Rs 755 to Rs 29,200 per 10 grams in the national capital on brisk buying by stockists and investors driven by firming global trend. Silver also zoomed up by Rs 915 to Rs 42,260 per kg on increased offtake by industrial units and coin makers. The sentiment bolstered after gold climbed in global markets as investors awaited the conclusion of a Federal Reserve meeting on whether the central bank may start reducing its stimulus program in the coming months, traders said. Gold in Singapore, which normally sets the price trend on the domestic front, rose by one per cent to USD 1,339.74 an ounce and silver by 1.4 per cent to USD 20.01 an ounce. Weak rupee against us dollar which make the import of the precious metals costlier and investors shifting funds from melting equities also influenced the sentiment. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity spurted by Rs 755 each to Rs 29,200 and Rs 29,000 per 10 grams, respectively, a level last seen on April 12. However, sovereigns held steady at Rs 24,400 per piece of eight grams in scattered deals. In a similar fashion, silver ready jumped up by Rs 915 to Rs 42,260 per kg and weekly-based delivery by Rs 1040 to Rs 42,160 per kg respectively. Silver coins also sky-rocketed by Rs 1000 to Rs 81,000 for buying and Rs 82,000 for selling of 100 pieces.

30 July 2013

सोने के आयात पर सख्ती बनी रहेगी

केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सोने के आयात में जून में कमी के बाद जुलाई में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है जिसे ध्यान में रखते हुए इसके आयात पर प्रतिबंध बरकरार रहेगा। चिदंबरम ने यहां दैनिक दिव्य भास्कर के एक समारोह में कहा, 'जून में आयात कम था लेकिन जुलाई में इसमें तेजी आई। जुलाई में आयात बढ़ा, इसलिए आयात पर नियंत्रण के उपाय जारी रहेंगे।Ó अप्रैल में 141 टन सोने का आयात हुआ और मई में यह बढ़कर 162 टन हो गया। उन्होंने सरकार और रिजर्व बैंक की सोने के आयात पर नियंत्रण पर लगाम लगाने की पहल को उचित ठहराते हुए कहा, 'दो महीने में करीब 303 टन सोने का आयात हुआ। यदि हम इसे छह से गुणा करें तो चालू वित्त वर्ष में 1,800 टन सोने का आयात होगा। इस लिहाज से 1,800 टन सोने के आयात के लिए पैसे कहां से आएंगे।Ó सरकार ने सोने पर सीमा-शुल्क बढ़ाकर आठ प्रतिशत कर दिया वहीं रिजर्व बैंक ने सोने के आयात और वित्त पोषण पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए। मंत्री ने कहा कि भारत ने 2012-13 में 845 टन सोने का आयात किया जिसके लिए देश को 50 अरब डॉलर (तीन लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा का भुगतान करना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि लोगों को सोना नहीं खरीदने के लिए राजी करना मुश्किल है। चिदंबरम ने कहा, 'मैं उनसे सिर्फ यही कह रहा हूं कि सोने की खरीद कम की जाए। यदि वे 20 ग्राम खरीद रहे हों तो मेरी गुजारिश है कि वे 10 ग्राम खरीदें।Ó कीमतों में आई तेजी सोने ने आज एक बार फिर से शानदार बढ़त हासिल की। मुंबई के जवेरी बाजार में सोना 6 सप्ताह के ऊंचे स्तर (28,000 रुपये प्रति 10 ग्राम) के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 28025 के आंकड़े पर पहुंच गया। हालांकि रुपये में गिरावट की वजह से भारतीय उपभोक्ता अंतराष्टï्रीय बाजार में सोने में गिरावट का लाभ उठाने में पूरी तरह कामयाब नहीं रहे हैं। अंतरराष्टï्रीय बाजार में सोना आज 35 डॉलर तक गिर कर 1332.75 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। पिछले सप्ताह न्यूयार्क में कॉमेक्स पर सोना 2.2 फीसदी चढ़ कर 1,321.90 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था जो इस धातु में लगातार तीसरी तेजी थी। 24 जिंसों वाले स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जीएससीआई स्पॉट इंडेक्स में 2.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि इक्विटी का एमएससीआई ऑल-कंट्री वल्र्ड इंडेक्स 0.3 फीसदी मजबूत हुआ। यह धातु वर्ष 2008 के अंत के स्तर के मुकाबले सितंबर 2011 में 1923.70 की सर्वाधिक ऊंचाई को छू चुकी है जो 2008 के भाव की तुलना में लगभग दोगुना है। (BS Hindi)

दिसंबर के बाद मिलों से लेवी का चावल नहीं लेगी सरकार

आर एस राणा नई दिल्ली | Jul 30, 2013, 02:12AM IST राइस मिलों के पास मिलिंग के लिए अभी भी 110 टन धान मौजूद नया सीजन अक्टूबर से नए सीजन में 400 लाख टन चावल खरीद संभव चालू खरीफ में 196 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई हुई पिछले साल की समान अवधि में 184.24 लाख हैक्टेयर रकबा था एफसीआई के पास 739.05 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक इसमें 315.08 लाख टन चावल और 423.97 लाख टन गेहूं राइस मिलों के ढुलमुल रवैये से परेशान खाद्य मंत्रालय सख्त कदम उठाने जा रहा है। चालू खरीफ विपणन सीजन 2012-13 में राइस मिलों को लेवी का चावल सितंबर महीने तक देना है। खाद्य मंत्रालय राइस मिलों को केवल तीन महीने का ही अतिरिक्त समय देगा। ऐसे में दिसंबर के बाद लेवी चावल जमा कराने वाली राइस मिलों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि अक्सर राइस मिलें समय पर लेवी का चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास जमा नहीं कराती हैं। इसलिए चालू खरीफ विपणन सीजन में राइस मिलों को तीन महीने से ज्यादा का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। राइस मिलों को चालू खरीफ विपणन सीजन 2012-13 में लेवी का चावल सितंबर महीने तक जमा कराना है तथा समय पर लेवी का चावल नहीं देने वाली राइस मिलों को केवल तीन महीने का ही अतिरिक्त समय दिया जाएगा। ऐसे में दिसंबर तक सभी राइस मिलों को लेवी का चावल एफसीआई को देना होगा, ऐसा नहीं करने वाले राइस मिलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ विपणन सीजन 2012-13 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 338 लाख टन चावल की खरीद हुई है। खरीफ और रबी खरीद सीजन को मिलाकर राइस मिलें अभी तक 264 लाख टन लेवी का चावल एफसीआई को सौंप चुकी हैं। राइस मिलों के पास इस समय करीब 110 लाख टन धान का स्टॉक मिलिंग के लिए रखा हुआ है। वर्तमान में हो रही चावल की सरकारी खरीद को देखते हुए कुल खरीद 345 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि खाद्य मंत्रालय ने चावल की खरीद का लक्ष्य 401 लाख टन का तय किया था। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में धान की रोपाई में बढ़ोतरी हुई है जबकि मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है। ऐसे में अक्टूबर से शुरू होने वाले नए खरीफ विपणन सीजन 2013-14 में चावल की सरकारी खरीद 400 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रोपाई बढ़कर 196.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 184.24 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। भारतीय खाद्य निगम के पास पहली जुलाई को 739.05 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक जमा है। इसमें 315.08 लाख टन चावल और 423.97 लाख टन गेहूं का स्टॉक है। (Business Bhaskar.....R S Rana)

Gold snaps 3-day gaining streak; down Rs 30 on global cues

New Delhi, Jul 30. Snapping a three-day gaining streak, gold prices slipped by Rs 30 to Rs 28,445 per 10 grams in the national capital today on stockists selling at prevailing higher levels amid a weak global trend. However, silver recovered by Rs 345 to Rs 41,345 per kg on increased offtake by industrial units. Traders said stockists selling at prevailing higher levels against restricted buying mainly led to decline in gold prices. Weak global trend speculation that the central bank may begin to taper its unprecedented stimulus program in the coming months, also influenced the gold, they said. Gold in Singapore, which normally sets the price trend on the domestic front, fell 0.7 per cent to USD 1,318.26 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity fell by Rs 30 each to Rs 28,445 and Rs 28,245 per 10 grams, respectively after gaining Rs 655 in last three days. Sovereigns, however, remained stable at Rs 24,400 per piece of eight grams in restricted buying activity. On the other hand, silver ready recovered by Rs 345 to Rs 41,345 per kg and weekly-based delivery by Rs 320 to Rs 41,120 per kg, respectively. The white metal had lost Rs 350 in the previous two session. On the other hand, silver coins maintained steady trend at Rs 80,000 for buying and Rs 81,000 for selling of 100 pieces.

Gold declines as Fed policy makers meet; physical demand slows

London, Jul 30. Gold today declined for the third day as investors awaited the start of a Federal Reserve policy meeting and on speculation physical demand is slowing. Gold fell by 0.4 per cent to USD 1,322.14 an ounce and silver 1.3 per cent to USD 19.61 an ounce. The Dollar Index, a measure against 10 major currencies, rose for a second day after reaching a five-week low yesterday before Fed policy makers begin a two-day meeting today. Bullion rose the past three weeks and is up 7.2 per cent this month, set for the biggest monthly gain since Jan 2012. Gold tumbled 21 per cent this year after some investors lost faith in the metal as a store of value and on speculation the Fed may curb its bond-buying programme. Fed Chairman Ben S Bernanke said it’s too early to decide whether to begin scaling back purchases in September, after saying on June 19 that buying could slow if the economy improves. Physical demand that slowed in recent weeks will probably gain as prices fall, Standard Bank said.

Rice production may hit record this kharif season: Anwar

New Delhi, Jul 30. India's rice production is likely to hit an all-time high in the ongoing kharif season on the back of good monsoon that has propelled sowing area, Minister of State for Agriculture Tariq Anwar said today. "Monsoon has been good so far this year. As per the reports received from the states, sowing area is higher and it seems that this time we will set new records in foodgrain production during Kharif," he said on the sidelines of a Assocham's Bio-Agri summit. Rice production is also expected to be record in Kharif season, he added. Earlier Agriculture Minister Sharad Pawar had also said the production of foodgrains in kharif season could break all previous records. For the kharif season, all-time high in foodgrains output was in 2011-12 at 131.27 million tonnes (MT). However, the output fell in kharif last year because of drought in Karnataka, Maharashtra, Gujarat and Rajasthan. The all-time high of rice output was also in 2011-12 at 92.78 MT. Area under kharif crops, including paddy, had increased by 17.70 per cent to 747.78 lakh hectares till last week. The acreage of paddy, a major kharif (summer-sown) crop, rose by 8.58 per cent to 196.38 lakh hectares. Sowing of kharif (summer) crops begins with the onset of South-west monsoon from June. The country had received an excess of 21 per cent rainfall till last week. The advancement of monsoon rains had also pushed area under pulses by 90 per cent to 73.62 lakh hectares. Similarly, area sown for coarse cereals has increased to 148.82 lakh hectares from 117.48 lakh hectares in the review period.

29 July 2013

नए सीजन में चावल की सरकारी खरीद बढ़ेगी

अक्टूबर से शुरू होने वाले सीजन में 400 लाख टन खरीद के आसार नए खरीफ विपणन सीजन 2013-14 (अक्टूबर से सितंबर) में चावल की सरकारी खरीद 400 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है। चालू खरीफ विपणन सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अभी तक 338.15 लाख टन चावल की खरीद हो चुकी है। खाद्य मंत्रालय ने नए खरीफ विपणन सीजन में चावल की खरीद के लिए प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों के खाद्य सचिवों की 31 जुलाई को दिल्ली में बैठक बुलाई है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों के खाद्य सचिवों की 31 जुलाई को दिल्ली में बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता खाद्य सचिव करेंगे। बैठक में राज्यों की मांग के हिसाब से चावल की सरकारी खरीद का अग्रिम लक्ष्य तय किया जाएगा। चालू खरीफ विपणन सीजन 2012-13 में एमएसपी पर अभी तक 338.15 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हुई है, जबकि खरीद का लक्ष्य 401 लाख टन का था। चावल की सरकारी खरीद अभी जारी है तथा उम्मीद है कि खरीद 345 लाख टन तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में चावल की पैदावार में कमी आने के कारण चालू खरीफ में चावल की खरीद तय लक्ष्य से कम हुई है। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में मौसम फसल अनुकूल चल रहा है तथा धान की रोपाई भी चालू खरीफ में बढ़कर 196.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि के 184.24 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। ऐसे में चावल की पैदावार में पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी होने का अनुमान है इसलिए चावल की सरकारी खरीद खरीफ विपणन सीजन 2013-14 में 400 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है। अक्टूबर से शुरू होने वाले नए खरीफ विपणन सीजन 2013-14 के लिए केंद्र सरकार ने कॉमन ग्रेड चावल के एमएसपी में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,310 रुपये और ग्रेड-ए के एमएसपी में 65 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,345 रुपये प्रति क्विंटल तय किए गए हैं। केंद्रीय पूल में पहली जुलाई को 739.05 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक जमा है, इसमें 315.08 लाख टन चावल और 423.97 लाख टन गेहूं है। (Business Bhaskar)

जोरदार बारिश से होगा खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन

आर एस राणा नई दिल्ली | Jul 29, 2013, 00:03AM IST खेतों से उम्मीद चालू सीजन में अभी तक खरीफ फसलों की बुवाई 17.7 फीसदी ज्यादा जल्दी बुवाई शुरू होने से खरीफ फसलों को मिलेगा फायदा पकने के लिए साढ़े चार से पांच माह का पूरा वक्त मिलेगा फसल जल्दी तैयार होने से बाजार में नई आवक जल्दी शुरू होगी इससे महंगाई पर अंकुश लगेगा और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी दलहन व तिलहन के बेहतर उत्पादन से आयात पर निर्भरता कम होगी अनुकूल मौसम से खरीफ फसलों की बुवाई में हुई भारी बढ़ोतरी से खाद्यान्न की बंपर पैदावार होने की संभावना है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई 17.7 फीसदी बढ़कर कुल 747.78 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार आगामी दिनों में भी मौसम अनुकूल ही रहने की संभावना है। ऐसे में खरीफ में खाद्यान्न की रिकॉर्ड पैदावार होने का अनुमान है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आयुक्त (कृषि) डॉ. जे एस संधु ने बिजनेस भास्कर को बताया कि जून-जुलाई महीने में हुई बारिश से समय पर खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जिससे फसलों को पकाई के लिए पर्याप्त साढ़े चार से पांच महीने का समय मिलेगा, इससे प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011-12 में अनुकूल मौसम से खरीफ फसलों का रिकॉर्ड 13.12 करोड़ टन का उत्पादन हुआ था जबकि चालू खरीफ में खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2011-12 से भी ज्यादा होने का अनुमान है। तिलहन और दलहन की पैदावार में बढ़ोतरी से खाद्य तेलों और दालों के आयात पर निर्भरता में कमी आएगी। दलहनी फसलों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 73.62 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 39.52 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। दालों में अरहर की बुवाई पिछले साल के 17.84 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 29.65 लाख हैक्टेयर में, उड़द की बुवाई 10.31 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 16.98 लाख हैक्टेयर में और मूंग की बुवाई पिछले साल के 7.72 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 17.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। चालू खरीफ में तिलहनों की बुवाई 167.15 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 138.30 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई पिछले साल के 101.53 लाख हैक्टेयर के आंकड़े को पार कर 117.33 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। मूंगफली की बुवाई भी पिछले साल के 25.45 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 34.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में 196.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 184.24 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल के 117.48 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 148.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाजों में मक्का की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 71.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 57.15 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। कपास की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 105.06 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 97.24 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई में चालू खरीफ में जरूर कमी आई है। चालू खरीफ में 48.48 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 50.04 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। (Business Bhaskar.....R S Rana)

SC refuses to entertain PIL on food security ordinance

New Delhi, Jul 29. The Supreme Court today refused to entertain a PIL challenging the food security ordinance promulgated by the government three weeks ago. A bench comprising justices T S Thakur and Vikramajit Sen declined to hear the PIL and asked the petitioner to approach the high court for redressal of his grievances. The court passed the order on a petition filed by advocate M L Sharma alleging that the Centre has brought the ordinance for political purposes and the court should examine its validity. The bench, however, made it clear that the court cannot examine the ordinance on the ground that there is political dimension or objective behind it. It asked the petitioner to approach the high court to raise other grounds for challenging validity of the ordinance. The petition sought quashing of the ordinance alleging that the constitutional provision has been misused for pre-election propaganda and political gains. President Pranab Mukherjee had on July 5 signed the ordinance on food security to give the nation's two-third population the right to get 5 kgs of food grains every month at highly subsidised rates of Rs 1-3 per kg. The petition said Article 123 of the Constitution that deals with the power of the President to promulgate ordinances during the recess of Parliament has been misused as there was no "emergency" situation. "There were no emergency circumstances to issue the impugned ordinance. Hence, it does not comply with the terms of Article 123. Therefore, the impugned notification is unconstitutional and is liable to be declared unconstitutional and void," according to the PIL. It also raised several questions including whether the government can invoke Article 123 without any emergency situation. "Whether Article 123 can be allowed to be misused by the sitting political parties in government for their pre-election propaganda for political purposes?, it asked. The petition also said that million of tonnes of food grains are rotting in open as the country lacks storage facility even as people are dying of hunger. "Instead of complying with the Supreme Court's direction to release food grain for the protection of life of citizens of India, the respondent (Centre) has released a food bill via ordinance route for securing political mileage for their election mandate," the PIL, which made Principal Secretary of the PMO and the agriculture minister as parties, said.

Gold import surges in July, curbs to continue: Chidambaram

Ahmedabad, Jul 29. Restrictions on gold imports will continue following a surge in inward shipments of the metal in July after moderating in the previous month, Finance Minister P Chidambaram said today. "Imports were low in June but in July it has turned again...in July the imports have risen, therefore those measures (to contain imports) continue," Chidambaram said at a function of daily Divya Bhaskar here. Gold imports were 141 tonnes in April and rose to 162 tonnes in May. "About 302 tonnes of gold was imported in two months. If we multiply it by six, then 1,800 tonnes of gold is to be imported (in the fiscal). So where is the money to import 1,800 tonnes," he asked, justifying steps taken by the government and the Reserve Bank to curb gold imports. While the government increased customs duty on gold to 8 per cent, the Reserve Bank imposed a series of restrictions on import and financing of gold. The minister said India imported 845 tonnes of gold in 2012-13 for which the nation had to shell out USD 50 billion (about Rs 3 lakh crore) in foreign exchange. Admitting that it was difficult to persuade people not to buy gold, Chidambaram said, "I just ask them to moderate gold purchases. If they are buying 20 grams, I ask them instead to buy 10 grams."

Gold extends gain for third day on sustained buying

New Delhi, Jul 29. Gold prices extended gains for the third day by adding Rs 50 to Rs 28,475 per ten grams in the national capital today on sustained buying by stockists. However, silver fell further by Rs 230 to Rs 41,000 per kg on reduced offtake by industrial units and coin makers. Shifting of funds from weakening equity to rising bullion further fuelled the uptrend in gold, they said. Traders said sustained buying by stockists helped gold prices to extend gains for the third straight session. However, reduced offtake by industrial and coin makers kept pressure on silver prices, they said. On the domestic front, gold of 88.8 and 88.5 per cent purity rose further by Rs 50 each to Rs 28,475 and Rs 28,275 per ten grams, respectively. It had gained Rs 605 in the previous two sessions. Sovereign held steady at Rs 24,400 per piece of eight gram. On the other hand, silver ready fell further by Rs 230 to Rs 41,000 per kg and weekly-based delivery by Rs 219 to Rs 40,800 per kg. The white metal had lost Rs 120 in last trade. Silver coins held steady at Rs 80,000 for buying and Rs 81,000 for selling of 100 pieces.

दलहन उत्पादन का फिर बनेगा रिकॉर्ड

इस साल दलहन उत्पादन का नया रिकॉर्ड बन सकता है। इस खरीफ सत्र में दलहनी फसल की बुआई पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 80 फीसदी से अधिक रकबे पर हो चुकी है। जानकारों का कहना है कि यदि अगस्त के अंत तक मौसम अनुकूल रहा तो देश में वर्ष 2013-14 में भी बंपर दलहन पैदावार की आमद हो सकती है। इस बार 2012-13 के 1.845 करोड़ टन की तुलना में अधिक उत्पादन का अनुमान है। पिछले साल दलहन उत्पादन ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, क्योंकि असमान बारिश ने किसानों को अपने नुकसान की भरपाई के लिए दलहन की खेती के लिए प्रेरित किया था। इस बार ज्यादा रकबे की वजह है अच्छी बारिश। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस खरीफ सत्र में दलहन की बुआई 26 जुलाई तक लगभग 73.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 84 फीसदी अधिक है। खरीफ सत्र में लगभग 1.1 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन बोई जाती है। अधिकारियों ने कहा कि बुआई अगले 15 दिन तक चलने की उम्मीद है। दलहन के रकबे में सबसे अधिक वृद्घि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्टï्र और राजस्थान में हुई है जो कि मुख्य रूप से दलहन उत्पादक क्षेत्र हैं। अन्य फसलों में भी बुआई की रफ्तार मजबूत बनी हुई है, क्योंकि देश के ज्यादातर हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अनुकूल बना हुआ है। अलबत्ता, मध्य प्रदेश में लगातार बारिश की वजह से सोयाबीन की खड़ी फसल को कुछ नुकसान पहुंचने की खबर है। लगभग 1.963 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में 26 जुलाई तक धान की रोपाई हो चुकी है जो पिछले साल के मुकाबले 6.58 फीसदी अधिक है। पिछले शुक्रवार तक मोटे अनाज की लगभग 1.488 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 26.66 फीसदी अधिक है। तिलहन की बुआई 1.672 करोड़ हेक्टेयर में हो चुकी है जो समान अवधि के मुकाबले 21 फीसदी अधिक है। कपास का रकबा लगभग 1.05 करोड़ हेक्टेयर दर्ज किया गया है जो 8 फीसदी अधिक है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 1 जून के बाद से सामान्य से लगभग 16 फीसदी अधिक है। हालांकि आने वाले दिनों में बारिश बेहद अहम होगी क्योंकि इससे बुआई वाली ज्यादातर फसलों को जल्दी पकने में मदद मिलेगी। (BS Hindi)

इलायची उत्पादन में आएगी कमी

इडुक्की जिले में इलायची उत्पादकों की उम्मीदों की फसल को बीमारी लग गई है। बीमारी जिले के कई अन्य हिस्सों में भी फैली हुई है। इस इलाके में पिछले लगभग 50 दिनों से भारी बारिश हुई है जिससे यह बीमारी तेजी से फैल रही है और किसान और मसाला बोर्ड इस पर काबू पाने में विफल रहे हैं। इसलिए इस बार उत्पादन 18,000 टन के सामान्य दायरे से कम से कम 30 फीसदी कम रह सकता है। बीमारी की चपेट में आए कट्टïापना और उडुमबंचोला जैसे कुछ इलाकों में हालात काफी खराब हैं और उत्पादन में 40 फीसदी तक की कमी की आशंका है। फसल में इस बीमारी की वजह से ज्यादातर मामलों में अंकुर, फूलों और जड़ों को नुकसान पहुंचा है। यह नुकसान कट्टïापना इलाके में काफी अधिक है। मसाला बोर्ड के अधिकारियों ने किसानों को बोर्डऑक्स मिक्स्चर छिड़कने को कहा है। यह फफूंद को मारने वाला स्प्रे है, लेकिन यह बीमारी एक से दूसरे बागान में तेजी से फैल रही है। मौजूदा बारिश और ठंडे मौसम के कारण भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इस महीने फसल की कटाई शुरू हो गई है और कुछ बागानों में इलायची तोड़े जाने का पहला दौर पूरा हो चुका है। इस बीमारी के हमले से फसल को काफी नुकसान हुआ है। कट्टïापना के इलायची किसान रेजी नल्लानी ने कहा कि यह स्प्रे इस बीमारी की पूरी तरह से रोकथाम में सक्षम नहीं है और कई दूसरी तरह के कीटों के हमले के संकेत मिले हैं। मसाला बोर्ड भी इस स्थिति के बारे में कुछ नहीं बता पा रहा है। किसानों के अनुसार इस बीमारी और भारी बारिश की वजह से इस बार उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा। उत्पादन में कम से कम 30 फीसदी तक की कमी आने की आशंका है, क्योंकि फसल की कटाई अभी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाई है। रेजी ने कहा कि इस समय इलायची बागानों में काम करना काफी कठिन है। श्रमिक इनमें काम करने से परहेज कर रहे हैं। पिछले लगभग 25 दिनों से इस जिले में बारिश हो रही है। पिछले लगभग 50 दिनों से अच्छी धूप नहीं निकलने से बागानों में फूल नहीं खिल रहे हैं। इलायची बागानों में फूल खिलने के लिए धूप जरूरी है। इससे फसल की कटाई का अगला चरण प्रभावित हो सकता है। (BS Hindi)

27 July 2013

बेहतर बुआई से कपास कीमतों में नरमी

बेहतर मॉनसून से कपास बुआई के आंकड़े रिकॉर्ड बनाने की राह में हैं। बुआई के बेहतर आंकड़ों से वायादा बाजार में कपास की कीमतें दबाव में दिख रही हैं लेकिन निर्यात मांग अच्छी होने की उम्मीद कपास की कीमतों को मजबूती दे सकती है। पिछले एक महीने में हाजिर बाजार में कपास की कीमतें सात फीसदी बढ़ चुकी हैं हालांकि भविष्य की कीमतों का सूचक माने जाने वाले वायदा और वैश्विक बाजार में कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। बाजार जानकारों की मानी जाए तो किसानों का माल खत्म हो चुका है और नई फसल आने में लंबा समय है जिसे देखते हुए सटोरिये कीमतों को तोडऩे की जुगत में है लेकिन जल्द ही कीमतों में मजबूती का दौर शुरू होगा। कपास बुआई के बेहतर आंकड़े आने से घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में पिछले एक सप्ताह से गिरावट का रुख बना हुआ है। एमसीएक्स में कपास का भाव गिरकर 988 रुपये प्रति 20 किलोग्राम और एनसीडीईएक्स में 991 रुपये प्रति 20 किलोग्राम हो गया। हालांकि हाजिर बाजार में कीमतों में गिरावट नहीं देखने को मिली है। वायदा बाजार में एक महीने में कपास की कीमतों में करीबन पांच फीसदी की कमी आई है जबकि हाजिर बाजार में कपास करीबन 7 फीसदी मजबूती के साथ 11928 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। कपड़ा मंत्रालय से मिल रही सूचना की मानी जाए तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कपास निर्यात बढ़कर 348.4 करोड़ किलो हो चुका है जबकि पिछले साल निर्यात का आंकड़ा 219.97 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच रहा था। सिर्फ जून महीने में 142.29 करोड़ किलोग्राम कपास का निर्यात हुआ है। इसके साथ ही चालू फसल सीजन मेंं 107 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) के सौदों का रजिस्ट्रेशन भी हो चुका है। जो कपास में आने वाली तेजी की तरफ इशारा कर रहे हैं। एंजेल कमोडिटी की वेदिका नार्वेकर के मुताबिक निर्यात मांग बढ़ी है निर्यातकों ने अपने सौदों को पूरा करने के लिए अपने स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा निकाल दिया है। खत्म हुए कपास सीजन का करीब 96 फीसदी (328 लाख गांठ) बाजार में आ चुका है। यानी किसानों के पास अब माल नहीं बचा है और नई फसल के आने में समय है इसलिए आने वाला महीना कपास के लिए भारी उलट-पुलट वाला महीना साबित हो सकता है। इस समय निर्यात मांग और वैश्विक बाजार में तेजी भी मजबूत होती है तो घरेलू बाजार में भी कपास और धागा की कीमतें नई ऊंचाई की तरफ भाग सकती हैं। कपास की घरेलू मांग में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। पिछले साल मिलों में कपास की खपत 223 लाख गांठ थी जो इस बार बढ़कर 235 लाख गांठ पहुंचने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में भारी उतार चढ़ाव का दौर चल रहा है लेकिन मांग में तेजी बनी हुई है। यार्न निर्यातक रमेश शाह के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में हर दिन भारी उतार-चढ़ाव के कारण पूरा बाजार अस्थिर बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से धागा निर्यातकों को फायदा तो हुआ है लेकिन रुपये में भी अस्थिरता बाजार में थोड़ी सी चूक फायदे की जगह घाटा कर रही है। लेकिन एक बात जो सामने दिखाई दे रही है कि मांग में तेजी की वजह से कीमतों में अभी और मजबूती आएगी जिसका सीधा फायदा भारतीय धागा निर्यातकों को होगा। वर्ष 2011-12 में भारत ने 1.3 करोड़ गांठ का कपास निर्यात किया था लेकिन 2012-13 में सूखे के कारण कपास निर्यात घटकर 80-90 लाख गांठ रह गया था। (BS Hindi)

सोने के आयात पर पड़ा फं दा तो चमक गया तस्करी का धंधा

सोने पर आयात शुल्क बढ़ाते समय सरकार ने सोचा था कि इससे देश में सोने का आयात घटेगा। उसने गलत नहीं सोचा था क्योंकि मई में आयात 162 टन था और जून में केवल 31 टन रह गया। लेकिन सरकार ने यह नहीं सोचा था कि आयात शुल्क 1 से बढ़ाकर 8 फीसदी करने पर वे तस्कर भी जग जाएंगे, जो दो दशक से सोए पड़े थे। अब कानूनी रास्ते से सोना आना तो कम हो गया, लेकिन गैर कानूनी रास्तों से इसकी आवक एकाएक बढ़ गई। शायद यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विभिन्न एजेंसियों ने तस्करी से आ रहा 59.82 करोड़ रुपये का सोना पकड़ा है जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 12.86 करोड़ रुपये का तस्करी वाला सोना पकड़ा गया था यानी सोने की तस्करी में 5 गुना इजाफा हुआ है। पिछले पूरे वित्त वर्ष में कुल 99.13 करोड़ रुपये का तस्करी का सोना पकड़ा गया और राजस्व अधिकारियों को आशंका है कि चालू वित्त वर्ष के लिए यह आंकड़ा करीब 250 करोड़ रुपये हो सकता है। तस्करी के जरिये देश में लाए गए सोने की धरपकड़ बढ़ी है क्योंकि जून में की गई शुल्क बढ़ोतरी और सोने का आयात घटाने के रिजर्व बैंक के कदमों का असर आने वाली तिमाहियों में दिखेगा। नाम नहीं छापने की शर्त पर राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'पिछले वित्त वर्ष में हमने तस्करी वाला जितना सोना जब्त किया था, उसका 60 फीसदी तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही जब्त कर चुके हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो तस्करी वाले सोने की जब्ती का आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष का ढाई गुना हो सकता है।Ó सोने की तस्करी में आई तेजी पर वित्त मंत्रालय की भी नजर है। मंत्रालय इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सोने के आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी का अध्ययन कर रहा है। तस्करी रोकने की खातिर खाड़ी देशों में आने-जाने वाली उड़ानों समेत सभी हवाई अड्डïों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अधिकारी ने बताया, 'हम खुफिया जानकारी जुटाने और सोने की तस्करी रोकने पर ध्यान दे रहे हैं।Ó बढ़ते चालू खाते के घाटे के कारण सरकार अभी शुल्क बढ़ोतरी वापस नहीं ले सकती है। इस समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों ने ज्यादा अधिकारों और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अनुमानों के अनुसार अधिकारी तस्करी के रास्ते देश में आए कुल सोने का 5-10 फीसदी ही पकड़ पाए हैं। पिछले वित्त वर्ष में 871 मामलों में 99 करोड़ रुपये का सोना पकड़ा गया था जबकि वित्त वर्ष 2012 में कुल 486 मामलों में 46 करोड़ रुपये का सोना पकड़ा गया था। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने की तस्करी के 204 मामले थे जबकि चालू वित्त वर्ष में अभी यह 220 है। इस साल अब तक 50 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। (BS Hindi)

ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई 90 फीसदी तक पूरी

बेहतरी- खरीफ फसलों की बुवाई का मौजूदा रकबा 17.7 फीसदी ज्यादा दलहन का रकबा 73 लाख हैक्टेयर जबकि तिलहनों की बुवाई 167 लाख हैक्टेयर में अनुकूल मौसम से खरीफ फसलों की बुवाई में 17.7 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल बुवाई 747.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि के 635.05 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। धान को छोड़कर अन्य खरीफ फसलों की लगभग 85-90 फीसदी बुवाई हो चुकी है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ में अनुकूल मौसम से दालों की बुवाई बढ़कर 73.62 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 39.52 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। पिछले साल सूखे जैसी स्थिति बनने से कर्नाटक और महाराष्ट्र में अरहर की बुवाई घटी थी जबकि चालू सीजन में जून महीने में हुई बारिश से इन राज्यों में बुवाई बढ़ी है। अरहर की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 29.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 17.84 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मोटे अनाजों ज्वार, बाजरा और मक्का की बुवाई बढ़कर चालू खरीफ में 148.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 117.48 लाख हैक्टेयर में ही मोटे अनाजों की बुवाई हो पाई थी। बाजरा की बुवाई बढ़कर 53.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 37.10 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मक्का की बुवाई पिछले साल के 57.15 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 71.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में 17.53 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 167.15 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 138.30 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई बढ़कर 117.33 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 101.53 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में पिछले साल के 25.45 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 34.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में बढ़कर 196.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 184.24 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई हो पाई थी। कपास की बुवाई पिछले साल के 97.24 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 105.06 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। हालांकि गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में पिछले साल के 50.04 लाख हैक्टेयर से घटकर 48.48 लाख हैक्टेयर में ही हुई है। जूट की बुवाई 8.22 लाख हैक्टेयर से बढ़कर चालू खरीफ में 8.27 लाख हैक्टेयर में हुई है। (Business Bhaskar....R S Rana)

लंबी अवधि के निवेशक कैस्टर में निवेश करके कमा सकते हैं मुनाफा

कैस्टर तेल में निर्यातकों की अच्छी मांग बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2013-14 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 6 फीसदी बढ़कर 99,322 टन का हुआ है। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक पहले की तुलना में कम हो गई है। वैसे भी वायदा बाजार में कैस्टर सीड के दाम घटकर न्यूनतम स्तर पर आ गए है इसलिए नीचे भाव में निवेशकों की मांग निकलने की संभावना है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक को खरीद करके चलना चाहिए। एनसीडीएक्स पर अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में कैस्टर सीड की कीमतों में पिछले डेढ़ महीने में 12.9 फीसदी की गिरावट आई है। अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में कैस्टर सीड का भाव 15 जून को 3,716 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि शुक्रवार को इसका भाव 3,236 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। ब्रोकिंग फर्म इंडियाबुल्स कमोडिटी लिमिटेड के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (कमोडिटी) बद्दरूदीन ने बताया कि कैस्टर सीड के दाम घटकर वायदा में न्यूनतम स्तर पर आ गए है जबकि हाजिर बाजार में दाम ऊंचे बने हुए है। वैसे भी कैस्टर तेल में निर्यात मांग बढ़ रही है। ऐसे में निवेशकों को नीचे भाव में खरीद करनी चाहिए। एस सी केमिकल के मैनेजिंग डायरेक्टर कुशल राज पारिख ने बताया कि रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होने से कैस्टर तेल में निर्यातकों का मार्जिन बढ़ा है। निर्यातकों द्वारा कैस्टर तेल के निर्यात सौदे 1,200-1,225 डॉलर प्रति टन की दर से किए जा रहे हैं तथा चालू वित्त वर्ष 2013-14 के पहले दो महीनों (अप्रैल से मई) के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 6 फीसदी बढ़ा है। चालू खरीफ में कैस्टर सीड की कुल बुवाई में कमी आने की आशंका है। ऐसे में आगामी दिनों में कीमतों में तेजी आने की संभावना है। साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2013-14 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) में 99,322 टन कैस्टर तेल का निर्यात हुआ है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 92,902 टन से ज्यादा है। वर्ष 2012-13 में 4.30 लाख टन कैस्टर तेल का निर्यात हुआ था जबकि चालू वर्ष में निर्यात बढ़कर 4.50 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है। जयंत एग्रो आर्गेनिक लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक वामन भाई ने बताया कि उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक घटकर 30,000 बोरी (एक बोरी-75 किलो) की रह गई है जबकि आगामी दिनों में आवक और घटेगी इसलिए मौजूदा कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी बनने की संभावना है। उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड का भाव 3,410 रुपये और कैस्टर तेल का भाव 720-725 रुपये प्रति 10 किलो चल रहा है। आंध्रप्रदेश में कैस्टर की बुवाई पिछले साल की तुलना में घटी है जबकि गुजरात और राजस्थान में बुवाई की सही तस्वीर अगस्त महीने में पता चलेगी। कृषि मंत्रालय के बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ में कैस्टर सीड की कुल बुवाई तो बढ़ी है लेकिन आंध्रप्रदेश में कम हुई है। आंध्रप्रदेश में चालू खरी 97,000 हैक्टेयर में ही कैस्टर सीड की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.16 लाख हैक्टेयर में हुई थी। कैस्टर की कुल बुवाई चालू खरीफ में 2.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.71 लाख हैक्टेयर में हुई थी। सामान्यत::: कैस्टर सीड की बुवाई 9.38 लाख हैक्टेयर में होती है। (Business Bhaskar....R S Rana)

26 July 2013

Gold extends decline as demand from jewellers may slow

London, Jul 26. Gold today extended declines on speculation that higher prices will curb demand from jewellers. Gold dropped 0.4 per cent to USD 1,329.31 an ounce and silver retreated 0.8 per cent to USD 20.09 an ounce. Prices have climbed for three weeks as US Federal Reserve Chairman said it’s too early to decide whether to scale back on stimulus to boost the economy. Physical purchases of gold have slowed in the past two weeks as higher prices deterred demand, Standard Bank Group Ltd said.

Gold, silver rebound on fresh stockists buying, global cues

New Delhi, Jul 26. Both the precious metals, gold and silver rebounded in the national capital today on fresh buying by stockists driven by a firm global trend. While gold recovered by Rs 325 to Rs 28,145 per ten grams, silver gained Rs 125 to Rs 41,350 per kg on increased offtake by industrial units and coin makers. Traders said fresh buying by stockists in line with a firm global trend, as US economic data backed the case for sustained monetary stimulus, mainly boosted the sentiment. Gold in Singapore, which normally sets price trend on the domestic front, gained 0.6 per cent to USD 1,341.20 an ounce and silver by 0.5 per cent to USD 20.35 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity rebounded by Rs 325 each to Rs 28,145 and Rs 27,945 per ten grams, respectively. The yellow metal had lost Rs 545 in last two sessions. Sovereign followed suit and rose by Rs 200 to Rs 24,400 per piece of eight gram. In line with a general firm trend, silver ready recovered by Rs 125 to Rs 41,350 per kg and weekly-based delivery by Rs 190 to Rs 41,280 per kg. The white metal had lost Rs 895 in the previous two sessions. Silver coins also spurted by Rs 1,000 to Rs 80,000 for buying and Rs 81,000 for selling of 100 pieces.

agri commodity......cardamom...........mentha oil.......

Cardamom August MCX: Sell at 708-710 TP 690/680SL above 734 Cardamom prices are expected to fall during today’s trading session. According to trade sources, huge carry forward stocks of around 3,500 tonnes are available at the physical markets. This may pressurize prices. Daily new crop arrivals are expected to increase and support the downside in cardamom prices. However, the downside may be limited as heavy rains in Kerala might add moisture to the spice. Mentha oil July MCX: Sell at 900-902 TP 880/870 SL 915 Today mentha oil prices will trade at negative note. As per trade sources arrivals are huge at spot front. However, lacks of export cues from mentha consuming sectors prices are still holding a bearish trend. According to IMD forecast rains could scattered in some part of Uttar Pradesh including mentha growing regions also. Due to this scenario buyers might refrain from buying at spot front and this situation might lead to weigh on prices at futures market too.

mcx prices trand......gold.............copper........crude......refined soyabean oil and crude palm oil.....

Gold: Gold prices opened the week under positive tone and traded higher in early few sessions on an expectation that the U.S. Federal Reserve would maintain monetary stimulus when U.S. existing home sales and regional manufacturing index posted worse than expected numbers last week. However, gold retreated in the last couple of sessions as a jump in U.S. durable goods orders and a rise in U.S. new home sales increased prospects that Fed may scale back monetary stimulus. A survey by Bloomberg economists showed that U.S. monthly bond purchases will be reduced to $65 billion in September from existing $85 billion. ¬¬¬¬¬Price Movement in the Last week: MCX August gold prices opened the week at Rs 26,786/10 grams, traded higher and found good resistance at Rs 27,716/10 grams and currently trading at Rs 27,325/10 grams (July 26, Friday at 5.55 PM) with a gain of Rs 630/10 grams. Outlook for this week: MCX October gold prices are expected to be volatile but under a slight positive tone on a speculation whether Federal Reserve will continue its’ economic stimulus? The U.S. Gross Domestic Product (GDP) and a private employment report releases are important for direction of gold before commencement of U.S. Federal Open Market Committee policy meet on July 31. MCX October gold shall find supports at 26,785/26,415 levels and resistances at 28,120/28,350 levels. International Spot gold has supports at 1300/1268 and resistances at 1375/1400 levels. Recommendation for this week: Buy MCX October Gold between 26,785-27,020, SL 26,400 and Target- 28,120/28,300. Copper: MCX August Copper futures traded slightly lower in the last week as concerns that demand from China, the largest user, will decline as the country planned to eliminate obsolete production capacity. China’s industry ministry ordered more than 1,400 companies in 19 industries, including aluminum and copper, to cut production capacity this year. As per a survey, the plan will entail shutting down 654,400 tons of copper capacity and 260,000 tons for aluminum as part of the initial goal. According to Goldman Sachs Group Inc., the copper surplus may rise to 500,000 tons in 2015 from 257,000 tons this year, which is also supported a fall in base metals. China’s manufacturing shrank in July for the first time in 10 months said a preliminary purchasing manager’s report by Markit Economics. Price movement in the last week: MCX August Copper prices opened the week at Rs 415.50/kg, after making a high of Rs 423.35/Kg, prices fell from high and touched a low of Rs 410.35/Kg and currently trading at Rs 411/kg (July 26, Friday at 6.00 PM) with a loss of Rs 3.75/kg as compared with previous week’s close. Outlook for this week: MCX August Copper is expected to trade lower on account of slow economic growth rate in China, world largest importer and consumer. MCX August Copper shall find a supports at 405/398 levels and resistances at 422/427 levels. Recommendation for this week: Sell MCX August Copper between 420-422, SL 428, Target- 405/398. Crude: MCX August crude oil futures traded lower in the last week on account of higher U.S. oil production. According to Energy Information Administration (EIA), U.S. crude output surged to a 22-year high. U.S. oil production increased to 7.56 million barrels a day last week ended July 19, the most since December 1990. U.S. petroleum demand fell 1 percent to 18.7 million barrels a day in June from a year earlier, the lowest level for the month since 1997, the American Petroleum Institute said on July 18. Rising crude oil output in the U.S. and speculation that China’s plans to cut excess manufacturing capacity will curb fuel demand. Price movement in the last week: MCX August crude oil prices opened the week at Rs 6425/bbl, initially traded mildly higher and found strong resistance of Rs 6487/bbl. Later, prices fell sharply and touched a low of Rs 6174/bbl., currently trading at Rs 6205/bbl (July 26, Friday at 6.00 PM) with a gain of Rs 228/bbl, i.e. down by 3.55%. Outlook for this week: MCX August crude oil is expected to trade lower on the back of higher U.S. crude oil output coupled with lower demand for fuel from China as China’s plans to cut excess manufacturing capacity, world’s second largest oil consuming country. MCX August crude oil shall find a support at 6080/5970 levels and resistance 6300/6425 levels. Recommendation for this week: Sell MCX August Crude between 6280-6300, SL 6430, target- 6080/5980. Refined Soybean Oil and Crude Palm Oil: NCDEX August refined soy oil traded lower in the last week owing to bumper soybean production estimates and higher production & inventory of palm oil estimates. Lower exports figures of Malaysian palm oil in first 25 days of July also added bearish market sentiments. As per SGS (a cargo surveyor), Exports from Malaysia, the largest producer after Indonesia, fell 6 percent in the first 25 days of July from 1,128,408 tons in the same period in June. Palm Oil futures tumbled to the lowest level in more than 3 years as global supplies of the world’s most consumed cooking oil climb the most since 1999 as demand expands at the lowest pace in more than a decade. As per U.S. department of Agriculture, Palm production, accounting for 35 percent of cooking oil supply, will expand 5 percent to 58.1 million tons in 2013-2014. Crude palm oil (CPO) output is expected to increase in August due to the peak production period while a bumper soybean crop is expected for the 2013-2014 season in the United States in September. As per USDA, world stockpiles of palm are set to surge 21 percent to a record 9.5 million tons by the end of 2013-2014 as demand expands 4.4 percent, the least in 12 years. Soybean oil, a competing product, slumped to the lowest since 2010 as supplies rise to a record for a fifth year. Global production of soybean oil may total 44.03 million tons in 2013-14, up from 42.27 million tons a year earlier. Sunflower oil output may be 14.68 million tons, up from 13.58 million tons in the previous season. Total world vegetable oil consumption may rise to 158.7 million tons, up 3.1 percent from a year earlier, Oil World said. Inventories at the end of the 2013-14 season may increase 2.6 percent from a year earlier to 21.4 million tons. As per USDA’s Weekly Export Sales Report, net weekly export sales came in at 128,300 tonnes for the current marketing year and 665,200 for the next marketing year for a total of 793,500. As of July 18th, cumulative sales stand at 35.5% of the USDA forecast for the 2013/2014 marketing year versus a 5 year average of 24.5%. Sales of 435,000 tonnes are needed each week to reach the USDA forecast. Net oil sales came in at 3,300 tonnes for the current marketing year and cumulative sales stand at 90% of the USDA forecast for the 2012/2013 marketing year versus a 5 year average of 85%. Sales of 9,000 tonnes are needed each week to reach the USDA forecast. Outlook for this week: NCDEX August refined soybean oil is expected to trade lower on account of weak overseas market as higher global production estimates of oilseeds and palm oil. NCDEX August refined soybean oil shall find a support at 628/610 levels and resistance 660/667 levels. MCX August crude palm oil (CPO) shall find a support at 475/467 levels and resistance 495/503 levels. Recommendation for this week: Sell NCDEX August refined soybean oil between 656-660, SL 668, target- 628/612. Sell MCX August crude palm oil (CPO) between 491-495, SL 505, target- 475/468.

25 July 2013

कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध के विरोध में शरद पवार

महंगाई रोकने के लिए भारतीय वाणिज्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया है। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में कृषि उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक देश बन रहा है, ऐसे यह प्रतिबंध इस राह में बाधक बनेगा। आकड़ों के मुताबिक इस साल भारत का कृषि निर्यात 23.3 खरब रुपए पहुंचा। जबकि पिछले साल यह सिर्फ 18.6 खरब था। पवार ने कहा कि कृषि निर्यात में बढ़ोतरी बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में भारत का क्रेडेट मज़बूत करना चाहिए। इसलिए भारत की आयात-निर्यात नीति स्थिर होनी चाहिए, ऐसे में निर्यात पर प्रतिबंध लगाना उचित कदम नहीं होगा।

गन्ने ने दिया शानदार प्रतिफल

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा कराए गए अध्ययन के अनुसार 2008-09 से 2010-11 के बीच सभी किसानों के लिए फसलों में गन्ने ने प्रति हेक्टेयर सर्वाधिक सकल प्रतिफल दिया है। इसके बाद कपास और गेहूं से किसानों को अच्छा मुनाफा मिला। इस अध्ययन में सिर्फ उन्हीं फसलों को शामिल किया गया जिनके लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है और इसमें फलों, सब्जियों, पोल्ट्री आदि को अलग रखा गया। इस अध्ययन को सीएसीपी के अशोक विशनदास और बी लुक्का द्वारा किया गया। इसमें कहा गया है कि किसानों के लिए गन्ने ने प्रति हेक्टेयर रकबे के लिए 82,800 रुपये का औसतन प्रतिफल दिया जो सभी फसलों में सर्वाधिक है। इस अवधि (2008-09 से 2010-11) के दौरान सबसे खराब प्रदर्शन सूरजमुखी का रहा जिसने किसानों के लिए उत्पादन की लागत से भी कम प्रतिफल दिया। सूरजमुखी ने जो प्रतिफल दिया, वह उसकी उत्पादन लागत की तुलना में लगभग 40 फीसदी कम है। मात्रा के संदर्भ में कपास किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर औसतन प्रतिफल 2008-09 से 2010-11 के बीच लगभग 29,100 रुपये प्रति हेक्टेयर रहा जबकि गेहूं के लिए यह 24,300 रुपये प्रति हेक्टेयर रहा। सीएसीपी ने कहा है, 'पिछले दशक में भी विश्लेषण में शामिल 22 फसलों में से 8 फसलों ने 100 प्रतिशत या इससे अधिक सकल मुनाफा दिया जबकि अन्य 10 फसलें 50 से 100 प्रतिशत का मुनाफा और सिर्फ तीन फसलें 50 प्रतिशत से कम का मुनाफा दे सकीं।Ó इस अवधि में सबसे खराब प्रदर्शन सूरजमुखी का रहा। विश्लेषणों में यह भी पता चला है कि राज्यवार  हरियाणा, केरल, पंजाब और उत्तराखंड ने किसानों के लिए सर्वाधिक मुनाफा दिया जो 2008-09 से 2010-11 के दौरान सभी फैसलों के लिए 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर से अधिक रहा जबकि आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश ने भी किसानों के लिए राष्टï्रीय औसत की तुलना में अधिक मुनाफा दिया। खराब स्थिति झारखंड, असम और छत्तीसगढ़ में देखी गई जहां उत्पादन की अधिक लागत दर्ज की गई। अध्ययन में सिर्फ उन्हीं फसलों को शामिल किया गया जिनके लिए एमएसपी घोषित किया गया है और पूरे कृषि क्षेत्र को इसके दायरे में नहीं लाया गया। (BS Hindi)

प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं पवार

मंत्री का तर्क - निर्यात पर प्रतिबंध से सप्लायर के रूप में देश की छवि बिगड़ेगी प्याज के आंसू प्याज के मूल्य में भारी बढ़ोतरी होने से उपभोक्ताओं की मुश्किल महाराष्ट्र में भारी बारिश से प्याज की आपूर्ति प्रभावित हुई अप्रैल-जून के दौरान 5.11 लाख टन प्याज का निर्यात राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात से हो रही सप्लाई भारी बारिश से सप्लाई में दिक्कत लेकिन जल्दी ही भाव गिरने की उम्मीद प्याज के मूल्य में भारी बढ़ोतरी होने के बावजूद केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि वह प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से कृषि उपजों के सप्लायर के रूप में भारत की छवि प्रभावित होगी। पवार ने बुधवार को यहां सीसीआई द्वारा आयोजित इंडियन डेयरी समिट-2013 के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में हुई भारी बारिश से प्याज की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है। लेकिन यह मूल्य वृद्धि अस्थाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही प्याज की आपूर्ति सुगम हो जाएगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी। उन्होंने बताया कि उत्पादक राज्यों में मौसम खराब होने से प्याज की फसल के साथ ही आपूर्ति भी प्रभावित हुई है लेकिन जल्दी ही आपूर्ति बढ़ जाएगी, जिससे कीमतें कम होंगी। दिल्ली में प्याज की कीमतें बढ़कर 35 से 40 रुपये प्रति किलो हो गई हैं जबकि उत्पादक राज्यों में इसके दाम बढ़कर 20 से 25 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। पवार ने कहा कि प्याज या किसी अन्य कृषि उपज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है क्योंकि भारत विश्व बाजार में कृषि उपजों के प्रमुख सप्लायरों के रूप में स्थापित हो चुका है। अगर निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो भारत की यह छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि देश का कृषि निर्यात वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान बढ़कर 2.33 लाख करोड़ रुपये का हो गया है जबकि वित्त वर्ष 2011-12 में केवल 1.86 लाख करोड़ रुपये का कृषि निर्यात हुआ था। सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान देश से 776.47 करोड़ रुपये का 5.11 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 5.17 लाख टन से थोड़ा कम है। इस समय राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से प्याज की आवक हो रही है। प्याज की नई फसल की आवक सितंबर-अक्टूबर महीने में बनेगी। सूत्रों के अनुसार उपभोक्ता मामलात और वाणिज्य मंत्रालय प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे मूल्य में कमी हो और उपभोक्ताओं को राहत मिले। उपभोक्ता महंगाई की मार से पहले ही परेशान हैं। (Business Bhaskar)

Gold, silver tumble on stockists selling, weak global cues

New Delhi, Jul 25. Both the precious metals, gold and silver prices, tumbled in the national capital today on heavy sell-off by stockists in tandem with a sharp fall in global markets. While gold plunged by Rs 510 to Rs 27,820 per 10 grams, silver lost Rs 755 to Rs 41,225 per kg on poor offtake by jewellers and indutrial units. Traders said the sentiment dampened following a steep fall in gold prices in overseas markets on signs of economic recovery as sales of new US homes in June rose to a five-year high, mainly kept pressure on the precious metals. Gold in New York, which normally sets the price trend on the domestic front, fell by 1.1 per cent to USD 1,320.30 an ounce, the biggest drop since July 5 and silver 1.2 per cent to USD 20.02 an ounce last night. In addition, sluggish demand at prevailing higher levels further influenced the trading sentiment. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity tumbled by Rs 510 each to Rs 27,820 and Rs 27,620 per 10 grams, respectively. Sovereigns followed suit and lost Rs 100 at Rs 24,200 per piece of eight grams. In line with a weak general trend, silver ready dropped by Rs 755 to Rs 41,225 per kg and weekly-based delivery by Rs 815 to Rs 41,090 per kg, respectively. Silver coins also plunged by Rs 1,000 to Rs 79,000 for buying and Rs 80,000 for selling of 100 pieces.

HP to launch food security program from August 20: minister

Dharamsala, Jul 25. Himachal Pradesh is all set to launch the food security program from August 20 coinciding with the birthday of former Prime Minister Rajiv Gandhi. "The location from where CM Virbhadra Singh will start the programme is yet to be decided," said G S Bali, Food Minister of Himachal in Dharamsala today. Around 32 lakh persons of the state will be benefited by the central government scheme, Bali said adding, beneficiaries will get wheat at Re 1 per kg and rice at Rs 3 per kg. "According to central guidelines a maximum of 75 per cent rural and 50 per cent urban residents can come under this programme," the minister said, stressing that the state government's programme to provide subsidiary food of three cereals, oil and salt for others will continue. "As soon as sugar is received from Centre for distribution through the PDS network, it will be distributed across the state along with pending quota," he added.

Gold swings after declining the most in three weeks

London, Jul 25. Gold today swung between gains and losses after the biggest drop in almost three weeks as investors weighed the prospects for reduced US stimulus. Gold fell 0.2 per cent to USD 1,319.80 an ounce, after rising 0.2 per cent and falling 0.5 per cent. Prices slid 1.7 per cent yesterday, the most since July 5. Silver fell 0.5 per cent to USD 20.07 an ounce. Gold slumped 21 per cent this year, set to end a 12-year bull run, as the dollar index rose 4.5 per cent amid speculation the US Federal Reserve may taper its bond-buying programme as early as this year. Holdings in the SPDR Gold Trust, the biggest exchange-traded product backed by the metal, were unchanged at 929.76 tonnes, ending a six-day drop

Ration dealers announce protest over Food Security Bill

Thiruvananthapuram, Jul 25. Claiming that the proposed Food Security scheme in its present form would deny food grains to around 40 crore people, All India Ration Dealers Association today announced a series of protests to press its demand for framing proper criteria for identifying the beneficiaries. The association would hold a hunger-strike in New Delhi on October 2, its leaders told reporters here. The forum would also observe 'black day' co-ordinating five lakh 'nyaya vila (fair value)' shops across the country on August 20 in support of its demand, the association general secretary Babychan Mukkadan said. "The government should not implement the law without framing proper criteria for finding out the deserved beneficiaries or preparing a list of them. To press the demand, we are planning a series of protests at the state and national level," he said. Otherwise, ration food grains would be denied to half of the deserved families in urban areas and 25 per cent of rural families, he claimed. The association members would also hold hunger strike in front of the state Secretariat here on September 23, he said.

24 July 2013

बंदिशों के बाद पड़ोसी देशों से खुले सोने की तस्करी के रास्ते!

सिंगापुर से हवाई सफर करते हुए शुक्रवार को ढाका लौटे मिजानुर रहमान को जब पुलिस ने शाह जलाल हवाई अड्डïे पर रोका तो उसके पास 400 ग्राम सोना और दूसरा सामान मिला। इसकी कीमत करीब 70 लाख टका (लगभग 53.62 लाख रुपये) थी। इससे पहले 6 जुलाई को बांग्लादेशी सीमा शुल्क अधिकारियों को विमान बांग्लादेश एयरलाइंस के एक विमान में शौचालय से 25.3 किलोग्राम सोने की छड़ें मिली थीं। इनकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये आंकी गई थी। नेपाल पुलिस ने भी पिछले हफ्ते चीन से तस्करी के जरिये लाए जा रहे 35 किलो सोने के बिस्कुट पकड़े थे। यह बरामदगी काठमांडू से करीब 120 किलोमीटर उत्तर में स्थित तातोपानी में की गई थी। यह नेपाल और चीन के बीच व्यापार का प्रमुख केंद्र है। माना जा रहा है कि यह सोना भारत जा रहा था क्योंकि कारोबारियों के मुताबिक नेपाल और बांग्लादेश में सोने की मांग भारत के मुकाबले न के बराबर है। इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता क्योंकि जैसे-जैसे भारत सरकार सोने के आयात पर सख्ती कर रही है, वैसे-वैसे पड़ोसी देशों में सोने की तस्करी बढ़ रही है। वहां के कारोबारी तस्करी बढऩे की बात कबूल रहे हैं और अपने देश की सरकारों से इस पर अंकुश लगाने के लिए भी कह रहे हैं। नैशनल जेम्स ऐंड ज्वेलरी एसोसिएशन के महासचिव सुमंत मान ताम्रकर तातोपानी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि चीन से आने वाला यह सोना भारत भेजा जा सकता है क्योंकि इस पर सीमा शुल्क विभाग की नजर नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि आम रास्तों और तरीकों से आने वाले सोने की तस्करी शायद नहीं होती क्योंकि शुल्क में इजाफे से अब उसका कोई फायदा नहीं रह गया है। नेपाल सरकार ने भी कुछ समय पहले सोने पर सीमा शुल्क बढ़ा चुकी है। ताम्रकर ने बताया, 'बजट के बाद यहां सोने का भाव 3,000 नेपाली रुपये से बढ़कर 3,600 नेपाली रुपये प्रति ग्राम हो गय है। इतनी ऊंची कीमत पर तस्करी नहीं होगी।Ó नेपाल गोल्ड ऐंड सिल्वर डीलर्स एसोसिएशन (नेगोसिडा) के अध्यक्ष मणि रत्न शाक्य ने टेलीफोन पर बताया, 'हम सोने पर कर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि 10 ग्राम सोने की कीमत भारत में नेपाल के मुकाबले 1,200 नेपाली रुपये ज्यादा हो जाए। अभी इनमें 750 नेपाली रुपये का ही फर्क है और मुद्रा में उतार-चढ़ाव होते ही तस्करी शुरू हो जाती है।Ó शाक्य ने बताया कि नेपाल का राष्टï्रीय बैंक रोजाना 15 किलो सोना जारी करता है। उन्होंने कहा कि त्योहारी दिनों में इसकी मांग 40 किलो रोजाना तक पहुंच जाती है। इसीलिए इस सीमा को बढ़ाकर 30 किलो किए जाने की मांग चल रही है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के लिए आंकड़े इकठ्ठïा करने वाली थॉमसन रॉयटर्स जीएफएमएस के मुताबिक पिछले साल साल 102 टन सोना अनधिकृत रास्तों से आया था। कुल स्वर्ण आयात का यह 10 फीसदी था। उसके मुताबिक इस साल 40 फीसदी इजाफे के साथ यह आंकड़ा 140 टन तक पहुंच सकता है। (BS Hindi)

Click here दालों का रिकॉर्ड उत्पादन पर खाद्यान्न की पैदावार में कमी

पिछले साल सूखे के बावजूद दलहन उत्पादन 8 फीसदी बढ़कर 184.5 लाख टन बीते फसल वर्ष 2012-13 (जुलाई-जून) के दौरान देश में दालों का रिकॉर्ड 184.5 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। हालांकि देश के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बनने के कारण खाद्यान्न के कुल उत्पादन में 1.5 फीसदी की कमी आकर 25.53 करोड़ टन का उत्पादन होने का अनुमान है। गेहूं का उत्पादन भी 2.5 फीसदी घटकर 924.6 लाख टन होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2012-13 में देश में दालों का रिकॉर्ड उत्पादन 184.5 लाख टन हुआ, जो वर्ष 2011-12 के 170.9 लाख टन से करीब 8 फीसदी ज्यादा है। दालों के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी से आयात पर निर्भरता में कमी आने के आसार हैं। देश में दालों की सालाना खपत 200 लाख टन से ज्यादा होती है इसलिए हर साल हमें करीब 30 से 35 लाख टन दालों का आयात म्यांमार, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से करना पड़ता है। दलहन की प्रमुख फसलों चना, अरहर और उड़द का क्रमश: 88.8 लाख टन, 30.7 लाख और 19 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है। चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2012-13 में खाद्यान्न उत्पादन 25.53 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2011-12 में 25.92 करोड़ टन का बंपर उत्पादन हुआ था। इस साल गेहूं, चावल और कपास का उत्पादन कम होने का अनुमान है लेकिन दलहन का रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना है। वर्ष 2011-12 में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन 948.8 लाख टन हुआ था जबकि वर्ष 2012-13 के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार गेहूं उत्पादन घटकर 924.6 लाख टन ही रह गया। इसी तरह से चावल का उत्पादन वर्ष 2011-12 के अंतिम अनुमान 10.53 करोड़ टन से कम होकर 10.44 करोड़ टन रहा। कपास का उत्पादन वर्ष 2012-13 में पिछले साल के 352 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) से कम होकर 340 लाख गांठ होने का अनुमान है। वर्ष 2012-13 में चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार तिलहनों का उत्पादन 297.99 लाख टन से बढ़कर 310.06 लाख टन हो गया। मोटे अनाजों का उत्पादन पिछले साल के 420.1 लाख टन से घटकर 400.6 लाख टन होने का अनुमान है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान के कई जिलों में वर्ष 2012-13 फसल सीजन में सूखे जैसे हालात बनने से मोटे अनाजों के उत्पादन में कमी आई है। दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार गन्ने का उत्पादन पिछले साल के 3,610.37 लाख टन से घटकर वर्ष 2012-13 में 3,389.63 लाख टन रह गया। जूट का उत्पादन इस दौरान पिछले साल के 113.99 लाख गांठ (एक गांठ-180 किलो) से घटकर 112.96 लाख गांठ होने का अनुमान है। (Business Bhaskar...R S Rana)

प्याज निकाल रहा आंसू, पवार को विश्व बाजार में छवि की चिंता

नई दिल्ली। देश में प्याज की बढ़ी कीमतें जहां लोगों को रुला रही हैं वहीं कृषि मंत्री शरद पवार इसके निर्यात पर प्रतिबंध के खिलाफ है। हाल ही में सरकार ने प्याज की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका को देखते हुए इसकी घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के साथ निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए थे। शरद पवार ने कहा कि वे प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। इस तरह के कदम वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की छवि को प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्याज की आपूर्ति में कमी एक अस्थाई स्थिति है, जोकि इसके उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र आदि में भारी बारिश की वजह से आपूर्ति बाधित होने से उत्पन्न हुई है। किसी भी तरह की कृषि वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध उचित नहीं होगा.. वैश्विक बाजार में भारत प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश के रूप में स्थापित हो चुका है। अगर हम निर्यात पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो इससे छवि प्रभावित होगी। इसलिए हम प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध के खिलाफ है। पवार यहां नई दिल्ली में डेयरी क्षेत्र के लिए आयोजित सीआइआइ के एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि पिछले एक वर्ष में प्रमुख मेट्रो शहरों के खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतें दोगुने से भी अधिक होकर 36 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं। इस स्थिति से उन ग्राहकों की स्थिति और दूभर हो गई है जो पहले से ही महंगाई की मार से त्रस्त हैं। देश में 22 आवश्यक खाद्य जिंसों के कीमतों की निगरानी करने वाले उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समय में राष्ट्रीय राजधानी के खुदरा बाजारों में प्याज की बिक्री 36 रुपये प्रति किलो के हिसाब से की जा रही है तथा मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में कीमत 32 रुपये प्रति किग्रा है। वहीं, कुछ बाजारों में प्याज 40 रुपये प्रति किलो की अधिक दर से बेची जा रहा है जो स्थान और प्याज की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। मंत्रालय के आंकड़े दर्शाते हैं कि इन शहरों में एक वर्ष पहले प्याज की कीमत 14 से 15 रुपये प्रति किलो के दायरे में थी। प्याज की कीमत में वृद्धि ने अधिकांश ग्राहकों के बजट को गड़बड़ा दिया है जो ग्राहक पहले से ही महंगे टमाटर, दलहनों और अनाजों की कीमत में त्रस्त हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 776.47 करोड़ रुपये मूल्य के 5,11,616 टन प्याज का निर्यात किया गया है, जो पूर्व वर्ष की समान अवधि में 5,17,274 टन रहा था। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है, क्योंकि सरकार के पास निर्यात को रोकने का कोई और विकल्प नहीं है। इससे पूर्व वह कीमत वृद्धि की स्थिति में न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को बढ़ाया करती थी। हालांकि एमईपी को पिछले वर्ष से समाप्त कर दिया गया है। हालांकि इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय जबकि सरकार चालू खाते के घाटे को कम करने के लिए निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रही है, प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना एक मुश्किल फैसला होगा। देश में सबसे ज्यादा प्याज महाराष्ट्र में होता है। लेकिन, यहां फसल की स्थिति अच्छी नहीं है। नासिक के लासलगांव के स्पॉट मार्केट में इस बार 1000 टन प्याज की आवक हुई है। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 1800 टन था, यानी 800 टन की कमी। भारत आमतौर पर हर साल अपने कुल उत्पादन के 10 फीसद भाग का निर्यात करता है। इसमें से ज्यादातर निर्यात बांग्लादेश, मलेशिया और सिंगापुर को किया जाता है। इस कारोबारी साल के पहले तिमाही में ही 5.25 लाख प्याज निर्यात हो चुका है। कम पैदावार और ज्यादा निर्यात से स्थिति और बिगड़ गई है। मौजूदा समय में प्याज की उत्तरी किस्म की ताजा आवक समाप्त हो गई है और मांग को गोदामों में रखे पुराने स्टॉक से पूरा किया जा रहा है। दिल्ली में प्याज के दाम बारिश के चलते दक्षिणी राज्यों से प्याज की नई फसल न आने से राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया हुआ है। खुले बाजारों में प्याज की कीमत 40-45 रुपये किलो के बीच पहुंच गई है। एक सप्ताह पूर्व तक खुले बाजार में यह 25-30 रुपये तक मिल रहा था। ऐसे में प्याज की कीमतों में 10-15 रुपये तक उछाल आने से लोग परेशान हैं। जून के शुरू में प्याज की कीमत थोक में प्रति किलो 13.50 रुपये रही। माह के अंत तक थोक में प्रति किलो 19 रुपये पहुंची। जुलाई की शुरुआत में थोक में प्याज 19.50 रुपये प्रति किलो तक बिका। इस समय राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र से प्याज आ रही है। मंडी में सितंबर से प्याज की नई फसलों की आवक शुरू होगी। इसके बाद कीमतों के नीचे जाने की संभावना है। (Dainik Jagran)

प्याज समेत कृषि उत्पादों का निर्यात जारी रहेगा: पवार

प्याज की कीमतों में उछाल के बीच कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को कहा कि वह इसके निर्यात के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे विश्व बाजार में कृषि उत्पादों के निर्यातक बाजार में भारत की साख गिरेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि प्याज की तेजी थोड़े अस्थायी है। महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। पवार डेयरी क्षेत्र पर सीआईआई द्वारा आयोजित एक समारोह के दौरान संवाददाताओं से अलग से कहा कि किसी कृषि उत्पाद के निर्यात पर प्रतिबंध उचित नहीं है। भारत ने अब वैश्विक बाजार में कृषि उत्पादों के एक प्रमुख निर्यातक के तौर पर अपने-आपको स्थापित कर लिया है। यदि हम निर्यात पर प्रतिबंध लगाते हैं तो यह छवि प्रभावित होगी। इसलिए हम प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध कि खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि देश का कृषि निर्यात वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान बढ़कर 2.33 लाख करोड़ रुपए हो गया जो इससे पिछले साल 1.86 लाख करोड़ रुपए था। सूत्रों के मुताबिक वाणिज्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय कुछ समय के लिए प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध पर विचार कर रहे हैं, ताकि देश में प्याज की कीमत कम की जा सके और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान किया जा सके जो पहले ही मंहगाई के बोझ तले दबे हैं। यह पूछने पर कि प्याज की कीमत कब कम होगी, पवार ने कहा यह तेजी थोड़े समय की है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से आपूर्ति प्रभावित हुई है। बारिश से फसल, परिवहन और लाजिस्टिक्स प्रभावित हुआ है। प्याज की खुदरा कीमत दिल्ली और देश के मुख्य भागों में बढ़कर 35-40 रपए प्रति किलो हो गई है, जबकि एशिया के सबसे बड़े प्याज बाजार महाराष्ट्र के लासलगांव में प्याज का थोकमूल्य 25 रपए प्रति किलो हो गया है। प्याज की कीमत पर नयी फसल के आने से पहले अक्टूबर तक दबाव रहने की आंशका है। आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक भारत ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 776.47 करोड़ रुपए मूल्य का 5,11,616 टन प्याज का निर्यात किया था। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 5,17,274 टन था। हालांकि इस साल उत्पादन करीब 1.5-1.6 करोड़ टन रहने की उम्मीद है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में फसल कम होने के कारण महाराष्ट्र पर दबाव पड़ा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों प्याज समेत सब्जियों की आसमान छूती कीमतों को लेकर उपभोक्ता परेशान रहे हैं। प्याज की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुये दिल्ली सरकार ने भी जमाखोरों के खिलाफ छापा मारने का फैसला किया था और खुदरा विक्रेताओं से कहा था कि सब्जियों को उचित दर पर बेचे। दिल्ली सरकार ने कहा था कि शहर में प्याज की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है जबकि खुदरा बाजार में कीमतें बढ़कर 40 रुपये प्रतिकिलो हो गई हैं जो एक महीने पहले 20 रुपये प्रतिकिलो थी। व्यापारियों ने कहा था कि महाराष्ट्र में कम आपूर्ति के कारण थोक बिक्री बाजार में कीमतें पिछले ढाई साल में सबसे अधिक हो गई हैं, इसी वजह से यहां भी कीमतें बढ़ रही हैं। इससे पहले उत्तराखंड में त्रासदी, हिमाचल में भारी वर्षा और यमुना नदी में आई बाढ़ से टमाटर की फसल को हुए भारी नुकसान की वजह से इसके दाम खुले बाजार में भड़क कर 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। प्याज भी पिछले एक पखवाडे के दौरान सुर्ख होकर 50 प्रतिशत तक महंगी हो गई थी। (Hindi Hindustan)

Organised sector share in milk biz should rise to 50pc: Pawar

New Delhi, Jul 24. To ensure sufficient supply of milk at affordable rates, Agriculture Minister Sharad Pawar today said there is a need to increase the share of organised sector in milk business to 50 per cent by the end of the current (12th) Five Year Plan in March, 2017. Despite severe drought in some states like Maharashtra this year, milk production has not reduced, thereby providing good supplementary income to farmers and sufficient supply of milk in the market, he said. "India, with 128 million tonnes of production, now ranks first among milk producing nations. ...we need to target that by the end of this Five Year Plan period, at least 50 per cent of milk in the country is handled by organised sector," Pawar said addressing a CII event here on dairy sector. At present, about 30 per cent of milk is marketed by the organised sector, he said. Stating that sustainable development of India's dairy sector will be in true spirit of 'inclusive growth', Pawar called upon both private and cooperative sectors to invest in especially in improved infrastructure for milk collection, testing, processing and product development and establishing market for diversified products. Dairy contributes close to a third of the gross income of rural households and in case of those without land, nearly half of their gross income, he added. While noting that the private sector has an important role in enhancing sustainability of dairy sector, Pawar pointed out that the private companies in most cases adopts a strategy not conducive to farmers. During flush season, the private sector reduces procurement of milk and procurement prices, sometimes to a level which is uneconomical to farmers, he said and suggested them to maintain a consistent strategy that would benefit both farmers and consumers. He also suggested the private sector to establish a strong backward linkage with farmers by providing extension and marketing services to milk producers. Besides ensuring remunerative price to farmers, the Minister said the dairy industry needs to ensure both availability and affordability of milk and its products to consumers. The government has launched the National Dairy Plan Phase-I with a total investment of more than Rs 2,200 crore for 12th Five Year Plan (2012-2017) to meet the projected demand of 150 million tonnes of milk. On fodder supply to livestock, Pawar said the shortage in the country is estimated to be 36 per cent and the government has taken initiatives to improve the supply.

Pawar not in favour of onion export ban

New Delhi, Jul 24. Amid rising onion prices hurting consumers, Agriculture Minister Sharad Pawar today said he was not in favour of a ban on onion exports, saying such a move will hit India's image as a global supplier of farm produce. The Minister said the rise in onion prices is a "temporary situation" as heavy rains in major producing states like Maharashtra have affected supplies. "It is not fair to ban export of any agricultural commodities. ...India has now established its position as a major supplier of agricultural items in the global market. If we ban exports, this image will be affected. So, we are against export ban on onion," Pawar told reporters on the sidelines of a CII event on dairy sector. The country's agricultural exports have increased to Rs 2.33 lakh crore during the 2012-13 fiscal, as against Rs 1.86 lakh crore in the previous year, he said. According to sources, both Consumer Affairs and Commerce ministries are mulling over banning onion exports for short term to bring down its domestic prices and give relief to consumers, who are already burdened with overall price rise. Asked when onion prices are expected to cool down, Pawar said, "It is a temporary situation. Heavy rains in key producing states has affected supplies. Rains has affected crops as well as transport and logistics." The retail price of onion has risen to Rs 35-40 per kg in Delhi and most parts of the country, while the wholesale price has increased to Rs 25 per kg at Lasalgoan in Maharashtra, Asia's biggest onion market. Onion prices are likely to be under pressure till October when the new crop is expected to hit the market. According to official data, India has exported 5,11,616 tonnes of onion amounting Rs 776.47 crore in first quarter of this fiscal against 5,17,274 tonnes in the year-ago period. Although production is expected to be normal at around 15-16 million tonnes this year, lower crop in states like Tamil Nadu has put pressure on Maharashtra.

22 July 2013

India produces record pulses in 2012-13;foodgrains output down

New Delhi, Jul 22 The country has achieved a record pulses production of 18.45 million tonnes (MT) in the 2012-13 crop year ended June, while foodgrain output fell by 1.5 per cent to 255.36 MT due to drought in some states last year. The Agriculture Ministry today released the fourth advance estimates of foodgrain production for 2012-13. Pulses output has been revised upward to record 18.45 MT in 2012-13 as compared with 18 MT in the third estimates released in May. Pulses output stood at 17.09 MT in 2011-12. The record pulses production augurs well for the country which is depended on imports to meet the shortfall of around 3-4 MT. Higher supply will reduce imports and also prices. Higher support price prompted farmers to grow pulses. "As per the latest estimates, India has produced 255.36 MT of foodgrains during the 2012-13," an official statement said. The foodgrains output is same as it was in the third estimate, but it is lower than the record 259.29 MT achieved in the 2011-12 crop year (July-June). In foodgrains category, rice production has been revised upward to 104.4 MT from 104.22 MT in the third estimates. However, rice output is lower at 105.3 MT compared with 2011-12. Coarse cereals production estimates has also been revised upward at 40.06 MT in 2012-13 from 39.52 MT in the third estimate, but it is still lower than the previous year's 42.01 MT. However, wheat output has been revised downward to 92.46 MT from 93.62 MT in the third estimate. Production stood at record 94.88 MT in 2011-12. Foodgrains output in 2012-13 is lower than previous year due to poor monsoon in Maharasthra, Karnataka and Rajasthan. However, the production is expected to rebound this year as the country is currently receiving good monsoon and sowing area has exceeded last year's level so far. According to the latest estimate, oilseeds production is pegged at 31 MT in 2012-13, slightly higher than 29.79 MT achieved in the previous year. Among oilseeds, groundnut output fell substantially to 4.74 MT from 6.96 MT last year. A same trend has been seen in sesamum, negerseed and linseed. However, soyabean, mustardseed and sunflower production is estimated to have risen from the previous year's level at 14.67 MT, 7.82 MT and 5,80,000 tonnes, respectively. In 2011-12, the country had produced 12.21 MT of soyabean, 6.6 MT of mustardseed and 5,17,000 tonnes of sunflower. Among cash crops, cotton production is estimated at 34 million bales in 2012-13, lower than the record 35.2 million bales in the previous year. One bale has 170 kg of cotton. Similarly, sugarcane production is estimated lower at 338.9 MT in 2012-13 as against 361 MT last year, mainly due to drought in growing states like Maharashtra. Whereas jute and mesta output is estimated at 11.29 bales as against 11.39 bales in the previous year.

Industry seeks CTT exemption on veg oils

New Delhi, Jul 22 Vegetable oil industry body SEA has sought that the government keep processed agri-items, especially soybean oil, palm oil and castor oil, out of the ambit of commodity transaction tax (CTT). Effective July 1, the government has notified CTT of 0.01 per cent to be levied on all derivative contracts of non- agricultural commodities and processed food items transacted through recognised commodity exchanges. The government, however, exempted 23 specified agri- commodities from CTT. These include cotton seed oilcake, copra, mustard seed, soybean and soymeal. "Unfortunately, certain agri commodities like soybean oil, RBD palmolein, castor oil and cotton seed are missed out from the exemption," Mumbai-based Solvent Extractors Association of India said in a letter to its members. SEA said it has strongly represented to the Department of Consumer Affairs as well as the Forward Markets Commission (FMC) to re-look at the list of exempted agri-commodities. The industry body said that CTT would further add to the tax burden and discourage value chain participants from hedging their price risks on the commodity bourses. It would expose them to uncertainties arising from demand-supply situation in domestic and global market. The processors already pay 5 per cent value added tax (VAT) on refined oil. Also, there is state defined mandi tax applicable on purchase of soybeans and other oilseeds across India, it added. To boost export of edible oil in consumer packs, SEA has suggested the government to either do away with minimum export price (MEP) for edible oil in consumer packs or lower the price to USD 1100-1200 per tonne from the existing USD 1500 per tonne. It also sought bulk export of all edible oils, at least rice bran oil on a trail basis as this will help paddy growers to realise better value for byproducts. On oilseeds sowing in the ongoing 2013-14 crop year, SEA said area under various oilseeds is expected to be higher by 5-7 per cent as compared to last year as major growing states have received good rains so far. "If rain continues at intervals during August and September, India may harvest a record oilseeds crop this year," it added.

Gold, silver zoom on strong global cues

New Delhi, Jul 22. Gold prices surged by Rs 390 to Rs 27,680 per 10 grams in the national capital today on brisk buying by stockists, taking strong cues from global markets. In line with the general firming trend, silver shot up by Rs 800 to Rs 41,325 per kg on increased offtake by jewellers and industrial units. Traders said sentiment bolstered after gold jumped to a one-month high in overseas markets as expectations the US Federal Reserve will sustain stimulus hurt the dollar, and raised demand for precious metals as an alternate investment. Gold in Singapore climbed 2.1 per cent to USD 1,323.23 an ounce, the highest level since June 20 and silver by 2.9 per cent to USD 20.08 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity zoomed up by Rs 390 each to Rs 27,680 and Rs 27,480 per 10 grams, respectively. Sovereigns followed suit and rose by Rs 50 to Rs 24,300 per piece of eight grams. In a similar fashion, silver ready rallied by Rs 800 to Rs 41,325 per kg and weekly-based delivery by Rs 840 to Rs 41,200 per kg, respectively. However, silver coins held steady at Rs 79,000 for buying and Rs 80,000 for selling of 100 pieces.

खाद्य सुरक्षा कानून से सार्वजनिक वित्त पर असर पड़ेगा

नयी दिल्ली : उद्योग मंडल फिक्की ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा कानून से सार्वजनिक वित्त पर दबाव बनेगा तथा राजकोषीय घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 5 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा. फिक्की ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘इससे राजकोषीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और इसकी मजबूती का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा. इसके चलते राजकोषीय घाटा 2013-14 में बढ़कर जीडीपी के 5 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा, जो बजटीय अनुमान 4.8 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है.’’ रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये खाद्यान आवंटन के मामले में कई समस्याएं हैं और आपूर्ति प्रणाली में दक्षता सुनिश्चित करना जरुरी है. उल्लेखनीय है कि 3 जुलाई को सरकार ने देश की दो तिहाई आबादी को हर महीने सस्ती दर एक से तीन रुपये किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराने के लिये अध्यादेश लाने का निर्णय किया. क्रियान्वयन के बाद अपनी तरह का यह दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा. इसमें सरकार को देश की 67 प्रतिशत आबादी को 6.2 करोड़ टन चावल, गेहूं तथा मोटा अनाज उपलब्ध कराने के लिये सालाना अनुमानत: 1,25,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. सर्वे में यह भी कहा गया है कि अगर सहयोगात्मक कदम नहीं उठाये गये तो औद्योगिक उत्पादन में गिरावट, चालू खाते के बढ़ते घाटे तथा रुपये की विनिमय दर में गिरावट से देश की वृद्धि की संभावना प्रभावित हो सकती है. सर्वे में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. उनके अनुसार, ‘‘कुछ गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं और अर्थव्यवस्था को फिर से तीव्र आर्थिक वृद्धि के रास्ते पर लाने के लिये इनसे बेहतर तरीके से निपटना होगा.’’ फिक्की के आर्थिक परिदृश्य सर्वे में यह भी कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 5 प्रतिशत रहेगी. सर्वे में प्रतिभागियों ने औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर वित्त वर्ष 2013-14 में 3.3 प्रतिशत रहेगी जो पिछले वित्त वर्ष में 1.1 प्रतिशत थी. उद्योग संगठन ने रिजर्व बैंक से आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करने को कहा है. सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने उम्मीद जताई कि इस वित्त वर्ष के अंत तक रेपो दर में 0.5 से 0.75 प्रतिशत की कटौती होगी. चालू खाते के घाटे के बारे में इसमें कहा गया है कि रुपये की विनिमय दर में गिरावट से यह बढ़ेगा. वित्त वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इसमें गिरावट की उम्मीद है. (Parbhat Kharab)

Gold rises above $1,300 on stimulus outlook, rising oil prices

London, Jul 22. Gold today advanced above USD 1,300 an ounce to a one-month high as speculation that the Federal Reserve will maintain stimulus and rising oil prices spurred demand for the metal. Gold rose 1.5 per cent to USD 1,316.10 an ounce. Prices reached USD 1,323.23, the highest since June 20. Silver also rose 2.1 per cent to USD 19.92 an ounce. Bullion rose 0.8 per cent last week, capping the first back-to-back weekly gains since May, after Fed Chairman Ben S. Bernanke indicated that it's too early to decide whether to begin scaling back bond purchases in September. Gold slid 21 per cent this year, wiping USD 58.1 billion from the value of gold exchange-traded product holdings, after some investors lost faith in the metal as a store of value. Gold ETP holdings fell 2.9 tons to 1,976 tons on July 19, the lowest since May 2010. The 10.2 tons sold last week was the least since May.

20 July 2013

प्याज बढ़ाएगा सरकार की मुसीबत

नई दिल्ली। चुनावी साल में प्याज की कम पैदावार सरकार की मुसीबतें बढ़ा सकती है। प्याज की कीमतों ने कई बार सरकार को सांसत में डाला है। इसकी पैदावार घटने के साथ मानसून की हालिया बारिश ने प्याज के मूल्य में और तड़का लगा दिया है। इससे देश के लगभग सभी क्षेत्रों में प्याज की कीमतें बढ़ गई हैं। प्याज की महंगाई से आने वाले दिनों में भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। प्याज उत्पादक बड़े राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात के सूखा प्रभावित होने की वजह से खेती का रकबा घटा वहीं उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित रहा है। बीते सीजन में प्याज का रकबा 10.87 लाख हेक्टेयर था, जो चालू सीजन घटकर 9.92 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी वजह से बीते साल में प्याज का कुल उत्पादन 1.76 करोड़ टन था। वहीं, चालू सीजन में प्याज उत्पादन घटकर 1.66 करोड़ टन तक रहने का अनुमान है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक प्याज की पैदावार में और भी कमी आ सकती है। नासिक स्थित राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अधिकारी व नैफेड के सदस्य बी होल्कर ने 'जागरण' को बताया कि महाराष्ट्र की प्रमुख प्याज मंडी लासलगांव और नासिक में चार लाख टन से अधिक का स्टॉक है। नासिक में प्याज की दैनिक आवक घट रही है। होल्कर ने बताया कि महाराष्ट्र में भीषण सूखा होने के बावजूद किसानों ने जैसे तैसे प्याज की फसल को बचाकर उत्पादन किया है। इससे प्याज खेती की लागत बढ़ी है। कीमतों के बढ़ने की एक प्रमुख वजह यह भी है। नासिक की उत्पादक मंडी में भी प्याज का थोक भाव गुरुवार को 2,400 से 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रहा। भला ऐसे में दिल्ली पहुंच इस प्याज का महंगा होना तय है। लेकिन दिल्ली के बजाय प्याज की आपूर्ति अच्छी कीमत मिलने के चलते दक्षिण भारत के राज्यों में हो रही है। दक्षिण भारत के राज्यों में पिछले सप्ताह ही प्याज के मूल्य सातवें आसमान पर पहुंच गए। इसका नतीजा यह हुआ कि महाराष्ट्र से उत्तरी क्षेत्र की मंडियों में आने वाली प्याज सीधे दक्षिणी क्षेत्र की मंडियों में जाने लगीं। इससे दिल्ली समेत उत्तरी राज्यों में प्याज की सप्लाई प्रभावित हुई है। लिहाजा खुदरा बाजार में प्याज के दाम 15 रुपये से बढ़कर 40 रुपये किलो तक पहुंच गए। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में वहां की लोकल प्याज के बाजार में आने में अभी लगभग एक महीने का समय और लग सकता है। छिटपुट जगहों से प्याज मंडियों में पहुंच रही है, लेकिन बहुत कम। पूर्वी क्षेत्र में प्याज की मांग में इजाफा होने से मूल्य बढ़े हैं। कोलकाता में प्याज का मूल्य 35 रुपये किलो चल रहा है।

अब 14 कैरट आभूषण पर दांव

आभूषण के शौकीन लोगों को यदि कम दाम पर आभूषण मिले, तो कौन उसे नहीं लेना चाहेगा। सोने के भाव कम हुए तो रत्न जडि़त आभूषण सस्ते होने की उम्मीद थी, लेकिन डॉलर की मजबूती से रंगीन रत्नों का आयात महंगा हो गया, जिससे आभूषण के दाम में कमी नहीं आ पाई। इससे परेशान जयपुर के आभूषण कारोबारियों ने अब लागत कम करने के लिए डायमंड और कुंदन मीना ज्वैलरी में भी 18 के बजाय 14 कैरट सोने का प्रयोग करना शुरू कर दिया है।' कालाजी ज्वैलर्स के विवेक काला ने बताया कि अभी तक हीरे के आभूषण 18 कैरट सोने में और कुंदन मीना आभूषण 20 से 22 कैरट सोने में बनाए जा रहे थे, लेकिन अब महंगे होते आभूषण की लागत कम करने के लिए जयपुर के जौहरियों ने 14 कैरट सोने के आभूषण बनाना शुरू कर दिया है। जयपुर के अधिकांश आभूषण कारोबारी 14 कैरट में आभूषण बना रहे हैं। इससे आभूषण की कीमत को काबू में रखने का प्रयास किया गया है, ताकि लोगों का आभूषण का शौक पूरा हो सके। ज्वैलर्स एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष निर्मल बरडिया का कहना है कि 14 कैरट आभूषण को प्रचलन में आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा, क्योंकि इससे लागत कीमत में 10 फीसदी तक की कमी लाई जा सकेगी, जो महंगाई के दौर में ग्राहकों को राहत प्रदान करने वाली होगी। बरडिया ने बताया कि आभूषण में उपयोग होने वाले सोने की शुद्धता में कमी लाना आसान काम नहीं है, क्योंकि ग्राहक एक ही ट्रेंड पर आभूषण की खरीद करते हैं। भारत में 22 कैरट आभूषण ज्यादा प्रचलन में रहे, लेकिन सोने के भाव में बढ़ोतरी के कारण लोगों ने जब 18 कैरट आभूषण को अपना लिया तो उन्हें 14 कैरट आभूषण बनाने के लिए जौहरियों को ज्यादा सोचना नहीं पड़ा। अगर विदेशी खरीदारों की बात करें तो विदेशों में ग्राहक 9 और 14 कैरट स्टैंडर्ड की ज्वैलरी खरीदते हैं, इसलिए वहां आभूषण बेचने में कोई समस्या नहीं है। (BS Hindi)

फिलहाल सोने में चमक लौटने के आसार कम

सोने की कीमतें हाल के महीनों में तेजी से गिरी हैं जिससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह सोने की खरीदारी का सही समय है? इस सिलसिले में राजेश भयानी ने थॉमसन रायटर्स जीएफएमएस के शोध निदेशक विलियम टैनकार्ड से बातचीत की। विलियम ने स्वर्ण बाजार के भविष्य, खनन क्षेत्र की स्थिति, सोने की मांग आदि के बारे में विस्तार से बताया। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश: सोने की कीमतें हाल के समय में तेजी से नीचे आई हैं। क्या गिरावट का दौर खत्म हो चुका है? शुरू में हमें लगा था कि 2013 में कीमतें मजबूत रहेंगी और गिरावट 2014 से शुरू होगी। लेकिन सोने के लिए मोहभंग अनुमानित समय से पहले ही दिखने लगा। अब यह आम सहमति है कि सोना शायद कई वर्षों में सर्वाधिक मंदी की चपेट में है। सोने में तेजी की एक प्रमुख वजह यह भी रही है कि निवेशकों को ब्याज दरों और शेयरों जैसे अन्य परिसंपत्ति वर्गों से अच्छा प्रतिफल नहीं मिला। तुलनात्मक रूप से सोना बेहतर परिसंपत्ति के रूप में उभरा। अब सुरक्षित निवेश के अधिक विकल्प उपलब्ध हैं और इससे सोना प्रभावित हो रहा है। ये कारक सोने में निवेश की मांग प्रभावित कर रहे हैं। हमारा मानना है कि सोना अगले कई वर्षों तक खराब प्रदर्शन करेगा। कीमतों में तेज गिरावट से मांग में इजाफा हुआ है। क्या सोने की पारंपरिक खरीदारी के लिए बढ़ी हुई मांग से ईटीएफ में घटता निवेश रुकेगा? हाल में जब सोने में तेज गिरावट आई, संस्थागत निवेशक ईटीएफ से परहेज करते देखे गए और सोने की पारंपरिक मांग से बाजार को मदद मिली। हालांकि पारंपरिक मांग पूरी किए जाने में कुछ बाधाएं हैं, क्योंकि बुलियन रिफाइनरियां अचानक मांग पूरी करने में सक्षम नहीं हो सकतीं जबकि निवेशक सोने की बिक्री तुरंत कर सकते हैं। भविष्य में पारंपरिक तौर पर सोने की मांग अहम भूमिका निभा सकती है और इससे निवेश मांग में गिरावट सिर्फ आंशिक रूप से नियंत्रित हो सकती है। यही एक प्रमुख वजह है जिससे हम अगले कुछ वर्षों के लिए सोने पर मंदी का रुख अपना रहे हैं। आने वाले समय में स्वर्ण खदान गतिविधियों की स्थिति क्या रहेगी? अतीत में खदानों ने बड़े पैमाने पर हेजिंग की और अब महज 100-150 टन की हेज पोजीशन ही बाजार में बची है। इसलिए अब सोने की कीमतों के लिए डी-हेजिंग का समर्थन नहीं है। सोने की कीमतें अपनी उत्पादन लागत से कुछ ही ऊपर कारोबार कर रही हैं। खदानों की इस पर कैसी प्रतिक्रिया होगी? हमने 2012 में अनुमान जताया था कि वैश्विक स्वर्ण खनन की लागत (नकदी और अन्य राशि) 1200 डॉलर प्रति औंस थी और 2013 में इसमें मामूली सुधार दिखेगा। अतीत में जब सोने की कीमतें चढ़ रही थीं, उत्पादकों को लागत वृद्घि से भी जूझना पड़ा। श्रमिक लागत भी बढ़ी है। अब उत्पादक व्यवस्था में लचीलेपन के जरिये ऊंची किस्म के सोने के खनन पर ध्यान देंगे और लागत नियंत्रित करेंगे। हालांकि अधिक लागत की वजह से निश्चित रूप से कम नकदी वाली छोटी खदानें उत्पादन में कटौती भी कर सकती हैं। बढ़ती लागत और कीमतों में कमी के माहौल में क्या आप स्वर्ण खनन क्षेत्र में स्थायित्व की उम्मीद कर रहे हैं? 2009-10 में जब खनन कंपनियों की पूंजी प्रभावित हुई थी तो समेकन पर जोर दिया गया था, हालांकि अधिग्रहण की पेशकश की कीमतें वास्तविक नहीं थीं। अब यदि समेकन होता है तो यह सही कीमतों पर ही होगा। नकदी की किल्लत या दबाव से जूझ रही खदानों को एकीकरण का रास्ता चुनना पड़ सकता है। भारत मांग घटाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में क्या चीन सोने की मांग के संदर्भ में भारत से आगे निकल जाएगा? हम आगामी वर्षों में चीन से अच्छी मांग देख सकते हैं, क्योंकि सोने के लिए आकर्षण बरकरार है। भारत के लिए मांग को नियंत्रित करना कठिन होगा, क्योंकि सोना उसकी संस्कृति का हिस्सा है। (BS Hindi)

Gold, silver fall on sluggish demand at higher levels

New Delhi, Jul 20. Both the precious metals, gold and silver, fell in the national capital today on reduced offtake by stockists at prevailing higher levels. While gold declined by Rs 10 to Rs 27,290 per ten grams, silver lost Rs 205 at Rs 40,525 per kg on reduced offtake by jewellers and industrial units. Marketmen said sluggish demand at prevailing higher levels mainly kept gold prices under pressure. They said silver was down on reduced offtake by jewellers and industrial units, awaiting more correction in prices. On the domestic front, golf of 99.9 and 99.5 per cent purity declined by Rs 10 each to Rs 27,290 and Rs 27,090 per ten grams, respectively. It had gained Rs 275 yesterday. Sovereign held steady at Rs 24,250 per piece of eight gram. Silver ready fell by Rs 205 to Rs 40,525 per kg and weekly-based delivery by Rs 230 to Rs 40,360 per kg, respectively. The white metal had gained Rs 295 in the previous session. Silver coins continued to be asked around previous level of Rs 79,000 for buying and Rs 80,000 for selling of 100 pieces.

mcx futures gold.......copper.........crude.......soyabean..........

Gold: MCX August gold futures traded slightly lower in the beginning of the last week on back of rupee’s appreciation against the U.S. dollar. The Reserve Bank of India (RBI) raised marginal standing facility rate to a record 10.25 percent from 8.25 percent. Marginal Standing Facility (MF) is the rate at which the scheduled banks could borrow funds from the RBI overnight, against the approved government securities. The RBI sold 25.32 billion rupee bonds on Thursday of planned 120 billion rupee bonds to drain cash from banking system to curb higher inflation and rupee weakness. Further, the government of India eased regulations in Foreign Direct Investment (FDI) to attract foreign funds flow into India’s capital markets. These reforms in India’s money market helped rupee to gain against the U.S. dollar last week. However, gold prices in domestic bourses recovered due to overseas stability in overseas bullion market. Gold in the international market traded slightly higher as the U.S. housing data reported worse than expectation. Added, Federal Reserve Chairman Ben S. Bernanke testimony indicated delay in scaling back bond purchases also helped bullion to show some gains. Fed in its’ semi annual policy meet said the current pace of bond purchases could be maintained till inflation increases to target rate 2.0 percent, unemployment rate reduces to 6.5 percent and improvement in financial conditions. Gold prices retreated when U.S. economic indictors like a surprise fall in U.S. initial jobless claims and better than expected manufacturing growth in Philadelphia region reversed early gains. Further, Federal Reserve Chairman Ben S. Bernanke comments that the central bank’s asset purchases could be reduced more quickly or expanded depends on economic conditions would also pressurize bullion whenever U.S. economic indicators suggest a recovery. ¬¬¬¬¬Price Movement in the Last week: MCX August gold prices opened the week at Rs 26,794/10 grams. Initially traded lower and found strong support at Rs 26,240/10 grams. Later, prices bounced back from and touched a high of Rs 26,925/10 grams. Currently trading at Rs 26,650/10 grams (July 19, Friday at 5.30 PM) with a nominal gain of Rs 49/10 grams. Outlook for this week: MCX August gold is expected to trade lower on account of lower investment demand for gold Exchange Trade Fund. Holdings in the SPDR Gold Trust, the World's largest gold-backed exchange-traded fund, declined to 935.17 tonnes as on July 18, 2013, down 0.42% as compared to 939.07 tonnes on July 15, 2013. MCX August gold shall find supports at 26,240/25,760 levels and resistances at 27,100/27,600 levels. Spot gold has supports at 1265/1235 and resistances at 1322/1360 levels. Recommendation for this week: Sell MCX August Gold between 27,000-27,100, SL 25,610 and Target- 26,240/25,800. Copper: MCX August Copper futures traded slightly lower in the last week owing to world’s third largest metals consuming country Germany’s investor sentiment dropped in July after China posted worse than expected economic growth rate. U.S. housing starts and building permits suggest pace of residential construction growth is slowed to least since August, as 40 percent of total global copper is used in building construction. But other U.S. economic indicators suggested growing demand concerns for base metals as U.S. industrial production growth recovered and job market improved, these factors restricted sharp price fall of metals. Manufacturing in the Philadelphia region expanded more than forecast in July. The Federal Reserve Bank of Philadelphia’s general economic index increased to 19.8, the highest level since March 2011. Price movement in the last week: MCX August Copper prices opened the week at Rs 420.20/kg. After making a high of Rs 422.30/Kg, prices fell sharply and touched a low of Rs 411.10/Kg and currently trading at Rs 416.25/kg (July 19, Friday at 5.40 PM) with a loss of Rs 4/kg as compared with previous week’s close. Outlook for this week: MCX August Copper is expected to trade lower on account of slow economic growth rate in China, world largest importer and consumer. MCX August Copper shall find a supports at 405/398 levels and resistances at 422/427 levels. Recommendation for this week: Sell MCX August Copper between 420-422, SL 428, Target- 405/398. Crude: MCX August crude oil futures traded slightly lower in the early part of the last week on rupee appreciation. However, crude oil prices recovered sharply from early sell-off and breached 15 month price high on the back of decline in U.S. jobless claims and a fall in U.S. oil inventories. Jobless claims in U.S. dropped by 24,000 to 334,000 in the week ended July 13, the fewest since early May. Manufacturing in the Philadelphia region expanded more than forecast in July, the latest sign of an improving outlook for the industry after a slowdown earlier this year. According to the Energy Information Administration (EIA), U.S. oil inventories decreased 6.9 million barrels to 367.0 million barrels and oil imports gained by 180,000 barrels last week, indicating demand from the world’s largest oil consumer, U.S. Price movement in the last week: MCX August crude oil prices opened the week at Rs 6349/bbl, initially traded lower and found strong support of Rs 6229/bbl. Later, prices bounced back sharply and touched a high of Rs 6482/bbl., currently trading at Rs 6468/bbl (July 19, Friday at 5.40 PM) with a gain of Rs 128/bbl, i.e. up by 2%. Outlook for this week: MCX August crude oil is expected to trade higher on the back of lower crude oil inventory and positive U.S. economic data improved demand concerns in the world’s largest oil consuming country. MCX August crude oil shall find a support at 6340/6168 levels and resistance 6570/6660 levels. Recommendation for this week: Buy MCX August Crude between 6340-6350, SL 6165, Target- 6570/6660. Soybean: NCDEX-October soybean futures traded lower in the last week owing to higher sowing acreage amid favorable weather for crop which will translate into higher output for this season. According to Ministry of Agriculture (GOI), Kharif oilseeds sowing area covered to 149.82 lakh hectares (LH) till July 18, 2013 against 108.81 lakh ha last year during the same period. Kharif oilseed includes soybean (109.99 LH), groundnut (30.33 LH), Sesamum (6.33 LH), Sunflower (1.26 LH), Niger Seed (0.42 LH) and Castor Seed (1.48 LH). Area covered under soybean throughout India is 109.99 lakh hectares till July 18, 2013 as compared to 86.20 lakh hectare last year, i.e. up by 23.79 lakh ha or 28%). Higher coverage is due to more area covered in state like Madhya Pradesh, Maharashtra, Rajasthan and Karnataka compare to last year. Area covered under kharif oilseeds in Madhya Pradesh was 62.24 lakh ha compared to 49.06 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Area covered under soybean in Madhya Pradesh was 58.80 lakh ha till July 18,2013 compared to 47.17 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Area covered under oilseeds in Maharashtra was 36.27 lakh ha till July 18, 2013 compared to 27.99 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Area covered under soybean was 34.05 lakh ha compared to 26.47 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Due to good rainfall and distribution in the oilseeds growing region helps the quick covering of soybean. Area covered under oilseeds in Rajasthan was 16.24 lakh ha till July 18, 2013 compared to 12.09 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Area covered under soybean was 10.06 lakh ha compared to 7.68 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Area covered under oilseeds in Karnataka was 6.01 lakh ha till July 18, 2013 compared to 2.86 lakh ha recorded during corresponding period of last year. Area covered under soybean was 2.38 lakh ha compared to 1.52 lakh ha recorded during corresponding period of last year. According to USDA’s Weekly Export Sales Report, net export sales for soybeans came at 110,600 tonnes for the current marketing year and 591,700 for the next marketing year for a total of 702,300. New crop sales were mainly "unknown" at 257,600 and China at 240,500 tonnes. Sales were very close to trade expectations and had little impact. Cumulative soybean sales for the new crop season stand at 33.7% of the USDA forecast for the marketing year versus a 5 year average of 23.0%. Sales of 439,000 metric tonnes are needed each week to reach the USDA forecast. With the huge inversion of old crop to new crop; buyers have been more active at booking new crop needs. Meal sales came in at 41,600 metric tonnes for the current marketing year and 38,000 for the next marketing year for a total of 79,600. Cumulative meal old crop sales stand at 99.9% of the USDA forecast vs. a 5 year average of 88.7% for this time of the year. Oil sales came in at 10,600 metric tonnes, all for old crop. Cumulative sales stand at 89.7% of the USDA forecast for 2012/2013 season versus a 5 year average of 83.8%. Sales of 9,000 metric tonnes are needed each week to reach the USDA forecast. Outlook for this week: NCDEX October soybean is expected to trade lower on the back of higher sowing acreage of soybean amid favorable weather for crop. NCDEX October soybean shall find a support at 3085/3050 levels and resistance 3190/3235 levels. Recommendation for this week: Sell NCDEX October Soybean between 3180-3190, SL 3240, target- 3085/3050.

19 July 2013

जून में कॉटन यार्न निर्यात रिकॉर्ड पर

रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से यार्न निर्यातकों के मार्जिन में बढ़ोतरी हुई है। इसीलिए जून महीने में 142.29 करोड़ किलो यार्न का रिकॉर्ड निर्यात हुआ है जबकि चालू वित्त वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में 348.4 करोड़ किलो यार्न का निर्यात हो चुका है। चालू फसल सीजन में करीब 107 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास के निर्यात सौदों का भी रजिस्ट्रेशन हो चुका है इसलिए कपास की कीमतों में तेजी की ही संभावना है। कपड़ा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यार्न का निर्यात बढ़कर 348.4 करोड़ किलो का हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 219.67 करोड़ किलो का हुआ था। इसके अलावा चालू कपास सीजन में अभी तक करीब 107 लाख गांठ कपास के निर्यात सौदों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है जिसमें से करीब 97 लाख गांठ की शिपमेंट भी हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 17 जुलाई को अक्टूबर महीने के वायदा अनुबंध में कॉटन का भाव 84.07 सेंट प्रति पाउंड पर बंद हुआ। मुक्तसर कॉटन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर नवीन ग्रोवर ने बताया कि घरेलू बाजार में कच्चे माल के दाम बढ़े हैं लेकिन रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से यार्न निर्यातकों का मार्जिन बढ़ा है। नॉर्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि विश्व बाजार में भारतीय कपास अन्य देशों की तुलना में सस्ती है। हालांकि उत्पादक मंडियों में पिछले तीन-चार दिनों में कपास की कीमतों में करीब 500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) की गिरावट आई है लेकिन घरेलू बाजार में कपास का बकाया स्टॉक कम है जबकि नई फसल आने में अभी ढाई महीने का समय शेष है। इसलिए कीमतों में मजबूती रहने की संभावना है। अहमदाबाद मंडी में गुरुवार को शंकर-6 किस्म की कपास का भाव 42,300 से 42,500 रुपये प्रति कैंडी रहा जबकि 18 जून को इसका भाव 38,000 से 38,300 रुपये प्रति कैंडी था। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगम घरेलू बाजार में अभी तक 12 लाख गांठ कपास की बिक्री कर चुकी है तथा निगम के पास केवल 11 लाख गांठ का स्टॉक ही बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि चालू बुवाई सीजन में अभी तक कपास की बुवाई पिछले साल से आगे चल रही है लेकिन कुल बुवाई में 4-5 फीसदी कमी आने की आशंका है। हालांकि अनुकूल मौसम से उत्पादकता बढ़ेगी, इसलिए पैदावार पिछले साल से ज्यादा ही होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 92.44 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 65.22 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। (Business Bhaskar R S Rana..)